चोरी से न्यूड वीडियो बना इसे वायरल करने वाले होटल मालिक को महिला पत्रकार ने कोर्ट में दी शिकस्त, मिलेगा 350 करोड़ रुपये जुर्माना (देखें तस्वीरें)

कोर्ट में अपनी पीड़ा व्यक्त करतीं खेल पत्रकार एरिन फूट फूट कर रो पड़ीं…

इस महिला खेल पत्रकार को पूरे सात साल बाद इंसाफ मिला. और, जब इंसाफ मिल गया तो वह खुद को रोक न सकी. फफक कर रो पड़ी. खेल पत्रकार एरिन का होटल की दीवार में सुराख कर न्यूड वीडियो बनाया गया था. वीडियो बनाने वाले पर होटल मालिक पर अदालत ने 350 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. मामला अमेरिका का है.

अमेरिका की एक अदालत ने स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट एरिन एंड्रयू का न्यूड वीडियो बनाने वाले होटल मालिक पर 350 करोड़ रुपए (55 मिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाया है. पीड़िता एरिन एंड्रयू फॉक्स न्‍यूज में स्पोर्ट्स रिपोर्टर / एंकर है. उनका न्‍यूड वीडियो 2008 में वायरल हुआ था. उस वक्‍त वह ईएसपीएन के लिए काम किया करती थीं. ज्यूरी ने सोमवार को इस केस में फैसला सुनाया. अदालत में इस केस की सुनवाई के दौरान एरिन कई बार फूट-फूटकर रो पड़ीं और न्यूड वीडियो वायरल कराए जाने के बाद के अपने जीवन की पीड़ा के बारे में बताती रहीं.

अभियुक्त होटल मालिक माइकल बैरेट की तस्वीर ये है…

आगे की स्लाइड्स में संंबंधित खबर के अन्य डिटेल और बाकी तस्वीरें हैं…

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एरिन के पापुलर होने के कारण वीडियो बनाया!
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अनिल अंबानी ने TOI पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का मुकदमा

अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।

अनिल अंबानी की बीएसईएस कंपनी की तरफ से बेनेट कोलमैन कंपनी (BCCL) द्वारा संचालित टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार पर आरोप लगाया गया है कि TOI में प्रकाशित आलेखों में बीएसईएस पर गलत आरोप लगाए गए हैं और कंपनी को बदनाम करने की कोशिश की गई है। साथ ही जिस कैग रिपोर्ट के जिन तथ्यों को आधार बनाकर कंपनी के बारे में आलेख लिखे गए हैं। उन सभी तथ्यों का सार्वजनिक होना दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की सीधे तौर पर अवमानना है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि उनके अखबार में प्रकाशित सभी लेख पूरी तरह से विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से हैं । साथ ही प्रकाशन के सभी नियम कानूनों को ध्यान में रख कर पूरी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किए गए है। जिसमें कैग रिपोर्ट के तथ्यों के साथ-साथ बीएसईएस कंपनी के पक्ष को भी रखते हुए बैलेंस रिपोर्टिंग की गई है और कंपनी को किसी भी तरह से बदनाम करने की किसी तरह से साजिश नहीं की गई है। गौर करने वाली बात तो यह है कि मानहानि के नाम पर मुआवज़े की इतनी बड़ी रकम की मांग करना हर्जाना वसूलने से ज्यादा मीडिया को धमकाने-डराने की कोशिश दिखलाई देती है।

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अरुण पुरी के खिलाफ विहिप नेता द्वारा दायर मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

बिजनेस टुडे मैग्जीन के कवर फोटो पर महेंद्र सिंह धोनी को भगवान विष्णु के रूप में प्रकाशित करने के खिलाफ बेंगलुरु में एक विहिप नेता ने इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमें पर रोक के लिए अरुण पुरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने अरुण पुरी को राहत दे दी है. पढ़िए इस संबंध में रिलीज हुई खबर….

SC stays proceedings against Aroon Purie

NEW DELHI: The Supreme Court stayed criminal proceedings against India Today group head Aroon Purie, which was initiated against him for publishing a cover photo in Business Today in 2013 showing Indian cricket team captain M S Dhoni as Lord Vishnu. Agreeing to hear Purie’s plea, a bench of Justices J S Khehar and N V Ramana directed additional chief metropolitan magistrate of Bengaluru not to proceed in the case filed by a VHP leader for allegedly hurting religious sentiments.

Senior advocate Amrendra Sharan and Sanchit Guru, appearing for Purie, contended that the entire complaint against him was false and baseless and it was filed merely to harass the petitioner. They also pointed out that a similar complaint was filed in Pune which was dismissed by the lower court. Purie approached SC after Karnataka HC refused to quash the proceedings against him. VHP leader Yerraguntla Shyam Sunder had filed a complaint objecting to the picture in which Dhoni — in the garb of the deity — holds various products including a shoe in his hands. The sub title read “God of Big Deals”.

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रोहन जगदाले हाजिर हों…

जिया नामक चैनल और मैग्जीन लांच करने वाले रोहन जगदाले लापता हैं. तभी तो वो मीडियाकर्मियों के बकाये को लेकर लेबर आफिस में चल रही लड़ाई में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं. मीडियाकर्मियों ने उदारता दिखाते हुए उन्हें खुद मेल और पत्र के जरिए सूचित किया है कि वे अगली तारीख पर नोएडा लेबर आफिस आ जाएं अन्यथा उनकी गैरमौजूदगी में एकपक्षीय फैसला सुनाया जा सकता है… देखें पत्र….


मीडिया को लेकर आपके पास भी कोई खबर सूचना जानकारी हो तो उसे भड़ास तक bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं. 

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CBI FILES A CHARGESHEET AGAINST THREE ACCUSED IN A CASE RELATING TO ALLEGED MURDER OF SHRI CHANDRIKA RAI, THEN JOURNALIST AND THREE HIS FAMILY MEMBERS

New Delhi : The Central Bureau of Investigation has filed a chargesheet against three accused, resident of Shahdol & Umariya Districts of Madhya Pradesh U/s 120 B, 392 & 302 of IPC relating to alleged murder of Shri Chandrika Rai, then Journalist and three his family members in the Court of Chief Judicial Magistrate, Umariya(MP).

CBI had registered a case U/s 302, 460, 380 r/w 34 IPC on 05.03.2014 on the orders of Madhya Pradesh High Court, Principal Bench, Jabalpur and took over the investigation of said case which was earlier registered at Police Station Umariya(MP). It was alleged that Shri Chandrika Rai, Journalist, his wife Smt. Durga Rai, Shri Jalaj Rai (son) and Ms.Nisha Rai (daughter) were brutally murdered in the intervening night of 17/18.02.2012 by unknown persons, in his house at MPEB Colony, District Umariya(MP). The dead bodies were found in four different rooms of the house of Shri Chandrika Rai when the house was broke open by the relatives of Chandrika Rai on 18.02.2012. The family members of deceased Chandrika Rai approached the Hon’ble High Court of MP with the request for investigation of the case by CBI vide Writ Appeal No.803/2012 and Writ Appeal No.20/2013. The Hon’ble High Court vide its order dated 24.01.2014 stayed the ongoing trial against accused and had passed order for re-investigation of the case by CBI.

CBI conducted a thorough investigation and arrested one accused, resident of District Shahdol(MP). The role of other accused persons were also found in said case.

The public is reminded that the above findings are based on the investigation done by CBI and evidence collected by it. Under the Indian Law, the accused are presumed to be innocent till their guilt is finally established after a fair trial.

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काश, कोई ‘हेमंत तिवारी’ जगेंद्र सिंह का केस भी सीएम तक पहुंचा दे

शाहजहांपुर के सोशल मीडिया पत्रकार जगेन्द्र सिंह का लखनऊ के सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। जगेंद्र सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे और वो सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर काफी मुखर थे। राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार एन यादव का हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया। वे हिंदी दैनिक आज के ब्यूरो प्रमुख पद पर कार्यरत रहे थे।

दिवंगत पत्रकार एन यादव के लिए मुख्यमंत्री ने 20 लाख रुपये की सहायता दी। हेमंत तिवारी (अध्यक्ष मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति) के आग्रह पर अखिलेश जी आपने यह धनराशि स्वीकृत की। उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री से लोहा लोने वाले जुझारू पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत पुलिस द्वारा डाली गई दबिश के दौरान जलकर घायल होने से हुई। जगेंद्र सिंह ने भी लखनऊ में ही सिविल अस्पताल में आखिरी साँस ली। 

एक सवाल : क्या मुख्यमंत्री जोगिंदर के परिजनों की कुछ आर्थिक मदद करेंगे। हेमंत तिवारी “गजेन्द्र” आप का वोटर नहीं है, क्या इसलिए आप ने उसकी मौत की खबर पर गौर नहीं किया। शाहजहांपुर जिले में कार्यरत एक जुझारू पत्रकार और एक संपादक की तुलना नहीं हो सकती पर मृत्यु के बाद कम से कम संवेदना तो एक बराबर दिखाई जा सकती है। क्षमा करें, मेरा मकसद लाश पर राजनीति करने का बिलकुल नहीं है (जैसा कि अन्य पत्रकार नेताओं का प्रतीत होता है) पर बात दिल को लगती है, इसलिए मुखर हो कर बोल रहा हूँ।

एक क्षुब्ध पत्रकार के पत्र पर आधारित

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हाशिमपुरा जनसंहार की पुनर्विवेचना के लिए सड़क पर उतरेगा आईएनएल : मोहम्मद सुलेमान

कानपुर : मेरठ के हाशिमपुरा जनसंहार पर हालिया आए अदालती फैसले के बाद, पीडि़तों के इंसाफ के सवाल पर इंडियन नेशनल लीग ने यहां प्रेस क्लब कानपुर में एक प्रेस काफ्रेंस का आयोजन किया। प्रेस काफ्रेंस को इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्म्द सुलेमान, रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब एडवोकेट तथा सामाजिक कार्यकर्ता एखलाक हुसैन चिश्ती ने संबोधित किया।

प्रेस काफ्रेंस को संबोधित करते हुए इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि बेगुनाहों की सामूहिक हत्या के इस जघन्यतम अपराध में प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार, खासकर मुलायम सिंह यादव बराबर के भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के रहनुमा बनने का दावा करने वाले मुलायम सिंह ने, हत्याकांड में इस्तेमाल राइफलों को जब्त करते हुए केस से ही नहीं जोड़ा। यही नहीं, अदालत में चल रहे इस मुकदमें में लंबे समय तक सरकारी वकील तक नहीं उपलब्ध कराया गया। इस दौरान मशावरत की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई और उसके बाद इस केस को दिल्ली स्थानांतरित किया गया। मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार ने अदालत में इतनी लचर पैरवी की कि आज नतीजा सबके सामने है। इंसाफ की हत्या के इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी सरकार तथा मुलायम सिंह यादव की भूमिका रही है और पीडि़तों को इंसाफ दिलाने के लिए इंडियन नेशनल लीग सड़क पर उतरेगी। मोहम्मद सुलेमान ने मांग की कि इस मामले में सूबे की समाजवादी पार्टी सरकार हाशिमपुरा प्रकरण में तत्काल पुर्नविवेचना की घोषणा करे।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि एक तरफ रिहाई मंच को हाशिमपुरा पीडि़तों के इंसाफ के सवाल पर लखनऊ में कार्यक्रम तक नहीं करने दिया जाता वहीं आजम खान दिल्ली में कैंडिल लाईट का आयोजन करते हैं। अगर आजम खान अदालत के फैसले से इतने ही दुखी हैं तो फिर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में पूरे मामले की सबीआई या एसआईटी से जांच की घोषणा सपा सरकार से क्यों नहीं कराते? मोहम्मद शुऐब ने सवाल किया सपा सरकार इससे पहले भी कई बार सत्ता में रह चुकी है तब उसने पीडि़तों के इंसाफ के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि पीडि़तों को इंसाफ तब तक नहीं मिल सरकता जब तक कि इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पुर्नविवेचना नहीं होती। उन्होंने मांग की प्रदेश की सांप्रदायिक हिंसा पर अब तक जितने भी आयोग गठित हुए हैं उनकी जांच रिपोर्ट समाजवादी पार्टी सरकार तत्काल सार्वजनिक करे। मोहम्मद शुऐब ने पूछा कि सपा सरकार इन्हे सार्वजनिक करने से डर क्यों रही है? क्योंकि वह सेक्यूलर होने के नाम पर हिन्दुत्व की राजनीति करती है और उसमें इंगित अपराधियों को दंडित करने का नैतिक साहस तक नहीं है।

प्रेस काफ्रेंस को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता एखलाक हुसैन चिश्ती ने कहा कि हाशिमपुरा पर आए अदालती फैसले और इसके पहले शंकर बिगहा, बथानीटोला, बाथे जनसंहारों के फैसले के बाद यह बात साफ हो गई है कि अब इस मुल्क की न्यायपालिका गरीबों और वंचितों को इंसाफ से वंचित रखने के लिए कमर कस चुकी है। अगर हाशिमपुरा के मुसलमानों को पीएसी के जवानों ने नहीं मारा तो फिर असली हत्यारे कौने थे? इसका उत्तर इस पूरे सिस्टम को देना होाग। उन्होंने कहा कि दलितों और मुसलमानों के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं थी, अब न्यायपालिका भी इसमें शामिल हो गई है। एखलाक हुसैन चिश्ती ने कहा कि इस मुल्क में मुसलमानों-दलितों के अब तक जितने भी जनसंहार हुए हैं उनमें किसी को सजा नहीं दी गई। यह अन्याय लोकतंत्र के लिए खतरा है और इसके खिलाफ, लोकतंत्र बचाने के लिए देश की अमन पसंद आवाम सड़कों पर उतरेगी।

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कोल एवं मीडिया उद्यमी नवीन जिंदल के खिलाफ सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट

सीबीआई ने उद्योगपति नवीन जिंदल पर आरोप लगाया है कि यूपीए शासन के दौरान झारखंड में एक कोयला खदान हासिल करने में उन्होंने भ्रष्टाचार किया और गलत तथ्य पेश किए। सीबीआई ने जिंदल, यूपीए सरकार में कोयला राज्य मंत्री रहे दासारी नारायण राव, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता सहित 10 लोगों के खिलाफ दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट पेश की। 54 पेज की चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि जिंदल और उनकी कंपनी जिंदल स्टील-पावर लिमिटेड ने 2007 में अमरकोंडा मुर्गाडांगल कोल ब्लॉक हासिल करने के लिए न केवल राव को रिश्वत दी थी, बल्कि अपनी कंपनी के बारे में गलत तथ्य भी पेश किए थे, जिन्हें तत्कालीन कोयला सचिव गुप्ता की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी ने नजरंदाज कर दिया था।

सीबीआई ने कहा है कि जिंदल ग्रुप की कंपनियों ने हैदराबाद की सौभाग्य मीडिया के शेयर खरीदे। यह कंपनी राव की है। सीबीआई ने कहा कि यह खरीदारी 100 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से की गई थी, जबकि उस वक्त शेयर का कीमत 28 रुपये थी। चार्जशीट में पैसे के लेनदेन का पूरा खाका पेश किया गया है। सीबीआई ने कहा है कि इसकी जांच एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट अलग से कर रहा था और उसने पाया है कि सौभाग्य मीडिया को जिंदल ग्रुप की कंपनियों जेएसपीएल, गगन स्पॉन्ज, जिंदल रियल्टी और न्यू दिल्ली एग्जिम से 2.25 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली।

जेएसपीएल ने कहा है कि सीबीआई के इस कदम से वह ‘हैरान’ है। कंपनी ने कहा कि उसे मेरिट के आधार पर कोल ब्लॉक मिला था। कंपनी के प्रवक्ता ने ईमेल से दिए जवाब में कहा, ‘अपनी कंपनी और मैनेजमेंट के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का हम खंडन करते हैं। कानून के मुताबिक उचित कदम उठाया जाएगा।’ सीबीआई ने जून 2013 में दर्ज किए गए मामले में यह चार्जशीट पेश की है। वह मामला द इकनॉमिक टाइम्स में उसी साल 11 अप्रैल को छपी एक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था।

सीबीआई चार्जशीट में बताया गया है कि कोल ब्लॉक एलोकेशन में कमेटी के फैसले को राव ने प्रभावित किया था। सूत्रों ने बताया कि यह चार्जशीट फॉर्मर पीएम और तत्कालीन कोयला मंत्री मनमोहन सिंह से भी पूछताछ का रास्ता बना रही है। सीबीआई ने कहा कि भूषण एनर्जी लिमिटेड ने रिप्रेजेंटेशन दिए थे, लेकिन राव ने जिंदल ग्रुप का पक्ष लिया, जबकि कोड़ा आपराधिक साजिश में शामिल थे क्योंकि उन्हीं के कार्यकाल में उनकी सिफारिश पर कोल ब्लॉक दिया गया था।

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फोकस चैनल के मालिक नवीन जिंदल और उनके बेटे-बेटी-पत्नी के खिलाफ ईडी ने फेमा के तहत केस दर्ज किया

फोकस न्यूज चैनल के मालिक और कांग्रेस नेता नवीन जिंदल पर इनफोरसमेंट डायरेक्टोरेट यानि ईडी ने केस दर्ज कर लिया है. इनके चार परिजनों के खिलाफ भी ईडी ने मामला दर्ज किया है. ऐसा रिजर्व बैंक को जानकारी दिए बिना सिंगापुर के बैंक में बैंक खाता खोलने के कारण किया गया है. निदेशालय जल्द ही इन सभी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगा. जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें नवीन जिंदल के अलावा उनकी पत्नी शालू जिंदल, बेटी यशस्विनी और बेटे वेंकटेश हैं. इन सभी के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज कर लिया गया है.

प्रवर्तन निदेशालय को फाइनेंसियल इंटेलिजेस यूनिट से सूचना मिली थी कि नवीन जिंदल और उनके परिजनों ने सिंगापुर के एक प्राइवेट बैंक में साल 2010 में खाते खुलवाए थे. एफआईयू की रिपोर्ट में इन बैंक खातों के बाकायदा नंबर भी भेजे गए थे. सूचना के आधार पर ईडी ने रिजर्व बैंक से पता किया कि नवीन जिंदल और उनके परिजनो के इन बैंक खातो की उसके पास कोई सूचना है, तो आऱबीआई ने साफ तौर पर इनकार कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक, सिंगापुर के प्राइवेट बैंक जूलियस बीर एंड कंपनी में अकाउंट खुलवाते वक्त चारों अकाउंट दस-दस हजार डॉलर जमा कराए गए थे. प्रवर्तन निदेशालय जानना चाहता है कि इन खातो में जिंदल ने कब कब कितना पैसा जमा कराया, इस खाते में पैसा कहां-कहां से आया, भारत के किन बैंकों से इस खाते में पैसा गया और इस पैसे का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया, इस समय खाते में कितना पैसा है और इस बारे में जिदल ने आरबीआई को सूचना क्यों नहीं दी.

ये तमाम ऎसे सवाल हैं जिनका जवाब ईडी जिंदल से जानने की कोशिश करेगा. उधर, नवीन जिंदल की कंपनी जेएसपीएल का कहना है कि कुछ भी गलत नहीं किया गया है. सब कुछ अधिकारिक तौर पर है हुआ. जिंदल का बहुत सा कारोबार विदेशों में भी है. नोटिस मिलने पर जांच एजेंसियों को जवाब दे दिया जाएगा. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने नवीन जिंदल के खिलाफ कोयला घोटाला मामले में भी लगभग आधा दर्जन केस दर्ज कर रखा है, जिनकी जांच जारी है.

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फर्जी IAS ट्रेनी केस: नौकरी नहीं, परस्पर सम्बन्ध दिखते हैं कारण

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने आईजी गढ़वाल रेंज संजय गुंज्याल से रूबी चौधरी केस में गहराई से जांच करने का अनुरोध किया है.

उन्होंने कहा है कि यह केस मात्र रूबी और गार्ड के वश का नहीं है. यहाँ तक कि सौरभ जैन भी अकेले इसे बिना आईएएस एकेडेमी के निदेशक के संज्ञान में आये नहीं कर सकते थे. उन्होंने इसे प्रथमद्रष्ट्या नौकरी के लिए पैसे लेने की जगह परस्पर संबंधों के जोड़ कर देखे जाने का अनुरोध किया है. साथ ही उन्होंने संस्थान की छवि के दृष्टिगत सचिव, डीओपीटी, भारत सरकार से इस प्रकरण की खुली जांच कराते हुए उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का अनुरोध किया है.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें –  

Fake IAS trainee case:  related with mutual relations, not job

IPS officer Amitabh Thakur and social activist Dr Nutan Thakur have requested IG Garhwal Range Sanjay Gunjyal to get the Ruby Chaudhary fake IAS case enquired deeply.

They said this case could not have been committed solely by Ruby or the Guard. Even Saurabh Jain could not have done this without the matter coming in the knowledge of Academy Director. They suggested to look the matter as being related to mutual relations between Saurabh and Ruby, instead of Ruby’s allegations of taking money for job.

They have also requested Secretary, DOPT, Government of India to constitute an open enquiry in the matter and make its report public, in the interest of the Academy’s prestige.

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यादव सिंह केस : सरकार की कत्तई सीबीआई जांच की मंशा नहीं

लखनऊ : यादव सिंह मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पीआईएल करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर को अज्ञात सूत्रों से भेजे गए अभिलेखों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार मामले में किसी भी कीमत पर सीबीआई जांच नहीं चाहती है.

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर काले धन पर बने एसआईटी के सदस्य सचिव उदय सिंह कुमावत ने 11 फ़रवरी 2015 को राज्य सरकार को पत्र लिख कर तब तक किये गए सभी प्रशासनिक और सिविल तथा आपराधिक न्यायिक कार्यवाही का ब्यौरा माँगा था ताकि सीबीआई जांच पर निर्णय लिया जा सके.

यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने 13 फ़रवरी को कुमावत को कहा था कि चूँकि प्रकरण हाई कोर्ट में विचाराधीन है, अतः अभी सामानांतर प्रक्रिया उचित नहीं होगी. एसआईटी ने यूपी सरकार की दलील को नामंजूर करते हुए 24 फ़रवरी को उत्तर प्रदेश सरकार से यादव सिंह मामले के सभी अभिलेख सीबीआई को देने के निर्देश दिए थे लेकिन उसने 16 मार्च की सुनवाई में कहा गया कि वे शीघ्र इस पत्र के सम्बन्ध में केंद्र सरकार से पत्राचार करेंगे. डॉ ठाकुर इन समस्त पत्राचार को 20 अप्रैल की अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष रखेंगी.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें – 

Documents: UP Govt opposes CBI inv in Yadav Singh case at all cost

The various documents sent by anonymous sources to social activist Dr Nutan Thakur, who has file the PIL in Allahabad High Court in Yadav Singh scam, prove it beyond all doubt that State government does not want CBI enquiry at any cost.

The documents show that Udai Singh Kumawat, Member Secretary, Special Investigation Team (SIT) on Black money, formed on Supreme Court directions, sent a letter dated 11 February 2015 to the State government, directing it to present the details of actions taken in this case so far, both administratively and in Courts- civil and criminal, so as to decide about CBI investigation

To this Chief Secretary UP Alok Ranjan intimated Sri Kumawat on 13 February that since the matter is under consideration before the Allahabad High Court, hence any parallel proceeding may not be appropriate.

SIT refused the UP government argument and directed it through letter dated 24 February 2015 to provide all the documents related with Yadav Singh case to CBI, but the State government again told the High Court on 16 March that it shall soon be responding to this letter.

Dr Thakur shall be putting these letters before High Court on next date of hearing on 20 April.

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सुनंदा पुष्कर मर्डर केस में दिल्ली पुलिस के हाथ लगे महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्ड

नई दिल्ली : सुनंदा पुष्कर हत्याकांड की छानबीन के दौरान पुलिस को 100 घंटों के फोन रिकॉर्ड के रूप में एक अहम जानकारी हाथ लगी है। कॉल रिकॉर्ड को जांच के लिए भेजा गया है। आशंका है कि फोन से कुछ महत्वपूर्ण एसएमएस डिलिट किए जा चुके हैं। जांच में सब पता चल जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर व पाकिस्तानी महिला पत्रकार मेहर तरार के बीच प्रेम-प्रसंग की जानकारी सुनंदा को ट्विटर, फेसबुक व मोबाइल एसएमएस के जरिये ही मिली थी। सुनंदा के पति थरूर की मेहर तरार से फेसबुक व ट्विटर पर ही अधिकतर चैटिंग के जरिये बातचीत होती थी। इसके अलावा मोबाइल पर एसएमएस व व्हाट्सएप के जरिये भी बातचीत होती थी। उनके बीच हुई कई अश्लील बातचीत को सुनंदा ने पकड़ लिया था, जिसे उन्होंने 15 जनवरी 2014 को दिल्ली आने पर वरिष्ठ महिला पत्रकार नलिनी सिंह व अन्य कई पत्रकारों से साझा किया था।

पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि सुनंदा के तीनों स्मार्टफोन व लैपटॉप की जांच रिपोर्ट आ गई है। आशंका है कि फोन से कुछ महत्वपूर्ण एसएमएस गायब कर दिए गए हैं। मामले की जांच कर रही एसआइटी ने जनवरी में सुनंदा के फोन और लैपटॉप को जांच के लिए गुजरात की प्रयोगशाला में भेजा था। वहां से एक सप्ताह पहले आई रिपोर्ट को आधार बनाकर एसआइटी बारीकी से साक्ष्य तैयार करने में जुट गई है।

बस्सी के मुताबिक सुनंदा हत्याकांड मामले में जितना जरूरी जहर का पता लगाना है, उतने ही इलेक्ट्रानिक साक्ष्य भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सुनंदा का विसरा अमेरिका भेजा गया है। उसकी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। फोन रिकॉर्ड में पुष्कर की कई लोगों से बातचीत दर्ज है। परिवार के अन्य सदस्यों से हुई सुनंदा की बातचीत भी इस हत्याकांड को सुलझाने में मदद कर सकती है। सुनंदा पुष्कर की मौत से पहले के उनके कई बयान पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। 

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रीता जोशी केस में गिरफ्तार निर्दोष लड़ेंगे न्याय की लड़ाई

लखनऊ : रीता बहुगुणा जोशी के घर आगजनी मामले में फर्जी फंसा कर गिरफ्तार किये गए पूर्णतया निर्दोष लोग अब अपनी न्याय की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने यह निर्णय आज आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा उनके नीलमथा, कैंट स्थित आवास पर जा कर मुलाकात करने के बाद किया.

पीड़ित शिव कुमार, गुड्डू यादव और इन्दर सिंह यादव ने बताया कि किस तरह उन्हें घर से उठा कर फर्जी केस में जेल भेज दिया गया. पुलिस ने उनके ड्राइविंग लाइसेंस ले लिये जिससे वे आज तक महरूम हैं. इन्दर ने बताया कि गिरफ़्तारी के कारण वे सगे भाई की अंत्येष्ठी में शामिल नहीं हो सके.

नूतन इन लोगों के न्याय की लड़ाई में उनकी अधिवक्ता होंगी. जहां पुलिस के खिलाफ मुक़दमा दर्ज हो गया है वही वे इन लोगों को समुचित मुआवजा दिए जाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में वाद दायर करेंगी.

खबर अंग्रेजी में पढ़ें – 

Rita Joshi innocent arrested to fight their case

The innocent persons arrested and framed by Lucknow police in Rita Bahuguna Joshi case have decided to fight their case for justice till the end.

They decided it after IPS officer Amitabh Thakur and social activist  Dr Nutan Thakur today visited their residence in Neelmatha, Cantt.

The victims Shiv Kumar, Guddu Yadav and Inder Singh narrated how they were lifted from their house and framed in completely false charges. Shiv Kumar and Guddu said the police took away their driving licence, resulting in its permanent loss. Inder told he could not attend his own brother’s funeral.

Nutan shall be their advocate in their fight for justice. While FIR has already been registered against policemen,  she shall be filing their complaint for compensation before the National Human Rights Commission.

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आदिवासी महिला ने शोषण के खिलाफ ‘खबर मंत्र’ पर किया केस

Aloka Ranchi : आदिवासी महिला के शोषण पर एसटी-एसी थाना में खबर मंत्र पर केस हुआ.. अखबार खबर मंत्र का प्रबंधन यहां कार्यरत लोगो से काम तो लेते हैं पूरे महीने लेकिन जब मानदेय मांगने कोई जाता है तो उसे कोल कुकूर जैसे जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करके गाली देते हैं… इसी के बाद महिला आदिवासी कर्मचारियों ने अखबार खबर मंत्र के खिलाफ एसटी एसी थाना में केस ठोक दिया..

 

रांची की वरिष्ठ महिला पत्रकार अलोका के फेसबुक वॉल से.

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यादव सिंह प्रकरण : सीबीआई जांच आदेश का हलफनामा दायर

लखनऊ : यादव सिंह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा पीआईएल में आज महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई नहीं हो सकी. मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी.

इस बीच डॉ ठाकुर ने पूरक हलफनामा दायर कर कोर्ट के सामने वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को भेजा दिनांक 24 फ़रवरी 2015 का आदेश प्रस्तुत किया जिसमे भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से काले धन पर बने एसआईटी के आदेशों पर यादव सिंह मामले के सभी अभिलेख सीबीआई को देने के निर्देश मिले हैं.

हलफनामे में डॉ ठाकुर ने कहा कि उन्हें औद्योगिक विकास विभाग का दिनांक 14 मार्च का हलफनामा आज प्राप्त हुआ है जिसमे प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए जस्टिस अमरनाथ वर्मा कमीशन का उल्लेख तो है पर सीबीआई जांच के सम्बन्ध में एसआईटी आदेश और उसके पालन में की गयी कार्यवाही का कोई जिक्र नहीं है जो एक उल्लेखनीय तथ्य है.

खबर अंग्रेजी में पढ़े –

Yadav Singh case- Affidavit on CBI enquiry order filed

Lucknow : The PIL in Lucknow bench of Allahabad High Court in Yadav Singh scam filed by social activist Dr Nutan Thakur could not be heard today because of Advocate General Vijay Bahadur Singh not being able to appear in the Court. It shall be heard next on 23 March.

Meanwhile Dr Thakur today filed supplementary affidavit before the Court presenting the copy of an order dated 24 February 2015 issued by Finance Ministry, Government of India to Chief Secretary, UP which directs the UP government to provide all the documents related with Yadav Singh case to CBI, as per the instructions of Special Investigation Team (SIT) on Black money, formed on Supreme Court directions.

In the Affidavit, Dr Thakur said that she received the Affidavit of Industrial development department dated 14 March where the State government talks of Justice A N Verma commission but makes no mention at all of the CBI enquiry on directions of SIT and the steps taken in its compliance, which needs to be noted.

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यादव सिंह केस : सीबीआई जांच-आदेश नहीं मानती यूपी सरकार, कोर्ट से धोखा

लखनऊ : यादव सिंह मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तथ्यों को छिपाने और हाई कोर्ट के सामने गलतबयानी का गंभीर आरोप लगाया है.

GoI order for CBI enquiry, UP govt Affidavit

डॉ. ठाकुर ने कहा है कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को भेजा गया 24 फ़रवरी 2015 का आदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से काले धन पर बने एसआईटी के आदेशों पर यादव सिंह मामले के सभी अभिलेख सीबीआई को देने के निर्देश हैं. उत्तर प्रदेश सरकार इस आदेश को न सिर्फ मीडिया से छिपाए हुए है, बल्कि उसने हाईकोर्ट के सामने भी गलतबयानी करते हुए इस आदेश का जिक्र नहीं किया है.

डॉ. ठाकुर ने कहा है कि उन्हें औद्योगिक विकास विभाग का दिनांक 14 मार्च का हलफनामा आज प्राप्त हुआ है जिसमे प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए जस्टिस अमरनाथ वर्मा कमीशन का उल्लेख तो है पर सीबीआई जांच के सम्बन्ध में एसआईटी आदेश और उसके पालन में की गयी कार्यवाही का कोई जिक्र नहीं है. वह 16 मार्च को हाई कोर्ट की सुनवाई में भारत सरकार के इस आदेश की प्रति कोर्ट के सामने रखते हुए कोर्ट की मोनिटरिंग में यह सीबीआई जांच कराने का निवेदन करेंगी.

खबर अंग्रेजी में पढ़े –

Yadav Singh case- UP Govt hiding CBI enquiry, cheating High Court 

Social activist Dr Nutan Thakur, who has filed the PIL before Lucknow bench of Allahabad High Court in Yadav Singh scam has alleged the UP government of hiding facts from people and the High Court.

Dr Thakur said that she is in possession of an order dated 24 February 2015 issued by Finance Ministry, Government of India to Chief Secretary, UP which directs the UP government to provide all the documents related with Yadav Singh case to CBI, as per the instructions of Special Investigation Team (SIT) on Black money, formed on Supreme Court directions, but the state government is hiding this not only from the media but also from the High Court.

Dr Thakur said that today she received the Affidavit of Industrial development department dated 14 March where the State government talks of Justice A N Verma commission but makes no mention at all of the CBI enquiry on directions of SIT and the steps taken in its compliance.

She said that she shall be presenting a copy of this order of CBI enquiry before the High Court in hearing (16 March) and shall be praying for CBI enquiry under the High Court’s monitoring.

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Criminal case against I & B ministry

Today i have filed a criminal complaint (pfa) with the 8th ACCM, Bangalore  on the following subject: The removal of the words ‘secularism’ and ‘socialism’ from the Preamble of the Constitution of India in the official advertisement of DAVP, Ministry of I & B, Govt. of India on Republic Day of 2015 was not only a brazen attack on the esteem and integrity of the Constitution of India but also a clear violation of the criminal law provision of Section 2 of the Prevention of Insult to National Honour Act, 1971.

Siddharth Sharma

aamaadmisid@gmail.com

IN THE COURT OF THE VIII ADDITIONAL CHIEF METROPOLITAN MAGISTRATE, BANGALORE CITY  AT BANGALORE

P.C.R. NO. _             of 2015

Between:
Sri  SIDDHARTH SHARMA
S/o. Late Sita Sharan Sharma
Address : Lok Swaraj Manch
‘Ramjai’ # 2, 2nd Cross Chanakya Street,
Akkamma Block, Dinnur, RT Nagar
Bangalore 560032                                    …COMPLAINANT

And:
Sri BIMAL JULKA
Secretary to Govt. of India
Ministry of Information and Broadcasting   
Shastri Bhawan, New Delhi-1110001               
…ACCUSED No.1

Sri K. GANESAN
Director General of Advertising and Visual Publicity
DAVP, 5th Floor, Soochana Bhawan, Phase IV,
CGO Complex, Lodhi Road, New Delhi- 110003       
…ACCUSED No.2

* * *
UNDER SECTIONS 190 AND 200  OF THE CODE OF CRIMINAL PROCEDURE , r/w Section 156 (3), CRPC, the complainant above named  most humbly submits as follows:
That the addresses of the parties to these proceedings for the purpose of service of process of this Hon’ble Court are as shown in the cause title. The Complainant may also be served through his advocate Sri NITIN.R, whose full office address is given hereinbelow. That the complainant is the National Convenor, Lok Swaraj Manch (LSM) founded by Gandhiji’s associate, Prof Thakur Das Bang. LSM is a pan-India institution of individuals who strongly advocate transition to participatory democracy.   He is also the Vice-President, Anuvrat Mahasamiti, an international institution of Moral Values, a founder-member of Pragatisheel Bramha Samaj, a forum of intellectuals, one of the Founder Members of the Aam Aadmi Party. He is also the Vice- President, Bharatiya Sanskriti Vidyapith, a 50 year old education institution, a Co-Promoter of Citizens’ Forum Against Corruption, Karnataka’s citizen anti-corruption initiative and a Former Hon. Secretary, Gandhi Peace Foundation, Bangalore. He was also an active volunteer in the Jan Lokpal movement by India Against Corruption (IAC) led by Sri Anna Hazareji.

The complainant humbly submits that the accused have violated the Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 on account of deliberate and brazen publication of advertisement on Republic Day this year in all major National and Vernacular newspapers in the country. A copy of one such original advertisement that appeared in the popular Kannada daily, Vijaya Karnataka dated 26/1/2015 is herewith produced as DOCUMENT no.1. The same advertisement is freely available online and a copy of the internet edition also is herewith produced as DOCUMENT no.2.

The news paper advertisement was/is in gross contempt of the Constitution of India inasmuch as it depicts the Preamble of the Constitution as stating that India is only a, ‘SOVEREIGN DEMOCRATIC REPUBLIC’, even though the Preamble unequivocally and explicitly states in bold that India is a ‘SOVEREIGN SOCIALIST DEMOCRATIC REPUBLIC’. The Preamble is not only applicable and binding on the ordinary citizens of India but also upon the Functionaries/Public Servants working within the government system.

The ultimate arbiter of the Constitution of India viz., the Honourable Supreme Court of India has categorically held that the Preamble is an integral part of the Constitution and not a separate text in itself.

The Supreme Court in Kesavananda Bharti (AIR 1973 SC 1461) stated as follows:
“Reference to the debates of the Constituent Assembly shows that there was considerable discussion in the said Assembly on the provisions of the Preamble. A number of amendments were moved and were rejected. A motion was thereafter adopted by the Constituent Assembly that “the Preamble stands part of the Constitution” (see Constituent Assembly debates, Vol. X, p. 429-456). There is, therefore, positive evidence to establish that the Preamble is a part of the Indian Constitution”.

In S R Bommai case(AIR 1994 SC 1918)  SC held: “The preamble of the Constitution is an integral part of the Constitution.”

This position has been upheld by the Supreme Court even after the coming into force of 42nd amendment to the Constitution of India. The said 42nd amendment has not only stood the test of time but also the final scrutiny of the Supreme Court of India and it is not open either to the ordinary citizens or the public functionaries such as accused herein to rely on any other text of the Constitution of India (including the Preamble) than the text which binds one and all, as on date.

The Complainant further submits that both Secularism and Socialism have been treated as part of the basic structure as reflected in preamble of our Constitution and therefore neither the Preamble nor the concepts of Secularism and Socialism are open to semantical debates or whimsical interpretations by anyone including those mighty in the bureaucracy.

The Supreme Court in D S Nakara case((1983) I SCC 305) has settled that: “The principal aim of a socialist State is to eliminate inequality in income and status and standards of life. The basic framework of socialism is to provide a decent standard of life to the working people and especially provide security from cradle to grave… It was such a socialist State which the Preamble directs the centers of power Legislative Executive and Judiciary-to strive to set up” and in Minerva Mills Ltd. case (AIR 1980 SC 1789) This is not mere semantics. The edifice of our Constitution is built upon the concepts crystallised in the Preamble. We resolved to constitute ourselves into a Socialist State which carried with it the obligation to secure to our people justice-social, economic and political. We, therefore, put Part IV into our Constitution containing directive principles of State policy which specify the socialistic goal to be achieved.” And in Praveenbhai Togadia case ((2004) 4 SCC 684) it was held: “Secularism has come to be treated as a part of fundamental law, and an unalienable segment of the basic structure of the country’s political system.”

The offence committed hereinabove is grave in nature apart from being offensive to the sensibilities of the concerned citizens of this country such as the complainant who hold the Constitution of India in high esteem and who are fearful of the country turning into a theocratic state.

The said commission of offence has not been in order to discharge any public duty for citizens but is patently offensive. Hence, there is no legal-technical bar to entertain this complaint.

Furthermore, the complainant humbly submits that some of the Cabinet Ministers and the Minister of Information and Broadcasting (I & B) of Govt. of India have justified the exclusion of the words, secularism and socialism from the Preamble of the Constitution, going by the reports in the responsible sections of the media.  Hence, it requires to be investigated by the jurisdictional Police whether the advertisement was brought out on the formal directions of the political executive viz., the Minster for I & B etc. of the Government of India, in which case such persons shall also be equally culpable. The internet copy of a newspaper report dated 28/1/2015 quoting a Cabinet Minister, as above-said, is herewith produced as DOCUMENT no.3.    

The above said offence has been committed in multiple jurisdictions in the country. This court also enjoys the jurisdiction to entertain this complainant and take cognizance of the offence mention herein since one such publication/distribution of defiling of Constitution of India happened through the advertisement by Directorate of Advertising and Visual Publicity of the Ministry of Information and Broadcasting, GoI, in the issue of ‘VIJAYA KARNATAKA’ dated 26.01.2015, which was received and read by the complainant,  his family and friends on the same day, in his above-mentioned address, which falls within the territorial limits where this Hon’ble Court can exercise the powers under law.

The acts and omissions of the accused herein are not civil wrongs but constitute deliberate omission and commission that attract the mischief that Section 2 of the Prevention of Insult to National Honour Act, 1971 seeks to curtail.   

PRAYER
WHEREFORE, the Complainant in the above case most humbly prays this Hon’ble Court be pleased to refer the matter for investigation or secure the presence of the accused, as may be deemed fit, and deal with them in accordance with law, in the ends of justice.

ADVOCATE FOR COMPLAINANT             
COMPLAINANT
Address:

VERIFICATION
I, Siddharth Sharma, the complainant in the above matter, do hereby state on verification that, the statements made from para 1 to 14 of the memorandum of complaint are all true to the best of my knowledge, information and belief.

Place: Bangalore

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रेप केस प्रकरण में मथुरा के पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु के घर फरारी नोटिस चस्‍पा

मथुरा के पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु पर एमबीए की एक छात्रा के साथ बलात्‍कार किये जाने के आरोप में कल पुलिस ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए कोर्ट से सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कार्यवाही करा ली है। पुलिस ने कल ही उपमन्‍यु के घर पर उसकी फरारी संबंधी सूचना का नोटिस भी चस्‍पा कर दिया है। पीड़िता के अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रेप के आरोपी कमलकांत उपमन्‍यु के फरार हो जाने तथा पुलिस की गिरफ्त में न आने पर कल इस मामले की आई. ओ. महिला सब इंस्‍पेक्‍टर रीना ने संबंधित न्‍यायालय से सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कार्यवाही किये जाने की अनुमति लेकर आरोपी के घर उसका नोटिस चस्‍पा कर दिया।

इस प्रक्रिया के बाद भी यदि उपमन्‍यु पुलिस अथवा कोर्ट के समक्ष हाजिर नहीं होता है तो पुलिस उसे फरार मानते हुए सीआरपीसी की धारा 83 के तहत उसकी चल-अचल संपत्‍ति कुर्क करने का आदेश ले सकती है। सामान्‍य तौर पर 82 के बाद 83 की कार्यवाही करने के लिए पुलिस 30 दिन का समय लेती है किंतु यह समय निर्धारित नहीं है। यदि पुलिस को ऐसा लगता है कि आरोपी इस बीच में अपनी चल-अचल संपत्‍ति बेच सकता है तो वह 83 की कार्यवाही करने का आदेश कभी भी लेकर उसकी चल-अचल संपत्‍ति कुर्क कर सकती है। उल्‍लेखनीय है कि उपमन्‍यु के खिलाफ न्‍यायालय ने गैर जमानती वारंट (NBW) पहले से जारी किया हुआ है।

चूंकि यह मामला यूपी जर्नलिस्‍ट एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्‍यक्ष, ब्रज प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष, मथुरा की छावनी परिषद् के पूर्व उपाध्‍यक्ष का तमगा प्राप्‍त तथा अधिवक्‍ता सहित बसपा की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके एक प्रभावशाली पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु से ताल्‍लुक रहता है लिहाजा तरह-तरह की अफवाहों का बाजार भी इस बीच गर्म है। पहले इस आशय की अफवाह उड़ी की भारी-भरकम रकम देकर उपमन्‍यु ने पीड़िता के परिवार से समझौता कर लिया है, और अब कल से एक नई अफवाह यह उड़ी कि इस मामले की तफ्तीश (जांच) को डीजीपी ने गैर जनपद (फिरोजाबाद) स्‍थानांतरित कर दिया है। हद तो तब हो गई जब तफ्तीश चेंज होने के संबंध में पुलिस महानिदेशक उत्‍तर प्रदेश के कार्यालय से जारी दर्शाया हुआ डीजीपी आनंद लाल बनर्जी के तथाकथित हस्‍ताक्षरयुक्‍त वाला एक पत्र भी सोशल मीडिया पर तैरने लगा।

आगरा परिक्षेत्र की पुलिस उपमहानिरीक्षक श्रीमती लक्ष्‍मी सिंह के नाम से संबोधित इस पत्र में लिखा है कि हनुमान नगर निवासी सेना के पूर्व सूबेदार त्रिभुवन उपमन्‍यु के संलग्‍न पत्र का अवलोकन करें जो माननीय मुख्‍यमंत्री के कार्यालय से मुकद्दमा अपराध संख्‍या 944/2014 धारा 376 व 506 के संबंध में प्रेषित है और निष्‍पक्ष विवेचना गुण-दोष के आधार पर जनपद फिरोजाबाद से कराये जाने के संबंध में है। पत्र में यह भी लिखा है कि उपरोक्‍त प्रकरण वादी के बताये गये तथ्‍यों के अनुसार संदिग्‍ध प्रतीत हो रहा है।

जांच स्‍थानांतरित करने के लिए जिन सज्‍जन पूर्व सूबेदार त्रिभुवन उपमन्‍यु के नाम का उल्‍लेख उक्‍त पत्र में किया गया है, बताया जाता है कि वह आरोपी पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु के सगे भाई हैं।
इस संबंध में जानकारी की गई तो पता लगा कि प्रथम तो प्रतिवादी पक्ष के किसी प्रार्थना पत्र पर जांच स्‍थानांतरित करने का कोई प्रावधान नहीं है और दूसरे इसी पत्र में यह भी लिखा है कि उपरोक्‍त प्रकरण वादी के बताये गये तथ्‍यों के अनुसार संदिग्‍ध प्रतीत हो रहा है जोकि पूरी तरह विरोधाभासी है क्‍योंकि इस मामले में पीड़िता खुद ‘वादी’ है। इस सबके अलावा पत्र में डीआईजी को उनके व्‍यक्‍तिगत नाम से संबोधित किया जाना, बिना जांच के ही एक संगीन अपराध को संदिग्‍ध बताया जाना तथा पत्र की तारीख 22 को काटकर हाथ से 18 किया जाना आदि तमाम ऐसे कारण हैं जो पत्र को किसी सुनियोजित साजिश का हिस्‍सा साबित करते हैं।

हालांकि इस पत्र के आधार पर कल पूरे दिन अफवाहों का बाजार तो गर्म रहा ही, साथ ही यह दावा करने वालों की भी खासी संख्‍या सामने आती रही जिन्‍होंने कहा कि उनकी डीआईजी से बात हो चुकी है और उन्‍होंने जांच फिरोजाबाद स्‍थानांतरित किये जाने की पुष्‍टि कर दी है। इतना सब-कुछ हो जाने तथा सोशल मीडिया पर भी प्रसारित होने के बावजूद आश्‍चर्यजनक रूप से पुलिस इस मामले में चुप्‍पी साधे रही जबकि यह एक संगीन साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है।

इस तरह पुलिस विभाग के गोपनीय पत्र का मजमून तैयार करके उसे प्रसारित करना तथा उसके लिए प्रदेश के डीजीपी कार्यालय तथा डीजीपी के नाम व हस्‍ताक्षरों का इस्‍तेमाल करना अपने आप में बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है परंतु पुलिस ने ऐसा करने वाले का पता तक लगाना जरूरी नहीं समझा। यहां एक सवाल यह है कि यदि इस पत्र में किसी प्रकार की कोई सत्‍यता है तो भी पुलिस का एक विभागीय गोपनीय पत्र आखिर कैसे सार्वजनिक हुआ और कैसे वह सोशल मीडिया का हिस्‍सा बन गया।

यूं तो इस रेप केस को लेकर पुलिस के कुछ आला अधिकारियों का रवैया शुरू से काफी लचीला रहा है परंतु अब ऐसे किसी पत्र को प्रसारित करने के मामले में भी पूरी तरह उदासीन बने रहना साइबर क्राइम को बढ़ावा देने से कम नहीं माना जा सकता। जो भी हो, अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में आरोपी पत्रकार को गिरफ्त में ले पाती है अथवा ऐसी तरह-तरह की अफवाहों के बीच उसे कोर्ट में सरेंडर करने का मौका देती है ताकि सांप मर जाए और लाठी भी सही सलामत रहे।

(साभार- लीजेण्‍ड न्‍यूज़)

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‘न्यूज11’ के खिलाफ गलत खबर चलाने का मुकदमा

रांची में चुनाव आयोग ने झारखंड के एक कुख्यात न्यूज चैनल ‘न्यूज 11’ के खिलाफ चुनाव के दौरान गलत समाचार प्रसारण करने पर मामला दायर किया है। चुनाव आयोग ने खबर को आचार संहिता के खिलाफ और बदनीयती माना है। आयोग की ओर से चैनल के खिलाफ परिवाद पत्र राजेश पांडेय ने दाखिल किया है। साथ ही हजारीबाग के डीसी से भी इस पर प्रतिवेदन मांगा है।

चैनल ने मतदान के एक दिन पहले गलत तरीके से यह खबर चला दी थी कि सदर विधानसभा सीट पर भाजपा को टक्कर कांग्रेस नहीं बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी दे रहे हैं। चैनल पर काफी देर तक चली इस खबर का असर मतदान पर पड़ा और भाजपा को एक निर्दलीय प्रत्याशी के हराने की खबर पर अल्पसंख्क वोटों का ध्रुवीकारण कांग्रेस से हटकर निर्दलीय प्रत्याशी की ओर हो गया। मामले में शिकायत आयी तो चुनाव आयोग ने संज्ञाान ले लिया। हजारीबाग से फुटेज भी मंगाये जा रहे हैं।

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दैनिक भास्कर को औकात दिखाने वाले सीनियर रिपोर्टर रजनीश रोहिल्ला को आप भी सलाम करिए

रजनीश रोहिल्ला


9950954588. ये मोबाइल नंबर रजनीश रोहिल्ला का है. अजमेर में हैं. यहीं से प्रकाशित दैनिक भास्कर अखबार में सीनियर रिपोर्टर हैं. इन्होंने भास्कर प्रबंधन की आंख में आंख डालकर कहा- ”मजीठिया दो”. न मिलना था सो न मिला. उल्टे ट्रांसफर और प्रताड़ना का दौर शुरू. तब फिर रजनीश रोहिल्ला ने भास्कर प्रबंधन की आंख में आंख डालकर कहा- ”तुझे तेरी औकात दिखाउंगा”. ठान लिया तो पूरी कायनात रजनीश रोहिल्ला के लक्ष्य को पाने-दिलाने में जुट गई.

अजमेर के इस सीनियर रिपोर्टर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. मजीठिया वेज बोर्ड न देने को लेकर कंटेंप्ट आफ कोर्ट. सुप्रीम कोर्ट ने कुबूल किया इसे. केस रजिस्टर किया. अब साले भास्कर वाले गिड़गिड़ा रहे हैं रजनीश रोहिल्ला के आगे.. ”…आ जाओ भाई… सेटल कर लो… पैसे ले लो.. सब कर लो पर आ जाओ.. बस याचिका वापस ले लो.. कह दो कि सब ठीक है…. ” टाइप की बातें कहते करते हुए.

रजनीश रोहिल्ला का कल मेरे पास फोन आया. बोले- यशवंत भाई, ये स्थिति है अब. मैंने कहा- मित्र, आप अब खुद अकेले नहीं है. देश भर के पत्रकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. पूरे प्रकरण वाकये पर लिखकर भेजिए. इसे प्रकाशित किया जाएगा ताकि भास्कर वालों का हरामजदगी और एक पत्रकार के साहस की कहानी सबके सामने रखी बताई जा सकी. रजनीश रोहिल्ला ने वादा निभाया और आज जब सुबह मैंने भड़ास का मेल चेक करना शुरू किया तो उनका ये आर्टकिल पड़ा मिला. पढ़िए, और कुछ न कर पाइए तो कम से कम फोन करके रजनीश रोहिल्ला को उनकी इस बहादुरी / मर्दानगी पर बधाई सराहना शाबाशी दे डालिए…

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


मेरी कंपनी के कई बड़े अधिकारी समझौते के लिए मेरे ऊपर अलग-अलग तरह का दबाव बना रहे हैं

नमस्कार

9 साल तक पत्रकारों के लंबे संघर्ष के बाद बने मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई निणार्यक दौर में है। हमारी कंपनियां हमें मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देना नहीं चाहती। हालांकि वे खुद शुद्ध व्यवसायिक लाभ कमा रही है। हमारे शोषण को जारी रखकर हमें आर्थिक रूप से कमजोर बनाए रखना चाहती हैं। कुछ मैनेजर टाइप के लोगों को जरूर अच्छा पैसा दिया जा रहा है। ये वो लोग हैं जो केवल मालिकों के हितों के बारे में ही सोचते हैं। हम पत्रकारों को तो बेचारा समझकर लालीपॉप देने का सिलसिला चला रखा है। लेकिन अब देश के सुप्रीम कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हम पत्रकारों की परिभाषा और वेतन का स्ट्रक्चर भी बना दिया है। अब मालिक मनमाना रवैया नहीं अपना सकते हैं। इन मालिकों की हिमत देखिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी मानने के लिए तैयार नही है। उसे भी मजाक समझ रहे हैं।

मालिकों ने तुगलकी फरमान जारी कर अधिकांश पत्रकारों से दबाव डालकर  लिखवाया कि उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ नहीं चाहिए। मालिकों की नजर में पत्रकार वर्ग असहाय, मजबूर और बेचारा है। मालिकों की सोच के अनुसार पत्रकारों ने उस काले आदेशों पर हस्ताक्षर कर दिए। जबकि एक स्वर में उस काले आदेश का विरोध किया जाना चाहिए था। पर, पत्रकार सोच रहे थे  कि नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।  परिवार पर आर्थिक संकट आ जाएगा। लेकिन जरा सोचिए एक रणनीति बनाकर सारे  पत्रकार एक साथ मजठिया की मांग कर दें तो कंपनियां क्या बिगाड़ पाएगी। वो भी उस समय जब देश का सुप्रीम कोर्ट हमारे पीछे बैठा हो।

दोस्तों मैंने मालिकों द्वारा भेजे गए काले फरमान को मानने से मना कर दिया। मैंने लाख दबाव के बावजूद भी काले आदेश वाले कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए। मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ी। मेरा ट्रांसफर महाराष्ट्र के जालना में मराठी भाषी अखबार में कर दिया लेकिन मैं बिल्कुल भी विचलित नहीं हुआ। कंपनी के मैनेजर सोच रहे थे कि मै उनके पैरों में पड़ूंगा गिड़गिड़ाउंगा। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

मैंने मजीठिया वेजेज को लागू करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कंटेप्ट पीटीशन दायर की। मुझे उस समय बहुत खुशी हुई जब जानकारी मिली की कंटेप्ट पीटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्टर कर लिया। यह मजीठिया की लड़ाई की पहली बड़ी जीत थी। मेरी पीटीशन का रजिस्टर नंबर 21773 है। दो महीने बाद मुझे केस नंबर 401 मिला। यह आप सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर देख सकते हैं। 13 अक्टूबर को दीपावली के समय सुप्रीम कोर्ट ने हम पत्रकारों को बड़ा तोहफा देते हुए देश के सभी मीडिया हाउस मालिकों को दो महीने में मजीठिया वेज बोर्ड की पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

मित्रों, यह दो महीने 13 दिसंबर को पूरे होंगे। अगर इस दिनांक तक मालिक पालना रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर पाए तो उनके खिलाफ कंटेंप्ट की कार्रवाई शुरू होगी। लड़ाई महत्वपूर्ण दौर में पहुंच चुकी है। मैं इसका असर देख और महसूस कर पा रहा हूं। मेरी कंपनी के कई बड़े अधिकारी मुझसे संपर्क साध रहे हैं। समझौते के लिए मेरे ऊपर अलग-अलग तरह का दबाव बना रहे हैं। समझौता किस बात का, कैसा समझौता। मैने स्पष्ट कर दिया है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लागू कीजिए। मैं आगे की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हूं। मैं जानता हूं कि मालिक किसी भी हद तक जा सकते हैं। मेरी जिंदगी के साथ खिलवाड़ या फिर किसी भी तरह का नुकसान भी पहंचा सकते हैं लेकिन मैं सुपीम कोर्ट  और आप सब के भरोसे पर लड़ाई लड़ रहा हूं। इसलिए मझे कोई चिंता नहीं है। क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ मेरे अकेले की नहीं बल्कि सब पत्रकार भाइयों की है।

मित्रों मैं पिछले सात महीनों से बिना वेतन के चल रहा हूं। निश्चित रूप से मुझे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। महीने में कई दिन मेरे कोर्ट में बीत रहे हैं। मजीठिया नहीं मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी। मेर आप से अपील है इस संघर्ष में आप जैसा भी सहयोग कर सकते हैं। जरूर कीजिए। सुप्रीम कोर्ट हमारे साथ है। हमारी जीत निश्चित है।  मेरा निवेदन है कि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को इंटरनेट पर आप एक बार जरूर पढ़ें और ज्यादा से ज्यादा पत्रकार साथियों को इसकी जानकारी देकर उन्हें जागरूक बनाएं। सुप्रीम कोर्ट में अगली तारीख 2 जनवरी है।

आपका
रजनीश रोहिल्ला
9950954588
सीनियर रिपोर्टर
दैनिक भास्कर
अजमेर संस्करण

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दो परम चिटफंडियों सुब्रत राय और कुणाल घोष के दिन और मुश्किल हुए

: कुणाल घोष ने आत्महत्या की कोशिश की तो सुब्रत रॉय के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ : कोलकाता से खबर है कि तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद एवं सारदा घोटाला मामले में आरोपी कुणाल घोष ने शुक्रवार को प्रेसीडेन्सी सुधार गृह (जेल) में नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की. घटना के बाद जेल अधीक्षक, डॉक्टर और ड्यूटी पर मौजूद एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया और पूरे प्रकरण की जांच के लिए गृह सचिव बासुदेव बनर्जी के नेतृत्व में समिति गठित की गयी है. साथ ही घोष के खिलाफ आत्महत्या की कोशिश करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. पश्चिम बंगाल के सुधारगृह सेवा मंत्री एच ए सफवी ने कहा कि घोष ने दावा किया था कि उन्होंने नींद की गोलियों खा ली है. उन्हें सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्हें पिछले साल गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद से वह जेल में हैं.

एसएसकेएम के निदेशक प्रदीप मित्रा ने संवाददाताओं से कहा कि घोष को जब अस्पताल लाया गया था, उस समय वह अर्धनिद्रा में थे। मित्रा ने कहा, उन्हें सीसीयू में भर्ती कराया गया. उनके पेट की सफाई की गयी और नमूने फारेंसिक जांच के लिए भेज दिए गए हैं. घोष ने दावा किया कि उन्होंने नींद की 40 गोलियां खा ली हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में दिए एक बयान में अधीक्षक, जेल के डॉक्टर और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी को निलंबित किए जाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गृह सचिव बासुदेव बनर्जी के नेतृत्व में एक समिति गठित की गयी है. उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक अधीक्षक, जेल के डॉक्टर और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी निलंबित रहेंगे.

उधर, नई दिल्ली से खबर है कि पिछले 9 महीने से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद सहारा समूह के मालिक सुब्रत रॉय की मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम  ही नहीं ले रही हैं. एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने रॉय के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है. गौरतलब है कि जमानत हासिल करने के लिए सहारा समूह और खुद सुब्रत राय पिछले कुछ महीनों से 10000 करोड़ रुपए का इंतजाम करने में जुटे हुए हैं. इसके  चलते अपनी कुछ विदेशी प्रॉपर्टी बेचने के लिए अदालत ने उन्हें जेल परिसर में ही कॉन्फ्रेंस रूम की भी सुविधा दी थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब जमाकर्ताओं को करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं किए जाने से जुड़े मामले में सहारा समूह के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया है.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय को इस संबंध में सेबी से रिपोर्ट मिलने के बाद एजेंसी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आपराधिक मामला दर्ज किया गया. उन्होंने कहा, सहारा समूह के खिलाफ मनी लांड्रिंग रोधी कानून के तहत एक मामला दर्ज किया गया है. जांच प्रगति पर है.  इस संबंध में सहारा समूह को भेजे गए ई-मेल का कोई जवाब नहीं आया। सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय मार्च से ही जेल में बंद हैं. निवेशकों को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्भुगतान को लेकर सहारा समूह लंबे समय से सेबी के साथ विवाद में है. सहारा समूह कहता रहा है कि उसने 93 प्रतिशत निवेशकों को सीधे भुगतान कर दिया है. प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं अवैध परिसंपत्तियों का सृजन करने के लिए तो इस धन की मनी लांड्रिंग नहीं की गई. सूत्रों ने कहा कि सेबी को अभी तक मिले तथ्यों के आधार पर ईडी द्वारा शिकायत दर्ज की गई है. ईडी जांच तथ्यों के आधार पर पीएमएलए के तहत समूह की कुछ परिसंपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई शुरू करेगा.

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आज तक के स्ट्रिंगर शरद के खिलाफ डकैती का मुकदमा झूठा निकला

यशवंत भाई आदाब,  अभी कुछ समय पहले ‘भड़ास 4 मीडिया’ पर एक समाचार प्रकाशित हुआ था जिसका शीषर्क था- ‘आज तक के स्ट्रिंगर के खिलाफ डकैती का  मुकदमा दर्ज’.  ये खबर मुरादाबाद से आज तक के जिला संवादाता शरद गौतम के लिये उनके चाहने वालों ने भड़ास पर पोस्ट कराई थी और उनकी मंशा ये रही होगी कि इस खबर से आजतक समूह  शरद गौतम को बाहर का रास्ता दिखा देगा लेकिन हुआ इसका उलट. 14  oct 2014 को ये  मुकदमा संभल जनपद के चंदोसी कोतवाली में दर्ज हुआ और 18 OCT 2014 को जाँच अधिकारी ने मुकदमा झूठा पाया और एक्सपंज कर दिया.

जानकारी के मुताबिक़ संभल जनपद के कुछ प्रिंट के लोग जो फर्जी नामों से न्यूज़ चैनल के लिए भी काम करते हैं, शरद गौतम से खुन्नस रखते हैं. वो ये चाहते हैं कि शरद गौतम संभल जनपद की खबरें न कवर करें ताकि वो अपने हिसाब से खबरों को मैनज कर सकें और कुछ कमाई कर सकें. लेकिन ऐसे दलाल टाइप पत्रकार विफल हो गए हैं. मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि ऐसे टुच्चे पत्रकार मेरी पोस्ट पड़कर फर्जी नाम से टिप्पणी करेंगे वो इसलिये कि वो उनकी आदत में शामिल है. ऐसे घटिया लोगों ने मुरादाबाद में न जाने कितने पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा कर थूक कर चाटा है. और, अब ये ही काम जनपद संभल और मुरादाबाद के कुछ चुटिया टाइप पत्रकारों ने अंजाम दिया है.  शरद गौतम के खिलाफ दर्ज मुक़दमे में एक्सपंज रिपोर्ट की छायप्रति भी पोस्ट कर रहा हूं जिसको जहां जरूररत हो इस्तेमाल कर सकता है.

अब्दुल वाजिद

मुरादाबाद

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इंडिया टीवी और रजत शर्मा के खिलाफ दस मुकदमे

लखनऊ : नगर विकास व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. आजम खां ने एक बार फिर सफाई दी कि दिल्ली में उनके पास से असलहा मिलने की खबर पूरी तरह बेबुनियाद है। उनके पास न तो कोई बैग था और न ही ब्रीफकेस। उन्होंने कहा कि यह सब उन्हें राजनैतिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, आजम खां के खिलाफ भ्रामक खबरें चलाने के आरोप में सपाइयों ने अलग-अलग थानों में इंडिया टीवी न्यूज चैनल और इसके मालिक रजत शर्मा के खिलाफ दस मुकदमे दर्ज कराए हैं।

सपाइयों ने गंज कोतवाली, सिविल लाइंस कोतवाली, कोतवाली और सैफनी में न्यूज चैनल के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने गंज कोतवाली में चार, पटवाई में एक, सिविल लाइंस में एक, कोतवाली में एक, शहजादनगर, सैफनी और मिलक में एक मुकदमा दर्ज किया है। तहरीर में आरोप लगाया है कि न्यूज चैनल ने प्रदेश के नगर विकास मंत्री के खिलाफ भ्रामक खबरें चलाकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई है। पुलिस ने न्यूज चैनल के खिलाफ कई एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मिलक में पालिका के नामित सभासद इकरार हुसैन ने चैनल के संपादक, एंकर, मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार शाम दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षा कारणों से रोक लिया गया। तलाशी के दौरान एक हैंडबैग में चार कारतूस मिलने के बाद सीआईएसएफ के अधिकारियों ने उन्हें रोक कर पूछताछ की। जांच में पता चला कि जिस बैग से कारतूस मिले हैं वह उनके साथ लखनऊ जा रहे विधायक सरफराज खान का है। विधायक के लाइसेंस दिखाने के बाद पुलिस ने उनका लाइसेंस और कारतूस कब्जे में लेकर उन्हें जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद वे लखनऊ रवाना हो गए।

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आजतक के मुरादाबाद स्ट्रिंगर शरद गौतम पर डकैती का मुकदमा दर्ज

संभल के चन्दौसी कोतवाली में आजतक स्ट्रिंगर सहित छः लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की सूचना मिली है.  केबल संचालक ने दर्ज कराया है डकैती का मुकदमा. शरद गौतम मुरादाबाद के केबिल संचालक फ़िरासत खान की कम्पनी “डैन एफ़. के. केबिल नेटवर्क” में भी नौकरी करते हैं. बताया जाता है कि इससे पहले भी उन पर मुरादाबाद में कुछ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं.

आरोप है कि वो आजतक चैनल की आड़ में अधिकारियों और पुलिस पर रौब गाँठ कर प्रॉपर्टी और केबिल के अपने अवैध धंधों को अन्जाम दे रहे हैं. शरद गौतम कई चैनलों की आईडी अपने साथ लिए फिरते हैं. शरद गौतम को लोग कुन्नू भाई के नाम से भी जानते हैं.  मुकदमा अपराध संख्या : 382A/2014 धारा 395 आई पी सी थाना : चन्दौसी कोतवाली. इस प्रकरण के बारे में दैनिक जागरण में खबर छपी है, जिसकी कटिंग उपर प्रकाशित है. अमर उजाला ने जो खबर छापी है, वह इस प्रकार है….

चंदौसी। केबल नेटवर्क पर कुछ चैनलों के प्रसारण की वैधता को लेकर उठे विवाद में नया मोड़ आ गया है। मंगलवार रात सिद्धि विनायक केबल नेटवर्क के संचालक अहेष दत्त दुबे ने छह लोगों के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज कराया है। उनका कहना है कि वह वैध तरीके से प्रसारण कर रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने उनके घर में धावा बोलकर लूटपाट की। उन्हें धमकाया और उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। यह घटना 11 अक्टूबर शाम तीन बजे की है। इस मामले में उन्होंने मंगलवार रात डकैती का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि इन छह लोगों ने अपने साथियों के साथ गोपाल मोहल्ला स्थित अहेष दत्त दुबे के घर में घुसकर सेट टॉप बॉक्स, माड्यूलेटर, जरूरी कागजात तथा अन्य सामान उठा लिया और मना करने पर धमकी दी। इस मामले में मुकुल रस्तोगी, शरद गौतम, पवन अग्रवाल, सरदार जोगेंद्र सिंह, मोहित पूनिया, नरदेश्वर गिरि तथा इनके सहयोगियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। दुबे के मुताबिक घटना के समय सुभाष मिश्रा और पंकज गौड़ आदि मौजूद थे। वहीं, दूसरी ओर स्टार इंडिया प्राइवेट लिमटेड के प्रतिनिधि रविंद्र सिंह भाटिया ने केबिल संचालकों पर 13 अक्टूबर को कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।  इसे केबल संचालकों ने फर्जी करार दिया है। सीओ जगदीश सिंह का कहना है कि पुलिस साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई करेगी। 

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