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संघियों के हाथों अमर उजाला के संपादक भी हो आए सम्मानित!

नारद जयंती पर अमर उजाला के संपादक हुए सम्मानित… नोएडा के सेक्टर-27 स्थित कैलाश सभागार में आरएसएस के अनुषांगिक संगठन विश्व संवाद केंद्र नोएडा की ओर से महर्षि नारद जयंती व पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमर उजाला के संपादक (दिल्ली) उदय कुमार को प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने सम्मानित किया।

नारद जयंती पर अमर उजाला के संपादक हुए सम्मानित… नोएडा के सेक्टर-27 स्थित कैलाश सभागार में आरएसएस के अनुषांगिक संगठन विश्व संवाद केंद्र नोएडा की ओर से महर्षि नारद जयंती व पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमर उजाला के संपादक (दिल्ली) उदय कुमार को प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने सम्मानित किया।

इस मौके पर सम्मानित होने वाले अन्य पत्रकारों में आजतक के ढेर सारे पत्रकार थे जिनमें श्वेता सिंह, पंकज शर्मा आदि प्रमुख हैं। मानस प्रतीक गोहेन, संतोष कुमार, सत्यदेव यादव, पवन मिश्रा, मधुलिका सिंह, सुमित अवस्थी आदि पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। यह पता नहीं चल सका है कि आखिर किस काम के लिए इन लोगों का सम्मान हुआ है। बताया जा रहा है कि आरएसएस ने अपने संगठन विश्व संवाद केंद्र को निर्देश दे रखा है कि वह देश भर में जगह जगह कार्यक्रम कर पत्रकारों को थोक के भाव सम्मानित करे ताकि पत्रकारों के दिल दिमाग का संघीकरण किया जा सके। छोटे मोटे पत्रकारों को छोड़िए, अब आजतक और अमर उजाला जैसे मीडिया हाउसों के संपादक तक सम्मान लेने देने के नाम पर लार टपकाते हुए कार्यक्रम में पहुंच जा रहे हैं।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश के अलावा विधायक विमला बाथम, आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश, आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रसार भारती के चेयरमैन ने कहा कि उनके संस्था की जिम्मेदारी संसद ने तय की है और प्रसारण में कई बिंदुओं का ध्यान रखना होता है। इसमें देश की एकता और अखंडता समेत चार बिंदु शामिल हैं। यह प्रसार भारती के एक्ट में शामिल है। वहीं आरएसएस के इंद्रेश ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां विश्व की सैकड़ों जातियों व उपजातियों के लोग रहते हैं। ऐसे में भारतीय को असहिष्णु कहना गलत है। उन्होंने नारद जी के बारे में कहा कि उन्होंने कभी भी अपना मत नहीं दिया, बल्कि तथ्य पेश किया।

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