झारखंड में आर्थिक तंगी और समुचित इलाज के अभाव में जनवादी कवि और पत्रकार तैय्यब खान का निधन

धनबाद (झारखंड) । कोयलांचल की धरती ने सुप्रसिद्ध कवि और पत्रकार तैय्यब खान को खो दिया। तैय्यब खान जनवादी लेखक संघ के सक्रिय सदस्य थे। उम्र साथ नहीं देती थी फिर भी जोश और जूनून बरकरार था। वे इप्टा से भी झरिया इकाई के संरक्षक के रूप में जुड़े रहे। उन्हें किडनी की समस्या थी। आर्थिक अभाव से लगातार जूझते रहे।

तैय्यब खान की कई काव्य रचनाएँ प्रकाशित हुईं थी। हिंदी दैनिक समाचारपत्र जनमत, हिंदुस्तान, दैनिक चुनौती और कई उर्दू समाचारपत्र से भी वे जुड़े रहे। अंतिम समय में आर्थिक सहयोग कहीं से नहीं मिला। स्वाभिमानी होने के कारण इन्होंने किसी से कुछ कभी मांगा नहीं। झरिया के एक मदरसे में हिंदी शिक्षक के रूप में भी कार्यरत थे। इनकी सादगी, ईमानदारी और ग़ुरबत ही इनकी पहचान थी। काफी लंबे समय से बीमार थे। ऐसे कवि, कलाकारों, साहित्यकारों और पत्रकारों को भी पेंशन और मुफ्त उपचार दिया जाना चाहिए ताकि अपनी जिंदगी सम्मान से जी सकें।

पिछले दिनों खोरठा कवि अर्जुन पानुरि का भी निधन ब्लड कैंसर से हुआ। वे भी आर्थिक अभाव से जूझ रहे थे। कुछेक जनप्रतिनिधि ने उनका सहयोग किया था। पर वह नाकाफी था।

धनबाद से युधिष्ठिर महतो की रिपोर्ट.

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