आलोक सांवल के झूठ ने सुशील राणा को कहीं का ना छोड़ा

मीडिया में शीर्ष पदों पर काबिज लोग झूठ बोलकर किस कदर आम मीडियाकर्मियों का उत्पीड़न करते हैं, चीटिंग करते हैं, धोखा देते हैं, इसके बारे में जानना हो तो सुशील राणा के हाल-बेहाल को जानिए. सुशील राणा एक दफे दैनिक जागरण में काम कर चुके थे लेकिन जब उनको एडिटोरियल से हटाकर प्रोडक्शन में किया गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. दुबारा उन्हें जब आई-नेक्स्ट में ज्वाइन कराया जा रहा था तो सुशील राणा ने कहा कि वे डिजायनिंग और आर्ट से जुड़े व्यक्ति हैं जिसका विभाग संपादकीय होता है, न कि प्रोडक्शन, इसलिए वह इसी शर्त पर आएंगे कि उन्हें संपादकीय में रखा जाए और पिछली बार की तरह प्रोडक्शन में न धकेला जाए.

आई-नेक्स्ट के सीईओ आलोक सांवल ने सुशील राणा से कहा कि वे आई-नेक्स्ट के सर्वेसर्वा हैं और उनके इशारे के बगैर यहां पत्ता भी नहीं खड़कता, इसलिए वो उनकी बातों पर आंख मूंदकर भरोसा करें और आई-नेक्स्ट में ज्वाइन करें. सुशील राणा ने बड़े पद पर काबिज व्यक्ति की बातों पर भरोसा किया और आई-नेक्स्ट में बतौर आर्ट डायरेक्टर सुशील राणाज्वाइन किया. पांच बरस बीत गए. उनसे आई-नेक्स्ट के अलावा जागरण समूह के अन्य मैग्जीनों, विशेषांकों, अखबारों के लिए काम लिया जाने लगा.

सुशील राणापिछले दिनों अचानक सुशील राणा को फिर से संपादकीय से हटाकर प्रोडक्शन में डाल दिया गया. यह काम आलोक सांवल के इशारे पर आई-नेक्स्ट, कानपुर के जनरल मैनेजर पंकज पांडेय ने किया. सुशील राणा ने मेल भेज भेज कर आलोक सांवल को बताया कि उनके साथ अन्याय हो रहा है, पिछली बार की तरह फिर उनका विभाग बदला जा रहा है. लेकिन आलोक सांवल के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और उन्होंने इसे प्रबंधन का फैसला बताकर खुद को किनारे कर लिया. सूत्र बताते हैं कि जागरण प्रबंधन मजीठिया न देने के अपने घटिया इरादे के कारण ढेर सारे जागरण कर्मियों का डिपार्टमेंट बदल चुका है. इसी के तहत सुशील राणा को भी नए विभाग में डाल दिया गया और उनका पद आर्ट डायरेक्टर से घटाकर ग्राफिक डिजायनर कर दिया गया.

सूत्रों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में सबसे खराब भूमिका आलोक सांवल की रही. कहने को तो वो कहते हैं कि वे आई-नेक्स्ट के सर्वेसर्वा हैं और जो वादा कर देते हैं, उसे जरूर पूरा करते हैं. पर इस एक घटनाक्रम से साबित हो गया है कि आई-नेक्स्ट में आलोक सांवल की भूमिका नेता की नहीं बल्कि नौकर की है. जागरण प्रबंधन उन्हें जैसा कहता है, वे वैसा करते हैं. मीठे मीठे शब्दों में झूठ बोलने में माहिल ये शख्स न तो संपादकीय में कार्यरत रहा है और न ही कभी प्रबंधन का हिस्सा रहा है. ब्रांडिंग डिपार्टमेंट से करियर शुरू करने वाला आलोक सांवल केवल एक चीज अच्छे से जानता है, वह है मालिकों की जी-हुजूरी. इसी दम पर आलोक सांवल जागरण के मालिकों का प्रिय पात्र बनकर आम मीडियाकर्मियों के जीवन और करियर से खिलवाड़ करता रहता है. यही कारण है कि आई-नेक्स्ट में इन दिनों पर कही असंतोष और कुंठा का माहौल है.

सुशील राणा इस पूरे घटनाक्रम और झूठ बोलने में उस्ताद आलोक सांवल के धोखेबाज रवैये से इतने आहत हैं कि उन्होंने अब मीडिया इंडस्ट्री को अलविदा कहने का मन बना लिया है. वे जागरण को छोड़ने के मूड में नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से कंसल्ट कर रहे सुशील राणा जल्द ही मजीठिया पर जागरण के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले हैं. सुशील राणा जैसे दर्जनों लोग जागरण में एकजुट हो रहे हैं. सुशील राणा से संपर्क आप 07408677775 के जरिए कर सकते हैं और उन्हें उनके संघर्ष के लिए समर्थन / बधाई दे सकते हैं. फेसबुक पर सुशील राणा से संपर्क इस लिंक के जरिए कर सकते हैं… facebook.com/sushil.rana.790

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Comments on “आलोक सांवल के झूठ ने सुशील राणा को कहीं का ना छोड़ा

  • Gyan Prakash Awasthi says:

    aap ke sath jo huaa wo accha nahi huaa ye to aap ko 5year me malum pada chaliye koyi baat nahi der se aaye par durst aaye.hamlog aap ke sath h…aap puritaqat se ladai lade.alock sawal ko sabak sikhaye

    ..

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  • anil dutt sharma says:

    ye to inext k liye khel hai… meb inext ki is nii ko bhugat chuka hun… mridul tyagi nam k ek pagal patrakar ne muje inext dun k desk incharge k post se hata kar reporting m dal diya vo b 5 beats k sath.. kunki me uski ji hujuri ni karta tha… inext chor h…

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  • anil dutt sharma says:

    mridul tyagi jaise pagal insan k karn muje media field ko chodna pada… but jo hota h acche k liye hota h.. m a govt officer now….

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  • gaurav nigam says:

    mai i next me 2008 january se 2009 ke june tak work kia editorial me. mera kanpur se banaras transfer kia gaya jahan mujhe work karne me dikkat mahsoos hui to maine khud ko wapas kanpur liye jane ki request ki jis par mujhe kaha gaya ki banaras kaam nai karna hai to resign kar do. mujhe apni first job se resign karna padha. mere pas se meri salary slip mera bag gir jane se kho gayi hain….. ab jab mai inext se apna pf detail maangta hun aur pf ka paisa nikaalna chahta hun to na to mera record bataya jata hai aur na hi mera employe no. yahan tak ki mujhse itna badha jhooth bola gaya hai ki mera pf hi nahi kata jata tha. meri mehnat ke paise hi mujhe nahi mil rahe. ye hai i next ….

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