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रिपोर्ट— भारत में वर्ष 2025 के दौरान नौ पत्रकारों की हत्या, 33 पर हमले

नई दिल्ली। भारत में वर्ष 2025 के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़े पैमाने पर हमले सामने आए हैं। फ्री स्पीच कलेक्टिव (FSC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, साल भर में देशभर में करीब 15 हजार मामलों में फ्री स्पीच उल्लंघन दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक मामले गुजरात (108) में दर्ज हुए, इसके बाद उत्तर प्रदेश (83), केरल (78), असम (62) और जम्मू-कश्मीर (51) का स्थान रहा।

दक्षिण भारत में कर्नाटक में नौ, आंध्र प्रदेश में सात, तमिलनाडु में छह और तेलंगाना में पांच मामलों में अभिव्यक्ति की आज़ादी के उल्लंघन दर्ज किए गए।

FSC के ट्रैकर के अनुसार, वर्ष 2025 में 11,385 सेंसरशिप के मामले, 208 सामूहिक सेंसरशिप और आपराधिक केस, जबकि 117 नागरिकों की गिरफ्तारी दर्ज की गई। इस दौरान आठ पत्रकारों और एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की हत्या की पुष्टि हुई।

X (ट्विटर) पर सेंसरशिप और सरकारी दबाव

रिपोर्ट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर की गई व्यापक सेंसरशिप का भी जिक्र है। मई 2025 में भारत सरकार के अनुरोध पर 8,000 से अधिक अकाउंट और जुलाई में 2,354 अकाउंट भारत में ब्लॉक किए गए।

X के मुताबिक, जनवरी से जून 2025 के बीच उसे भारत सरकार से 29,118 कंटेंट हटाने के अनुरोध मिले, जिनमें से 26,641 अनुरोधों का पालन किया गया। मई 2025 में X की ग्लोबल गवर्नमेंट अफेयर्स टीम ने पुष्टि की थी कि सहयोग (Sahyog) पोर्टल के माध्यम से शिकायतों के बाद हजारों अकाउंट ब्लॉक किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन अकाउंट्स को भारत में रोका गया, उनमें The Wire, Maktoob Media, Kashmir Times की संपादक अनुराधा भसीन, इंडियन एक्सप्रेस के डिप्टी एडिटर मुज़मील जलील, कंटेंट क्रिएटर अर्पित शर्मा, Reuters सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं। ये कार्रवाइयां पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गईं।

सहयोग पोर्टल पर सवाल

FSC ने बताया कि सहयोग पोर्टल की स्थापना गृह मंत्रालय ने वर्ष 2024 में आईटी एक्ट, 2000 के तहत “अवैध ऑनलाइन कंटेंट” हटाने के लिए की थी, लेकिन व्यवहार में इसका उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आलोचनात्मक आवाज़ों को दबाने के लिए किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी–फरवरी 2025 के दौरान 3,070 बार इंटरनेट शटडाउन या ऐप ब्लॉकिंग, और 785 टेकडाउन आदेश जारी किए गए।

पत्रकारों पर हमले और मौतें

रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में कुल 40 हमले दर्ज हुए, जिनमें से 33 पत्रकारों पर थे। उत्पीड़न के 19 मामलों में से 14 और धमकियों के 17 मामलों में से 12 सीधे तौर पर पत्रकारों के पेशेवर काम से जुड़े थे।

FSC ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर और उत्तराखंड में यूट्यूब न्यूज़ क्रिएटर राजीव प्रताप की मौत का विशेष उल्लेख किया है। कुल मिलाकर वर्ष 2025 में नौ पत्रकारों की मौत दर्ज की गई— उत्तर प्रदेश में दो, जबकि अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा, उत्तराखंड और पंजाब में एक-एक।

राजद्रोह और आपराधिक मामलों का बढ़ता इस्तेमाल

रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद प्रशासनिक विफलताओं पर सवाल उठाने को लेकर नेहा सिंह राठौर, माद्री काकोती (डॉ. मेडुसा) और शमिता यादव (Ranting Gola) पर राजद्रोह के मामले दर्ज किए गए। नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।

अगस्त 2025 में असम पुलिस ने The Wire के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, कंसल्टिंग एडिटर करण थापर, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, पाकिस्तानी पूर्व मुख्यमंत्री नजम सेठी और The Wire हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज के खिलाफ भी राजद्रोह का मामला दर्ज किया।

इसी महीने असम पुलिस ने पत्रकार अभिसार शर्मा पर उनके यूट्यूब शो के चलते राजद्रोह का केस दर्ज किया। वहीं, स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज किया गया।

विधान परिषद और छापेमारी

FSC ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति ने एक मामले में चार पत्रकारों और एक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता को पांच दिन की जेल की सिफारिश की। इसके अलावा, नवंबर 2025 में कश्मीर टाइम्स के जम्मू कार्यालय पर छापेमारी और खोजी पोर्टल The Reporter’s Collective का नॉन-प्रॉफिट टैक्स स्टेटस रद्द किया जाना भी रिपोर्ट में दर्ज है।

गिरती रैंकिंग, बढ़ती चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं का सीधा असर भारत की वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग पर पड़ा है, जो बीते कुछ वर्षों में लगातार नीचे गई है। FSC का कहना है कि 2025 भारत में मीडिया स्वतंत्रता के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण वर्षों में से एक बनकर सामने आया है।

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