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झुक गया तालिबान, प्रेस वार्ता में महिला पत्रकारों ने वो सवाल पूछे जिनसे पूरी दुनिया कतराती रही, देखें वीडियो

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तक़ी की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक कूटनीतिक घटना नहीं, बल्कि पत्रकारिता के साहस और विरोध की ताक़त का सबूत बन गई। पहली बार जब तालिबान ने महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखा तो देशभर में विरोध हुआ — और नतीजा ये कि मुत्तक़ी को दोबारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी, इस बार महिलाओं की मौजूदगी के साथ। एक महिला पत्रकार ने वो सवाल पूछे जिनसे पूरी दुनिया कतराती रही — अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी और पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या पर जवाब मांगा।


सौरभ-

पहले तालीबान के विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री बैन कर दी जिसका खूब विरोध तो अब दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को एंट्री दे दी गई और इस बार इन महिला पत्रकार ने अपने मारक सवाल से विदेश मंत्री को निशब्द कर दिया…कि “जब ईरान, सऊदी, सीरिया और देवबंद तक में लड़कियाँ पढ़ती हैं, तो अफ़ग़ानिस्तान में क्यों नहीं

शायद महिला पत्रकारों से यही डर था जो सही साबित हुआ…


सलीम अख्तर सिद्दकी-

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने दो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डालीं। मतलब वो प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं डरते। असहज सवालों का सामना भी करते हैं। ईमानदारी से ये भी मान लिया कि पहली कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों न बुलाना हमारी गलती थी


जितेंद्र विसारिया-

इस महिला पत्रकार को सलाम!

जिसने वो सवाल पूछने की हिम्मत की, जो पूरी दुनिया पूछने से डरती है।

तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताक़ी से सीधा सवाल- “जब ईरान, सऊदी, सीरिया और देवबंद तक में लड़कियाँ पढ़ती हैं, तो अफ़ग़ानिस्तान में क्यों नहीं?” और साथ ही पत्रकार दानिश सिद्दीकी की निर्मम हत्या पर जवाब भी मांगा।

ऐसी पत्रकारिता ही असली पत्रकारिता है — सत्ता के सामने सवाल, सच के साथ खड़ी आवाज़!!!


प्रदीप चौधरी-

चलो तालिबान ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी और महिलाओं को भी बुलाना पड़ा। ये होता विरोध का फ़ायदा, लोकतंत्र की जीत है ये।

खैर! पहले बार भी कम से कम प्रेस कांफ्रेंस किया तो था ही इतनी हिम्मत तो थी ही।


मुकेश माथुर-

अफगान दूतावास की प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में आज पहली पंक्ति में महिला पत्रकार।

शुक्र है तालिबान को हमने हमारे देश की रिवायतें बता दीं।

हमारी अपनी बहुत सारी मुश्किलें हैं, कई विसंगतियां भी है लेकिन सामान्यतः सोच हमारी अब आदम युग से काफ़ी आगे बढ़ गई है। हम अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान नहीं हिन्दुस्तान हैं।

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