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पत्रकारों की आवाज दबा रहा ‘वाशिंगटन पोस्ट’ क्या खुद को बचा पाएगा?

वाशिंगटन पोस्ट ने बीते दिन अपने न्यूज़रूम के पुनर्गठन की घोषणा की। यह फैसला उस वक्त आया है जब जेफ बेजोस के स्वामित्व वाला यह प्रतिष्ठित अखबार घटती सब्सक्रिप्शन संख्या से जूझ रहा है। दूसरी तरफ संस्थान छोड़ रहे पत्रकारों का कहना है कि वाशिंगटन पोस्ट में उनकी आवाज को दबाया गया।

सीएनएन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने एक इंटरनल ईमेल में बताया कि न्यूज़रूम को पूरी तरह से पुनर्गठित किया जाएगा ताकि पाठकों की बदलती आदतों के अनुसार अखबार को ढाला जा सके।

क्या होंगे बड़े बदलाव?

मरे के मुताबिक, अखबार अब डिजिटल और प्रिंट कार्यप्रणालियों को अलग करेगा, एक केंद्रीय समाचार हब को मजबूत बनाएगा और कई न्यूज़ विभागों को पुनर्गठित करेगा। इसके साथ ही, WP Ventures नामक परियोजना को भी विस्तार दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर उपस्थिति बढ़ाने और नए व्यावसायिक अवसर खोजना होगा।

मरे ने अपने संदेश में लिखा कि अखबार को अब “पाठकों के प्रति जुनूनी” होना पड़ेगा और इसे एक “रीडर का न्यूज़ ऑर्गनाइज़ेशन” बनना होगा, न कि सिर्फ “राइटर्स का पेपर”। इसके लिए, वाशिंगटन पोस्ट अब पारंपरिक समाचारों की संख्या घटाएगा और कहानी कहने के नए फॉर्मेट विकसित करेगा।

डिजिटल-फर्स्ट रणनीति पर जोर

पोस्ट अब खुद को पूरी तरह डिजिटल-फर्स्ट न्यूज ऑर्गनाइज़ेशन के रूप में स्थापित करना चाहता है। हालांकि अखबार का प्रिंट संस्करण जारी रहेगा, लेकिन न्यूज़ डेस्क अब मुख्य रूप से डिजिटल उत्पादों पर केंद्रित होगी। इसके लिए एक नया “हेड ऑफ प्रिंट” नियुक्त किया जाएगा, जो प्रिंट उत्पादन को बाकी न्यूज़रूम से अलग रखेगा, लेकिन अखबार को रोचक, आकर्षक और जीवंत बनाए रखने का प्रयास करेगा।

न्यूज़रूम का नया स्ट्रक्चर

नेशनल सेक्शन को दो भागों में बांटा जाएगा :

  1. पॉलिटिक्स एंड गवर्नमेंट – इसमें राजनीति और सरकारी मामलों की रिपोर्टिंग होगी।
  2. नेशनल रिपोर्टिंग – इसमें वॉशिंगटन डीसी से बाहर के अहम मुद्दों और शख्सियतों पर ध्यान दिया जाएगा।

अन्य विभागों का विलय:बिजनेस, टेक्नोलॉजी, हेल्थ & साइंस, और क्लाइमेट को मिलाकर एक नया विभाग बनाया जाएगा, जो 21वीं सदी की प्रमुख सीमाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा।

नया दांव : WP Ventures को अब और अधिक संसाधन दिए जाएंगे। यह परियोजना पोस्ट के सीईओ विल लुईस द्वारा शुरू की गई थी, और इसका उद्देश्य पाठकों तक नए तरीकों से पहुंचना है।

गिरती सब्सक्रिप्शन और अंदरूनी टकराव

हाल के महीनों में वाशिंगटन पोस्ट को कई झटके लगे हैं। पिछले महीने जेफ बेजोस ने अखबार के ओपिनियन सेक्शन में बड़े बदलाव किए, जिसके कारण करीब 75,000 पाठकों ने सब्सक्रिप्शन रद्द कर दिया। इससे पहले, अक्टूबर में जब बेजोस ने एक कमला हैरिस समर्थक ओप-एड को प्रकाशित करने से रोका, तब भी अखबार ने 2.5 लाख सब्सक्राइबर्स खो दिए थे।

इन परिवर्तनों का प्रभाव जारी है। हाल ही में ओपिनियन एडिटर डेविड शिपली और तीन अन्य संपादकीय बोर्ड सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। अब, वरिष्ठ स्तंभकार रूथ मार्कस ने भी अखबार छोड़ दिया है। मार्कस का कहना है कि उनका एक लेख, जो बेजोस के बदलावों की आलोचना करता था, प्रकाशित नहीं किया गया।

मार्कस ने एक ईमेल में लिखा : “लगभग दो दशकों में पहली बार, मेरा लेख बिना किसी ठोस कारण के खारिज कर दिया गया। यह दिखाता है कि संपादकीय स्वतंत्रता अब कमजोर हो रही है।”

क्या वाशिंगटन पोस्ट खुद को बचा पाएगा?

जहां एक ओर न्यूज़रूम खुद को पाठकों के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अखबार के मालिक की नीतियां खुद ही अपने पत्रकारों को दबाने का काम कर रही हैं। यह विरोधाभास वाशिंगटन पोस्ट के भविष्य के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है : क्या यह रणनीति पाठकों को वापस ला पाएगी, या फिर यह उनकी नाराजगी को और बढ़ाएगी?

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