नई दिल्ली : भारत की प्रमुख मीडिया कंपनी जी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment Enterprises Ltd.) ने रिलायंस-डिज्नी के संयुक्त उद्यम जियोस्टार (JioStar) के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ज़ी का आरोप है कि JioStar ने लाइसेंस एग्रीमेंट समाप्त होने के बाद भी उसके म्यूजिक कैटलॉग का इस्तेमाल जारी रखा।
रॉयटर्स की वेबसाइट में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली की अदालत में 14 अप्रैल को दायर करीब 1800 पन्नों की याचिका में ज़ी ने दावा किया है कि रिलायंस-डिज्नी समूह ने उसके गानों और म्यूजिक कंटेंट का कम से कम 50 बार अनधिकृत इस्तेमाल किया। यह इस्तेमाल टीवी चैनलों, म्यूजिक और डांस शोज़ के साथ-साथ स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म JioHotstar पर भी किया गया।
ज़ी ने अदालत से करीब 30 लाख डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये) हर्जाने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि 2024 और 2025 में कई लाइसेंस समझौते समाप्त हो गए थे और व्यावसायिक शर्तों पर सहमति न बनने के कारण उनका नवीनीकरण नहीं हुआ। इसके बावजूद उसके गानों का इस्तेमाल जारी रखा गया, जो सीधा कॉपीराइट उल्लंघन है।
याचिका में ज़ी ने कहा, “इन म्यूजिक वर्क्स का अवैध दोहन कॉपीराइट उल्लंघन की श्रेणी में आता है।” कंपनी ने अदालत से मांग की है कि JioStar को उसके कंटेंट के किसी भी मौजूदा या भविष्य के अनधिकृत इस्तेमाल से रोका जाए।
मंगलवार को मामले की शुरुआती सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने JioStar को निर्देश दिया कि यदि ज़ी के कॉपीराइटेड गानों का इस्तेमाल अब भी हो रहा है तो उसे 15 दिनों के भीतर रोका जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की गई है।
JioStar, रिलायंस और डिज्नी के 8.5 अरब डॉलर के विलय के बाद बनी भारत की सबसे बड़ी मनोरंजन कंपनी है। उसके पास हजारों टीवी शोज़ और बड़े खेल आयोजनों के प्रसारण अधिकार हैं। वहीं JioHotstar को भारत का सबसे बड़ा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म माना जाता है, जिसके लगभग 50 करोड़ मासिक यूजर्स बताए जाते हैं।
दूसरी तरफ, ज़ी भारत के सबसे पुराने मीडिया समूहों में से एक है। कंपनी का दावा है कि उसके पास 17 भाषाओं में 19,450 से ज्यादा गानों का विशाल म्यूजिक कैटलॉग मौजूद है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कंपनियों के बीच पिछले कई महीनों से इस विवाद को लेकर बातचीत चल रही थी। दिसंबर 2025 में JioStar ने ज़ी को भेजे एक पत्र में कहा था कि उसने अपने प्लेटफॉर्म से कथित उल्लंघन वाले कंटेंट को हटाने के लिए “व्यापक कदम” उठाए हैं। हालांकि JioStar का कहना था कि पुराने आर्काइव कंटेंट की निष्क्रिय होस्टिंग को कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता। ज़ी इस दलील से सहमत नहीं है।
JioStar ने अपने जवाब में ज़ी की हर्जाने की मांग को “दबाव बनाने वाली” करार दिया है। 16 मार्च को भेजे गए पत्र में कंपनी ने कहा कि वह “व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक और सौहार्दपूर्ण समाधान” के लिए अब भी तैयार है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत का मीडिया और स्ट्रीमिंग बाजार तेजी से एकीकृत हो रहा है और कंटेंट अधिकारों को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि ज़ी और रिलायंस समूह पहले से ही लंदन में एक अरब डॉलर के क्रिकेट राइट्स विवाद को लेकर मध्यस्थता की प्रक्रिया में भी आमने-सामने हैं।



