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सुख-दुख

भारत में ज़्यादा टीवी चैनल देखने वाले लोग बहुत हाइपर, एग्रेसिव, चिड़चिड़े और बीपी के पेशेंट होते जा रहे हैं!

नितिन त्रिपाठी-

डर फ़िल्म में अनुपम खेर जूही चावला का भाई बना है. हर मैच देखते समय वह इतना हाइपर रहता है कि पैड ग्लव्स पहन कर मैच देखता है कि क्या पता कब भारतीय टीम से बुलावा आ जाये आओ देश को बचा लो.

इन दिनों भारत में मीडिया /सोशल मीडिया ने आम जनता का यही हाल कर रखा है. इसे ज़्यादा देखने वाले सख्श बहुत हाइपर, एग्रेसिव, चिड़चिड़े, बीपी के पेशेंट होते जा रहे हैं. सबसे मजेदार बात यह है कि बड़े देशों में यह एकमात्र मीडिया होगा जिसकी रिपोर्टिंग रिपोर्टिंग कम कॉमेडी ज्यादा होती है.

अभी आप देखो अमेरिका ईरान में युद्ध चल रहा है. यहाँ अमेरिका में वॉर न्यूज़ देखनी हो इंतज़ार करना पड़ता है कभी कभार दिख जाती है. यहाँ तक कि प्रेसिडेंट ट्रम्प भी खामेनेई की मृत्यु की घोषणा कर मस्त फण्ड रेजिंग डिनर पर गए. जिस देश का युद्ध है वह चिल है, यहाँ की आम जनता को फ्रिकर नहीं लेकिन भारतीय मीडिया देख लो तो लगेगा कि पूछो मत जैसे दुनिया ख़त्म होने वाली है.

और उससे एक लेवल ऊपर कुछ चैनल ऐसे हैं जो धरती के घूमने को भी मोदी जी से लिंक कर देते हैं. उनके लिए ईरान युद्ध भी या तो मोदी जी ने कराया होता है या रोका होता है. जो देश ये युद्ध कर रहा है उनकी 100 इंटरनेशनल नेस में एक नाम इंडियन मेंशन न होगा लेकिन ये चैनल ऐसा शो करेंगे जैसे सारी दुनिया दिन भर मोदी मोदी करती रहती हो. उनमें भी एक लेवल ऊपर वाले वो हैं जो सदैव मोदी जी को मारने की साज़िश के खुलासे किया करते हैं. पता नहीं भारतीय जाँच एजेंसी और भारतीय रक्षा विभाग इतना कमजोर क्यों है कि इतने सालों से साज़िश चल रही है टीवी के गुप्त सूत्रों के मुताबिक़ लेकिन ये आज तक किसी को पकड़ न पाये.

और फिर सोशल मीडिया है ही. इसे पढ़ने सुनने देखने वाले लोग एक्सट्रीम नेगेटिव होते जा रहे हैं. इन्हें हर वक्त नेगेटिव न्यूज़ / एनालिसिस चहिये. पोस्ट लिखो कि अमेरिका में काफ़ी लोग सूर्यास्त से पहले भोजन कर लेते हैं यह अच्छी आदत है – ये प्रूव करने लगेंगे कि ये गंदी आदत है. आप पोस्ट लिखो कि नोएडा में सरकार की लापरवाही से एक इंजीनियर की मृत्यु हुई ये लिखने लगेंगे कि वो इंजीनियर को सड़क देख गाड़ी चलानी थी. लिखो इंदौर में दसियों लोगों की मृत्यु हुई नल में दूषित पानी आने से – ये सिद्ध करने लगेंगे यह सब कॉमन है सारी दुनिया में होता है. इन्हें मुस्लिम से समस्या है, ईसाई से समस्या है, हिंदुओं में दूसरी जाति से समस्या है, कांग्रेस से समस्या है, मोदी भक्त हैं तो योगी से और योगी भक्त हैं तो मोदी से समस्या है.

कांग्रेसी, आपिये और कम्युनिस्ट तो खैर अपनी ही कुंठा में मानसिक संतुलन कबका खो चुके हैं. वो तो नेगेटिव से भी ऊपर माइनस में कबके चले गए.

मेरे अपने सभी पाठकों को सलाह है मेंटल बैलेंस और ग्रोथ चाहते है तो भारतीय न्यूज़ चैनल देखना बंद कर दीजिये, सोशल मीडिया को अधिकांशतः इग्नोर कीजिए, विशेषकर व्हाट्सएप में सारे ग्रुप क्विट कर दीजिये – फ़ैमिली वाले भी. एक सप्ताह में आपकी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ इम्प्रूव कर जायेगी.

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1 Comment

1 Comment

  1. Unanimous

    March 3, 2026 at 11:09 am

    सोचिए देखने वालीं के ये हालात हैं तो जो लोग इन टीवी चैनलों में कार्यरत हैं उनका क्या हाल होगा?!

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