विजय सिंह ठकुराय-
कुछ खोजी पत्रकार और दुष्ट वामपंथी यह आरोप लगाते हैं कि हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री “अजित डोभाल” जी के सुपुत्र “विवेक डोभाल” एक ब्रिटिश नागरिक हैं, भारत की नागरिकता त्याग चुके हैं। विवेक के भाई शौर्य की एक पाकिस्तानी नागरिक के साथ पार्टनरशिप में कंपनी रह चुकी है, और कंपनी के तार बड़े सऊदी घरानों से जुड़े हुए हैं।
स्वयं विवेक डोभाल “काइमन आइलैंड” में GNY एशिया नामक कंपनी के द्वारा हेज फंड इन्वेस्टमेंट में व्यापार करते हैं। गौरतलब है कि काइमन आइलैंड दुनिया भर के टैक्सचोरों और काले धंधे वालों की आरामगाह के तौर पर दुनिया भर में कुख्यात है। स्वयं अजित डोभाल जी 2011 में आर्थिक भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए एक रिपोर्ट तैयार किये थे, जिसमें काइमन आइलैंड का जिक्र कर के ऐसे टैक्सचोरी के अड्डों पर सख्त लगाम लगाने की अनुशंसा किये थे।

विवेक जी की कंपनी का भारत में पंजीकरण आश्चर्यजनक रूप से नोटबन्दी के तुरंत बाद हुआ। बहुत से लोग इसे नोटबन्दी का फायदा उठा कर मनी-लांड्रिंग के लिए की गई प्लानिंग का हिस्सा बताते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि मैं विवेक की छवि खराब करने के लिए ये बातें कर रहा हूँ। बिल्कुल भी नहीं। मैं बताना चाहूंगा कि ये सब बातें फालतू की बकवास है।
दुनिया भर के लोग टैक्स बचाने के लिए काइमन आइलैंड में कंपनी खोलते हैं, यह गैरकानूनी तो है नहीं तो विवेक कुछ डॉलर बचाने के लिए विश्वगुरू देश को त्याग कर वहां कंपनी खोल लिए तो गलत क्या किया? कोई फ्राड तो किया नहीं? सब पेपर वर्क मौजूद है।
रही बात कंपनी की टाइमिंग की तो प्लानिंग विवेक के दिमाग में 2012 से चल रही थी। प्लानिंग पूरी नवंबर, 2016 में हुई तो क्या गलत है? इत्तेफाक भी हो सकता है? मनी लांड्रिंग के भी कोई सबूत नहीं हैं। उसी तरह भाई का पाकिस्तानी पार्टनर होना अथवा सऊदी के घरानों से कोई संबंध अगर है तो गलत क्या है? सऊदी से तो हमारे अच्छे संबंध हैं ही और हर पाकिस्तानी बदमाश हो, यह भी खुदा का कोई नियम नहीं है।
रही बात नागरिकता की तो अगले बंदे के लंदन में बिज़नेस फैले हुए हैं, खूब चक्कर लगता है, लंदन में समय बिताता है तो ब्रिटेन की नागरिकता ले लिया। क्या गलत किया? दिल से तो हिंदुस्तानी ही है। वैसे भी, आज यूरोप की नागरिकता फ्री में बंटने लगे तो विश्वगुरु की जनसंख्या एक दिन में 50% ड्राप हो जाएगी, यह भी एक कड़वा सच है, मानों या न मानों।
उपरोक्त सभी बयान के कुछ अंश मैंने विवेक डोभाल के ही दिए गए पब्लिक स्टेटमेंट्स से इकट्ठा किये हैं। और मैं विवेक से सहमत हूँ। जब आर्थिक भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं है तो ऐसी छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए।
वो अलग बात है कि अगर कांग्रेस राज में NSA के घर में विदेशी नागरिक होता, टैक्स हैवन्स मानी जाने वाली जगहों में कंपनी होती, सऊदी और पाकिस्तान के कनेक्शन होते तो इन सब बातों को दस अन्य फर्जी बातों से जोड़ कर, मिक्सी में घुमा कर, भगत लोग ऐसी-ऐसी कॉन्सपिरेसी थ्योरी बनाते, जिनके तार सीधे डीप स्टेट और सोरोज भाई की फाउंडेशन से जा कर जुड़ते।
पर हम ऐसा बिल्कुल नहीं करेंगे। विवेक भाई समझदार और ऊर्जावान हैं। बिल्कुल सही जा रहे हैं। मेरी शुभकामनाएं।
समझदार घरों के समझदार बच्चे ऐसे ही होते हैं, विकसित मुल्कों में कैरियर बनाते हैं। जो मूरख होते हैं, वो अपने बच्चों से मंदिर-मस्जिद खुदवाते हैं।
हो सके तो कुछ सीखें इनसे। अपने लिए नहीं तो अपने बच्चों के लिए। धन्यवाद।


