सनातन धर्म रक्षा पीठ की ओर से अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने की बहस
मथुरा। मथुरा की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई सोमवार को हुई। यह याचिका सनातन धर्म रक्षापीठ, वृंदावन बनाम सुरेश कुमार खन्ना शीर्षक से दायर की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विजिलेंस जांच को प्रभावित किया, भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया तथा भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत की। याचिकाकर्ता संस्था सनातन धर्म रक्षापीठ, वृंदावन के संस्थापक-अध्यक्ष कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने आरोप लगाया कि मंत्री द्वारा आश्रमों पर अवैध कब्जा करने वाले भूमाफियाओं और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को संरक्षण प्रदान किया गया है।
पूर्व में न्यायालय ने वृंदावन कोतवाली से रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से न्यायालय असंतुष्ट रहा। अदालत ने पाया कि पुलिस ने एफआईआर से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत कर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया। जबकि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह जानकारी मांगी थी कि क्या सुरेश कुमार खन्ना के विरुद्ध कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है या नहीं।
वृंदावन पुलिस ने इसके उत्तर में एक अन्य एफआईआर की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, जो कि एक फर्जी वसीयत से संबंधित मामला था और जिसकी विवेचना अभी चल रही है। न्यायालय ने इसे असंगत मानते हुए तीन दिन के भीतर सटीक और स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की शिकायत पर, जिसमें वित्त मंत्री के हस्तक्षेप के आरोप हैं, कोई एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘ललिता कुमारी बनाम राज्य’ का हवाला देते हुए जोरदार तर्क प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संज्ञेय अपराध की स्थिति में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है, इसके लिए किसी प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा,
“यदि ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तो अपराधी ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले मंत्री भी अपराध को बढ़ावा देते रहेंगे।”
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ठाकुर किशन सिंह (पूर्व अध्यक्ष, बार एसोसिएशन मथुरा) और अधिवक्ता रीना एन. सिंह (सर्वोच्च न्यायालय) विशेष रूप से उपस्थित रहीं।


