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तीन खबरें जो आज पहले पन्ने पर होनी चाहिए थी, नहीं हैं

आप जानते हैं कि अखबारों में पहले पन्ने पर कैसी खबर होती है। आज यह जानिए कि कौन सी खबर पहले पन्ने पर नहीं है। आज कम से कम तीन ऐसी खबरें है जो पहले पन्ने पर होनी चाहिए थी। किसी न किसी अखबार में हैं भी लेकिन इन्हें आम तौर पर प्रमुखता नहीं मिली। ऐसी पहली खबर है 1. जूता मार सांसद को टिकट नहीं पर पिताजी को मिला, दूसरी खबर है, 2. विजय माल्या और नीरव मोदी ही नहीं, 36 कारोबारी देश से हुए फरार और तीसरी व अंतिम खबर है 3. हिमाचल प्रदेश भाजपा प्रमुख न राहुल गांधी को गाली दी। यह खबर इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में यह भी बताया है कि केरल भाजपा के अध्यक्ष ने मुसलमानों के लिए आपत्तिजनक बात की। लेकिन यह भी आमतौर पर पहले पन्ने पर नहीं है।

जूता मार सांसद को टिकट नहीं पर पिताजी को मिला
भारतीय जनतापार्टी ने अपने जूता मार सांसद शरद त्रिपाठी को संत कबीर नगर से टिकट नहीं दिया है। आज तो यह एक बड़ी खबर है और आपके अखबार में कहीं ना कहीं होगी भी लेकिन क्या यह पहले पन्ने की खबर नहीं है? इस खबर के साथ सूचना यह भी है कि पार्टी ने शरद त्रिपाठी के पिता रमा पति त्रिपाठी को टिकट दिया है। यह भी खबर है और बड़ी खबर है। हिन्दुस्तान में यह खबर पहले पन्ने पर छोटी सी है। हालांकि अंदर विस्तार से है। क्या आप यह नहीं जानना चाहेंगे कि एक जूतामार सांसद के पिता को टिकट किस आधार पर दिया गया है? वे कौन हैं क्या करते हैं – ये सामान्य सूचनाएं हैं जो पत्रकारों को मालूम होती हैं या एक-दो फोन करके आपके लिए जुटाई जानी चाहिए। पर अखबार वाले इसकी जरूरत ही नहीं समझते हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान में अंदर के पन्ने पर

शरद त्रिपाठी 47 साल के हैं और 2014 में पहली बार संत कबीर नगर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद बने थे। शरद त्रिपाठी के पिता रमापति राम त्रिपाठी उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष हैं और पार्टी ने इस बार उन्हें देवरिया से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने शरद त्रिपाठी की जगह इस बार प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर से मौका दिया है। आप जानते हैं प्रवीण निषाद कौन हैं? aajtak.intoday.in की एक खबर के अनुसार प्रवीण निषाद ने गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के टिकट पर बसपा के समर्थन से भाजपा प्रत्याशी को हराया था। ये सब चीजें छपती रही हैं पर जब टिकट दिया गया तो ये सूचनाएं देने का महत्व है।

गोरखपुर सीट 1989-90 में हिन्दू महासभा के महंत अवैद्यनाथ ने जीती थी। 1991-96 महंत अवैद्यनाथ ही यहां से भाजपा सांसद रहे। 1998-99 में योगी आदित्यनाथ यहां से चुनाव जीते और मुख्यमंत्री बनने तक जीतते रहे। उनके इस्तीफा देने के बाद भाजपा ने उपेन्द्र दत्त शुक्ल को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था । वे चुनाव हार गए और तब तब प्रवीण निषाद की जीत देश भर में चर्चा का विषय बनी थी। बाद में प्रवीण निषाद ने अपने पिता के साथ भाजपा से गठजोड़ कर लिया था। इसके बाद अब उन्हें जूता मार सांसद शरद त्रिपाठी की जगह संतकबीरनगर से टिकट दिया गया है।

जूतामार सांसद का टिकट काटने और उनके पिता को टिकट देने की खबर राजस्थान पत्रिका ने पहले पन्ने पर छापी है। हालांकि, यह खबर भी भोजपुरी स्टार रविकिशन को गोरखपुर से भाजपा उम्मीदवार बनाने की सूचना के साथ है। सिंगल कॉलम की इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, भाजपा : 7 नाम तय। मुख्य शीर्षक है, जूतामार का टिकट कटा, “रविकिशन गोरखुपर से प्रत्याशी।” इसी तरह, एक और खबर नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर है जो दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है।

विजय माल्या और नीरव मोदी ही नहीं, 36 कारोबारी देश से हुए फरार
एजेंसी की यह खबर आपके अखबार में भी होगी ही पर पहले पन्ने पर नहीं होने का मतलब है। शीर्षक है, विजय माल्या और नीरव मोदी ही नहीं, 36 कारोबारी देश से हुए फरार। खबर के मुताबिक, ईडी ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार को बताया कि विजय माल्या और नीरव मोदी समेत कुल 36 कारोबारी हाल में देश से फरार हो चुके हैं। एजेंसी ने कहा, “माल्या, ललित मोदी, मेहुल चौकसी, नीरव मोदी और संदेसरा बंधु (स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड के प्रवर्तक) की समाज में ज्यादा गहरी जड़े थीं इसके बाद भी वे देश छोड़ गए। ऐसे 36 कारोबारी हैं जो हाल में देश छोड़कर फरार हुए हैं।” वैसे तो यह खबर मुख्य खबर नहीं है और मुख्य खबर कुछ और है पर क्या इस खबर का विस्तार अखबारों को नहीं देना चाहिए। विस्तार तो छोड़िए इतनी खबर भी पहले पन्ने पर नहीं है।

राहुल गांधी को गाली
आज की तीसरी खबर जो पहले पन्ने पर होनी चाहिए थी, और नहीं है वह है, हिमाचल प्रदेश भाजपा प्रमुख न राहुल गांधी को गाली दी। यह खबर इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में यह भी बताया है कि केरल भाजपा के अध्यक्ष ने मुसलमानों के लिए आपत्तिजनक बात की। पर यह भी आमतौर पर पहले पन्ने पर नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट।

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