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उत्तर प्रदेश

यूपी में जंगलराज : जेल के चिकित्साधिकारी को क्यों है मौत का अंदेशा, पढ़िए पूरा पत्र

सेवा में
महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
महानिदेशालय स्वास्थ्य भवन लखनऊ उ.प्र.
विषय – हत्या से पूर्व का बयान
महोदय

सविनय निवेदन है कि मैं जिला कारागार फिरोजाबाद में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हूँ। मैं डायबिटीज का मरीज़ हूँ और सुबह-शाम इन्सुलिन लेता हूँ। जनवरी 2016 में जब मैं नवीन प्रा. स्वास्थ्य केंद्र इटौली पर तैनात था, तब मुझे पैनिक एंग्जायटी की समस्या हो गई थी। ढाई महीने तक नियमित दवा लेने और 21 फरवरी से 22 मार्च तक स्वास्थ्य लाभ हेतु अर्जित अवकाश लेने के बाद में पूरी तरह ठीक हो गया।

सेवा में
महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
महानिदेशालय स्वास्थ्य भवन लखनऊ उ.प्र.
विषय – हत्या से पूर्व का बयान
महोदय

सविनय निवेदन है कि मैं जिला कारागार फिरोजाबाद में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हूँ। मैं डायबिटीज का मरीज़ हूँ और सुबह-शाम इन्सुलिन लेता हूँ। जनवरी 2016 में जब मैं नवीन प्रा. स्वास्थ्य केंद्र इटौली पर तैनात था, तब मुझे पैनिक एंग्जायटी की समस्या हो गई थी। ढाई महीने तक नियमित दवा लेने और 21 फरवरी से 22 मार्च तक स्वास्थ्य लाभ हेतु अर्जित अवकाश लेने के बाद में पूरी तरह ठीक हो गया।

मैं छुट्टी से वापस लौटा तो मुझे पता चला कि मुख्य चिकित्साधिकारी ने बदले की भावना से मेरा ट्रांसफर जिला कारागार में कर दिया है। जिला कारागार में लेवल तीन की पोस्ट खाली थी जबकि मैं लेवल एक में हूँ। लेवल एक की जिले में 45 पोस्ट खाली हैं और 35 चिकित्साधिकारी कार्यरत हैं और लेवल-2 की ग्यारह पोस्ट हैं और लेकिन सभी भरी हैं। मैंने मुख्य चिकित्साधिकारी को 15.02.16 को आशु लिपिक रामजीलाल गुप्ता के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था जो ACR भेजने के पैसे लेता था और उसके द्वारा ACR न भेजने के कारण 2014 में सात चिकित्साधिकारियों का प्रमोशन लेवल-1 से लेवल -2 में नहीं हो सका। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बजाय जांच करने के उसकी पेंशन सुनिश्चित कर दी।

19 मई को मैंने एक पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखा  जिसमें अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर अपनी मूल तैनाती नवीन प्रा. स्वा केंद इटौली पर करने का निवेदन किया। मैंने RTI के माध्यम से आशु लिपिक रामजीलाल गुप्ता पर हुई कार्रवाई के बारे में पूछा। मुख्य चिकित्साधिकारी महोदय ने RTI का जवाब तो आज तक नहीं दिया, तीन दिन बाद जेल से डॉ धर्मेंद्र हरजानी का ट्रांसफर पर दिया। इससे मेरा ड्यूटी सिड्यूल और मुश्किल हो गया और नियमित दवा लेने के बावजूद मेरी स्वास्थ्य समस्या सुधरने के बजाय बढ़ गई। 22 जून को मैंने पुनः चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर अपनी स्वास्थ्य समस्या बताई और चिकित्सा अवकाश के लिए कहा। महोदय ने स्पष्ट शब्दों में कहा – हम तुम्हें चिकित्सा अवकाश नहीं दे सकते।

10 जुलाई को डॉ अमित जिंदल का जेल से ट्रांसफर कर दिया और डॉ संजीव कुमार को उनकी जगह जेल में ट्रांसफर कर दिया। १२ जून को मैंने पुनः जिला अस्पताल के सीनियर कंसलटेंट डॉ अजय अग्रवाल से परामर्श लिया। उन्होंने मुझे दो हफ्ते का रेस्ट लिखा है। दांत में अक्सर दर्द होता रहता है , इसके लिए जिला अस्पताल के डेंटिस्ट ने RCTकराने के लिए लिखा है। मैंने स्वास्थ्य संबंधी नए-पुराने प्रपत्रों के साथ 15 जुलाई को चिकित्सा अवकाश के लिए लिखित फॉर्म भरकर चिकित्साधिकारी को दिया है। मगर महोदय ने अवकाश देने से मना कर दिया है।

बिना किसी वजह के मेरा मार्च के बाद से वेतन भी मुख्य चिकित्साधिकारी ने रोक रखा है। मौखिक रूप से कई बार और 09.06.16 को मैंने लिखित पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को दिया पर मार्च के बाद से मेरा वेतन अभी तक नहीं निकल सका है।

मैं 23.06.16 को अपर निदेशक आगरा व महानिदेशक महोदय को अपने स्वास्थ्य,चिकित्सा अवकाश व वेतन के बारे में लिख चुका हूँ पर कहीं से कोई राहत नहीं मिली। महोदय, इनसोम्निया व एंग्जायटी के लिए सरटालिन, क्लोनेज़ीपाम व ज़ोल्पिडेम मुझे नियमित लेनी पड़ती हैं। रात में नींद बहुत देर से आती है और दिन में दोपहर तक नींद आती रहती है। मैं अकेला  रहता हूँ। जेल शहर से पांच किलोमीटर दूर है। माचिस, आटा, सब्जी तक लेने शहर से पांच किलोमीटर जाना पड़ता है। एंग्जायटी के समय शुगर लेवल तेज़ी से नीचे गिरता है। 15.05.16 को मेरा शुगर लेवल 48 व 23.05.16 को 52 व 10.06.16 को 56 था। ऐसे मैं भी मुख्य चिकित्साधिकारी शाम पांच से सुबह नौ बजे तक कारागार की ड्यूटी। दिन में नौ से पांच तक पोस्टमॉर्टम ड्यूटी और पांच से सुबह नौ बजे तक फिर कारागार ड्यूटी की उम्मीद करते हैं।

29 मई को मैंने सात पोस्टमॉर्टम किए। सड़ी हुई लाशें जहां खड़ा होना दुश्वार था। मोरचरी ऐसी जगह पर है जहां का तापमान 45 डिग्री से ऊपर रहा होगा। बैठ कर खाना खाने तक की जगह नहीं है। पंखा चलवाने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक को कई फोन किए। डेढ़ घंटा पंखा चला कर बंद कर दिया। अगर पानी की बोतल और मीठा मेरे साथ न होता और जब तक आधा किलोमीटर से पानी लेकर व्यक्ति आएगा तब तक किसी भी इन्सुलिन लेने वाले व्यक्ति की हाइपोग्लाइसीमिया से मौत हो सकती है।

मेरी स्वास्थ्य समस्या ऐसी है जिसके साथ मैं काम तो कर सकता हूँ परंतु उससे तात्कालिक रूप से वह मेरे लिए जानलेवा हो सकता है और  लंबे समय में मेरे स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डाल सकता है। मेरे साथ भी कहीं पर किसी भी तरह से ऐसी दुर्घटना घटती है तो इसके लिए सीधे तौर पर मुख्य चिकित्साधिकारी को ज़िम्मेदार ठहराया जाए। मेरा वेतन निकलवा दिया जाए। मेरा NPS का और ACP का पैसा मेरे माँ-बाप को दे दिया जाए (रामजीलाल गुप्ता द्वारा ACR न भेजने के कारण मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और ACP की पहली लिस्ट में मेरा नाम नहीं है ) । 2014 में मेरे जवान भाई की मृत्य के बाद उसकी आठ साल व चार साल की बच्चियां मुझ पर आश्रित हैं सरकार उनके पालन-पोषण व अध्ययन की व्यवस्था करे। जिन – जिन अधिकारियों को मैंने पत्र लिखे हैं वे सब मेरी फाइल में उपलब्ध हैं।

सधन्यवाद

प्रार्थी
डॉ राम प्रकाश
चिकित्साधिकारी
जिला कारागार फिरोजाबाद उ. प्र.
वरिष्ठता क्रमांक – 13517 
मोबाइल – 8273492240

प्रतियां
1. महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य लखनऊ        
2. अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आगरा
3. मुख्य चिकित्साधिकारी फिरोजाबाद

संलग्नक-
1. 15.02.16 को मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखे पत्र की प्रति
2. 19.05.16 को मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखे पत्र की प्रति
3. 22.06.16 को मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखे पत्र की प्रति
4. पुराने व नए चिकित्सा संबंधी दस्तावेज पृष्ठ

दिनांक-  25.07.2016

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