कल लात खाई, आज मिठाई!

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

कल कैमरे के सामने जमकर जिससे लात खाई, उसी से कैमरे के सामने आज मिठाई खाने का आनंद सिर्फ उन्नाव के पत्रकार कृष्णा तिवारी ही जान सकते हैं.

तिवारी जी को जब उन्नाव के सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने कैमरे के सामने सरेआम लतिया दिया तो पूरे देश के पत्रकारों में कोहराम मच गया.

उन्नाव और यूपी में जगह – जगह पत्रकारों ने इनके नहीं बल्कि मीडिया के स्वाभिमान के लिए जमकर धरना प्रदर्शन भी शुरू कर दिया था. लेकिन मीडिया का स्वाभिमान तो तब बचे, जब पत्रकारों में कुछ गैरत बची रह गई हो.

होना तो यह चाहिए था कि तिवारी जी शासन- प्रशासन से समझौता करने की बजाय अपने पत्रकार साथियों के साथ मिलकर या अकेले ही कानूनी लड़ाई लड़ते . ताकि अगली बार उन्हें या फिर उनके जैसे किसी और पत्रकार को कोई बददिमाग अफसर किसी सड़क छाप गुंडे की तरह पीटने से पहले सौ बार सोचता.

तिवारी जी ने खुद तो लात खाने के बाद मिठाई खा ली लेकिन शासन- प्रशासन को यह प्रेरणा भी दे दी कि मंदिर का घंटा समझकर जब चाहो पत्रकारों को बजा दिया करो.

बहरहाल तिवारी जी को पत्रकार मानना मीडिया की तौहीन है क्योंकि जो व्यक्ति खुद के लिए नहीं लड़ सकता वह भला पत्रकारिता करके किसी गरीब- लाचार के लिए क्या लड़ेगा…

राघवेंद्र प्रताप सिंह-

सीडीओ से पत्रकार कृष्णा तिवारी लात खाने के बाद अब मिठाई खा कर खुश हो लिए हैं। कृष्णा तिवारी का कहना है कि CDO ने उनसे माफी मांग ली है। पिटाई और मिठाई का वीडियो / फोटो तो दिखा लेकिन माफी का नहीं। तिवारी जी इसी को नाक कटान कहते हैं ,आ थू ….

अतुल तिवारी आक्रोश-

अफसोस है कि आपके साथ हुए अन्याय के लिए आवाज उठाई और खामखाँ कुछ तथाकथित लोगों के बुरे बने.. पूरे प्रदेश के आक्रोशित पत्रकारों के मुंह पर तमाचा है आपकी ये मुस्कुराहट.. अब समझ आ रहा है कि पत्रकारिता क्यों सिसक रही है और क्यों हम जैसे लोग हर दिन शोषण का शिकार हो रहे हैं..!

श्याम मीरा सिंह-

पत्रकार कृष्णा तिवारी को CDO साहब ने मना लिया है, माफ़ी भी माँग ली है और मिठाई भी खिला दी है. CDO साहब ने कहा है कि पहचान नहीं पाए “सॉरी”। अगर योगीराज में एक निर्दोष पत्रकार को थप्पड़ मारने की सजा एक मिठाई का डिब्बा है. तो मैं भी ऐसे अत्याचारी अधिकारियों में थप्पड़ मारना चाहता हूँ. और सजा के रूप में मोहल्ले में मिठाइयाँ बाँटने के लिए तैयार हूँ।

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Comments on “कल लात खाई, आज मिठाई!

  • विजय सिंघल says:

    ऐसे पत्रकार को चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाइए ऐसे लोग पत्रकारिता के नाम पर धब्बा है ऐसे पत्रकारों से दूर रहना चाइए जिनका खुद कोई बजूद नही ओर जो निर्भीक ईमानदार सच्चे पत्रकारों की छवि खराब कर रहे है

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  • श्रुतिमान शुक्ल says:

    उन्नाव में पत्रकार ने पिटने के बाद पिटाई करने वाले अधिकारी की ही मिठाई खाकर मामले को शांत कर दिया। क्या करते बेचारे। अगर यह नहीं होता तो और छीछालेदर होती। अपने पत्रकार भाईयों का एक गुट सीडीओ साहब के पास बैठकर उनकी तरफदारी और अपने ही साथी को पीटा जताना बहुत उचित बताते। न जाने कितने आरोप लग जाते उन्नाव के पत्रकार तिवारी जी पर। खैर, पत्रकार का एक ही मकसद है खबर। खबर के लिए पत्रकारों ने गोली खाने से भी परहेज नहीं किया है। कैसी बेइज्जती साहब, जब मारने वाला सरकार को प्रतिनिधि हो। पूरी फौज लेकर पत्रकार को पीट दिया तो यह कौन सी बहादुरी है। इंसाफ सबके साथ होता है। इसमें भी देर सबेर होगा।

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