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सियासत

संघर्ष विराम की खबर से भाजपा के पक्के समर्थक भी निराशा में डूब गये!

रंगनाथ सिंह-

संघर्ष-विराम और भाजपा के लाभार्थियों की रफूगरी –

आप लोगों ने वह किस्सा सुना होगा जिसमें बादशाह ने एक रफूगर रखा था जिसका काम था उसकी हवाई बातों को रफू करना। जिस तरह भारत और पाकिस्तान के सीजफायर की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहल कर दी उसके बाद प्रधानमंत्री के समर्थकों के पास रफूगरी का भारी जिम्मा आन पड़ा है।

जैसा कि सुबह लिखा था कि कोई भी स्वस्थ और सज्जन आदमी युद्ध नहीं चाहता मगर युद्ध की दिशा में दो कदम बढ़कर जिस तरह किसी तीसरे ने स्टैच्यू बोला उससे जनता के बीच सही सन्देश नहीं गया है। पाकिस्तानी डीजीएमओ से पहले फोन करवा देने भर की जहमत को भारत की कूटनीतिक जीत नहीं माना जा सकता। डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस और मार्को रूबियो द्वारा समझाता कराने के दावे के बाद एस जयशंकर के इस स्पष्टीकरण का कोई खास वजन नहीं बचेगा कि यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के बाद हुआ है। जाहिर है कि क्रेडिठ वार में डोनाल्ड ट्रंप ने बाजी मार ली है।

पाकिस्तान ने भारत के कई इलाकों में बमबारी करने के बावजूद लगातार यही कहा कि उसने कोई हमला नहीं किया है। वह लगातार झूठ बोलता रहा कि उसने भारत के पाँच लडाकू विमान मार गिराये हैं। पाकिस्तान की जिस टीम ने राहुल गांधी और सत्पाल मलिक का वीडियो दिखाया जिसमें पुलवामा पर बकवास की गयी थी, उसी टीम की प्रेस कांफ्रेस में पाक वायुसेना प्रमुख ने कहा कि पुलवामा में उन्होंने पाकिस्तान का Tactical Brilliance दिखाया था! यानी पाकिस्तान 180 डिग्री के कोण पर खड़े दो झूठ एक साथ बोल सकता है। पाकिस्तान की किताबों में आज तक पढ़ाया जाता है कि 1965 का युद्ध उन्होंने ही जीता था! ऐसे कैरेक्टर वाले बन्दे इस टकराव पर भी सफेद झूठ ही बोलेंगे क्योंकि उनकी हार का कोई चलता-फिरता ठोस प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है।

भारत सरकार बेहतर जानती होगी कि उसने यह निर्णय किसलिए लिया मगर मॉस कम्युनिकेशन का छात्र होने के नाते इस फैसले के सामान्य जन पर प्रभाव को देखकर लगता है कि भाजपा के पक्के समर्थक भी इस खबर के आने के बाद निराशा में डूब गये हैं। और जो लोग किसी न किसी तरह भाजपा के लाभार्थी हैं वे सरकारी सीजफायर की रफूगरी में लग गये हैं मगर जनमानस सरकारी रफूगरों के बयानिया पर शायद ही यकीन करेगा।

मेरी राय में अभी तक के घटनाक्रम में भारत सरकार का सबसे बड़ा निर्णय यह रहा है कि उसने किसी भी आतंकवादी गतिविधि को “युद्ध उकसाने वाला कृत्य” घोषित कर दिया है। यानी सरकार ने स्टैण्ड लिया है कि अब जब भी कोई ऐसा आतंकी हमला होगा सरकार पाकिस्तान में हमला करेगी। मगर यह तो भविष्य की बात हो गयी। अभी यह देखना है कि इस संघर्ष-विराम की क्या शर्तें तय होती हैं। जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि भारत ने क्या हासिल किया है तब तक इस मसले को लाभ या हानि के तराजू में तौलना जल्दबाजी होगी।

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