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उत्तर प्रदेश

पत्रकार के यहां लाखों की चोरी, पहले रिपोर्ट लिखने में आनाकानी अब कार्यवाही करने में ढीली यूपी पुलिस

लोनी (गाजियाबाद)। प्रदेश के रसूख़दार मंत्री आज़म ख़ान की भैंसों को जिस पुलिस ने महज चंद दिनों में ढूंढ़ निकाला था, वही पुलिस आज अपनी धीमी कार्यशैली के चलते कछुए से भी मात खा रही है. पुलिस के ढुलमुल रवैये के चलते अपराधियों के हौसले दिन-पर-दिन बुलंद हो रहे हैं. पूरे प्रदेश में अपराधी निडर होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. जनता का जीना मुहाल हो रहा है. ताज़ा मामला ज़िला गाजियाबाद के थाना लोनी का है. जहां एक पत्रकार के घर में हुई लाखों रुपये की चोरी की वारदात के कई दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं.

लोनी (गाजियाबाद)। प्रदेश के रसूख़दार मंत्री आज़म ख़ान की भैंसों को जिस पुलिस ने महज चंद दिनों में ढूंढ़ निकाला था, वही पुलिस आज अपनी धीमी कार्यशैली के चलते कछुए से भी मात खा रही है. पुलिस के ढुलमुल रवैये के चलते अपराधियों के हौसले दिन-पर-दिन बुलंद हो रहे हैं. पूरे प्रदेश में अपराधी निडर होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. जनता का जीना मुहाल हो रहा है. ताज़ा मामला ज़िला गाजियाबाद के थाना लोनी का है. जहां एक पत्रकार के घर में हुई लाखों रुपये की चोरी की वारदात के कई दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं.

पीड़ित पत्रकार रहीसुद्दीन का कहना है कि वारदात के कई दिन बाद भी पुलिस चोरों का कोई सुराग नहीं लगा पाई है. पुलिस की कछुआ चाल वाली कार्यशैली से वह परेशान हैं. पत्रकार होने के बावज़ूद पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है. पीड़ित ने दुखी मन से बताया कि पुलिस ने लेट लतीफ़ी दिखाते हुए उनका मामला पूरे 24 घंटे बाद दर्ज किया. जबकि उन्होंनें वारदात वाले दिन ही थाने में तहरीर दे दी थी. ऐसे में वह कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने में सफ़ल होगी और उनका लाखों रुपये का सामान वापस दिला पाएगी.

गौरतलब है कि ईद के मौके पर पत्रकार रहीसुद्दीन अपने परिवार समेत ईद मनाने ज़िला बुलंदशहर के कस्बा झाझर में अपने ननिहाल गये थे. उनकी गैर-मौज़ूदगी में चोरों ने उनके घर में रखे लाखों रुपये के सामान पर हाथ साफ़ कर दिया. पीड़ित परिवार जब अगले दिन घर वापिस आया तो घर में हुई वारदात का उन्हें पता लगा.
 
मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से दुखी पत्रकार रहीसुद्दीन ने उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम खुला पत्र लिख कर मामले की जल्द से जल्द जांच कराने और अपराधियों को पकड़ने की अपील की है।

पुलिस अधिकारियों को लिखा पत्रः

सेवा में,                                       
        समस्त वरिष्ठ अधिकारीगण,
        पुलिस विभाग, उत्तर-प्रदेश.

महोदय,
        मैं एक अदना-सा पत्रकार हूं, ज़िला गाजियाबाद के थाना लोनी एरिया में रहता हूं. घर में बूढ़े मां-बाप, दो भाई और एक बहन है. मैं 29 जुलाई 2014 को अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ ईद मनाने के लिए अपने नानाजी के घर गया था. नानाजी की छह माह पूर्व गुज़र गये थे तो ईद पर वहां जाना ज़रुरी था.

जब मैं 30 जुलाई 2014 को घर वापस आया तो पता चला घर में चोरी हो गई है. चोर घर में रखे 35 हज़ार रुपये, 9 तोले सोने के जेवरात, डेढ़ किलो चांदी के जेवरात, 4 गैस सिलेंडर और एक कंम्प्यूटर सैट ले गये हैं. ये सब सामान मेरे माता-पिता की अभी तक की जमा-पूंजी थी.

मैंनें इस मामले में मुक़दमा दर्ज करने के 30 तारीख़ को ही लोनी थाने में तहरीर दे दी थी. पर थाने वालों ने मक़दमा दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि साहब कहेंगे तो कर देंगे मुक़दमा दर्ज, वरना नहीं. मैंनें साहेब से फ़ोन पर बात की. साहेब को समझाया-बुझाया. साहेब ने मुंशी को मुक़दमा दर्ज करने की स्वीकृति दे दी. लेकिन मुक़दमा फ़िर भी दर्ज नहीं हुआ. क्योंकि थाने में रोजनामचा उपस्थित नहीं था. मुंशी ने कहा कि आपका मामला कल दर्ज होगा.
 
उसके जबाव में मैंनें कहा कि चोरी तो मेरे घर में आज हुई है तो मामला फ़िर कल क्यों दर्ज होगा. काफी बातचीत हुई उससे. अंत में मेरे काफ़ी दबाव ड़ालने पर मुंशी तहरीर स्वीकार करने को राज़ी हुआ. मैंनें कहा मुक़दमा कब दर्ज होगा अब..? तो उसने कहा- कल आ जाईये आप. कल आपको एफआईआर की कॉपी मिल जायेगी.

मैं अगले दिन ठीक 24 घंटे बाद थाने पहुंचा. थाने में मुंशी से मिला. मुंशी की ड़यूटी चेंज थी. मैंनें नये मुंशी से एफआईआर की कॉपी मांगी. उसने मेरा नाम-पता पूछते हुए रजिस्टर तलाशने शुरु किये. पर उसमें मेरे मामले की एफआईआर कॉपी नहीं थी. उसने कहा- आपका मुक़दमा अभी लिख़ा नहीं है… लिखा जायेगा अभी.

मैंनें कहा ठीक है लिख दीजिये. उसने कहा बैठ जाईये, अभी 1 घंटा लगेगा. मैं उसकी बात सुनकर बैठ गया. एक घंटा पूरा हुआ और उसने रोजनामचे में सारी तहरीर को शब्द-ब-शब्द लिखा. उसके बाद तहरीर को आगे बढ़ाते हुए कंम्प्यूटर ऑपरेटर की तरफ़ बढ़ा दिया.

मैंनें देखा कंम्पयूटर ऑपरेटर ने मेरी तहरीर अपने ड्रॉवर में रख दी है. उसने कहा कल ले लीजियेगा एफआईआर की कॉपी. मैंनें कहा- क़ल दी थी तहरीर. अभी तक मुझे एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है. मुझे अभी चाहिए एफआईआर की कॉपी. उसने भौंहों को सिकोड़ते हुए एक घंटे बाद आने के लिए कहा. मैंनें एक घंटा इंतज़ार किया. तब कहीं मुझे एफआईआर की कॉपी मिल पाई.
 
थाने वालों की लापरवाही अभी ख़त्म नहीं हुई थी. इंद्रापुरी चौकी इंचार्ज भानु प्रताप सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया. आज 5 दिन हो गये हैं लेकिन पुलिस अभी तक वारदात का कोई सुराग नहीं निकाल पाई है. आपकी पुलिस कछुए चाल से भी कम गति से कार्रवाई कर रही है. इससे मैं दुखी होने के साथ-साथ ख़ासा ऩाराज हूं. मेरे बूढ़े मां-बाप हैं. उनको बार-बार संभालना मेरे लिए कठिन होता जा रहा है. आपकी कार्यशैली से मुझे विश्वास नहीं हो पा रहा है कि पुलिस कभी चोरों के पकड़ पाएगी.

आपसे निवेदन है कि आप अपने विभाग को हिदायत दें और मेरे मामले में जल्द से जल्द जांच करवाकर अपराधियों को पकड़े. मैं सदैव आपका आभारी रहूंगा.

शिकायतकर्ता-
रहीसुद्दीन S/O मौ. हारुन
निवासी- 455, बी-ब्लॉक, संगम विहार, लोनी गाजियाबाद- 201102.
मोबाईल नंबर- 9555023323.

ज़िला- गाजियाबाद
थाना- लोनी
एफआईआर नंबर- 1280
रोजनामचा संख्या- 42,
दिनांक- 31/07/2014

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