अमावस की एक रात… गोवर्द्धन परिक्रमा मार्ग… यशवंत को एक भिखारी का भूखदान

ये हैं इटवा के भगवान सिंह. इनकी पत्नी शादी के ग्यारह साल बाद ही गुजर गईं. नाम गुड्डी. भगवान जी ने पत्नी का नाम खुदवा रखा है. पत्नी के असमय चले जाने से दो बेटियों और एक बेटे के पालन पोषण समेत सब कुछ का भार इन्हीं पर आन पड़ा. रिक्शा चला चला कर इन्होंने दोनों बेटियों को ब्याह दिया और बेटे को सुनार के पेशे में उतार दिया. इनका मानना है कि यह सब गिरिराज जी की कृपा के कारण संभव हो पाया और उन्होंने उसी समय शपथ लिया था कि बेटे बेटी सब सही से सेटल हो जाएंगे तो सबसे कठिन वाली परिक्रमा करने आएंगे. इनसे हुई बातचीत का वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें>

इस भगवान ने खोल दी दिल की किताब

अगली स्लाइड में देखें> मनमोहक परिक्रमा मार्ग पर कहीं भांग की दुकान तो कहीं संपूर्ण कब्रिस्तान



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