सुप्रिया श्रीनेत-
गैस की किल्लत बनाम मोदी जी के एप्स्टीन गैंग की जुमलेबाज़ी
आज ना चाहते हुए भी 5 साल पहले कोरोना महामारी में मोदी सरकार का कुप्रबंधन और रूह कंपाने वाली भयावह तस्वीरें याद आ रही हैं. युद्ध west asia में चल रहा है, और उसका सबसे ज़्यादा खामियाजा हमें हिंदुस्तान में भोगना पड़ रहा है. जो सरकार कह रही थी कि हमारी तैयारी पूरी है, उसी सरकार ने अब देश Essential Commodities Act लागू कर दिया है.
अभी 10 दिन पहले तक सरकार ढिंढोरा पीट रही थी कि हमारे पास पर्याप्त तेल औऱ गैस का स्टाक है. अगर ऐसा था तो ECA लागू करने की जरूरत क्यों पड़ गई? सरकार कुछ भी खोखले दावे कर ले मगर ज़मीनी हकीकत ये है कि देश के तमाम क्षेत्रों में गैस और तेल की किल्लत दिख रही है.
- मुंबई में तमाम होटल और रेस्टोरेंट इसलिए बंद हो रहे हैं क्योंकि कमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी हो गई है
- बेंगलुरू होटल एसोसिएशन ने कहा कि कमर्शियल गैस की सप्लाई रुकने से कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है
- चेन्नई और हैदराबाद तक के कई रेस्टोरेंट्स मालिकों ने कहा कि अगर गैस सप्लाई जल्दी बहाल नहीं हुई तो खाना बनाने का काम बंद करना पड़ सकता है
- पुणे में LPG की कमी से गैस शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद हो गया
- गुजरात में गैस आधारित कई उद्योग बंद होने से लोग बेरोजगार हो गए हैं
- यहां तक कि महाराष्ट्र के कुछ इलाको में पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी-लंबी कतारें लगने की खबरें और तस्वीरें आ रही हैं
- तेल कंपनियों ने राशनिंग शुरू कर दी है, डीलर्स और गैस एजेंसियों को गैस नहीं मिल रही हैं. तमाम ऐसे लोग जिन्होंने 10 दिन पहले गैस बुक की थी, उन्हें अभी तक गैस की डिलीवरी नहीं मिली है. लोग किल्लत की आशंका से चिंतित और परेशान हैं
जो सरकार बार-बार कहती थी कि हम किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयार हैं, उस सरकार का इस किल्लत से निपटने का क्या प्लान है? क्योंकि विपक्ष को गरियाने से, नेहरू जी को कोसने से काम नहीं चलेगा. संकट की इस घड़ी में एपस्टीन के यार हरदीप पुरी किस बिल में छिप गए हैं, कहीं दिखाई क्यों नहीं दे रहे हैं? एपस्टीन का जो गैंग इस सरकार में भरा पड़ा है, वो कहाँ दुबका हुआ है?
सरकार ने पहले कहा हमारे पास 75 दिन का इमरजेंसी स्टॉक है, फिर सरकार के मंत्री कहते हैं हमारे पास सिर्फ 25 दिन का स्टॉक है. कौन सही, कौन गलत ये भगवान ही जानता है
भारत की इम्पोर्टेड कच्चे तेल पर निर्भरता
- 2014: 77.6%
- 2026: 88.6%
- निर्भरता 14.2% up
भारत का वार्षिक घरेलू कच्चे तेल उत्पादन
- 2014: 37.8 मिलियन मीट्रिक टन
- 2026: 28 मिलियन मीट्रिक टन
- उत्पादन 26% down
सरकार की नाकामी और संवेदनहीनता का ख़ामियाज़ा इस देश की मासूम जनता क्यों भुगते?
मगर इनको क्या? इन्होंने तो कोरोना में भी जनता से ताली-थाली बजवाई थी. अपनी नाकामी छिपाने के लिए श्मशानों को तिरपाल से ढकवाया था, अपनी जिम्मेदारी से मुँह मोड़ कर घूम-घूम कर चुनाव का प्रचार किया था. अगर फिर से कोई आपदा आई तो ये फिर से वही कलाकारी करने लगेंगे, इन्हें जनता की दुख-तकलीफ से क्या लेना-देना.
दुख तो इस बात का भी है कि हमारी मीडिया संकट से निपटने की तैयारी पर सवाल करने की जगह पाकिस्तान में डीजल-पेट्रोल का क्या भाव है, ये बता रही है. इसके बाद भी इनको गोदी मीडिया कह दो तो बुरा मान जाते हैं. आज लोग मोदी जी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर आशंकित हैं, लेकिन सरकार को अभी भी जुमलों से फुर्सत नहीं है!
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत की एक्स पोस्ट.


