
अमित मौर्य-
वाराणसी | सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन एक संगीन अपराध है — चाहे हथियार असली हो या नकली। भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत, यह न सिर्फ भय और अराजकता फैलाता है, बल्कि युवाओं को गलत दिशा में प्रेरित करता है। बावजूद इसके, पिंडरा विधायक अवधेश सिंह का भतीजा गौरव सिंह उर्फ़ पिंच्चू सोशल मीडिया पर पिस्टल लहराते हुए रील बनाता है, और प्रशासन चुप बैठा रहता है।
कानून क्या कहता है?
पूर्व अपर आयुक्त (मुख्यालय) वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, संतोष कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर आग्नेय अस्त्रों का प्रदर्शन, चाहे नकली ही क्यों न हो, एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज होना चाहिए।
फिर भी गौरव सिंह की वायरल रील पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई — रील में वह पिस्टल लहराते हुए कहता है, “कोई भी बाहुबली आएगा, उसे रेल दिया जाएगा”, जो खुलेआम कानून की अवमानना है।

प्लास्टिक की पिस्टल? यह कोई बचाव नहीं!
विधि विशेषज्ञों के अनुसार, पब्लिक डोमेन में भय फैलाने की मंशा से किया गया कोई भी हथियार प्रदर्शन — चाहे वह प्लास्टिक का हो या असली — दंडनीय है। सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट ‘निजी’ नहीं होता, यह जनता के सामने है और इसके लिए उत्तरदायित्व तय होता है।
रील से शुरू, रैकेट तक फैला मामला
गौरव सिंह पिंचु की कहानी सिर्फ पिस्टल लहराने तक सीमित नहीं है। ‘आशा फिल्म प्रोडक्शन’ के नाम पर एक महिला कलाकार से स्क्रीन टेस्ट के बहाने अश्लील मांगें की गईं। पीड़िता के अनुसार, “मुझसे कपड़े उतारने और कमरे में आने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी दी गई।”
पीड़िता ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, “मैं अभिनय का सपना लेकर वहां गई थी, लेकिन वहां स्क्रिप्ट नहीं, साजिशें थीं।” यह घटनाक्रम फिल्म निर्माण के नाम पर चल रहे देह व्यापार नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसका गौरव सिंह पिंचु से संबंध सामने आया है।
संपत्ति पर कब्जा और गठजोड़ का खेल
गौरव सिंह की गतिविधियाँ सिर्फ रील और फिल्म प्रोडक्शन तक सीमित नहीं हैं। सिगरा थाना क्षेत्र की जिस बहुचर्चित बिल्डिंग में अब ‘बनारसिया’ नामक रेस्टोरेंट चलता है, वह पहले ‘ग्रीनटेक प्रोजेक्ट प्रा. लि.’ नामक कंपनी की संपत्ति थी, जिसने निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी की और फरार हो गई।
इसके बाद राजेश शर्मा नामक व्यक्ति ने संपत्ति पर कब्जा किया और गौरव सिंह पिंचु को साझेदार बनाया। जब पिंचु को सत्ता का स्वाद लग गया, तो उसने राजेश पर ही केस दर्ज करवा उसे जेल भेज दिया और खुद पूरी संपत्ति पर कब्जा कर लिया।
‘तंदूर विला’ से ‘बनारसिया’ तक: बदला नाम, नहीं बदला काम
इस भवन में पहले ‘तंदूर विला’ नाम से रेस्टोरेंट चलता था, जिसके खिलाफ देह व्यापार की शिकायतें भी आई थीं। अब नाम बदलकर ‘बनारसिया’ रखा गया है, लेकिन भीतर की हकीकत नहीं बदली।
प्रशासन की चुप्पी और पुलिस की निष्क्रियता
सारा मामला सामने होने के बावजूद पुलिस कमिश्नर और थाना प्रभारी मौन हैं। एफआईआर दर्ज नहीं हुई, न ही महिला शोषण के मामले में जांच शुरू हुई। क्या पिंचु की राजनीतिक पहुंच प्रशासन की आँखों पर पट्टी बाँध रही है?
सोशल मीडिया पर हथियार प्रदर्शन अपराध, पर एफआईआर नहीं फिल्म के नाम पर महिला से यौन शोषण का प्रयास करोड़ों की ठगी वाली संपत्ति पर अवैध कब्जा राजनैतिक संरक्षण से प्रशासन मौन देह व्यापार और ब्लैकमेलिंग के आरोप विधायक अवधेश सिंह ने बदनामी के बाद पिंचु से सार्वजनिक दूरी बनाई
गौरव सिंह पिंचु की रील, सिर्फ एक मनोरंजन नहीं, बल्कि कानून की धज्जियों, प्रशासनिक चुप्पी और अपराध की परतों को उजागर करती है। यह मामला बताता है कि सत्ता और संबंधों की आड़ में अपराध किस हद तक फल-फूल सकते हैं। अब सवाल है – क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है?


