
कन्हैया शुक्ला-
लोकसभा चुनाव 24 में प्रधानमंत्री मोदी को सभी चैनलों में देखा गया ..यहां तक कि सोशल मीडिया के कई और यूटूबरों को भी मोदी ने भरपूर समय दिया पर किसी ज़माने में सबसे क़रीबी सुभाष चंद्रा के चैनल ZEE नेटवर्क से दूरियां बना के रखी ..आख़िर क्या वज़ह है?
2014 में बीजेपी के आने के बाद सुभाष चंद्रा सबसे क़रीबी समझे जाते थे. और तो इनकी क़िताब The Z फेक्टर का विमोचन PM नरेंद्र मोदी ने किया और इस आयोजन में मोदी जी ने बढ़-चढ़ कर कई कहानियां सुनाई. इस मौक़े पर मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह, अनुपम खेर और बहुत बड़े दिग्गज़ शामिल हुए. पर बीते 6 साल में ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी ने ZEE से दूरियां बना ली? इतनी की 2024 लोकसभा चुनाव में मोदी ने ZEE से किनारा कर लिया है. अब तो ऐसा लग रहा है कि क़िताब के अगले पार्ट का नाम The Z से Zero फेक्टर में न बदल जाए. लेकिन लगता है ये क़िताब लिखी जा चुकी है बस 2024 चुनाव के बाद इसका विमोचन एजेंसियां करेंगी और पूरा देश पढ़ेगा!

सुभाष चंद्रा की पिछले 6 साल की अगर जिंदगी देखें तो बड़े बदलाव आ गए. पहला राज्यसभा मेंबर नहीं रहे.. जिसका ठीकरा अंदर ही अंदर चौधरी के ऊपर फूटा. इसके बाद चौधरी ने भी इनका साथ छोड़ कर अपना काला-सफ़ेद शुरू कर दिया. पर नेता जी जैसी छवि कॉपी करने वाले चंद्रा के ऊपर अब बहुत आरोप लग रहे हैं कि इन्होंने सिस्टम में रह कर अपना झोला इतना भर लिया की बैंक तक बर्बाद हो गए. सुभाष चंद्रा ने इतना झोल किया है कि अब बीजेपी इनको झेल नहीं पा रही है. इसलिए अबकी बार बीजेपी इनके पर काट रही है और प्रधानमंत्री का ZEE को इंटरव्यू न देने का मतलब चुनाव के बाद सुभाष चंद्रा के लिए अच्छे संकेत तो कतई नहीं दे रहे हैं. क्या आने वाले दिनों में पूर्व माननीय राज्यसभा मेम्बर साहब भी विदेश में ही पाए जाएंगे?
चैनल में उथलपुथल वैसे भी देखी जा सकती है. रोजाना लोग निकाले जा रहे हैं. कई राज्यों में.. ख़ासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इस बार बीजेपी के आने के बाद ZEE के फ़ीडबैक को लेकर नाराजगी भी है. ये तो तय है कि ZEE और मोदी में कुछ तो ऐसा है जिसका असर दिखना शुरू हो गया है और आने वाले 5 सालों में इसका परिणाम भी सामने होगा!


