कमर वहीद नकवी-
कल शाम को अपने प्रिय साथी और जुझारू पत्रकार वीरेंद्र सेंगर की यादें, उनके साथ बिताये गये लम्हे, उनकी ऐतिहासिक रिपोर्टिंग, उनकी लाजवाब शख़्सीयत, सादगी और ईमानदारी से लबरेज़ उनका बर्ताव, सभी कुछ जैसे साक्षात सामने आ गया। सात महीने पहले उनके अचानक निधन की ख़बर ने झकझोर दिया था।
कल उनकी लिखे दो व्यंग्य संग्रहों ‘सच के सिवाय’ और ‘आगे और आग है’ के साथ-साथ उनकी स्मृति में तमाम मित्रों की यादों की स्मारिका ‘स्मृतियों में वीरेंद्र’ का विमोचन था। बड़ी संख्या में उनके तमाम मित्र वहाँ उपस्थित हुए थे। एक के बाद एक तमाम वक्ताओं ने बड़ी शिद्दत के साथ सेंगर जी को याद किया। हम सबके लिए बड़ा भावुक क्षण था यह। ख़ास कर इसलिए कि सेंगर जी की रिपोर्टों को जिस सम्मान से याद किया गया, वह अविस्मरणीय था। और यह भी कि उनकी ऐसी बहुत-सी रिपोर्टें उन्होंने अपने समय के अभूतपूर्व हिन्दी साप्ताहिक ‘चौथी दुनिया’ में की थीं, जिसका उस समय मैं भी हिस्सा था। ‘चौथी दुनिया’ बन्द हो गया था, कुछ साल बाद फिर छपना शुरू हुआ, लेकिन वह अब शायद नहीं छपता।
ख़ासकर मेरठ दंगों के दौरान हाशिमपुरा में पीएसी द्वारा मुसलमान नौजवानों के नरसंहार की हृदय विदारक ख़बर वीरेंद्र जी ने ही ब्रेक की थी। इससे तहलका मच गया था।


दूसरी बड़ी ख़बर दिल्ली के सुधा गोयल हत्याकांड के हत्यारों के बारे में थी, जो दहेज हत्या का पहला ऐसा मामला था, जिसमें निचली अदालत ने तीन आरोपियों को फाँसी की सज़ा सुनायी थी। हालाँकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह सज़ा उम्रक़ैद में बदल दी थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद तीनों दोषी कई साल तक जेल ही नहीं गये थे क्योंकि न्यायिक व्यवस्था के लूपहोल का फ़ायदा उठा कर फ़ैसले की फ़ाइल दबवा दी गयी थी।
कई महीनों की अथक मेहनत के बाद वीरेंद्र जी ने उन तीनों आरोपियों के नये ठिकानों का पता लगा लिया और ‘चौथी दुनिया’ में ख़बर छपने के बाद तीनों को जेल भेजा गया। (बाद में साथी धीरेन्द्र अस्थाना ने याद दिलाया कि यह ख़बर उन्होंने ब्रेक की थी। वैसे जहाँ तक याद पड़ता है, इस ख़बर में शायद कुछ सहयोग सेंगर जी ने भी किया था, शायद इसीलिए कुछ ग़लतफ़हमी हो गयी। लेकिन यह ख़बर धीरेन्द्र अस्थाना की ही थी, वही इस ख़बर की लीड लेकर आये थे और ख़बर धीरेन्द्र जी के ही नाम से ही छपी थी। इस त्रुटि के लिए खेद है)।
मेरठ में महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों के क़रीब चालीस दिनों तक चले धरने की वीरेंद्र जी की रिपोर्टें भी उनकी रिपोर्टिंग का एक शानदार दस्तावेज़ है। किसानों का यह धरना अपने आप में अनूठा था और इसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में बच्चे-बच्चे के भीतर एक ग़ज़ब की सामाजिक चेतना जगायी थी।
‘चौथी दुनिया’ आर्थिक रूप से एक छोटा अख़बार था, संसाधन नहीं Abhay Sharma ज़्यादातर रिपोर्टें रोज़ बसों से चल कर या फिर उस समय हमारे युवा फ़ोटोग्राफ़र Abha Purushottam Agrawal स्कूटर से हुई यात्राओं के ज़रिये हुईं।
कल के समारोह में प्रख्यात लेखक Purushottam Agrawal और प्रसिद्ध साहित्यकार व पूर्व डीजीपी विभूतिनारायण राय भी शामिल हुए। विभूति जी हाशिमपुरा कांड के समय ग़ाज़ियाबाद के एसएसपी थे और उन्होंने Santosh Bhartiya के विरुध्द एफ़आइआर दर्ज करायी थी।
समारोह में ‘चौथी दुनिया’ Vinod Agnihotri, osh Bhartiya, कृष्ण मोहन शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार Vinod Agnihotri भी शामिल हुए। संचालन मित्र Krishna MAlok Badauriya ने किया।
इस समारोह के सफल आयोजन के लिए वीरेंद्र जी की पत्नी Rita Bhadauria और Alok Badauriya जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।



