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अनिल अंबानी ने TOI पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का मुकदमा

अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।

<p>अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।</p>

अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।

अनिल अंबानी की बीएसईएस कंपनी की तरफ से बेनेट कोलमैन कंपनी (BCCL) द्वारा संचालित टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार पर आरोप लगाया गया है कि TOI में प्रकाशित आलेखों में बीएसईएस पर गलत आरोप लगाए गए हैं और कंपनी को बदनाम करने की कोशिश की गई है। साथ ही जिस कैग रिपोर्ट के जिन तथ्यों को आधार बनाकर कंपनी के बारे में आलेख लिखे गए हैं। उन सभी तथ्यों का सार्वजनिक होना दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की सीधे तौर पर अवमानना है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि उनके अखबार में प्रकाशित सभी लेख पूरी तरह से विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से हैं । साथ ही प्रकाशन के सभी नियम कानूनों को ध्यान में रख कर पूरी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किए गए है। जिसमें कैग रिपोर्ट के तथ्यों के साथ-साथ बीएसईएस कंपनी के पक्ष को भी रखते हुए बैलेंस रिपोर्टिंग की गई है और कंपनी को किसी भी तरह से बदनाम करने की किसी तरह से साजिश नहीं की गई है। गौर करने वाली बात तो यह है कि मानहानि के नाम पर मुआवज़े की इतनी बड़ी रकम की मांग करना हर्जाना वसूलने से ज्यादा मीडिया को धमकाने-डराने की कोशिश दिखलाई देती है।

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0 Comments

  1. purushottam apsnora

    September 12, 2015 at 1:44 am

    nishchit rup se bses ka yah prayas media ko dhamkane se adhik kuchh nhi hai.

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