
निर्मल कांत शुक्ल-
उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइनों के खिलाफ सवर्ण समाज सड़कों पर उतर पड़ा। उनका गुस्सा अब चेतावनी नहीं, सीधी चुनौती बन गया। बुधवार को नकटा दाना चौराहा सत्ता और सिस्टम के खिलाफ उठी हुंकार का गवाह बना, जहां प्रदर्शनकारियों ने UGC की अधिसूचना को “संविधान पर हमला” और “काला कानून” करार देते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर जोरदार प्रदर्शन किया। काली पट्टियां, काला टीका और मुंडन कराकर गुस्से का इजहार किया। विरोध इस बात का संकेत है कि यह आंदोलन अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। आंदोलन ने सरकार और व्यवस्था को खुली चेतावनी दे दी कि यदि यह अधिसूचना वापस नहीं ली गई, तो विरोध और भी उग्र होगा। सवर्ण समाज ने राष्ट्रपति को संबोधित सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षर से युक्त ज्ञापन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपा।
राहुल पंडित ने शंख बजाकर यूजीसी के काले कानून के खिलाफ शंखनाद किया। प्रदर्शन के दौरान नकटादाना चौराहे पर “काला कानून वापस लो”, “समानता के अधिकार से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लिखे बैनर और पोस्टर हाथों में लिए गए थे। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर और काला टीका लगाकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में निहित समानता के अधिकार के विरुद्ध है तथा सामान्य वर्ग के छात्रों और नागरिकों के हितों की अनदेखी करती है।
भीड़ की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
जुलूस के कचहरी पहुंचते ही काफिले में करीब डेढ़ सौ वकील शामिल हो गए, जिससे पूरी कचहरी में हर तरफ “यूजीसी बिल वापस लो” की ही गूंज सुनाई देने लगी। कचहरी में जब ज्ञापन लेने के लिए आंदोलनकारियों के समक्ष नगर मजिस्ट्रेट आए तो लोगों ने ज्ञापन सिर्फ जिलाधिकारी को ही देने की बात कही। बाद में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह अपने कार्यालय से बाहर आए और ज्ञापन लिया।
आंदोलन में त्याग और विरोध का प्रतीक बना मुंडन संस्कार
प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मण समाज के सीनियर जर्नलिस्ट निर्मल कांत शुक्ल एवं हरिओम वाजपेई (नादान) आदि ने मुंडन कराकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना रोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे अपने त्याग और विरोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि जब तक यह काला कानून वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस्तीफे के मुद्दे ने पकड़ा जोर
इस दौरान बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से जुड़े मामले को भी उठाया गया, जिससे UGC नियमों को वापस लेने की मांग को और अधिक बल मिला। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह अधिसूचना शैक्षणिक संस्थानों में भय और असंतोष का वातावरण उत्पन्न कर रही है।
अधिवक्ताओं का मिला समर्थन
आंदोलन को स्थानीय अधिवक्ताओं का भी समर्थन प्राप्त हुआ। वकीलों के एक समूह ने मौके पर पहुंचकर सवर्ण समाज की मांगों को न्यायसंगत बताया और कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए।
सवर्ण समाज की राष्ट्रपति से फरियाद
प्रदर्शन के समापन पर सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि UGC द्वारा लागू की गई यह अधिसूचना एकतरफा है और समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करती है। इसमें झूठी या फर्जी शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान न होने को गंभीर खामी बताते हुए इसके दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि देश की लगभग 40 से 50 करोड़ सामान्य वर्ग की जनसंख्या के संवैधानिक अधिकारों का इस अधिसूचना के माध्यम से उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही मांग की गई कि सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित और संविधानसम्मत नीति बनाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि UGC की यह अधिसूचना वापस नहीं ली गई, तो सवर्ण समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप देगा।
कार्यक्रम में इनकी रही भागीदारी
अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा के जिलाध्यक्ष अशोक वाजपेई एडवोकेट, संयुक्त बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव अवस्थी, सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सरोज कुमार बाजपेई, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध) अमित पाठक, संयुक्त बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अश्वनी अग्निहोत्री, डिग्री कॉलेज छात्र संघ के भूतपूर्व अध्यक्ष पवन शर्मा, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री सुखबीर सिंह भदौरिया, आकाशदीप मिश्रा, अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा, जिलाध्यक्ष पंकज शर्मा, ब्राह्मण चेतना परिषद के संजय पांडेय, अखिल भारतवर्ष ब्राह्मण महासभा के जिला महामंत्री दीपक शुक्ला, पंडित मणिकांत मिश्रा, करणी सेना के जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह, रामानुज अवस्थी, आशीष दीक्षित, पं. राहुल मिश्रा, आचार्य वेद प्रकाश शुक्ल, महेंद्र सिंह धामी, चंद्रशेखर उपाध्याय, पंडित श्रीराम शर्मा, नीरज शुक्ला एडवोकेट, वीरेंद्र पांडेय, प्रदीप मिश्रा, शिरीष सक्सेना एडवोकेट, हेमंत मिश्रा एडवोकेट, मनोज कुमार सिंह तोमर, संजय सिंह तोमर एडवोकेट, मो. उरूज एडवोकेट, अश्वनी शुक्ला, रामवीर मिश्रा, बरखेड़ा से मुकुल शर्मा व राहुल शर्मा आदि सैकड़ो की तादाद में सवर्ण समाज के पूरनपुर, बीसलपुर, कलीनगर, बरखेड़ा, अमरिया, जहानाबाद आदि क्षेत्र के लोग शामिल रहे।


