छत्तीसगढ़ के टीवी जर्नलिस्ट आरके गांधी को मॉरीशस में मिला मीडिया सम्मान

भारत सरकार और मॉरीशस सरकार की ओर से मॉरीशस में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन काफी सफल रहा। इसी कड़ी में वैश्विक साहित्य – संस्कृति संस्थान ने भी मॉरीशस साहित्य महोत्सव का आयोजन 24 अगस्त को किया। इस साहित्य महोत्सव में साधना न्यूज छत्तीसगढ़ के स्टेट हेड आरके गाँधी को मीडिया सम्मान 2018 से नवाजा गया। Continue reading

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बिहार के 21 पत्रकार ‘राष्ट्रीय मीडिया सम्मान-2017’ से सम्मानित

पटना । अर्पण फाउंडेशन व ईवेंटजिक मीडिया द्वारा 8 अक्टूबर को पटना के बीआईए हाल में आयोजित एक भव्य समारोह में बिहार के 21 पत्रकारों को राष्ट्रीय मीडिया सम्मान 2017 से बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार, पटना दूरदर्शन की कार्यक्रम प्रमुख रत्ना पुरकायस्था, बिहार चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके सिंह, साहित्यकार श्रीमती मल्होत्रा, त्रिभुवन स्कूल की प्रिंसिपल महुआ दास गुप्ता ने सम्मानित किया।

सम्मानित होने वाले पत्रकारों में न्यूज24 के अमिताभ ओझा, सहारा समय के आशुतोष कुमार, वरिष्ठ पत्रकार अनूप नारायण सिंह, यूएनआई के प्रेम कुमार, ईटीवी के रजनीश कुमार और ज्योति मिश्रा, दैनिक जागरण के नीरज कुमार, कशिश न्यूज चैनल के आफताब आलम, न्यूज इण्डिया के रोहित कुमार, हिंदुस्तान के दीपक दक्ष, प्रभात खबर के संजीत मिश्रा, हिंदुस्तान टाइम्स की नंदनी, लाईव सिटीज के आशीष भट्टाचार्य, दैनिक भास्कर के उदयकांत झा और साकिब खान, बीटीवी के मुरली मनोहर मिश्र, सन्मार्ग की श्वेता, सुमित मिश्र, बिहार न्यूज के नरेश चन्द्र,  छायाकार संजीव कुमार, अमित अरूण शामिल हैं।

संस्था की मधु मंजरी, चंदन राज और मौसम शर्मा ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। नेक्स्ट जेन इंफ्रा के रविकांत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंत्री प्रेम कुमार ने इस अवसर पर अपने संबोधन में बिहार में गत वर्ष मारे गए पत्रकार राजदेव रंजन की चर्चा करते हुए कहा कि अब बिहार में सरकार पत्रकारों की जान से खिलवाड़ नहीं होने देगी।  सरकार बिहार के पत्रकारों के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू कर रही है।

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राजस्थान की हस्तियों जहूर खान मेहर, चेतन स्वामी, जेब्रा रशीद, श्याम महर्षि और शीतल दुग्गड़ को किया जाएगा सम्मानित

वर्ष 2017 के लिए गोइन्का राजस्थानी पुरस्कार की घोषणा… कमला गोइन्का फाऊण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का ने एक प्रेस विज्ञप्ति द्वारा सूचित किया है कि वर्ष 2017 में मूर्धन्य वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार डॉ जहूर खान मेहर को  “गोइन्का राजस्थानी साहित्य सारस्वत सम्मान” से सम्मानित किया जायेगा. राजस्थानी भाषा एवं साहित्य के लिए अब तक उद्घोषित पुरस्कारों में सर्वाधिक राशि रुपये 1,11,111 /- (एक लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपये) का “मातुश्री कमला गोइन्का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार” इस वर्ष के लिए मूर्धन्य राजस्थानी साहित्यकार श्री चेतन स्वामी को उनकी कृति ‘इंदरधनख’ के लिए प्रदान किया जायेगा.

“रानी लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत महिला साहित्यकार पुरस्कार” जोधपुर निवासी श्रीमती जेब्रा रशीद को उनकी कृति ‘कदै तांई’ के लिए रुपये 31000/- (इकत्तीस हजार रुपये) के पुरस्कार से पुरस्कृत किया जायेगा. श्री गोइन्काजी ने आगे बताया कि वरिष्ठ राजस्थानी पत्रकार ‘राजस्थली’ त्रैमासिक के संपादक श्री श्याम महर्षि को “रावत सारस्वत पत्रकारिता सम्मान” से सम्मानित किया जायेगा तथा कार रेसिंग के क्षेत्र में राजस्थान का नाम रोशन करने वाली बीकानेर जिले की श्रीमती शीतल दुग्गड़ को “राजस्थान अनमोल रत्न सम्मान” से सम्मानित किया जायेगा. फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्यामसुन्दर गोइन्का ने बताया कि उक्त पुरस्कार एवं सम्मान आगामी 8 अक्टुबर 2017 को जयपुर में आयोज्य समारोह में प्रदान किये जायेंगे.

प्रेस विज्ञप्ति

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Entries invited for KCK Awards 2016 & 2017: Open for National, International Print Media

Calling for Nominations: KCK Award 2016-17

Greeting’s from Rajasthan Patrika!

Entries invited for KCK Awards 2016 & 2017: Open for National, International Print Media

Rajasthan Patrika announces 10th and 11th KC Kulish International awards. The award recognizes best of works in Print Media and honors the winning team with a cash prize of US$ 11,000/- and citation. Maximum of 10 meritorious entries also receive medals and certificates. The entries are judged by an independent panel of jury.

This annual award commemorates high ideals of Sh. Karpoor Chandra Kulish, the founder of Rajasthan Patrika newspaper (amongst the top newspapers in India as per IRS survey) by recognizing outstanding efforts of journalists working in daily newspapers globally on the basis of quality of content, research,investigation and impact. Stories which are remarkable (on any theme) can be submitted through due process.

How to Apply:

The forms for KCK awards can be downloaded from the website. The form needs to be sent duly filled and can be submitted online or by Email. The last date for submission of entries for 10th ( for stories published in 2016)  and 11th KCK (for stories published in 2017) award is 31st Dec, 2017.

Guests at KCK awards:

The first KC Kulish Award was conferred by former President of India Dr APJ Abdul Kalam and the then speaker of Lok Sabha Somnath Chaterjee was present as the Guest of Honour.

The second KC Kulish award was given by Lok Sabha Speaker Mrs. Meira Kumar amidst a glittering ceremony in the capital city, Delhi.

Prime Minister Dr. Manmohan Singh graced the third award function in Delhi and BL Joshi, Governor, UP was Guest of Honour at the ceremony.

The Fouth, fifth and sixth KCK award were conferred by the Chief Minister of Madhya Pradesh Shivraj Singh Chouhan at a glittering cermony in Jaipur.

Past Winners:

The 1st KCK award on the theme of “Human Developement” was jointly won by Afshan Subohi of the Dawn Newspaper, Pakistan and Nilesh Mishra from the Hindustan times. Merit awards were received by select journalists for their stories on the theme of the year.

The 2nd KCK award on the theme “Terrorism and Society”, was won by Harinder Baweja and his team from the Hindustan Times. Merit awards were received by various journalists from daily newspapers published in India and abroad.

The 3rd KCK award on the theme “Inclusive Development” was won by Anas Areneyaw Anas, Akuffo andSelase Kove Seyram from the New crusading guide published in Ghana. Merit awards were also given on the occasion.

The 4th KCK award on the theme “Crusade against corruption” was jointly won by Ajitha Karthikeyan and team from Times of India and J.Gopikrishnan and team from the Pioneer. Merit awards were also conferred.

The 5th KCK award on the theme “Changemakers”, had no winning recipients and only 5 merit entries were acknowledged for this year.

The 6th KCK award was won by the team of International Consortium of Investigative Journalists(ICIJ) for their story on “Shadowy Trade on Human Body Parts”, a series of articles that was published in the leading dailies abroad. Merit awards were received by journalists from national and international newspapers.

The 7th KCK award was jointly won by:

International Consortium of Investigative Journalists(ICIJ) and Senior Journalist Manu Pubby for his story Investigative story ‘VVIP Chopper Scam deal’ published in Indian Express.

The 8th KCK award was won by Wanjohi Kabukuru from the New African Magazine. Merit awards were received by various journalists from daily newspapers published in India and abroad.

The 9th KCK award was won by Rakesh Sharma from the Amar Ujala. Merit awards were received by various journalists .

Please do mail us for any queries at

kckaward@epatrika.com.

We are looking forward to receive your entries soon.

Regards,

KCK awards Desk

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पत्रकारों, फोटोग्राफरों और कार्टूनिस्टों को मिलेगा नेशनल एवार्ड, आवेदन करें

पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय लोगों को पुरस्कृत करने की योजना प्रेस कौंसिल आफ इंडिया की तरफ से लांच की गई है. आपको बस करना ये है कि नेशनल अवॉर्ड्स 2017 के लिए आवेदन कर दें. पुरस्कार के लिए वर्किंग जर्नलिस्‍ट और फ्रीलान्‍सर दोनों आवेदन कर सकते हैं. प्रेस काउंसिल की वेबसाइट पर जाकर इस बारे में जारी विज्ञापन को देखें. यहां एंट्री फॉर्म, डिक्‍लेयरेशन फॉम, रूल्‍स रेगुलेशन आदि की जानकारी मिलेगी. काउंसिल की तरफ से ये एवार्ड अच्छे मीडियाकर्मियों को प्रोत्‍साहित करने के मकसद से दिया जाता है. एवार्ड के लिए कुल पांच कैटगरी है जो यूं है :

1: पत्रकारिता में उत्‍कृष्‍टता के लिए राजा राम मोहन राय नेशनल अवॉर्ड

2: ग्रामीण पत्रकारिता और विकासपरक रिपोर्टिंग

3: खोजपरक रिपोर्टिंग

4: फोटो पत्रकारिता- इसे दो कैटेगरी में बांटा गया है।
(a) : सिंगल न्‍यूज पिक्‍चर
(b) : फोटो फीचर

5: बेस्‍ट न्‍यूजपेपर्स आर्ट- इस कैटेगरी में अखबार में प्रकाशित कार्टून्‍स, कैरिकेचर और इलस्‍ट्रेशन को शामिल किया गया है।

प्रेस काउंसिल की साइट पर जाकर अन्य जानकारी पाने और आवेदन करने के लिए नीचे क्लिक करें :

http://presscouncil.nic.in/Content/NewDetails/706_7_WhatnewdDetails.aspx

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मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार सुमंत मिश्र को तरुण कला मंच सम्मान

मुंबई : वरिष्ठ पत्रकार सुमंत मिश्र को वर्ष २०१७ का तरुण कला मंच सम्मान प्रसिद्ध आध्यात्मिक सद्गुरु साक्षी रामकृपाल जी के हाथों मिला।  मुंबई के अँधेरी लिंक रोड स्थित भक्ति वेदांत मिशन स्कूल के सभागृह  में दिए गए सम्मान समारोह में नवनीत डायजेस्ट के संपादक श्री विश्वनाथ सचदेव, तरुण कला मंच के अध्यक्ष श्री चित्रसेन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार श्री लालजी मिश्र, मुंबई कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्रीइंदु, प्रकाश तिवारी, व्यवसाई जेपी सिंह आदि उपस्थित थे।

साक्षी राम कृपालजी ने सुमंत जी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने के लिए सम्मान मिलना बड़ी बात है।  सुमंतजी के ऊपर यह ज़िम्मेदारी बनती है कि अपने अनुभवों को युवा पीढ़ी से बाँटें। विश्वनाथ सचदेव जी ने कहा, ‘सुमंत मिश्र मेरे सहयोगी रहे हैं। उन्हें मैं सीढ़ी दर सीढ़ी सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए देखा है। वे इस सम्मान के सही हक़दार हैं। इस सम्मान को पाने के लिए मेरी शुभकानाएं।’ सुमंत मिश्रा ने कहा- ”हर सम्मान आगे और मज़बूती के साथ काम करने की प्रेरणा देता है। हालांकि अब पत्रकारिता का स्वरुप बदल चुका है, फिर भी मेरी कोशिश होगी कि समय के साथ चलते हुए यथासंभव समाज हित में काम करूँ।”

श्री मिश्रा ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत वाराणसी में सन्मार्ग और दैनिक जागरण जैसे अखबारों से की थी। कालांतर में वे मुंबई आये और नवभारत टाइम्स से संबद्ध हुए। नवभारत टाइम्स में सहायक संपादक के रूप में कार्य करने के बाद आप नई दुनिया में सहसंपादक, दक्षिण मुंबई में सम्पादक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान समय में आप एपीएन न्यूज़ चैनल के मुंबई ब्यूरो प्रमुख हैं।

मुंबई से पत्रकार शशिकांत सिंह की रिपोर्ट.

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एवार्ड लेते समय यशवंत ने योगी के कान में क्या कहा, देखें वीडियो

योगी के हाथों पुरस्कार लेने पर वामपंथी खेमे के कुछ पत्रकारों द्वारा विरोध किए जाने का यशवंत ने कुछ यूं दिया विस्तार से जवाब…

Yashwant Singh : लोकमत अखबार के यूपी के संपादक आनंदवर्द्धन जी का एक दिन फोन आया. बोले- ”हर साल की तरह इस बार भी लोकमत सम्मान का आयोजन करने जा रहे हैं हम लोग. हमारी जूरी ने ‘जनक सम्मान’ के लिए आपको चुना है क्योंकि भड़ास4मीडिया एक बिलकुल अनोखा प्रयोग है, मीडिया वालों की खबर लेने-देने के वास्ते जो भड़ास4मीडिया की शुरुआत हुई है, उसके लिए आप सम्मान योग्य हैं.”

ऐसे तारीफ भरे शब्दों को सुनने के दौरान मेरी हालत कैसे रिएक्ट करूं टाइप हो जाती है. आनंद वर्द्धन जी से मैंने वादा किया कि आऊंगा आपके सम्मान समारोह में. उनने आने जाने का जहाज का टिकट मेल करा दिया.

जबसे लखनऊ में नई सरकार आई, एक बार भी मेरा लखनऊ जाना न हुआ. एकाध मेरे निजी-पारिवारिक काम थे, जिसके लिए लखनऊ जाना था, पर टलता जा रहा था. जहाज का टिकट मिलने के बाद लखनऊ का दौरा मेरा पक्का हो गया. एक पंथ दो काज.

लखनऊ से पत्रकारिता और शराबखोरी, दोनों ही क्षेत्रों में करियर की शुरुआत की थी. इसलिए इस जगह से मेरा लगाव कुछ ज्यादा है. बड़ा अपनापा सा लगता है लखनऊ से. प्रेस क्लब में जुए की सजी हुई टेबल, चारबाग में देर रात तक दारू की उपलब्धता, खाने को किसिम किसिम का स्वाद, घूमने भटकने को ढेर सारी जगहें. इसी कारण दस जून के सम्मान समारोह के लिए लखनऊ 7 जून को ही पहुंच गया.

कार्यक्रम के दिन नियत समय पर संगीत नाटक अकादमी में हाजिरी दी. आयोजकों ने मंच पर बैठने के लिए बुलाया तो वहां चला गया, अन्य पुरस्कारार्थियों के साथ. योगी बाबा आए और एक एक कर सबको पुरस्कार थमाने लगे. मैं तय करके आया था कि योगी से रुबरु होने के इन चंद सेकेंड्स में मुझे उनसे क्या कह देना है. मेरी बारी आई तो पहुंचते ही योगी जी से कहने लगा- ”शाहजहांपुर वाले जगेंद्र सिंह हत्याकांड में कुछ नहीं हुआ. हत्यारे आजाद हैं और पीड़ित का परिवार धमकी व प्रलोभन के कारण चुप है. इसे संज्ञान लीजिए. ”

मैं कहता रहा और योगी बाबा पुरस्कार देने वाली मुद्रा में मुस्कराते हुए मुझे देखते सुनते रहे. इस दौरान लोकमत यूपी के संपादक आनंदवर्द्धन जी भी मौजूद थे. योगी तक अपनी बात पहुंचाते हुए पुरस्कार सम्मान लेते फोटो खिंचाने के बाद वापस अपनी सीट पर आ गया. मुझे संतोष था मैंने यूपी के पत्रकारों के माथे पर पुती गहरी कालिख को मिटाने हेतु एक कदम चल सका. मुझे संतोष था एवार्ड समारोह में सीएम के होने का लाभ उठाते हुए उनका ध्यान पत्रकारों के एक बड़े मामले की ओर खींचने का. मुझे संतोष था जिस जगेंद्र हत्याकांड के कारण हम लोगों ने सपा को वोट न देने की अपील की थी, उस मुहिम को नई सरकार में आगे बढ़ा पाने का.

कार्यक्रम खत्म होते ही कई साथियों ने मुझसे मिलकर और कुछ ने फोन करके पूछा कि मैं योगी जी के कान में क्या कह रहा था? मैंने सभी को बताया कि जगेंद्र हत्याकांड में इंसाफ न होने की बात बताई योगी जी को.

संबंधित वीडियो देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.. इस वीडियो में पुरस्कार लेते वक्त यशवंत लगातार योगी से कुछ कह रहे हैं और तब योगी जी सहमति में सिर हिलाते दिख रहे हैं…

https://www.youtube.com/watch?v=y9AS48U_WcY

योगी के हाथों पुरस्कार लेने के बाद कुछ कामरेड लोगों के बिफरने का मुझे अंदाजा था. पर हमने कब परवाह की है जमाने की. जो करना है, वह करके रहता हूं, गलत या सही. इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम में मोदी बतौर प्रधानमंत्री जाते हैं. लोकमत के कार्यक्रम में योगी बतौर मुख्यमंत्री जाते हैं. आप हम कुर्सी का सम्मान करते हैं, व्यक्ति का नहीं. वैसे भी मेरे जैसे आध्यात्मिक व्यक्ति के लिए हर नेता एक सरीखा होता है. मैं मोदी और मनमोहन, योगी और मुलायम में बहुत ज्यादा फरक नहीं कर पाता. आप अगर कर पाते हैं तो आप महान हैं और आप का राशि कुंडली में राजनीति सर्वोच्च स्थान पर है. पर जब मैं गौर से देखता हूं तो सत्ता तंत्र का चरित्र हमेशा एक सा दिखता है. बस थोड़ा बहुत हेरफेर होता है. केवल चेहरे और व्यक्ति बदल जाते हैं. पार्टियों के नाम बदल जाते हैं. सत्ता के चलने का अंदाज वही रहता है. हां, हमारी जातीय क्षेत्रीय धार्मिक पृष्ठभूमि की वजह से सत्ता तात्कालिक तौर पर कभी करीब तो कभी दूर लग सकती है.

आपकी रुचि अगर राजनीति में है तो आप जिंदाबाद मुर्दाबाद करते रहिए, इनके उनके या मेरे पक्ष विपक्ष में खड़े रहिए. लेकिन मुझे राजनीति में कतई रुचि नहीं. इसलिए मेरे सामने एवार्ड देने वाला कोई योगी हो या कोई मुलायम या कोई मनमोहन, मुझे कोई फरक नहीं पड़ता.

विचारधाराएं इस दुनिया में दम तोड़ रही हैं, काफी समय से. तकनालजी और बाजार ने बहुत कुछ बदलने को मजबूर किया है. विचारधाराओं के जरिए औसत दिमाग से नीचे के लोगों को बरगलाया भरमाया जाता है या फिर लूट में शामिल होने का प्रलोभन देकर इरादतन मिलाया जाता है. विचारधाराओं के नाम पर अब केवल भीड़ की गोलबंदी की कवायद की जाती है ताकि लोकतंत्र में ज्यादा वोट पाने के नाटक को जस्टीफाई करते हुए सत्ता शीर्ष पर कब्जा जमाया जा सके. मुझे तो कई दफे ये चुनाव ही ढेर सारी समस्याओं की जड़ लगने लगे हैं. भीड़ हमेशा मूर्खतापूर्ण सोच रखती है और ऐसी ही सोच से उपजे नेता कहां से तार्किक और वैज्ञानिक विचार वाले होंगे. भीड़ हमेशा अपने जैसा मूर्ख व्यक्ति नेता के रूप में खोजती है और नेता हमेशा एक भीड़ की तलाश में रहता है, जो किसी एक नारे या एक बोली से सक्रिय हो जाए. भीड़ और भेड़ में ज्यादा फरक नहीं है. भेड़चाल ही है लोकतंत्र.

इन सम्मान समारोहों और वैचारिक विमर्श जैसे कार्यक्रमों में शिरकत करना मेरे लिए भड़ास4मीडिया की ब्रांडिंग का एक मौका होता है, साथ ही उन सभी वेब पत्रकारों के माथे पर जीत व गर्व की एक लकीर दर्ज कराना होता है जो अपने-अपने मीडिया हाउसों से लड़कर अपने दम पर अपनी वेबसाइटों वेब चैनलों ब्लागों सोशल मीडिया जैसे उपक्रमों के माध्यम से साहसपूर्ण पहल करते हुए पत्रकारिता को करप्ट व कारपोरेट महासागर में विलीन होने से बचाए हुए हैं.

भड़ास4मीडिया डाट काम की शुरुआत के वक्त मठाधीश टाइप पत्रकार लोग वेबसाइटों और ब्लागों को हिकारत भरी नजर से देखते थे और इसको संचालित करने वालों को छोटा पत्रकार / हारा हुआ पत्रकार / मुख्यधारा से तड़ीपार पत्रकार मानते बोलते थे. लेकिन बीते नौ साल में तस्वीर पलट गई है. मठाधीश लोग या तो नष्ट हो गए, या कर दिए गए या चुप्पी साधे नौकरी बजा रहे हैं और भड़ास4मीडिया टाइप पोर्टल के संचालक सत्ता शीर्षक की छाती पर अपनी धमक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं.

नौ वर्षों में हर किस्म के अनुभव से रुबरू हुआ. हर किस्म के लोगों से पाला पड़ा. अपने और पराये लोगों को नजदीक से महसूस किया. इस सबसे मेरी मानसिक बुनावट में काफी कुछ बदलाव आया. सैद्धांतिक ज्ञान में बहुत कुछ नए अध्याय जुड़े और कई सारे चैप्टर डिलीट हुए. हम लोग तभी से मानते थे कि सारी मीडिया नष्ट हो जाएगी, ये डिजिटल ही बचा रहेगा. यही कारण है कि हम भड़ास वालों ने एक भी मैग्जीन या अखबार न शुरू किया. क्योंकि तय कर रखा था कि युद्ध डिजिटली ही लड़ेंगे.

इस भड़ास4मीडिया ने मुझे धरती से आसमान तक की यात्रा कराई, अनुभव समझ संवेदना सामाजिकता के लेवल पर. और, इसी ने इन यात्राओं के जरिए एक आंतरिक, आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत कराई. कह सकता हूं कि मैं भड़ास में एक क्लर्क से ज्यादा कुछ नहीं हूं. कह सकता हूं कि प्रकृति ने मुझे जरूर कुछ अदभुत अनुभव करने और जीने के लिए भेजा है, जो कर रहा हूं, जो जी रहा हूं. मैं अब चीजों को अच्छे या बुरे के फ्रेेम में नहीं देखता न ग्रहण करता. इसे संपूर्णता के भाव से देखता, भोगता और महसूस करता हूं. अच्छा मेरा है तो बुरा भी मेरा है. सब मेरा है और कुछ भी मेरा नहीं है.

काफी समय से मैंने महत्वाकाक्षाएं-इच्छाएं पालने और योजनाएं बनाने का काम छोड़ दिया है. तत्क्षण में जीने का आदी हो गया हूं. देर तक और दूर तक का प्लानिंग न के बराबर है. अतीत में बिलकुल नहीं जाता. भविष्य के लिए परेशान नहीं क्योंकि न कोई महत्वाकांक्षा है और न कोई योजना. इसलिए मुझे जो कुछ मिल जाता है, जो कुछ मेरे संग हो जाता है, अच्छा बुरा, उसे सब ईश्वरीय नियोजन / प्रकृति की देन मानकर ग्रहण कर लेता हूं.

ये मजेदार नहीं है कि पिछली सरकार जब यूपी में आई थी, नई नई, अखिलेश यादव के नेतृत्व में तो मुझे शुरुआती तीन महीने के भीतर, शायद मई लास्ट का समय था, अरेस्ट करके जेल भेज दिया गया और कई मीडिया हाउसों ने फिर ताबड़तोड़ मुकदमें लिखवाए, सत्ता सिस्टम से दबाव बनवाकर घरों आफिसों पर छापे डलवाए. मुझे जेल भेजे जाने के बाद भड़ास के तत्कालीन संपादक अनिल सिंह को अरेस्ट कर जेल में भिजवाया गया क्योंकि सबकी चिंता थी कि आखिर यशवंत के जेल जाने के बाद भड़ास कैसे चल रहा है. जेल के अधिकारियों को फोन कर जेल के अंदर प्रताड़ित करने के लिए उकसाया गया. पर प्रकृति ने मेरे लिए कुछ और प्लान कर रखा था. जेल मेरे लिए जानेमन जगह सिद्ध हुई. वहां से निकला तो ‘जानेमन जेल’ किताब की रचना हुई.

और, अब ये जो नई सरकार आई है, यूपी में, योगी के नेतृत्व में, तो इसके मुखिया योगी ने बतौर सीएम अपने कार्यकाल के तीन महीने के भीतर ही मुझे अपने हाथों सम्मानित किया. माध्यम भले बना लोकमत अखबार. माध्यम भले ही बने आनंदवर्द्धन जी.

न जेल जाने की योजना मैंने बनाई थी और न सम्मान पाने की. दोनों ही चरम विपरीत स्थितियों को खुद आना था, खुद होना था. मेरे को तो बस दोनों ही हालात में आनंद की अनूभित करनी थी जो की. दोनों ही प्रकरणों में मुझे सकारात्मक और सहज रहना था, जो रहा. इन दोनों के लिए ही मुझे नेचर / परम / अदृश्य / सृष्टि को धन्यवाद कहना था, कृतज्ञ होना था, जो मेरे को निमित्त बनाए हुए जाने क्या क्या खेल तमाशा रचे हुए है. .

जो लोग विचारधाराओं के चश्मे से अब भी चलते हैं, और इसी आधार पर अगर हमको आपको कोसते हैं, तो ध्यान से देखिएगा, उनके जीवन में कोई न कोई फांस, द्वंद्व, दुख, गुलामी, वासना, उत्तेजना, घृणा, अवसाद, ब्रेन वाश आदि में से कुछ न कुछ भयंकर है जो उन्हें एक खास स्टाइल में जीने सोचने को मजबूर किए रहता है. बहुत मुश्किल होता है एक खास किस्म की स्कूलिंग और खास किस्म से तैयार किए गए दिमाग से उबरते हुए सहज मौलिक शांत सुंदर दिमाग की तरफ बढ़ पाना.

जो लोग गब्बर के डकैत गिरोह के इमानदार खजांची बन गुलामी का जीवन काट रहे हैं वे अगर दूसरों को इमानदारी का पाठ पढ़ाने लगें तो क्या कहिएगा. उनसे क्या पूछिएगा कि आप अच्छा खासा नक्सल वाला जीवन जी रहे थे, उधरे जंगल में शहीद हो गए होते तो ढेर सारे नौजवान लौंडों को प्रेरणा मिली होती नक्सलाइट बनने के वास्ते. पर आप तो भाग आए जान बचाकर दिल्ली और यहां पाल लिए हैं टाइम्स आफ इंडिया वालों की बिल्ली. सो, सौ सौ चूहे खाने के बाद हज की ओर काहें जा रहे हैं महाराज.

खैर.

अब अपने पास दूसरों की आलोचना के लिए ज्यादा वक्त नहीं रहता, इसीलिए यहीं बात समाप्त कर रहा हूं और उम्मीद करता हूं उन तक बात पहुंच गई होगी. मनुष्य को इस या उस खांचे में देखने वाले लोग ज्यादा बड़े फासिस्ट हैं. इन्हें एक बार फिर ब्रह्मांड विज्ञान जीवन की क्लासेज में दाखिला लेकर सिर्फ इस या उस खांचे की जगह संपूर्ण जीवन जीव सुर लाय ताल को समझना बूझना चाहिए. मने नौकरी करते करते एकदम्मे गड़बड़ा गए हों तो होलटाइमर वाला काम शुरू कर दीजिए क्योंकि कामरेड वाली पार्टियों में अच्छे कामरेडों का बड़ा अकाल है. पर ये न करेंगे क्योंकि आप मूलत: अवसरवादी और बकचोद हैं. जीवन एक पूंजीपति की सेवा करते गुजार दी और गरीब लौंडों से नक्सली बनने की इच्छा पाले रहेंगे. धत तेरी हिप्पोक्रेसी की.

मुझे तो अब किसी हत्यारे में भी कोई अपराधी नहीं दिखता. बस यही सोचता हूं कि नेचर ने इसे इस काम के लिए क्यों प्रोग्राम किया हुआ है? मैं हत्यारे के भीतर रुह बनकर प्रवेश कर जाना चाहता हूं और उसकी तरह सोचते हुए जानना चाहता हूं कि आखिर एक हत्यारे को आनंद कब आता है, दुख कब होता है, डर कब लगता है और वह रोता कब है. मुझे मुश्किल और उलझे हुए लोग ज्यादा संभावना से भरे लगते हैं. जो पीएफ सीएल डीए की गणना करता हुए इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग के बीच आते जाते जीवन के दिन वर्ष खर्च कर रहे हैं, उनमें क्या नया दिखेगा, उनमें क्या मौलिक दिखेगा. वह एक घटिया मास्टर की तरह रटी रटाई पुरानी पर्ची को पढ़ कर सिलेबस पूरा जान मान लिया करेंगे.

सीएम योगी के हाथों एवार्ड लेते हुए पहली फोटो डाली तो उसमें पांच दास के बीच निगेटिव कमेंट्स हैं. मेरे खयाल से इतना जेनुइन है. जो हार्डकोर कामरेड हैं और उसी शब्दावली के बीच जीवन जीते गुजारते हैं, उन्हें कष्ट तो होना ही चाहिए, योगी या मोदी के हाथों एवार्ड लेते देखकर, वह भी किसी पूर्व कामरेड को. और, मुझे लगता है कि ये जरूरी भी था. आप अगर मुझे किसी खांचे सांच में बांधकर देखते हैं, देखते थे, तो गलत थे. आप अपना जीवन और अपना खांचा दुरुस्त रखिए. मेरी चिंता छोड़ दीजिए. मैं एक जीवन में सौ किस्म का जीवन जीता हूं, अराजक, अवसरवादी, वामपंथी, दक्षिणपंथी, साहित्यिक, आध्यात्मिक, अभिनेता, गायक, कुक, ड्राइवर, माली, खिलाड़ी, साधक, घुमक्कड़, प्रेमी, अभिभावक, लीडर, विद्रोही, गरीब, अमीर, अभद्र, अशिष्ट, शराबी, कबाबी, क्रूर…. और, किसी क्षण मैं इनमें से कुछ भी नहीं होता हूं, इस देह से परे होता हूं.

क्या करिएगा, कैसे किसी खोल में हमको भरिएगा. पर असल में जिन लोगों का काम ही सिर्फ खोल में भरना है, वो तो भरेंगे. आप भले न भराएं, लेकिन वो खोल खांचे में जबरन आपको भरेंगे. इसलिए इनकी भराई की परवाह न करिए, उन्हें अपना काम करने दीजिए और हमें अपना. क्या कहेंगे लोग, सबसे बड़ा रोग… वाला नारा यूं ही नहीं दिया गया है. आप जब भी कुछ करेंगे तो उसके सहज स्वाभाविक दस विरोधी और दस प्रशंसक पैदा हो जाएंगे. यह प्रकृति का विभिन्नता का सिद्धांत है. यह जो प्रकृति प्रदत्त बहुलता, विविधता और अनेकता है, यही सबसे खास चीज है जो हमें आपको अलग अलग चश्मे, अलग अलग अनुभव जन्य सिद्धांत थमाए रहती है और सबके जरिए अलग अलग किस्म का तमाशा बनाए रहती है. तो इसका मौज लेना है और मस्त रहना है.

जिन्हें सीएम योगी के हाथों जनक सम्मान से मुझे सम्मानित किया जाना अच्छा लगा, उन्हें नमस्ते प्रणाम. जिन्हें यह अच्छा नहीं लगा, उन्हें प्यार भरा सलाम. मैं उचक कर न सेल्फी लेने गया और न मैंने कोई निजी काम बताया. मैं लपलपाया भी नहीं. मैं एक बड़े मुद्दे, जगेंद्र हत्याकांड का जिक्र कर सीएम का ध्यान खींचने की कोशिश की. मैं सीएम के हाथों सम्मान पाकर न गर्व से भरा हूं और न योगी के सीएम होने और इनके हाथों सम्मानित होने से किसी अवसाद या दुविधा में पड़ा. मैं तब भी मस्त था, आज भी मस्त हूं. मेरे पास इतना सोचने के लिए वक्त नहीं होता क्योंकि मेरे स्वभाव में दुनियादारी, चुगलखोरी, रणनीति, साजिश, प्रोपेगंडा आदि के लिए कोई जगह है ही नहीं. इसी दुनिया में सब कुछ हर क्षण है. आप जिस दृष्टि और सोच से देखेंगे, दुनिया और लोग वैसे ही दिखेंगे. किसी रोज चश्मा हटाकर और दिल दिमाग खोलकर एक एक चीजों को देखिए और उसे चूमिए.

लखनऊ यात्रा के दौरान खूब आनंद आया. बहुत सारे नए पुराने पत्रकारों साथियों से मिलना हुआ. हर दिन हर शाम हर रात जै जै रही… आप सभी चाहने वालों को ढेर सारा प्यार प्यार और प्यार… सभी आलोचक चश्मेधारी दिग्गजों का भी हूं दिल से शुक्रगुजार …. 😀 आलोचक न होते तो ये पोस्ट न लिखता… इसलिए समझ लीजिए… चैलेंज, आलोचना, सवाल ही आपको बड़ा होने, क्रिएट करने, रचने के मौके मुहैया कराते हैं…. इसकी अगली स्टेज ये है कि न तारीफ से प्रसन्न होने वाला हूं और न आलोचना पर भौहें तानने वाला… अब इस अगली अवस्था में पहुंंचने ही वाला हूं… फिर मैं खुद कहूंगा आप सबों के साथ…

मार मार पापी यशवंत को… अरे उसी भड़ास वाले को ही… 🙂

जैजै

भड़ास के संपादक यशवंत के उपरोक्त एफबी पोस्ट पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं….

Shrimaan एक साँस में पढ़ गया, दिल को सुकून आया कि आँच अभी भी बाक़ी है, सब कुछ बर्बाद नहीं हुआ है। आप जैसे और तो अब दिखते नहीं पर आप जुटे रहिएगा। आप ने मेरे जैसे कई लोगों को फिर से उम्मीद दिखाई है। कोशिश कीजिएगा कि आप ऐसे ही रहें।

Dinker Srivastava ग़जब…..धोते पछारते आपकी यूँ ही गुजरती रहे…..लोग जलते रहें आप जलाए रखें उनकी भी और मशाल भी…..बात थोड़ा लंबी सरक गई लेकिन मौक़े और समय के मुताबिक कही गयी…अच्छा बहुत अच्छा…..शुभकामनाएं

Divakar Singh अभी और ऊंचाइयां पानी हैं. आध्यत्मिक और व्यावसायिक दोनों.

Arun Sathi कामरेडों का हाजमा ही ख़राब है….इसीलिए हाशिये पे है…आप बिंदास है

Yogesh Bhatt कुछ लाइन याद हो आई हैं..जिसकी जैसी नजर उसने वैसा समझा मुझे

Vishal Ojha चलो भाई अब आनंद लो सब चीजों का..और हाँ कभी याद भी कर लिया करो

Sushil Dubey उस दिन 1 पैग का क्या हुआ बाबा,,,

Rohit Bisht बधाई, खरी कहने और सुनने का माद्दा बना रहे,बचा रहे यही शुभकामनाएँ

Rajshekhar Vyas Aap sachmuch videh Janak ho rahe hain ! Hardik badhai

Sangam Pandey क्या कहने….
”मुझे तो कई दफे ये चुनाव ही ढेर सारी समस्याओं की जड़ लगने लगे हैं. भीड़ हमेशा मूर्खतापूर्ण सोच रखती है और ऐसी ही सोच से उपजे नेता कहां से तार्किक और वैज्ञानिक विचार वाले होंगे. भीड़ हमेशा अपने जैसा मूर्ख व्यक्ति नेता के रूप में खोजती है और नेता हमेशा एक भीड़ की तलाश में रहता है, जो किसी एक नारे या एक बोली से सक्रिय हो जाए. भीड़ और भेड़ में ज्यादा फरक नहीं है. भेड़चाल ही है लोकतंत्र”

Ganesh Dubey Sahaj पूर्वांचल के खून में है साफगोई।। साधुवाद।।

Sunayan Chaturvedi भड़ास पुरुष की जय।

Sanjeev Kumar Badhai. Aapko janta bahut pahle se tha. Lakin is post ko padhne ke bad aapke vyaktitva ke bare me kuchh aur janne ko mila.

Anand Kumar हर कोई यशवंत नहीं बनता।

Dilip Clerk आप इस सम्मान के योग्य है दादा मैं भी भड़ास एक मुहिम

Sanjaya Kumar Singh बधाई। पुरस्कार के लिए और जोरदार लिखने के लिए भी।

Surendra Trivedi यशवंत जी, आपने तो सब कुछ लिख डाला। खैर, उम्मीद है कि आप बहुत आगे जाओगे।

Ramesh Chandra Rai देखो यशवंत तुम जो भी पोस्ट करो उससे मेरा कोई मतलब नहीं है। पूरे पत्रकारिता के जीवनकाल में मैं बहुत खुश था कि एक पत्रकार अपनी सुख सुविधा छोड़कर लड़ रहा है। तुम इसके लिए जेल यात्रा भी किए। मैं तुम पर गर्व करता था। लोगों को बताता था कि एक होनहार पत्रकार अपने कैरियर को दांव पर लगा दिया। सम्मान मिलने से सबसे अधिक खुश हूं लेकिन योगी के हाथ लेने से मुझे दुख हुआ। तुम मेरी भावना समझ गए होंगे। बाकी बात मिलोगे तो होगी। फिर भी तुम मेरे अनुज हो इसलिए मैं तुम्हें बधाई दे रहा हूँ।

Pradeep Surin कंटेंट पर ध्यान दीजिए। इतना लंबा नहीं चल पाएगा। बाकी बधाई हो आपको। 🙂

डॉ. अजित हार्दिक बधाई सर।आप अपने किस्म के अनूठे और अकेले पत्रकार है

Shrikant Asthana Should I say anything? You’ve risen above these things! Keep it up. Live happily as free as you feel right at any given moment.

Vivek Garg आपको आज तक नहीं पढ़ा और नहीं सुना, बस विकास अग्रवाल जी आपको यहाँ विजिट किये | फेसबुक पर साइड कॉलम में फ्रेंड्स की activity दिख जाती है | हम भी आपके पेज पर आ गए| आपको अवार्ड मिला ख़ुशी हुयी लेकिन में आपको यह बधाई आपकी लेखनी को दे रहा हूँ जो आपने इतना सटीक और स्वच्छ अक्षरों में बात को इतनी सरलता से लिखा ,आप भी मेरी तरह अपनी भावनाऔ का पूरा सम्मान करते हुए पूरी बात लिखते हैं , यह नहीं सोचते की पढने वाला निबंध समझ कर सो तो नहीं जाएगा | Such a confidence is necessary to remain alive within bowl(India) of so many school of thoughts whether needed or not in present time period . आपसे बहुत कुछ सिखने को मिलेगा | आपको अपना डिजिटल गुरु मित्र कह सकता हूँ , हिंदी बचपन से जानता हूँ , कई सालो से लिख रहा हूँ लेकिन वो पैनापन नहीं आया | आपको साधुवाद

Ajay Rai यंशवत हमारे साथ आपने गरीबो के बीच काम भी किया लेकिन दुख हुआ योगी के हाथो पुरस्कार लेने पर इस समय जब छात्र नौजवान योगी जी के कारण दमन का सामना कर रहे हो सफाइ जो दे !

Devendra Verma मोदी की भांड मीडिया तो सबने देखी अब योगी की जातिवादी और चापलूस मीडिया के दिन भी बहुरने लगे,

Arvind Singh सर आपको और आपकी पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई

Govind Badone शानदार, बेबाक।

Rajesh Rai आप ने तो पूरी गीता को आत्मसात कर लिया है ।

A.P. Soni Akash बधाई भड़ासी भाई यशवंत जी

Ram Ashrey Yadav भाई यशवंत जी लेख में आपने गज़ब की भड़ास निकाली है, बधाई!

Bhawna Vardan बधाई बधाई बधाई ….और आपकी इस पोस्ट के लिए तो क्या कहूँ …..नि:शब्द हूँ …हमेशा की तरह

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लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार राजू मिश्र ‘रेड इंक अवार्ड-2017’ से नवाजे जाएंगे

राजू मिश्र

पर्यावरण श्रेणी में बाजी मारी हिंदी ने… मुंबई प्रेस क्लब द्वारा हर साल दिए जाने वाले रेड इंक अवार्ड के लिए पहली बार हिंदी की किसी प्रविष्टि ने अपनी जगह पक्की की है। यह पुरस्कार बुंदेलखंड के सूखे की रिपोर्टिंग के लिए दैनिक जागरण – लखनऊ के वरिष्ठ समाचार संपादक राजू मिश्र को दिया जाएगा। पर्यावरण श्रेणी का यह सम्मान अंग्रेजी के फर्स्ट पोस्ट की टीम के साथ संयुक्त रूप से प्रदान किया जाएगा। फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्टिंग मराठवाड़ा के सूखे से संबंधित थी।

मुंबई प्रेस क्लब द्वारा उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए दिए जानेवाले रेड इंक अवार्ड समारोह का यह सातवां वर्ष है। इस वर्ष राजनीति, पर्यावरण, मानवाधिकार, खेल, विज्ञान जैसे 14 विषयों के लिए प्रिंट, डिजिटल एवं टेलीविजन माध्यमों से करीब 1300 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। इस बार प्रेसक्लब को प्राप्त हुई प्रविष्टियों में 2016 के मराठवाड़ा एवं बुंदेलखंड के सूखे पर की गई रिपोर्टिंग ने जूरी का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इन्हीं रिपोर्टों में दैनिक जागरण के राजू मिश्र की बुंदेलखंड के सूखे पर आठ रिपोर्ट्स की श्रृंखला को एवं फर्स्ट पोस्ट टीम द्वारा मराठवाड़ा पर की गई रिपोर्टिंग को पर्यावरण श्रेणी में संयुक्त रूप से विजेता चुना गया है।

इस बार सभी निर्धारित विषयों की प्रतियोगी श्रेणी में पुरस्कार के लिए 28 पत्रकारों को चुना गया है। चार पत्रकारों को विशिष्ट श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा। ये पुरस्कार 7 जून, 2017 को नरीमन प्वाइंट स्थित एनसीपीए के जमशेद भाभा सभागार में प्रदान किया जाएगा। सम्मान समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी मौजूद रहेंगे। महाराष्ट्र में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनानेवाले फड़नवीस को भी इस वर्ष मुंबई प्रेसक्लब द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

पुरस्कार पानेवाले पत्रकारों का चयन पिछले एक माह से चल रही कड़ी चयन प्रक्रिया के तहत किया गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए उस क्षेत्र के विशेषज्ञों की जूरी का गठन किया गया था। इनमें प्रमुख थे मुंबई उच्चन्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय थिप्से, ह्यूमन राइट वाच की दक्षिण एशिया डायरेक्टर मीनाक्षी गांगुली, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हेमंत गोखले, पर्यावरण क्षेत्र में लिखनेवाले वरिष्ठ पत्रकार डेरिल डिमेंटो, पर्यावरणविद् बिट्टू सहगल, क्रिकेटर किरण मोरे एवं महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित इत्यादि। 

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नभाटा की अनु चौहान समेत कई पत्रकारों को दिए गए मातृश्री पुरस्कार

नयी दिल्ली : विभिन्न समाचार संगठनों से चुने गए पत्रकारों को बीते रोज मातृश्री पुरस्कार से नवाजा गया। विजेताओं को भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने प्रशस्ति पत्र एवं ट्राफी देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर ऐश्वर्या राय बच्चन अभिनीत फिल्म सरबजीत को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा भी उपस्थित थे।

पुरस्कार समिति के संयोजक दिनेश शर्मा ने बताया कि इस बार नवभारत टाइम्स से अनु चौहान, पीटीआई के फोटो संपादक शिरीष शेटे, पीटीआई से ही राजेश राय, मनीषा श्रीवास्तव, यूएनआई से शांतुदास, यूनीवार्ता से अर्चना कश्यप तथा यूएनआई उर्दू से मकसूद आलम को पुरस्कार दिया गया। हिन्दुस्तान समाचार से अजीत कुमार पाठक, दैनिक आज से संजय राय, दैनिक हिन्दुस्तान से पंकज रूहेला, अमर उजाला से सीमा शर्मा, दैनिक जागरण से अभिनव उपाध्याय, और राष्ट्रीय सहारा से रविशंकर तिवारी को भी इस सम्मान से नवाजा गया।

पुरस्कार पाने वाले अन्य लोगों में हिन्दुस्तान एक्सप्रेस के फोटोग्राफर नरेंद्र कुमार, दैनिक जागरण के फोटोग्राफर हरीश कुमार, इंडिया न्यूज के कैमरामैन रोहित कुमार, वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा, श्रद्धा चैनल के पत्रकार राजेंद्र भारद्वाज, स्वतंत्र पत्रकार सुनीता वकील, द हिन्दू के कार्टूनिस्ट सुरेंद्र नाथ, एमएच-1 से नवनीत वाधवा, दैनिक सवेरा से आकाश द्विवेदी, सांध्य टाइम्स से मुकेश बोड़ाई और टोटल टीवी से तरण कालरा शामिल हैं।

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मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र को राष्ट्रीय एकता पुरस्कार

नवभारत टाइम्स, मुंबई के रविवारीय संस्करण ‘संडे एनबीटी’ के प्रभारी विमल मिश्र को मुंबई के के. सी. कॉलेज में एक भव्य समारोह में बीते सोमवार को ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता के लिए महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के 51 हजार रुपये राशि के ‘साने गुरूजी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार’से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार 27 वर्ष पुराने उनके रविवारीय स्तंभ ‘लोग’ व मानवीय सरोकार के विषयों पर प्रचुर लेखन के लिए प्रदान किया गया।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री विनोद तावडे व अकादमी के अध्यक्ष डॉ. नंदलाल पाठक सहित बड़ी संख्या में हिंदी साहित्यकार व पत्रकार मौजूद थे। समारोह में जानी-मानी लेखिका डॉ. सूर्यबाला को भी एक लाख रुपये राशि के जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी विमल मिश्र को पश्चिम रेल द्वारा प्रकाशित शोधपूर्ण कॉफी टेबल बुक ‘मुंबई लोकल’ के लिए पहले भी पुरस्कृत कर चुकी है। विमल इंटरनैशनल मदर टेरेसा अवॉर्ड, डॉ. गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, दुर्गादेवी सराफ पुरस्कार, डॉ. राममनोहर त्रिपाठी पुरस्कार, तरुण कला संगम पुरस्कार, आशीर्वाद पुरस्कार, आदि से भी सम्मानित हो चुके हैं। सरोकारी लेखन के लिए मुंबई महानगरपालिका के ऐतिहासिक हॉल में उनका सार्वजनिक अभिनंदन किया जा चुका है।

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दानवीर पत्रकार आनंद साहू को मिला सकारात्मक पत्रकारिता सम्मान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने महासमुंद में आयोजित साहू समाज के सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार आनंद साहू को सकरात्मक पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया। दूरस्थ ग्रामीण अंचल की बालिका मानसी साहू द्वारा मोदी को लिखे पत्र पर सकारात्मक रिपोर्टिंग के लिए श्री साहू को यह सम्मान दिया गया। स्मृति चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री ने श्री साहू के उज्जवल भविष्य की कामना की।

गौरतलब है कि दूरस्थ वनांचल के गांव अचानकपुर के उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता का परिवार बीते 8 साल से पीने की पानी के लिए परेशान था। अपनी तकलीफ पर 10 साल की मासूम बेटी ने पीएम मोदी को मार्मिक पत्र लिखा। इस पर पीएमओ से जारी निर्देश के बाद एक दिन में ही बोर खनन और दूसरे दिन ही हैंडपंप लगाकर इस परिवार को बड़ी राहत दी गई।

इस तरह एक मासूम बालिका की सूझबूझ से वर्षों की समस्या का समाधान हुआ। इस पर आनंद साहू ने नईदुनिया के रायपुर से लेकर राष्ट्रीय संस्करण नईदिल्ली तक सकरात्मक खबर प्रकाशित किया था। श्री साहू नईदुनिया के महासमुंद ब्यूरो चीफ हैं। उन्हें शुभचिंतक और पत्रकारिता से जुड़े लोगों की बधाई और शुभकामनाएं निरंतर मिल रही है।

हम यहां बताना चाहेंगे कि आनंद साहू और उनके परिवार की दानशीलता की चर्चा पहले भी होती रही है। आनंद साहू ने विकास यात्रा 2013 के दौरान मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के लिए अपनी माता देवकी देवी साहू की मंशानुरूप उनकी प्रेरणा से वर्षों की अपनी माता की जमा पूंजी 111111 रुपये छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को दान किया था। इसे तब भड़ास 4 मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। भड़ास4मीडिया की आर्थिक मदद की अपील पर 11 जनवरी 2011 को आनंद साहू ने 11111 रुपये का भेंट किया था।

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बेमिसाल : पत्रकार आनंद साहू ने किया सरकार को 111111 रुपये दान

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आनंद की तरफ से भड़ास को 11111/-

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काशी के डा. लेनिन रघुवंशी को मिला एम.ए थामस नेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2016

वाराणसी, 20 दिसम्बर 2016 : आप को बड़े हर्ष के साथ सूचित कर रहे है की काशी के जमीनीस्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में संघर्षरत डा.लेनिन रघुवंशी को विजिल इण्डिया मूमेन्ट के अन्तर्गत एम.ए थामस नेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2016 से 21 दिसम्बर 2016 को इयुमिनिकल ईसाई केंद्र बेंगलोर में सम्मानित किया जाएगा | अवार्ड को प्राप्त करने के लिए डा.लेनिन रघुवंशी बेंगलोर के लिए रवाना हो चुके है|

विजिल इण्डिया मूवमेन्ट के अन्तर्गत एम.ए थामस नेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड का चयन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया | इस वर्ष के चयन निर्णायक मण्डल में न्यायमूर्ति श्री संतोष हेगड़े (पूर्व न्यायाधीश, भारत के सर्वोच्च न्यायालय), श्री अकबर मिर्जा खलीली और डॉ चेरियन थॉमस (दुनियावी ईसाई केंद्र और सचिव एवं निदेशक (ईरान और अन्य देशों और बोर्ड विम के ट्रस्टी के लिए भारत के पूर्व राजदूत एवं विम के ट्रस्टी ) ने सर्वसम्मति से देश के विभिन्न भागों से प्राप्त मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के नामांकन में से इस अवार्ड के लिए डा.लेनिन रघुवंशी को चयनित किया।

डा. लेनिन रघुवंशी, दलितों, वंचितों व अल्पसंख्यको के मानवाधिकार के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं। 1996 में अपने संघर्ष को संगठित करने के लिए एक संगठन मानवाधिकार जननिगरानी समिति का गठन किया और इस संगठन के माध्यम से, वह लगातार हाशिए पर समुदाय के अधिकारों, विशेष रूप से दलितों और अल्पसंख्यको के अधिकारों को सुनिश्चित करने में लोगों के संघर्ष में अनवरत शामिल रहे है । अपने द्वारा लगातार किये गए संघर्षो से दलितों वंचितों व अल्पसंख्यको को उनके अधिकारों के हनन पर पैरवी कर उनको न्याय दिलाने का कार्य किया उनके इन तमाम कार्यो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना व तमाम अवार्डो से सम्मानित किया जाता रहा है इसी कड़ी में विजिल इण्डिया मूमेन्ट के अन्तर्गत एम.ए थामस नेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2016 से 21 दिसम्बर 2016 को इयुमिनिकल ईसाई केंद्र बेंगलोर में सम्मानित किया जाएगा|

जागरण भारत आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय डॉ एम ए थॉमस की स्मृति में 1994 में एम ए थॉमस राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार की शुरूआत की गयी थी । अवार्ड के रूप में रुपए एक लाख और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जायेगा। अवार्ड में मिली एक लाख की धनराशी को डा० लेनिन द्वारा मानवाधिकार जननिगरानी समिति को मानवाधिकारों के काम को आगे बढ़ने के लिए दान किया जाएगा|

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‘नई धारा’ मैग्जीन की तरफ से मैत्रेयी पुष्पा, विश्वनाथ सचदेव, अनिरुद्ध सिन्हा सम्मानित

नई दिल्ली : गांव की संस्कृति, भाषा, बोली-बानी, आपसी संबंधों में प्रेम की ताज़गी सबकी सब मुझे बचपन से ही मोहित करती रही हैं। सच तो ये है कि मुझे साहित्य रचने की प्रेरणा एवं शक्ति गांव से ही मिलती है, इसलिए मैं गांव पर ही लिखती हूं। ये बातें चर्चित लेखिका एवं दिल्ली अकादमी की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा ने दिल्ली के साहित्य अकादमी के सभागार में आयोजित व्याख्यान एवं सम्मान समारोह में कही।

हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका ‘नई धारा’ द्वारा आयोजित द्वादश उदयराज सिंह स्मारक व्याख्यान में ‘मैं गांव पर ही क्यों लिखती हूं‘ विषय पर बोलते हुए मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि भारत के गांव बदल रहे हैं। फ़ोर लेन सड़कें और डिजिटल क्रांति ने विकास की चकाचौंध संस्कृति के ज़रिए गांव की पारंपरिकता को तहस-नहस कर दिया है। गांव में अब सड़कें नहीं फ़ोरलेन हैं। उन्होंने कहा कि गांव में प्रेम है, संवेदनशीलता है जिसका शहर में अभाव है। प्रेम जहां है हम उसे वहां तलाश नहीं करते। हम सुविधाओं के ग़ुलाम हो गए हैं। शहर में गांव जैसा अपनत्व नहीं है।

इस अवसर पर नई धारा की ओर से मैत्रेयी पुष्पा को उदय राज सिंह स्मृति सम्मान से विभूषित करते हुए उन्हें एक लाख रुपये, प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र दिए गए। ‘नई धारा’ के प्रधान संपादक डॉ प्रथमराज सिंह ने लेखक-पत्रकार विश्वनाथ सचदेव (मुंम्बई), चर्चित गज़लगायक अनिरुद्ध सिन्हा (मुंगेर) और चर्चित लेखिका एवं वर्धमान विश्वविद्यालय (पश्चिम बंगाल) की हिन्दी विभाग की प्राध्यापक डॉ रीता सिन्हा को ‘नई धारा रचना सम्मान’ से सम्मानित करते हुए उन्हें 25-25 हज़ार रुपये, सम्मान पत्र, प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र प्रदान किए।

समारोह को संबोधित करते हुए नई धारा के प्रधान संपादक डॉ प्रथमराज सिंह ने कहा कि नई धारा हमारे लिए केवल एक साहित्यिक पत्रिका भर नहीं है बल्कि एक रचनात्मक अभियान है, इसके ज़रिए हम समाज और साहित्य को एक सकरात्मक दिशा देना चाहते हैं। हम आशा और विश्वास करते हैं कि पूर्वजों की इस परंपरा को परिवार की नई पीढ़ी मज़बूती से आगे बढ़ाएगी।

‘नई धारा’ के संपादक डॉ शिवनारायण ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी लेखक के जीवन की सार्थकता उसकी निजि उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उसके समाज सापेक्ष संघर्ष में है, इसलिए उसे अपने सामाजिक सरोकारों को अधिक से अधिक सार्थक बनाने की दिशा में सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते 67 वर्षों से लगातार प्रकाशित ‘नई धारा’ बिहार के सूर्यपुरा राज परिवार की पांच पीढ़ियों की हिन्दी सेवा का व्रत है, जिसे राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह, शिवपूजन सहाय, रामबृक्ष बेनीपुरी जैसे तपोनिष्ठ लेखकों ने पल्लवित-पुष्पित किया। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं बीते 25 वर्षों से इस पत्रिका का संपादन कर रहा हूं।

समारोह में गज़लगायक अनिरुद्ध सिन्हा ने अपनी गज़ल सुनाकर दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर  ‘ नई धारा सम्मान ’ से सम्मानित लेखिका एवं वर्धमान विश्वविद्यालय (पश्चिम बंगाल) की हिन्दी विभाग की प्राध्यापक डॉ रीता सिन्हा ने समाज में व्याप्त कूरीतियों और स्त्रियों की बौद्धिकता और लेखनी पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। डॉ रीता सिन्हा ने कहा कि ‘ नई धारा ’ का सम्मान मेरे लिए संकेत है कि मैं समस्त दुराग्रहों से ऊपर उठकर समाज की विडंबनाओं और विसंगतियों को अपनी रचनाओं के माध्यम से लाने का प्रयत्न करूं।

हिन्दी के चर्चित कवि और भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीलीधर मंडलोई ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि मैत्रेयी पुष्पा का सम्मान पूरे बुंदेलखंड का सम्मान है। मैत्रेयी की लेखनी में बुंदेलखंड की मिट्टी की ख़ुशबू महसूस की जा सकती है। मंडलोई ने कहा कि नई धारा का साहित्यिक कार्य बहूआयामी है। उन्होंने आयोजकों को नई धारा के सम्मान समारोह और साहित्यिक गतिविधियों की फिल्म बनाने और आर्काइव करने की सलाह दी। कथाकार बलराम ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर देशभर से आए बड़ी संख्या में साहित्यकार मौजूद थे। 

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तो ये है यूपी में यश भारती एवार्ड हथियाने का फार्मूला!

Maheruddin Khan : काफी सोच विचार के बाद इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि यह अनुभव मित्रों के साथ साझा करना चाहिए. गत सप्ताह एक सज्जन मेरे पास आए. मैं उन्हें पहचान नहीं पाया तो उन्होंने बताया कि 20-25 साल पहले नवभारत टाइम्स में मुलाकात होती थी, उस समय आपने मेरी बहुत मदद की थी जिसके चलते मैं राजनीति में बड़े लोगों से मिल सका. उन्होंने बताया कि मैं आपको लखनऊ ले जाने के लिए आया हूँ, आपको मुख्यमंत्री से मिलाना है और यश भारती सम्मान दिलाना है. 

मैंने बताया कि इसकी लिस्ट तो जारी हो गई है तो वह बोले- 52 लोगों की लिस्ट जारी हुई थी, जो आज 65 हो गई है, अगले सप्ताह समारोह से पहले 70 पार कर जाएगी, आप अपना बायोडाटा लेकर मुख्यमंत्री से मिल कर यशभारती का आग्रह कर दें, बाकी मेरी ज़िम्मेदारी. मैंने सम्मान के लिए आग्रह करने से इंकार कर दिया तो वह नाराज होकर बोले- आप नहीं सुधरेंगे, 20 साल पहले भी आपने मेरी तरफ से दिए जा रहे गिफ्ट को लेने से इनकार कर दिया था.

वरिष्ठ पत्रकार मेहरुद्दीन खान की एफबी वॉल से.

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काटजू नैं, ईं हैं असली इलाहाबादी बकैत

बकैती की सबकी अपनी अलग-अलग परिभाएं हैं, लेकिन इलाहाबादी बकैती की बात ही निराली है। आपने अक्सर कई इलाहाबादी बकइतों के बारे में सुना भी होगा। दरअसल इलाहाबाद शहर अपनी बकइती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर रहा है। प्रो. एएन झा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. हरिवंश राय बच्चन, फिराक़ गोरखपुरी, रवीन्द्र कालीया और दूधनाथ सिंह जैसे महान बकइत इलाहाबाद से निकले हैं।

दरअसल इलाहाबाद को देश की बौद्धिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है और इन बौद्धिक लोगों के कारनामों से पूरी दुनिया में इनके परचम को ही हम इलाहाबादी बकइती कहते हैं। हाल ही में ‘यश भारती’ पुरस्कार की घोषणा हुई है। इनमें तीन इलाहाबादियों के चर्चे ज़ोरों पर हैं। पुरस्कार पाने वालों की लम्बी फेहरिस्त में इन तीनों की एक साथ उपस्थिति ने तमाम इलाहाबादियों को ख़ुशी दे दी है। इससे सभी अन्य बकइत भी फूल कर कुप्पा हैं। एक हम भी।

पहला नाम योगेश मिश्र का है जो वेब पोर्टल न्यूज़ट्रैक व अपना भारत (साप्ताहिक) के एडीटर-इन-चीफ़ हैं। इन्होने सन् 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग से डी-फ़िल की है। पेशे से पत्रकार हैं। 25 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। श्री मिश्र को 2015 का मधु लिमये अवार्ड भी मिल चुका है। इन्होने अपनी लम्बी पत्रकारिता में दूरदर्शन, ई-टीवी, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, नेशनल दुनिया, नई दुनिया और आउटलुक जैसे बड़े संस्थानों के साथ काम किया है। इसके अलावा जर्मन रेडियो और वॉयस ऑफ़ अमेरिका के लिए भी ये विशेष रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री मिश्र की रचनाओं में समय पर, समय के सवाल, समय के संवाद, समय के आलेख, कशिश, खोज और जख़्म की शहादत शामिल हैं।

दूसरे, जाने-माने फ़िल्म अभिनेता दीपराज राणा हैं जो इलाहाबाद के अल्लापुर के रहने वाले हैं। ये अबी मुम्बई में रहते हैं। श्री राणा को आपने बेहद सफ़ल रही फिल्मों मंलग पाण्डेय, साथिया, साहेब बावी और गैंगस्टर, घोष्ट, चक्रव्यूह, साहेब बावी और गैंगस्टर रिटर्न्स, लूट, बुलेट राजा, गुण्डे, सिंघम रिटर्नस, क्रिएचरःथ्रीडी, प्रेम रतन धन पायो और 31 अक्टूबर में अभिनय का लोहा मनवाते देखा होगा। वो कहते हैं “मैं ठेठ इलाहाबादी हूं और उत्ते ठेठ बकइत भी।” ज़ाहिर है श्री राणा को उसी बकइता का नज़राना ‘यश भारती’ के रूप में मिला है। ये स्वभाव से बहुत ही मीठे और मिलनसार हैं। श्री राणा इलाहाबाद के एक विशेष पात्र पर केन्द्रित फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जिसके बारे में उन्होने अभी खुलासा करने से मना किया है। इस फ़िल्म को उनकी पत्नी जानी-मानी टीवी एक्ट्रेस नताशा प्रोड्यूस कर रही हैं।

तीसरा सबसे युवा नाम मणेन्द्र मिश्र ‘मशाल’ का है जो समाजवादी चिन्तक के तौर पर जाने जाते हैं और उत्तर प्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष श्री माता प्रसाद पाण्डेय के मीडिया प्रभारी हैं। श्री मिश्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एन्थोपोलॉजी विभाग से एमएससी, गणित से बीएससी पढ़ाई की है। इसके अलावा यहीं से जर्मन एवं मानवाधिकार में डिप्लोमा प्राप्त किया है। इन्होने पत्रकारिता के मक्का कहे जाने वाले भारतीय जनसंचार संस्थान से हिन्दी पत्रकारित में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। इन्होने समाजवादी मॉडल के युवा ध्वजवाहकःअखिलेश, समाजवादी स्तम्भ, लोहिया और युवजन, भाषा का सवाल और डॉ. लोहिया, छोटे लोहिया जनेश्वर, समाजवाद के अनुगामी और सीमान्त लोहियाःबृजभषण पुस्तकें लिखी हैं।

लेखक अमित राजपूत से संपर्क amitrajpoot.ar@gmail.com या 7053795682 से किया जा सकता है.

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बॉब डिलन का एक गीत “Masters of War” तो वाकई क़माल का है!

Om Thanvi : बीकानेर में छात्रजीवन में मेरे कमरे की दीवार पर बॉब डिलन का एक पोस्टर चिपका रहता था, लाल और काले महज़ दो रंगों में। JS (जूनियर स्टेटसमन) में कुछ अंकों में क़िस्तों में छपा था, जोड़कर टाँग दिया। मगर डिलन के बारे में जाना बाद में। उनका काव्य, उनके गीत और गान। फिर बरसों बाद कवि-मित्र लाल्टू ने डिलन के गीतों का एक कैसेट दिया। मैंने उसे आज तक नहीं लौटाया। अक्सर उसे सुना और अपनी सम्पत्ति बना लिया।

गीत हमारे यहाँ तो ज़्यादातर रूमानी होते हैं; डिलन ने उनमें विद्रोह का रंग भरा। उस रंग को जिया। नोबेल समिति ने डिलन का अभिनंदन कर अपनी जड़ता को ख़ूबसूरती से तोड़ा है। मित्र Tribhuvan ने बॉब डिलन को नोबेल घोषित होने पर सुंदर टिप्पणी लिखी है। साझा करता हूँ। प्रतिरोध का जज़्बा अमर रहे – इस जज़्बे के धारक जो भी हों, जहाँ भी हों! और हां, मेरे निजी संग्रह में बॉब डिलन पर बनी एक फ़िल्म है- ‘नो डायरेक्शन होम बॉब डिलन’। वृत्तचित्र (डॉक्युमेंटरी)। मार्टिन स्कोरसेज़ी ने ग्यारह साल पहले बनाई थी। अपने जलसाघर (होम थिएटर) के बड़े परदे पर फिर चलाने का मन है। इतवार को चार-छह मित्र बुलाता हूँ। गीत, संगीत, यायावरी और हादसों से भरी साढ़े तीन घंटे की फ़िल्म पता नहीं कितने लोग देखने को तैयार होंगे!

Tribhuvan : कितनी सुहानी घड़ी है कि बॉब डिलन को साहित्य का नोबेल मिला है। मैंने बॉब डिलन का नाम पहली बार अपने बच्चों से सुना और उन्होंने मुझे और मेरी पत्नी को उनके “Blowin’ in the Wind”, “The Times They Are a-Changin'”, “Subterranean Homesick Blues” and “Like a Rolling Stone” जैसे गीत सुनने बाध्य किया। यह मेरे लिए एक अलग अनुभव था और साहित्य के नभ का एक नया वातायन भी। मेरे बच्चों ने ये गीत गंगानगर, जयपुर, दिल्ली और जहां भी मैं रहा, हर जगह खूब गाए और सुनवाए।

बॉब डिलन के कितने ही तराने मैंने बाद में सुने और पढ़े। कई बार मैं महससू करता रहा हूं कि आख़िर ऐसी भाव-व्यंजनाएं हमारे यहां लोकगीतों में क्यों नहीं आती हैं? और क्यों हमारे यहां गीतकारों और ऐसे गैरफ़िल्मी गायकों को ज़्यादा लोकप्रियता नहीं है। बॉब डिलन का एक गीत “Masters of War” तो वाकई क़माल का है। युद्ध पिपासु लोगों के लिए लिखा गया यह गीत मनुष्यता को गहराई से देखता है और बताता है कि युद्ध और हिंसा के कारोबारी कितने विकराल दैत्य और मानव भक्षी राक्षस हैं।

बॉब डिलन के अलावा कई ऐसे गीतकार हैं, जो जादू सा जगाते हैं। मुझे बॉब डिलन की तरह ही बहुत ज्यादा झकझोरा जॉन लेनन ने। उनका गीत “इमेजिन” तो मेरे लिए त्रिकाल संध्या और पांच बार की नमाज़ जैसा है। ऐसे लगता है, जैसे गुरबाणी को जॉन लेनन ने किसी लिरिकल प्रार्थना में पिरो दिया है। यही क्यों, बच्चों ने जब पहली बार ऑजी ऑसबॉर्न का गीत “मा-मा आई ऐम कमिंग होम” सुनवाया या कभी घर में बजाया तो इस गीत ने चुपचाप राेने को विवश कर दिया।

सचमुच, मुझे लगता है, मेरे बच्चे किसी नोबेल पुरस्कार समिति से कम प्रतिभा नहीं रखते हैं। चलिए तो आप सुनिए “मास्टर्स ऑव वार”…बॉब डिलन की गीतिका, जो मनुष्य की संवेदनाओं और हिंसक इरादों वाले रक्तपिपासुओं को आत्मग्लानि में दबा देती है।

“Masters Of War”

Come you masters of war
You that build all the guns
You that build the death planes
You that build all the bombs
You that hide behind walls
You that hide behind desks
I just want you to know
I can see through your masks.

You that never done nothin’
But build to destroy
You play with my world
Like it’s your little toy
You put a gun in my hand
And you hide from my eyes
And you turn and run farther
When the fast bullets fly.

Like Judas of old
You lie and deceive
A world war can be won
You want me to believe
But I see through your eyes
And I see through your brain
Like I see through the water
That runs down my drain.

You fasten all the triggers
For the others to fire
Then you set back and watch
When the death count gets higher
You hide in your mansion’
As young people’s blood
Flows out of their bodies
And is buried in the mud.

You’ve thrown the worst fear
That can ever be hurled
Fear to bring children
Into the world
For threatening my baby
Unborn and unnamed
You ain’t worth the blood
That runs in your veins.

How much do I know
To talk out of turn
You might say that I’m young
You might say I’m unlearned
But there’s one thing I know
Though I’m younger than you
That even Jesus would never
Forgive what you do.

Let me ask you one question
Is your money that good
Will it buy you forgiveness
Do you think that it could
I think you will find
When your death takes its toll
All the money you made
Will never buy back your soul.

And I hope that you die
And your death’ll come soon
I will follow your casket
In the pale afternoon
And I’ll watch while you’re lowered
Down to your deathbed
And I’ll stand over your grave
‘Til I’m sure that you’re dead.

Som Prabh : बॉब डिलन का पुरस्कृत होना बराक ओबामा को शांति का नोबेल मिल जाना नहीं है। जो चौंक रहे हैं वे शायद छपी हुई किताबों को ही साहित्य समझते हैं। साहित्य सिर्फ छपी हुई किताबें नहीं है। 75 साल के बुजुर्ग गायक और गीतकार बॉब डिलेन के चुनाव का मजाक उड़ाने वाले दरअसल अपना ही उपहास कर रहे हैं। यह दूर की कौड़ी लग सकती है, लेकिन इससे सीख लेकर भारतीय साहित्य में आंदोलनों में सक्रिय या समाज को किसी तरह उद्वेलित करने वाले ऐसे गायकों, गीतकारों को पहचानने और पुरस्कृत करने की परंपरा की शुरुआत करनी चाहिए, जो समाज में मरियल हो चुके साहित्य से कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं और उनमें राजनैतिक प्रतिरोध और समकालीन सवालों से भिड़ंत की अद्भुत क्षमता है। इससे जनांदोलनों के तमाम अदृश्य चेहरे भारतीय समाज की पहचान बन सकेंगे। इससे वह खाई भी पाटी जा सकेगी जो लिखित और मौखिक परंपराओं में पैदा हुई है। जानता हूं कि यह होेगा नही? साहित्य का कारोबार जिनके हाथों में हैं उनके पास इतनी हिम्मत नहीं है कि वे ऐसा कर सकें। फिर भी सपने देखने से खुद को क्यों रोका जाए।

कल्बे कबीर : साहित्य के सद्य-नोबल-पुरस्कार से सम्मानित कवि-गायक बॉब डिलेन अमरीका-यूरोप में अपने देसी गीत-संगीत के लिये कितने लोकप्रिय हैं – मुझे कुछ ठीक-ठीक अंदाज़ा नहीं है, लेकिन यह तय है कि बॉब की ख्याति अपने ज़माने के हिंदुस्तानी शाइर जिगर मुरादाबादी से कम ही होगी । कहते हैं कि जिगर को देखने के लिये रेलवे-स्टेशनों पर भीड़ लग जाती थी। रेलें थम जाती थीं। जब जिगर अपनी लहकदार-खरज़दार आवाज़ में अपनी ग़ज़लों को गाते थे तो हज़ारों की भीड़ में सन्नाटा खिंच जाता था । समकालीन शाइर जिगर से इस बात पर रश्क़ रखते थे। उनमें जोश मलीहाबादी भी थे, जो गा नहीं सकते थे और अपनी बुलन्द आवाज़ में तरह में अपनी शाइरी पढ़ते थे। एक बार जोश ने तंज़ कसते हुये कहा – जिगर, तुम्हारा टेंटुआ तो किताबों में छप नहीं सकता! जोश अगर ज़िंदा होते तो देखते कि अब टेंटुआ भी किताबों में छपने लगा है! जो Bob Dylan की तुलना फ़िल्मी और मंचीय गीतकारों से कर रहे हैं वे मूर्ख हैं ग़रीबों-वंचितों के पक्ष में, कुलीनों के विरुद्ध और युद्ध के ख़िलाफ़ गीत लिखकर गाने वाले बॉब डिलेन की तुलना सिर्फ़ इकतारे पर गाने वाली मीरा, अभंग गाने वाले तुकाराम से की जा सकती है या किसी बाउल गायक से!

Nishant Jain : मुझे लगता है कि जाने-माने अमेरिकी गीतकार और गायक Bob Dylan को लिटरेचर का नोबेल मिलना साहित्य जगत में एक नए बदलाव की आहट है। उम्मीद है, इससे हिन्दी और भारतीय भाषाओं का अकादमिक साहित्य जगत थोड़ा उदार होगा और लोकप्रिय साहित्य-संगीत को ‘साहित्य’ के रूप में स्वीकारना शुरू करेगा। अकादमिक जगत के कुछ (सब नहीं, अतः कृपया दिल पर न लें) मठाधीश टाइप के लोग लोकप्रिय गीतकारों और लोक कवियों को ‘साहित्यकार’ की श्रेणी में नहीं गिनते। हिन्दी साहित्य जगत में तो स्थिति और भी ख़राब है।ऐसी कविता, जो एक सुशिक्षित व्यक्ति के भी पल्ले न पड़े, सिर्फ़ उसे ही साहित्य मानने की जिद और आम बोल-चाल की भाषा में रचे गए लयबद्ध गीतों और कविताओं को दोयम दर्जे का साहित्य मानना कहाँ तक तर्कसंगत है, उम्मीद है, कुछ विद्वान ही इस पर प्रकाश डालेंगे।

भूलना नहीं चाहिए कि साहित्य की तीन मूल विधाएँ -गीत, कहानी और नाटक, सभ्यता की शुरुआत से ही लोक-जीवन में रचे बसे हैं और अपनी लोक भाषा, लय और नाद सौंदर्य के बल पर आम जन की ज़ुबान पर चढ़ते रहे हैं। कबीर से लेकर निराला तक, कविता की तुकांतता ने निरंतर उसके नाद सौंदर्य के माध्यम से साहित्य को जन-जन तक पहुँचाया है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि हिन्दी वाले अकादमिक लोग भी अब पुनर्विचार करते हुए गुलज़ार साहब, गोपालदास नीरज, दुष्यंत कुमार, अदम गोंडवी, प्रसून जोशी, इरशाद कामिल, स्वानन्द किरकिरे जैसे बेहतरीन गीतकारों के लोकप्रिय गीतों के लिटरेरी योगदान को कुछ तवज्जो देंगे।

Arun Maheshwari : बॉब डिलेन को नोबेल पुरस्कार… अभी-अभी हम बीकानेर से हरीश भादानी समग्र के लोकार्पण समारोह से कोलकाता लौटे हैं । हरीश जी के गीतों और धुनों से सरोबार इस समारोह की ख़ुमारी अभी दूर भी नहीं हुई कि आज यह सुखद समाचार मिला – अमेरिकी गीतकार और गायक बॉब डिलेन को इस साल का साहित्य का नोबेल पुरस्कार घोषित किया गया है । शायद रवीन्द्रनाथ के बाद यह दूसरा गीतकार है जिसे उसके गीतों के लिये नोबेल दिया जा रहा है। बॉब डिलेन अमेरिका के पॉप संगीत के एक ऐसे अमर गीतकार और गायक रहे हैं जिनके छ: सौ से अधिक गीतों ने अमेरिका की कई पीढ़ियों को मनुष्यता और प्रतिवाद की नई संवेदना से समृद्ध किया है। यहाँ हम उनके एक प्रसिद्ध गीत – Blowin’ In The Wind को मित्रों से साझा कर रहे हैं और साथ ही तुरत-फुरत किये गये उसके एक हिंदी अनुवाद को भी दे रहे हैं –

Blowin’ In The Wind Lyrics

How many roads must a man walk down
Before you call him a man ?
How many seas must a white dove sail
Before she sleeps in the sand ?
Yes, how many times must the cannon balls fly
Before they’re forever banned ?
The answer my friend is blowin’ in the wind
The answer is blowin’ in the wind.

Yes, how many years can a mountain exist
Before it’s washed to the sea ?
Yes, how many years can some people exist
Before they’re allowed to be free ?
Yes, how many times can a man turn his head
Pretending he just doesn’t see ?
The answer my friend is blowin’ in the wind
The answer is blowin’ in the wind.

Yes, how many times must a man look up
Before he can see the sky ?
Yes, how many ears must one man have
Before he can hear people cry ?
Yes, how many deaths will it take till he knows
That too many people have died ?
The answer my friend is blowin’ in the wind
The answer is blowin’ in the wind

कितने रास्ते तय करे आदमी
कि तुम उसे इंसान कह सको ?
कितने समंदर पार करे एक सफ़ेद कबूतर
कि वह रेत पर सो सके ?
हाँ, कितने गोले दागे तोप
कि उनपर हमेशा के लिए पाबंदी लग जाए?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है ।

हाँ, कितने साल क़ायम रहे एक पहाड़
कि उसके पहले समंदर उसे डुबा न दे ?
हाँ, कितने साल ज़िंदा रह सकते हैं कुछ लोग
कि उसके पहले उन्हें आज़ाद किया जा सके?
हाँ, कितनी बार अपना सिर घुमा सकता है एक आदमी
यह दिखाने कि उसने कुछ देखा ही नहीं ?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है ।

हाँ, कितनी बार एक आदमी ऊपर की ओर देखे
कि वह आसमान को देख सके?
हाँ, कितने कान हो एक आदमी के
कि वह लोगों की रुलाई को सुन सके?
हाँ, कितनी मौतें होनी होगी कि वह जान सके
कि काफी ज्यादा लोग मर चुके हैं ?
मेरे दोस्त, इनका जवाब हवा में उड़ रहा है
जवाब हवा में उड़ रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी, त्रिभुवन, सोम प्रभ, कल्बे कबीर, निशांत जैन, अरुण माहेश्वरी की एफबी वॉल से.

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उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित हुए विनायक विजेता

सम्मान को विनायक विजेता ने शहीद सैनिकों के नाम किया

पटना : हिन्दी दैनिक ‘तरुणमित्र’ के बिहार संस्करण (पटना) के संपादक विनायक विजेता को पत्रकारिता क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पटना स्थित बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में रविवार को आयोजित एक समारोह में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने श्री विजेता को उनके कार्यों के लिए सम्मानित करते हुए उन्हें सम्मानपत्र एवं अंग वस्त्र प्रदान किया।

गौरतलब है कि बिहार के पत्रकारिता क्षेत्र में विनायक विजेता का नाम चर्चित, निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। इसके पूर्व भी पटना में आयोजित कई समारोहों में विनायक विजेता को सम्मानित किया जा चुका है। रविवार को मिले सम्मान को उन्होंने उरि हमले में ‘शहीद सैनिकों के नाम’ कर दिया।

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मुफ्त दवा बांटने और किताब पढ़ाने वाले कुरुक्षेत्र के पत्रकार पंकज अरोड़ा सम्मानित

कुरुक्षेत्र :  कुरुक्षेत्र के पत्रकार पंकज अरोड़ा को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल ने सम्मानित किया। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र की उपायुक्त सुश्री सुमेधा कटारिया एवं पुलिस अधीक्षक सिमरदीप सिंह अन्य अधिकारियों के साथ उपस्थित थे। गौरतलब है कि पंकज अरोड़ा पिछले दो दशक से भी अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हुए हैं। वे पत्रकारिता के साथ साथ अपने पिता जी की याद में एक डिस्पैंसरी एवं लाइब्रेरी भी कुरुक्षेत्र में चलाते हैं।

ये कार्य बिना सरकारी या गैर सरकारी अनुदान के सिर्फ अपने दम पर संचालित करते हैं और जनता की नि:शुल्क सेवा करते हैं। पिछले पांच वर्षों में 75 हजार से अधिक लोगों को मुफ्त दवाइयां वितरित की जा चुकी हैं व सात ब्लड कैंप लगाकर 1500 से अधिक यूनिट ब्लड इकट्ठा करके स्थानीय सरकारी अस्पताल में दान करवाया जा चुका है। इन्हीं सब कार्यों और जन सरोकार में योगदान देने के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंकज अरोड़ा को सम्मानित किया गया।

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देश भर के 14 पत्रकारों को पीयूसीएल ने निर्भीक पत्रकारिता के लिए किया सम्मानित (देखें लिस्ट)

रायपुर। नईदुनिया के समाचार संपादक अनिल मिश्रा समेत देश भर के 14 पत्रकारों को रविवार को मानवाधिकारों के लिए कार्यरत लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) और पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से निर्भीक पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इन सभी पत्रकारों को कांसे के कप में धान, कलम और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

राजधानी रायपुर के गॉस मेमोरियल सभागार में प्रेस, जनता और राज्य विषय पर आयोजित नागरिक सम्मेलन में समकालीन तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा, पीयूसीएल के प्रदेश अध्यक्ष लाखन सिंह, महासचिव और हाईकोर्ट की अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, राजेन्द्र सायल, सामाजिक कार्यकर्ता आनंद मिश्रा, नंद कश्यप, जनकलाल ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, आलोक शुक्ला, चितरंजन बख्शी ने अपने अपने विचार रखे। इन लोगों ने देश भर के 14 पत्रकारों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम में आदिवासी नेत्री सोनी सोढ़ी, अधिवक्ता शालिनी गेरा, गोल्डी जार्ज, सामाजिक कार्यकर्ता डिग्री चौहान, ईशा खंडेलवाल, प्रिया शुक्ला, सुकमा के पूर्व जस्टिज प्रभाकर ग्वाल, पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त समिति के संयोजक कमल शुक्ला, फिल्मकार अजय टीजी, इंडिया न्यूज के प्रदेश प्रमुख शेखर , सहित सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता, गणमान्य नागरिक व पत्रकार मौजूद थे।

जिन 14 पत्रकारों को सम्मानित किया गया, उनके नाम इस प्रकार हैं:

आलोक पुतुल
मालिनी सुब्रमण्यम
सुबोजित बागची
प्रभात सिंह
पुष्पा
क्रांति रावत
तामेश्वर
लिंगा कोडपी
दिनेश सोनी
देवशरण तिवारी
नितिन सिन्हा
उत्तम कुमार
राजकुमार सोनी

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संघियों के हाथों अमर उजाला के संपादक भी हो आए सम्मानित!

नारद जयंती पर अमर उजाला के संपादक हुए सम्मानित… नोएडा के सेक्टर-27 स्थित कैलाश सभागार में आरएसएस के अनुषांगिक संगठन विश्व संवाद केंद्र नोएडा की ओर से महर्षि नारद जयंती व पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमर उजाला के संपादक (दिल्ली) उदय कुमार को प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने सम्मानित किया।

इस मौके पर सम्मानित होने वाले अन्य पत्रकारों में आजतक के ढेर सारे पत्रकार थे जिनमें श्वेता सिंह, पंकज शर्मा आदि प्रमुख हैं। मानस प्रतीक गोहेन, संतोष कुमार, सत्यदेव यादव, पवन मिश्रा, मधुलिका सिंह, सुमित अवस्थी आदि पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। यह पता नहीं चल सका है कि आखिर किस काम के लिए इन लोगों का सम्मान हुआ है। बताया जा रहा है कि आरएसएस ने अपने संगठन विश्व संवाद केंद्र को निर्देश दे रखा है कि वह देश भर में जगह जगह कार्यक्रम कर पत्रकारों को थोक के भाव सम्मानित करे ताकि पत्रकारों के दिल दिमाग का संघीकरण किया जा सके। छोटे मोटे पत्रकारों को छोड़िए, अब आजतक और अमर उजाला जैसे मीडिया हाउसों के संपादक तक सम्मान लेने देने के नाम पर लार टपकाते हुए कार्यक्रम में पहुंच जा रहे हैं।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश के अलावा विधायक विमला बाथम, आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश, आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रसार भारती के चेयरमैन ने कहा कि उनके संस्था की जिम्मेदारी संसद ने तय की है और प्रसारण में कई बिंदुओं का ध्यान रखना होता है। इसमें देश की एकता और अखंडता समेत चार बिंदु शामिल हैं। यह प्रसार भारती के एक्ट में शामिल है। वहीं आरएसएस के इंद्रेश ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां विश्व की सैकड़ों जातियों व उपजातियों के लोग रहते हैं। ऐसे में भारतीय को असहिष्णु कहना गलत है। उन्होंने नारद जी के बारे में कहा कि उन्होंने कभी भी अपना मत नहीं दिया, बल्कि तथ्य पेश किया।

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आरएसएस वाले जमकर कर रहे हैं पत्रकारों का बिना वजह सम्मान, आजतक वाले भी नहा आए

विश्व संवाद केंद्र और नारद जयंती. यानि मीडिया वालों को सम्मानित कर पटाने का संघियों का अच्छा खासा उपक्रम. क्या लखनऊ क्या जयपुर क्या भोपाल और क्या दिल्ली. हर ओर दर्जनों की संख्या में पत्रकार लाइन लगाकर दांत चियारते एवार्ड लेते फोटो खिंचाते दिखे. छुटभैये तो सम्मानित होने के लिए लालायित तो रहते ही हैं, अब तो आजतक वाले भी लाइन लगाकर संघियों के हाथों सम्मान लेने पहुंच जाते हैं. केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद संघ वालों ने मीडिया वालों को बिना वजह सम्मानित करने का अभियान चला रखा है. नारद जयंती के नाम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक संगठन विश्व संवाद केंद्र जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित करता है और उन-उन जगहों के मीडिया वालों को थोक के भाव बुलाकर सम्मानित करता है.

दिल्ली में भी एक ऐसा ही आयोजन हुआ जिसमें संघ से जुड़े राम बहादुर राय, सूर्यप्रकाश, इंद्रेश आदि लोग आजतक वालों को सम्मानित करते दिखे. इस मौके पर सम्मान पाए आजतक के पंकज शर्मा ने जो भाव विह्वल पोस्ट और तस्वीरें फेसबुक पर डाला है, उसे प्रकाशित कर रहे हैं. आप कह सकते हैं कि कोई किसी का सम्मान कर रहा है तो आपको क्या दिक्कत? इसका बस इतना जवाब है कि जब आजतक जैसा समूह अपने लोगों को कहीं भी जाकर किसी से भी सम्मान लेने की छूट दे सकता है तो समझ में आता है कि यह समूह दरअसल अपने कद और पत्रकारिता के मूल तेवर और सरोकार से बेखबर होकर बाजारू बन गया है और बहती गंगा में हाथ धोने पर उतारू हो चला है…

 

Pankaj Sharma : ख्वाब सच होते हैं..अगर उनमें ईमानदारी और मेहनत हो तो, मैंने कोई कहानी आजतक ऐसी नहीं पढ़ी जिसके अंत में ईमानदारी, मेहनत या सच्चाई हार गई हो । वक्त लग सकता है..2 बरस..5 बरस..15 बरस या और ज़्यादा..लेकिन ख्वाब सच होते हैं मैंने देखा है उन्हें सच होते हुए। आदरणीय Sweta Singh ji इन्हें टीवी पर देखा करता था और एक ख्याल मन में आया करता था कि एक रोज़..रहती ज़िंदगी में ..शायद कभी उनसे मिला तो ये बात कहूंगा कि आपकी ऊर्जा से प्रेरणा मिलती है, ख्वाबों को सच करने का जुनून मिलता है, क्योंकि अब जब आपके साथ काम करने का सौभाग्य मिला है तो देखा है आप सुबह ऑफिस में होती हैं, शाम को हैदराबाद, अगले दिन दोपहर बनारस और फिर रात के 9 बजे स्टूडियो में खबरदार करते हुए। हम थक जाते हैं आपका अनुसरण करते हुए लेकिन आपके चेहरे पर शिकन नहीं मिलती..कल आपके पास खड़ा था..ये मेरे जीवन की उपलब्धि थी…

सामने पत्रकारिता के भीष्म पितामह पूज्य राम बहादुर राय साहब खड़े थे, परम आदरणीय सूर्य प्रकाश जी खड़े थे, इंद्रेश जी खड़े थे….. न मेरी जुबान साथ दे रही थी, न पैर, और न हाथ लेकिन आपने बड़ी सहजता से मुझे सहज किया अपने स्नेह से..जैसे हमेशा किया है मेरे नर्वस होने पर…आभारी रहूंगा आपका हमेशा…मैंने जो सफर तय किया मीडिया के क्षेत्र में उसमें Nilendu Sen दादा, Bithin Das दादा, आदरणीय Vikas Mishra सर, बड़े भाई Aalok Shrivastavजी, Vikas Gupta जी, अनुकरणीय Rehan Abbas साहब, Sanjay Sharma भैय्या और मेरे हरकदम के साथी Mohammed Anas Zubair का बड़ा योगदान रहा, आभारी रहूंगा तमाम उम्र आप सभी का, क्योंकि 15 बरस पहले जब आया था तब मेरे पास न हौसला था, ना हिम्मत थी, ना कोई रास्ता दिखता था, बस एक जुनून था कि अब वापस नहीं लौटूंगा यहां से और आप सभी के स्नेह ने मुझे थकने नहीं दिया…रुकने नहीं दिया, धन्यवाद Abhimanyu Sharma.

यहां मेरा विशेष नमन है फेसबुक के आभासी संसार के सभी साथियों का जिन्होनें मुझे मेरी उम्मीदों से ज्यादा प्यार दिया, आप सब हैं तो मैं हूं…वरना मेरा कोई वजूद नहीं, बेहद शुक्रिया आदरणीय Niraj Singh ji Padm Singh ji, Gaurav Prakash ji, Pawan K Sharma ji, Ashish Gupta ji, यहां मेरा विशेष आभार, चरण वंदन मेरी मार्गदर्शक, गुरू Vandana Sharma ji और Dimple Sharma ji के लिए जिन्होनें मिट्टी के इस लोथड़े को एक शक्ल दी..और मैं दुनिया के बाज़ार में चल गया…

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नईदुनिया के समूह संपादक आनंद पाण्डे को माधव राव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के लिए चुना गया

शख्सियत ऐसी कि पुरस्कार नगण्य हो गए…. नईदुनिया के समूह संपादक आनंद पाण्डे को माधव राव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के लिए चुना गया। पहले मन हुआ कि मोबाइल लगाऊं और बधाई दूं। फिर थोड़ा रुका और सोचा कि क्या यह पुरस्कार उनके पत्रकारिता के जुनून, ईमानदारी, समर्पण से ज्यादा है? क्या कोई भी पुरस्कार ऐसा है जो उनके समर्पण के बदले दिया जा सके? हाथ नंबर डायल करते-करते रुक गए। मैं राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के कद की बात नहीं कर रहा हूं। बेशक ऐसा पुरस्कार पाना किसी भी पत्रकार के लिए गर्व की बात है। मैं तो बात कर रहा हूं कि आधुनिक दौर में पत्रकारिता की साख को जिंदा रखने वाले शख्स की, जिससे पुरस्कार खुद गौरान्वित हो जाता है।

जिस शख्स के लिए कैरियर प्रायरिटी पर होता हो लेकिन पत्रकारिता टॉप प्रायरिटी पर। जो समूह संपादक के चैम्बर को गौरान्वित करते हों, लेकिन चैम्बर में घुसने से पहले किसी के मन में भय न होता हो…अपनी बात खुलकर कहने में संकोच न होता हो…खबर की बात पर पुरजोर तरीके से जहां बहस की जा सके…जिनके साथी या तो सकारात्मक हो जाते हों या अपने रास्ते बदल लेते हों…। जिनने आनंद जी को न देखा हो, न जाना हो, शायद उन्हें ये पढ़कर अजीब लगेगा। लेकिन सच्चाई यही है। करियर का 7 साल पुराना किस्सा बताता हूं।

जबलपुर नईदुनिया में कांग्रेस के एक कद्दावर नेता के खिलाफ मेरे पास खबर थी। संपादक आनंद पाण्डे जी थे तो उनसे खबर के बारे में विस्तृत चर्चा हुई। खबर बनाने के बाद मैंने रुटीन कथन के लिए नेताजी को फोन लगाया। नेताजी ने फोन पर कोई जवाब नहीं दिया लेकिन ठीक 15 मिनिट बाद ऑफिस आए और आनंद जी के साथ एक-एक कप चाय पी और चले गए। नेताजी को उम्मीद थी कि आनंद जी से संबंध हैं और विशेष संवाददाता तो उनका जलवा देखकर सहम जाएगा। चूंकि मुझे खबर फाइल करनी थी तो मैंने कथन के लिए फिर एसएमएस किया। नेताजी फिर 5 मिनिट बाद ऑफिस में। कहने लगे कि दो दिन से मैं परेशान हूं। आपका रिपोर्टर टीएण्डसीपी में भी गया और अब भी खबर लगाना चाह रहा है। आनंद जी ने मुझे तत्काल बुलाया और पूछा कि इनकी क्या खबर है?

मैंने बताया कि इनने कालोनी बनाने में जिस जमीन का उपयोग किया है उसमें एक शपथ पत्र मृत बेटे का लगा दिया। कालोनी पूरी अवैध हो गई, इसके बाद भी डुप्लेक्स बेच रहे हैं। नेताजी ने कहा कि साहब मेरी जमीन, मैं कुछ भी करूं, इससे रिपोर्टर या पेपर को क्या मतलब। मैंने बताया कि जो लोग जमीन खरीदेंगे, वो रजिस्ट्री बाद में अवैध हो जाएगी। इसलिए खबर जानी चाहिए। तत्काल आनंद जी ने हाथ उठाकर नेताजी से कहा- देखिए, आप मेरे मित्र हैं, लेकिन अगर खबर है तो जाएगी। और प्रमोद के तर्क और कागज बताते हैं कि खबर जरूर जाना चाहिए। अगर आपका कोई पक्ष है तो आप बताईये।

नेताजी की मुंह देखने लायक था। खबर प्रमुखता से लगी और फॉलोअप भी गया। ऐसे ही जबलपुर के एक लीडिंग अखबार के लिए श्री विवेक तन्खा पिता तुल्य हैं। लेकिन आनंद जी जबलपुर रहने के दौरान विवेक तन्खा जी को सम्मान तो दिया लेकिन शरणागत कभी नहीं हुए। बस यही कार्यशैली पत्रकारिता और पत्रकार के सम्मान की रक्षा कर रही है। आनंद जी के साथ दूसरी पारी में काम करने का मौका मिला। संस्थान भी वही पुराना, नईदुनिया। लेकिन इस बार आनंद जी के तेवर और मिजाज में और भी पैनापन आ चुका है। सकारात्मकता का ग्राफ बढ़ गया है। खैर, एक बार आप भी मिलिए उनसे। पक्का वादा, कुछ तो जरूर सीखेंगे।

प्रमोद त्रिवेदी
सीनियर न्यूज एडीटर
9644391777
9425442579

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दिल्ली में दिनेश गौतम, आशुतोष श्रीवास्तव, विवेक तिवारी समेत दर्जनों नए-पुराने मीडियाकर्मियों को मिला इम्वा एवार्ड (देखें लिस्ट)

दिल्ली में मावलंकर हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह में केन्द्रीय मंत्री नज़मा हेपतुल्ला ने टीवी पत्रकार दिनेश गौतम को इम्वा (Indian media welfare association) बेस्ट मेल न्यूज एंकर अवॉर्ड दिया. कार्यक्रम का आयोजन इंडियन मीडिया वेलफेयर एसोसियेशन ने किया था.. आज तक की अंजना ओम कश्यप को बेस्ट फीमेल एंकर के तौर पर पुरस्कृत किया गया.. दिनेश गौतम फिलहाल लाइव इंडिया चैनल में कार्यरत हैं..इसके पहले सहारा और ज़ी न्यूज और डीडी में काम कर चुके दिनेश गौतम को पहले भी कई प्रतिष्ठित अवार्डस से सम्मानित किया जा चुका है..

मध्यप्रदेश के एमएमबीसी इनसाइट न्यूज चैनल के ब्यूरो चीफ विवेक तिवारी का चयन बेस्ट हूमेन जर्नलिस्ट कैटगरी के लिए किया गया… विवेक ने जबलपुर के बरगी के उन 55 गांवों की व्यथा की स्टोरी एवार्ड के लिए भेजी थी जिसमें आजादी के 68 सालों बाद भी लोग जल संकट के बीच जीवन चला रहे हैं. ये लोग नाले से पानी पीने के लिए मजबूर हैं… इसके साथ ही मध्यप्रदेश की बुझती अटल ज्योति, बोझ बनी बीमारी जैसी स्टोरी को भी मानवीय रूप से काफी सराहना मिली… विवेक ने अपने पत्रकार साथी फतेह सिह और जितेन्द्र विश्वकर्मा के साथ इस अवार्ड को ग्रहण किया…

भारत सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्लाह ने आशुतोष श्रीवास्तव को भी सम्मानित किया. बिहार में छपरा के कशिश न्यूज के संवाददाता आशुतोष श्रीवास्तव को उत्कृष्ठ रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कार से नवाजा गया. आशुतोष श्रीवास्तव ने छपरा में हुए 2013 में मिड-डे मिल में अपनी बेहतर रिपोर्टिंग क्षमता का भरपूर प्रदर्शन कर मामले के तह तक पहुंचने की भरपूर कोशिश की और गड़बडी का खुलासा किया. इस हादसे में 23 बच्चों की मौत हुई थी. आशुतोष की बेहतर रिपोर्टिंग को देखते हुए इम्वा ने बेस्ट रिपोर्टर के खिताब से नवाजा है.

पत्रकारों की संस्था इंडियन मीडिया वेल्फेयर एसोसिएशन (इम्वा) के पांचवें अवार्ड प्रोग्राम में अध्यक्ष राजीव निशाना ने देश भर के मेहनती पत्रकारों को सम्मानित किया और कराया। इस प्रोग्राम में भारत की अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्लाह मुख्य अतिथि के रुप में आई थी। केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्लाह ने पत्रकारों के लिए संसद में आवाज़ उठाने की भी बात की। साथ ही कहा कि पत्रकार ही देश की ताकत हैं, पत्रकारों को पूरा हक मिलना चाहिए साथ ही साथ पत्रकारों की हत्या की भी निंदा की। अवार्ड समारोह में भापजा के विरष्ट नेता रमेश रतन और पुलिस उपायुक्त भेरों सिंह गुजर नें भी पत्रकारों की सराहना की। 

5वें इम्वा अवार्ड से सम्मानित हुए पत्रकारों में बेस्ट नेशनल एंकर (महिला) अंजना ओम कश्यप आजतक, बेस्ट नेशनल एंकर (पुरुष) दिनेश गौतम लाइव इंडिया, लाइफ टाइम अचिवमेंट अवार्ड प्रभू चावला, बेस्ट प्राइम टाइम शो सुधीर चौधरी डीएनए, बेस्ट एक्सट्रा ऑर्डिनेरी जर्नलिस्ट अली अब्बास नकवी- ए2जेड़, बेस्ट दिल्ली एनसीआर चैनल टोटल टीवी, बेस्ट बोल्ड चैनल ए2जेड़ न्यूज़, बेस्ट रिजनल चैनल यूपी समाचार प्लस, बेस्ट ह.हि. चैनल जनता टीवी, बेस्ट अप ग्रोविंग चैनल साधना प्राइम न्यूज़, बेस्ट रिजनल चैनल राजस्थान ईटीवी, बेस्ट न्यूज़ एजेंसी एएनआई, बेस्ट क्राइम एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी, बेस्ट स्पोर्टस एडिटर राजीव मिश्रा इंडिया न्यूज़, बेस्ट पॉलिटिकल एडिटर मारुफ रज़ा, बेस्ट अंतर्राष्ट्रीय जर्नलिस्ट अखलाक उस्मानी, बेस्ट इन्वेसटिगेटिव जर्नलिस्ट फारुक नवाज़ी इंडिया टीवी, बेस्ट दिल्ली जर्नलिस्ट गिरिश निशाना डीडी न्यूज़, बेस्ट गेस्ट कॉर्डनिटेर मुन्ने भारती एनडीटीवी, बेस्ट यंग जर्नलिस्ट दिव्या अग्रवाल न्यूज़24, बेस्ट प्रोग्राम कॉर्डिनेटर अफसर आलम, बेस्ट प्रोग्राम सुहेल नदीम आईबीएन7 शाबाश इंडिया, बेस्ट क्रिकेटर जर्नलिस्ट चीराग गोठी, बेस्ट उर्दू जर्नलिस्ट शकील हसन शम्शी, बेस्ट एंकर हरियाणा पंजाब सुंदर सौलंकी, बेस्ट यंग पॉलिटिकल एडिटर ममता चतुर्वेदी, बेस्ट रेडियो जॉकी नावेद, बेस्ट प्रोग्राम कैमरामेन जीशान अली, बेस्ट कैमरामेन विजय प्रसाद इंडिया टीवी, बेस्ट एडिटर प्रिंट अश्विनी कुमार पंजाब केसरी को दिया।

साथ ही बेस्ट इनपुट एडिटर केके दूबे, बेस्ट सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट आदेश शर्मा,  बेस्ट सोशल मीडिया साईट भड़ास4मीडिया, बेस्ट लोकल रिपोर्टिंग रमाकांत, बेस्ट फिल्ड रिपोर्टर(म.) शगुफ्ता शीरिन, बेस्ट यंग जर्नलिस्ट विंदेश श्रीवास्तव, बेस्ट फोटो जर्नलिस्ट(पु.) राज के राज, बेस्ट फोटो जर्निलिस्ट (म)  सीमा ठाकुर, बेस्ट ह्युमन रिपोर्टर लता सिंह, बेस्ट एजुकेशन रिपोर्टर शालू अग्रवाल, बेस्ट पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी वीके शर्मा, बेस्ट असाइनमेंट एक्सीक्यूटिव अखिलेश द्विवेदी, बेस्ट फिल्ड जर्नलिस्ट दीपक दालमिया, बेस्ट इंवेस्टीगेटीव न्यूज़पेपर सनस्टार, बेस्ट ग्रामीण रिपोर्टर सुरेंद्र पंचाल एवं शेलेंद्र, बेस्ट इंटरटेंमेंट गीतम श्रावास्तव, बेस्ट पुलिस मैगज़िन स्वाती चौधरी पीसमेकर, बेस्ट स्पोर्टस एडिटर प्रिंट राकेश थपियाल, बेस्ट एक्टिव प्रेस कल्ब जसवंत राणा चंडीगढ़, बेस्ट ऑनलाइन जर्नलिस्ट कार्तिक हर्बोला, बेस्ट पीआर एजंसी शेलेश गिरी, बेस्ट सोशल वुमेन वीन्नी मेशरम, बेस्ट राइटर तेजपाल धामा एवं लक्ष्मण राव, बेस्ट डिवोशनल जीतू सिंह, बेस्ट सोशल डीसीपी विजय सिंह, बेस्ट सोशल एसीपी मो. इकबाल, आदि को सम्मानित किया गया।

वहीं इम्वा 2016 प्रोग्राम में गायक प्रेम भाटिया, शंकर साहनी, आईपीएस भैरों सिंह, हास्य कलाकार राजीव मल्हौत्रा, समेत कई अधिकारी, पत्रकार, समाजसेवी, वकील एवं समाज की मशहूर हस्तियां शामिल थी। इम्वा अध्यक्ष राजीव निशाना ने कहा कि देश भर से 350 से ज्यादा नॉमिनेशन आए थे जिसके बाद पूरी इम्वा की टीम ने सोच विचार करके इस लिस्ट को फाइनल किया।साथ ही आगे भी इस तरह से पत्रकारों का मान सम्मान बढ़ाते रहेंगे।

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स्टॉप एसिड कैंपेन को जर्मनी के डॉयचे वेले का बॉब्स पुरस्कार मिला

यह कैंपेन एसिड अटैक पीड़ितों की मदद के लिए काम करता आया है. कैंपेन को भारतीय वेबसाइट स्टॉप एसिड अटैक्स द्वारा संचालित किया जाता है. डॉयचे वेले के प्रतिष्ठित बॉब्स पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की गई है. अंतरराष्ट्रीय जूरी ने भारत के “स्टॉप एसिड अटैक्स” की मुहिम को चुना है. इसके अलावा एक अन्य भारतीय वेबसाइट चौपाल ने यूजर्स पुरस्कार जीता है. अन्य विजेता हैं बांग्लादेश, ईरान और जर्मनी से. डॉयचे वेले के महानिदेशक पेटर लिम्बुर्ग ने बॉब्स पुरस्कारों की घोषणा के मौके पर कहा, “अभिव्यक्ति की आजादी के लिहाज से 2016 अच्छा साल साबित नहीं हो रहा है. सभी महाद्वीपों में अभिव्यक्ति पर किसी ना किसी रूप में रोक लगाई जा रही है.”

बॉब्स यानि बेस्ट ऑफ ऑनलाइन एक्टिविज्म. अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जर्मन राजधानी बर्लिन में  बॉब्स के विजेताओं के नाम घोषित किए गए. अंतरराष्ट्रीय जूरी ने14 भाषाओं के ऑनलाइन प्रोजेक्टों पर चर्चा की. चार मुख्य श्रेणियों के विजेता इस प्रकार हैं:

सोशल चेंज
स्टॉप एसिड अटैक्स – भारत
स्टॉप एसिड अटैक्स (एसएए) एक ऐसा अभियान है जो एसिड हिंसा से पीड़ित महिलाओं को लड़ने का हौसला देता है. एसएए पीड़ित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का और उन्हें समाज में सम्मानजनक जगह दिलवाने के लिए काम करता है. अभियान का मकसद है कि वे महिलाएं, जिन्हें तेजाब हमले से जूझना पड़ा है, वे खुद को अकेला और कमजोर महसूस न करें. इन महिलाओं के लिए नई जिंदगी की राहें आसान करने में एसएए अपना योगदान दे रहा है.
भारत की ओर से जूरी सदस्य अभिनंदन सेखरी ने इस बारे में कहा, “एसिड हमलों को रोकना एक बहुत मुश्किल लड़ाई है. इन लोगों ने एसिड हमले की पीड़ितों की ओर समाज का दृष्टिकोण बदला है. ना केवल वे पीड़ितों को साथ लाने में सफल रहे हैं, बल्कि उन्होंने कानून में भी बदलाव करवाए हैं.”
www.stopacidattacks.org/

सिटीजन जर्नलिज्म
रेजर्स एज – बांग्लादेश
पिछले एक साल से बांग्लादेश में ब्लॉगर लगातार कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं. रेजर्स एज नाम की डॉक्यूमेंट्री फिल्म इन्हीं हत्याओं और ब्लॉगरों की दिक्कतों को दर्शाती है. फिल्म दिखाती है कि कैसे कट्टरपंथियों की हिम्मत लगातार बढ़ती चली जा रही है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है.  बांग्लादेश की जूरी सदस्य रफीदा अहमद खुद पिछले साल की विजेता हैं. उनके पति अविजीत रॉय की 2015 में हत्या कर दी गयी थी. रफीदा कहती हैं, “लगातार दो साल तक बांग्लादेश के प्रोजेक्ट का जीतना दिखाता है कि देश में हालात अब भी सुधरे नहीं हैं, बल्कि बिगड़ते ही चले जा रहे हैं पिछले पांच हफ्तों में चार लोगों की हत्या की जा चुकी है. धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ता, लेखक, ब्लॉगर, प्रोफेसर और अल्पसंख्यक अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं.”
https://youtu.be/Lxg_iHMGSjA

टेक फॉर गुड
गेरशाद – ईरान
गेरशाद एक स्मार्टफोन ऐप है जो ईरान में सक्रिय “मॉरल पुलिस” के खिलाफ काम करता है. ईरान में लोगों पर कई तरह की पाबंदियां हैं, मिसाल के तौर पर महिलाओं पर वहां हिजाब के बिना घर से बाहर निकलने पर रोक है. नियंत्रण रखने के लिए सड़कों पर अधिकारी तैनात होते हैं. इस ऐप के जरिये लोग उनकी लोकेशन को मार्क करते हैं ताकि दूसरों को उस रास्ते से बचाया जा सके.
ऐप चलाने वाले अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहते. लेकिन ईरान की जूरी सदस्य गुलनाज एसफानदियारी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह पुरस्कार हमारा ऐप इस्तेमाल करने वालों को प्रोत्साहित करेगा. बेशक इससे ईरान के उन लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा, जो इस मॉरल पुलिस से बचने की कोशिश में रहते हैं. गेरशाद के माध्यम से हम ईरान में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं.”
www.gershad.com

आर्ट्स एंड कल्चर
सेंट्रुम फ्युर पोलिटिशे शोएनहाइट – जर्मनी
अंग्रेजी में इसका मतलब है सेंटर फॉर पॉलिटिकल ब्यूटी. यह संस्था कई तरह के प्रदर्शन आयोजित करती है और बदलाव की मांग करती है. ‘मुर्दे आ रहे हैं’ नाम के एक प्रदर्शन के साथ इस संगठन ने यूरोप की शरणार्थी नीति की निंदा की और लोगों का ध्यान उन शरणार्थियों की ओर खींचा जो यूरोप आने की कोशिश में अपनी जान गंवा रहे हैं. जर्मनी की जूरी सदस्य काथारीना नोकुन ने कहा, “ये लोग राजनीतिक तौर पर असहज और मुश्किल मुद्दे उठाते हैं, और नागरिकों ताथ राजनीतिज्ञों का ध्यान खींचते हैं. वे इस बात से घबराते नहीं कि लोग चिढ़ेंगे.”
www.politicalbeauty.de

यूजर अवॉर्ड:
चौपाल
चौपाल विचारों को समर्पित एक ओपन प्लैटफॉर्म हैं. मसालेदार पत्रकारिता से हटकर यहां एक ऐसा मंच उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है जहां समसामयिक मसलों पर गंभीरता से विचार व्यक्त किए जा सकें. इस पेज पर अच्छे और महत्वपूर्ण विचार सिर्फ दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों से ही नहीं आते, बल्कि ये सुदूर गांव या कस्बे में बैठे किसी भी सामान्य-जन के हो सकते हैं. चौपाल एक गैरयलाभकारी प्रयास है. वेबसाइट का दावा है कि यदि भविष्य में इससे कुछ आय होती है, तो उसका उपयोग जरूरतमंदों की शिक्षा के लिए किया जाएगा.
चौपाल.भारत/

ग्लोबल मीडिया फोरम में पुरस्कार समारोह
डीडब्ल्यू के महानिदेशक पेटर लिम्बुर्ग ने बर्लिन में कहा, “डॉयचे वेले दुनिया भर में अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करता है. बॉब्स के जरिये हम भाषाओं और संस्कृतियों की सीमाओं के परे, उन साहसी और रचनात्मक लोगों को सम्मानित कर रहे हैं, जो अभिव्यक्ति की आजादी के लिए काम कर रहे हैं. सभी विजेता प्रोजेक्ट एक दूसरे के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकते हैं और अलग अलग दिशाओं में काम करते हुए भी एक साझा मकसद को पूरा करते हैं, और वह है उत्पीड़ितों की मदद करना.”

द बॉब्स – बेस्ट ऑफ आनलाइन एक्टिविज्म –  के लिए इस साल 2,300 से ज्यादा वेबसाइटों और ऑनलाइन प्रोजेक्टों के सुझाव बॉब्स की टीम तक पहुंचे. अंतरराष्ट्रीय जूरी ने 126 वेबसाइटों को नामांकित किया और इनमें से चार विजेता चुने. जूरी बैठक के सभी विजेताओं और फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड के विजेता को जून में जर्मनी के बॉन शहर में होने वाले ग्लोबल मीडिया फोरम के दौरान सम्मानित किया जाएगा.

बॉब्स के इतिहास में 2016 में दूसरी बार फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड दिया जाएगा. डॉयचे वेले यह पुरस्कार ऐसे व्यक्ति या ऐसी पहल को देता है जो अभिव्यक्ति की आजादी के लिए एक मिसाल कायम कर रहा हो. इस साल यह पुरस्कार तुर्की के दैनिक हुर्रियत के मुख्य संपादक सेदात एरगिन को दिया जा रहा है. एरगिन पर तुर्की में राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एरदोवान के कथित अपमान के आरोप में मुकदमा चल रहा है. पिछले साल यह पुरस्कार सऊदी अरब के ब्लॉगर रइफ बदावी को दिया गया था जो अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के कारण जेल में हैं.

बॉब्स 2016 की जूरी:
अभिनंदन सेखरी (हिन्दी), जॉर्जिया पॉपलवेल (अंग्रेजी), एरकान साका (तुर्की), अलीसा वहीद (बहासा इंडोनेशिया), ओकसाना रोमानियुक (यूक्रेनी), मौरिसिओ सांतोरो (पुर्तगाली), रफीदा बोन्या अहमद (बांग्ला), जूली ओवोनो (फ्रेंच), गुलनाज एसफानदियारी (फारसी), एलेक्सी कोवालेव (रूसी), डॉलोर्स रेग (स्पेनिश), मोना करीम (अरबी), काथारीना नोकुन (जर्मन)

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पत्रकारिता में नारद सम्मान के लिए आवेदन आमंत्रित

Subject : Entries for Narad Samman 2016

Dear Sir

As you are aware Indraprastha Vishva Samvad Kendra is organising it’s prestigious annual journalism award function for the year 2015-16 titled  – Narad Samman.

We will appreciate if you send entries from your esteemed organisation for the following categories…

वर्ष 2015 -16 में पत्रकारिता के लिए

1. आजीवन सेवा नारद सम्मान (Lifetime Achievement Award) {To be nominated by the jury}
2. उत्कृष्ट पत्रकारिता नारद सम्मान (Narad Samman for All over excellence)
3. स्त्री सरोकार/ महिला संवेदना पत्रकारिता नारद सम्मान (‌‌Reporting on Women Issues)
4. ग्रामीण पत्रकारिता नारद सम्मान (‌Rural Reporting Award)
5. विदेशी पत्रकार नारद सम्मान (भारत सम्बंधित पत्रकारिता) (‌Foreign Correspondent Reporting on India)
6. न्यूज़रूम सहयोग नारद सम्मान (‌Newsroom Support Award)
7. युवा पत्रकार नारद सम्मान (‌Young Reporter Below-30-Years with up to Three Years Experience)
8. उत्कृष्ट छायाचित्रकार (प्रिंट/टी वी) नारद सम्मान (‌Photo Journalist)
9. उत्कृष्ट स्तम्भकार नारद सम्मान (‌Columnist Award)
10. डिजिटल पत्रकारिता नारद सम्मान (‌Digital Media)
11. सोशल मीडिया पत्रकारिता नारद सम्मान (‌Social Media)

Kindly send the entries positively by Saturday May 7, 2016. The form for the entries could be downloaded from our website www.ivskdelhi.com You may send the entries by e-mail to naradsamman 2016@ivskdelhi.com or post on the following address

Narad Samman 2016
3-E/13 Jhandewalan Extension,
Near Videocon Tower, New Delhi-110055

A jury of eminent journalists has been established to short-list the best stories.

Looking forward to your participation.

Regards
VAGISH ISSAR
(Secretary)
9810068474

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टॉप तीन चैनलों में शुमार इंडिया न्यूज़ ने RedInk अवॉर्ड के तीन categories पर भी क़ब्ज़ा जमाया

Rana Yashwant : तीन साल के फ़ासले में इंडिया न्यूज़ ने देश के टॉप तीन चैनल में ना सिर्फ़ अपनी मज़बूत जगह बनायी है बल्कि पत्रकारिता के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान RedInk अवॉर्ड पर तीन categories में क़ब्ज़ा कर ये भी जता दिया है देश में इंडिया न्यूज़ ने पत्रकारिता का मान बहुत बढ़ाया है. बुंदेलखंड के किसानों पर अर्धसत्य के एपिसोड को मानवाधिकार के लिए बेहतरीन शो का पुरस्कार मिला.

देश में पीने के ज़हरीले पानी के लिए इंडिया न्यूज़ के कार्क्रम ऑपरेशन कालापानी को health and hygiene category में बेस्ट शो का पुरस्कार मिला. दीपिका पादुकोण के लव स्कैंडल पर बेस्ट entertainment शो का अवॉर्ड भी इंडिया न्यूज़ के हिस्से गया. 9 category में से तीन पर इंडिया न्यूज़ का क़ब्ज़ा. इंडिया न्यूज़ टीम को बहुत बहुत बधाई.

इंडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत के फेसबुक वॉल से.


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मातृश्री पुरस्कार पाने वाले 23 पत्रकारों की लिस्ट देखिए

दिल्ली : यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) की हिन्दी सेवा यूनीवार्ता के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार विश्वकर्मा, यूएनआई के निखिल व्यास और यूएनआई उर्दू के सैयद अंजुम तथा राष्ट्रीय सहारा के हिन्दी के समूह संपादक विजय राय समेत 23 पत्रकारों को 41वें मातृश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चांदनी चौक स्थित अभिषेक सिनेप्लेक्स में आयोजित पुरस्कार समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पत्रकारों को इस पुरस्कार से नवाजा। इस मौके पर पुरस्कार समिति के अध्यक्ष सुखवीर शरण अग्रवाल व संयोजक दिनेश शर्मा समेत तमाम बुद्धिजीवी मौजूद थे।

उपरोक्त पत्रकारों के अलावा, पीटीआई के वरिष्ठ छायाकार कमल किशोर, भाषा के उमेश सिंह को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सोनम कपूर अभिनीत फिल्म ‘‘नीरजा’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के पुरस्कार से सम्मानित किया गया और इस फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। सन स्टार के पूर्व समूह संपादक ओंकारेश्वर, नवभारत टाइम्स की कात्यायनी उप्रेती, पंजाब केसरी दिल्ली के भरत कपूर, दैनिक हिन्दुस्तान के संजय कुशवाहा, दैनिक जागरण के संतोष कुमार शर्मा, अमर उजाला के छायाकार विवेक निगम, पायनियर के प्रमोद सिंह, न्यू इंडियन एक्सप्रेस के सुमित कुमार सिंह, मिलेनियम पोस्ट के अनूप वर्मा, इंडिया न्यूज के अजीत श्रीवास्तव, एएनआई के सुशील बत्रा और इंडिया टीवी से शुभम शंकधर को यह पुरस्कार दिया गया।

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राष्ट्रपति ने बालेन्दु शर्मा दाधीच को ‘आत्माराम पुरस्कार’ से सम्मानित किया

नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट में कार्यरत वरिष्ठ तकनीकविद और पूर्व संपादक बालेन्दु शर्मा दाधीच को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को एक भव्य समारोह में प्रतिष्ठित ‘आत्माराम पुरस्कार’ से सम्मानित किया। श्री दाधीच को यह पुरस्कार विज्ञान और प्रौद्योगिकी के जरिए हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए दिया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और अनेक गणमान्य हस्तियाँ मौजूद थीं। पुरस्कार के तहत मानपत्र और एक लाख रुपए की राशि दी जाती है।

राष्ट्रपति ने श्री दाधीच को मानपत्र से सम्मानित किया। शाम को एक अन्य समारोह में केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री प्रो. राम शंकर कठेरिया ने शॉल ओढ़ाकर तथा एक लाख रुपये का चेक देकर उनका अभिनंदन किया। राष्ट्रपति ने जिन अन्य हिंदी विद्वानों, साहित्यकारों और विशेषज्ञों को हिंदी सेवी सम्मान प्रदान किया उनमें साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, प्रख्यात लेखक डॉ. नरेंद्र कोहली, महेश दर्पण, बलदेव वंशी, राजीव कटारा और सुषम बेदी शामिल हैं। पिछले वर्षों के दौरान इसरो के पूर्व चेयरमैन एमजीके मेनन, पद्म विभषण जयंत विष्णु नार्लीकर और प्रसिद्ध विज्ञान लेखक गुणाकर मुले भी आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। यह सम्मान मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से प्रदान किया जाता है।

बालेन्दु शर्मा दाधीच सूचना प्रौद्योगिकी और न्यू मीडिया के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं। हिंदी भाषा में तकनीकी सोच को आगे बढ़ाने तथा सूचना तकनीक के विविध पहलुओं को रहस्यजाल से मुक्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी सॉफ्टवेयरों तथा वेब सेवाओं के विकास, हिंदी में न्यू मीडिया (वेब पत्रकारिता) को प्रोत्साहित करने, तकनीकी विषयों पर विषद् हिंदी लेखन के लिए जाने-पहचाने जाने वाले श्री दाधीच पहले भी अनेक पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत किए जा चुके हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह और गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा भी उन्हें हिंदी भाषा के प्रति तकनीकी माध्यमों से उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित कर चुके हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका भी उपस्थित थे। आत्माराम पुरस्कार संस्थान की हिंदी सेवी सम्मान योजना में दिए जाने वाले सात पुरस्कारों में से एक है। यह विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले 14 देसी-विदेशी विद्वानों को प्रदान किया जाता है। अवार्ड दिए जाने संबंधी तस्वीर देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

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दैनिक भास्कर के विजय सिंह कौशिक को राज्यस्तरिय पुरस्कार

मुंबई : पत्रकारिता में सामाजिक परिवर्तन की ताकत है। पत्रकार अभिव्यक्ति के प्रत्येक माध्यम का सकारात्मक इस्तेमाल कर बदलाव ला सकते हैं। मीडिया को आलोचना के साथ-साथ अच्छे कार्यों को भी लोगों तक पहुंचाना चाहिए। यह बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही। श्री फडणवीस यशवंतराव चव्हाण सभागृह में आयोजित राज्य सरकार के उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार उत्तम कांबले को जीवनगौरव पुरस्कार से नवाजा गया जबकि दैनिक भास्कर के प्रमुख संवाददाता विजय सिंह कौशिक को राज्यस्तरिय बाबूराव विष्णू पराडकर पुरस्कार प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र पर जब-जब संकट आए, पत्रकारिता ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। उन्होंने कहा कि आज समाज के सभी क्षेत्रों में व्य़वसायिकता का प्रभाव बढ़ा है। फडणवीस ने कहा कि अभियुक्ति के माध्यम से लोगों की जीवन भी बदला जा सकता है। पत्रकार समाज में हो रहे परिवर्तन को सामने लाकर लोगों के लिए प्रेरणा देने का कार्य कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवनभर संघर्ष करने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री कांबले किसी नायक से कम नहीं हैं। समाज को इस तरह के नायकों की जरूरत है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष से पुरस्कार की रकम में बढ़ोतरी पर विचार किया जाए। 41 हजार रुपए के पुरस्कार की रकम 51 किया जाए।

उन्होंने कहा कि हम पत्रकारों की व्यक्ति और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सजग हैं। इस संबंध में मेरी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित किए गए वरिष्ठ पत्रकार श्री कांबले ने कहा कि भारत और इंडिया के बीच की दूरी खत्म करने का सामर्थ्य मीडिया में हैं। मैंने कई जटिल समस्याओं के समाधान के लिए अपनी पत्रकारिता का इस्तेमाल किया और समस्या का समाधान हासिल करने में सफल हुआ। सूचना व जनसम्पर्क विभाग की सचिव मनीषा म्हैसकर ने कहा कि मीडिया में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि मीडिया में सकारात्मक खबरों को  प्रमुख नहीं मिलती। इस मौके पर सूचना व जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी देवेंद्र भुजबल, शिवाजी मानकर, पुरस्कार परीक्षण समिति के सदस्य वरिष्ठ पत्रकार उदय तानपाठक,  ब्रजमोहन पांडे व केतकी घुगे आदि मौजूद रहे।

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पत्रकार प्रसून लतांत लाला जगत ज्योति प्रसाद स्मृति सम्मान से सम्मानित

मुंगेर। जानेमाने पत्रकार और जनसत्ता के महानगर संस्करण के संपादक प्रसून लतांत को मुंगेर के सूचना भवन में आयोजित समारोह में लाला जगत ज्योति प्रसाद स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान लाला जगत ज्योति प्रसाद की 18 पुण्यतिथि पर दिया गया। उनके अलावा यह सम्मान मुंगेर के युवा कवि कुमार विजय गुप्त को दिया गया। सूचना भवन में आयोजित समारोह में यह सम्मान सूचना एवं जनसंपर्क के उपनिदेशक कमलाकांत उपाध्याय ने दिया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता डॉ मृदुला झा ने की। समारोह के विशिष्ट अतिथि थे प्रसिद्ध समाजसेवी राजकुमार सरावगी तथा विशिष्ट अतिथि थीं मंजू सिन्हा।

सम्मान समारोह में प्रसून लतांत ने कहा कि मीडिया में वंचितों तथा आम लोग हाशिए पर हैं। उनके सवाल मुखरता से स्थान लेते नहीं दीखते। ऐसी स्थिति में लोगों को जगह-जगह पाठक मंच बनाकर जनदवाब की स्थिति बनानी चाहिए। लाला जगत ज्योति प्रसाद को तो उन्होंने देखा नहीं, पर उनकी कहानी अनेकों लोगों की जुबानी सुनी है। लोग कहते हैं ​कि वे सरल और संवेदनशील थे। जब तक व्यक्ति संवेदनशील नहीं होगा तबतक वह सुंदर और प्रभावकारी ढंग से लिख नहीं सकता। लाला जगत ज्योति प्रसाद का इस न​जरिए से मूल्यांकन करने की जरूरत है। वहीं कुमार विजय गुप्त ने सम्मानित करने के लिए आयोजको के प्रति आभार व्यक्त् किया।

सम्मान अपर्ण करने के उपरांत सूचना एवं जनसंपर्क् के उपनिदेशक कमलाकांत उपाध्याय ने कहा कि मुंगेर साहित्यक और सांस्कृतिक महत्व का स्थान है। यहां दिवंगत पत्रकारों को याद करने की परंपरा अनोखी है। मुंगेर के आयोजनों में आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्रा स्मृति समारोह और लाला जगत ज्योति प्रसाद स्मृति समारोह महत्वपूर्ण है। इन विभूतियों के सही मूल्याकन और उनकी स्मृति को जिंदा रखने के लिए दस्तावेजीकरण का काम किया जाना चाहिए।

राजकुमार सरावगी ने लाला जगत ज्योति प्रसाद को सहजता और सरलता की प्रतिमूर्ति बताया। वहीं मंजू सिन्हा ने उनके व्यक्त्त्वि के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया। वरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन ने कहा कि वे संवेदनशील थे और साहित्य तथा पत्रकारिता की पहली शर्त संवेदनशीलता है। प्रसून लतांत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वे वरिष्ठ पत्रकार हैं लेकिन पिछले 35 सालों से देश के विभिन्न हिस्सों में रचनात्मक कार्यों के जरिये ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोगों के बीच करते रहे हैं और इनके लिए आज भी पत्रकारिता मिशन है। अपने रचनात्मक कार्यों के जरिये साक्षरता प्रसार, असहायों की मदद, स्थानीय नेतृत्व का निर्माण कर सामूहिक प्रवृतियों को बढ़ावा देने के कार्यों में लगे हुए हैं। वे 1974 के छात्र आंदोलन से जुड़े और आपातकाल में भी हिम्मत के साथ युवाओं को संगठित करते रहे। बाद में गंगा मुक्ति आंदोलन से भी जुड़े और इस आंदोलन की कामयावी के लिये भी लिखते रहे और आंदोलन में भी भाग लेते रहे।

गांधी विचार में भागलपुर विश्वविघालय से एम.ए करने के बाद जनसत्ता राष्ट्रीय दैनिक में रहकर प्रसून लतांत गांधीजी के विचारों, आंदोलनों और उनसे जुड़े स्थलों पर हजारों लेख और खबरें लिख चुके हैं, जिनके लिये विभिन्न गांधीवादी संस्थाओं से विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किए गये हैं। उन्हें गांधी शांति प्रतिष्ठान द्वारा रचनात्मक कार्यों के लिये स्वामी प्रणवानंद शांति पुरस्कार प्रदान पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार प्रदान कर चुकी हैं। इन्हें पत्रकारिता और समाज सेवा दोनों क्षेत्र में दर्जनों पुरस्कार मिला है। इन्हें चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा इन्हें सामाजिक सरोकार से जुड़े रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कृत किया गया था, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा विकास पत्रकारिता एवार्ड से सम्मानित, धर्मशाला में हिमाचल केसरी एवार्ड से सम्मानित, उद्यन शर्मा पत्रकारिता एवार्ड, मायाकोणि अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता एवार्ड, अखिल भारतीय पंचायत परिषद, नई दिल्ली द्वारा सम्मानित, गांधीयन पत्रकारिता के लिये येलो अम्ब्रेला कंपनी, मुम्बई द्वारा सम्मानित आविद हुसैन रचनात्मक लेखन और पत्रकारिता सम्मान किया गया है। इनके सम्मान से पूरा अंग जनपद गौरवान्वित है। प्रभात मिलिन्द ने कुमार विजय गुप्त के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित किया। समारोह में सुधांशु शेखर ने लाला जगत ज्योति प्रसाद के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित किया।

इसके बाद आरंभ हुआ कवि सम्मेलन का दौर। युवा कवयित्री यशस्वी विश्वास ने जब अपनी रचना —’कुछ नए गम हबीब हो गए,फासले दिलो के करीब हो गए में सुनाया तो पूरा तालियों की गड़़गडाहट से गूंज उठा। वहीं भागलपुर से  आयी माहे लका ने अपने अंदाज में —’ ज्योत से ज्वाला बन सकती है बेटी हिन्दु​स्तान की’ सुनाया तो पूरे माहौल में उत्साह का संचार हो गया। मुंगेर के शायर अनिरूद्ध सिन्हा ने तरन्नुम में पेश की गयी गजल से अपनी खास छाप छोड़ी। वहीं मृदुला झा ने गांव पर केन्द्रित अपनी रचनाओं का पाठ किया। इस मौके पर किरण शर्मा, कुमार विजय गुप्त, फैयाज रश्क, यदुनंदन झा द्विज, लाडले शायन, कुमार कर्ण, इकवाल हसन इकवाल,तारिक मतीन, एहतेशाम आलम, विकास,एसबी भारती, निरंजन शर्मा आदि कवियों ने रचनाओं का पाठकर भाव और वोध को अभिव्यक्ति प्रदान ​की।समारोह में कमर अमान, कमर आलम, मधुसूदन आत्मीय, नरेशचंद राय, प्रकाश नारायण, नारायण जलान, विदुशेखर,सृष्टि  अदि ने हिस्सा लिया। समारोह का समापन प्रो शब्बीर हसन के उदबोधन से हुआ।

सज्जन कुमार गर्ग की रिपोर्ट.

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