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तीन वरिष्ठ पत्रकारों की एक-एक किताबें पुस्तक मेले में प्रकट हुईं

‘बामियान में बुद्ध’, ‘बन्दूक’ और ‘कहीं कुछ नहीं’ का लोकार्पण… राजेंद्र राजन, राम जन्म पाठक और शशि भूषण द्विवेदी हैं इनके सृजक….  एक जमाना था जब साहित्यकार और पत्रकार एक ही सिक्के के दो पहलू थे। लेकिन धीरे-धीरे दोनों में दूरियां बढ़ती गईं। मगर अब भी कुछ लोग इस परंपरा को बचाए हुए हैं। इस बार विश्व पुस्तक मेले में कुछ किताबें आई हैं, जो इसकी गवाही देती हैं।

‘बामियान में बुद्ध’, ‘बन्दूक’ और ‘कहीं कुछ नहीं’ का लोकार्पण… राजेंद्र राजन, राम जन्म पाठक और शशि भूषण द्विवेदी हैं इनके सृजक….  एक जमाना था जब साहित्यकार और पत्रकार एक ही सिक्के के दो पहलू थे। लेकिन धीरे-धीरे दोनों में दूरियां बढ़ती गईं। मगर अब भी कुछ लोग इस परंपरा को बचाए हुए हैं। इस बार विश्व पुस्तक मेले में कुछ किताबें आई हैं, जो इसकी गवाही देती हैं।

इनमें राजेंद्र राजन का कविता संग्रह ‘बामियान में बुद्ध’ इलाहाबाद के साहित्य भंडार ने छापी है। पिछले दिनों इनकी एक कविता ‘हत्यारों का गिरोह’ देश भर में चर्चित हुई थी। सोशल साइट पर भी वायरल हुई। इस किताब की भूमिका हिंदी के दिग्गज उदय प्रकाश ने लिखी है।

दूसरी किताब है राम जन्म पाठक का कहानी संग्रह ‘बन्दूक एवं अन्य कहानियां’। इसे भी साहित्य भंडार ने छापा है। इस पर सागर सरहदी आज के मशहूर हीरो नवाजुद्दीन को लेकर चौसर नाम से फीचर  फिल्म बना चुके हैं। ये दोनों पत्रकार जनसत्ता के संपादकीय विभाग में कार्यरत है।

एक और किताब काफी चर्चा में है। वह है ‘हिंदुस्तान’ अखबार समूह के पत्रकार शशिभूषण द्विवेदी का कहानी संग्रह ‘कहीं कुछ नहीं’। इसे राजकमल ने छापा है, जहां से छपने के लिए वरिष्ठ लोग भी बेचैन रहते हैं।

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