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ये जो हमारी सरकार है – आज देखिये उसके कुछ कारनामे और कार्यशैली!

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों की कुछ प्रमुख खबरें

1. केजरीवाल गिरफ्तार हुए तो जेल से सरकार चलाएंगे : आम आदमी पार्टी। जाहिर है कि जेल से सरकार नहीं चला सकते हैं और चला ही लेंगे तो जेल क्यों जाएंगे। पर शीर्षक यही है। जाहिर है, आम आदमी पार्टी ने तय किया है कि मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया गया तो वे किसी और को मुख्यमंत्री नहीं चुनेंगे और जो भी मुख्यमंत्री का काम करेगा वह मुख्यमंत्री घोषित नहीं होगा। यह केंद्र सरकार की मनमानी से निपटने का एक तरीका हो सकता है और दिलचस्प है। लेकिन हिन्दी के अखबार नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, जेल भेज देंगे तो भी करते रहेंगे दिल्ली की सेवा। उप शीर्षक है, विधायकों ने गिरफ्तारी होने पर भी मुख्यमंत्री बने रहने का आग्रह किया। जाहिर है, वे इस्तीफा नहीं देंगे और जब तक इस्तीफा नहीं देंगे, कोई दूसरा मुख्यमंत्री नहीं होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया में दिल्ली में प्रदूषण के कारण ऑड-इवन फिर शुरू होने की खबर लीड है तो दिल्ली सरकार से संबंधित यह खबर सेकेंड लीड है। यहां इस खबर का इंट्रो है, गिरफ्तार किये जाने पर इस्तीफा देने का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है।

2. दूसरी खबर नवोदय टाइम्स में है, एलजी ने अधिकारियों को सड़कों और फुटपाथों की साफ-सफाई का निर्देश दिया। आप जानते हैं कि दिल्ली की जनता ने इस काम के लिए आम आदमी पार्टी को चुना है। केंद्र सरकार को यह मंजूर नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव हार गई उसके बाद कानून में संशोधन कर यह व्यवस्था की गई है। और यह व्यवस्था उसके लिए है जिसपर मार-पीट का आरोप है और अदालत ने इस संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्हें पुराने मुकदमे से राहत दी है। 

3. इंडियन एक्सप्रेस ने लीड खबर छापी है कि हीरा लाल समारिया को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद की शपथ दिलाई गई और शीर्षक में ही अखबार ने बताया है कि चुनाव समिति में रहे कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति को लिखा है कि उन्हें अंधेरे में रखा गया। उन्होंने बैठक का समय पुनर्निधारित करने का आग्रह किया था पर उन्हें सूचना ही नहीं दी गई। यह सरकार की कार्यशैली है और महत्वपूर्ण नियुक्तियों के संबंध में है और यह कोई नई बात नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने इस खबर को महत्व दिया। यह अच्छी बात है।

4. इस खबर के साथ ही इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा – राज्यपालों को राज्य सरकारों के सुप्रीम कोर्ट आने से पहले कार्रवाई करनी चाहिये। अदालत ने कहा है कि राज्यपाल निर्वाचित नहीं होते हैं, उन्हें स्वयं विचार करना चाहिये। यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में भी पहले पन्ने पर प्रमुखता से है। यहां शीर्षक है, विधेयकों पर बैठे रहने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपालों की आलोचना की। द हिन्दू में यह खबर लीड है और शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यपालों द्वारा देर किया जाना एक गंभीर चिन्ता है।

कहने की जरूरत नहीं है कि यह उन राज्यों में होता है जहां की सरकार भाजपा गिरा या खरीद नहीं पाई है और किसी कारण से गैर भाजपा की सरकार है। मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक में निर्वाचित सरकारों का भाजपा ने क्या किया है यह किसी से छिपा नहीं है और अभी इसपर चर्चा की जरूरत नहीं है। लेकिन राज्यपाल क्या करते हैं और किसलिये, किसे इस पद पर बैठाया जाता है यह सब चर्चा का मुद्दा हो सकता है जो अब मीडिया से गायब  रहता है। दूसरी ओर, यह भी दिखाई दे रहा है कि केंद्र सरकार के अधिकार और कार्य से संबंधित कितने मामले पिछले कुछ वर्षों में निपटाये गये।

सरकार अपने अधिकार से आगे बढ़कर काम करती रही हैं या इतने विवाद खड़े किये हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट को निपटाना पड़ा है और कहने की जरूरत नहीं है कि ये मामले नहीं होते तो सुप्रीम कोर्ट आम लोगों से संबंधित मामलों पर काम कर पाती। शायद अदाणी का मामला टलता नहीं रह पाता। लेकिन वह अलग मुद्दा है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने सुप्रीम कोर्ट के इस कथन को हाइलाइट किया है कि, संविधान को लागू कराने के लिए हम हैं लेकिन यह ऐसा मामला है (जिसपर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी है) जिसे राज्यपाल और मुख्यमंत्री को तय करने में सक्षम होना चाहिए। 

5. द टेलीग्राफ की एक खबर के अनुसार, अदाणी के मामले में सुनवाई में देरी के कारणों पर मुख्य न्यायाधीश कार्रवाई करेंगे। इस खबर के अनुसार मामला यह है कि पूंजी बाजार में अदाणी समूह द्वारा कथित हेराफेरी से संबंधित शिकायतों से संबंधित मामला मूल रूप से 28 अगस्त को लिस्ट हुआ था पर उसे बार-बार टाला जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार को कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से इस मामले को देखने के लिए कहेंगे। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस मामले में मौखिक शिकायत की थी।

6. महादेव ऐप्प आप जानते हैं। छत्तीसगढ़ का मामला है और काफी पहले पकड़ा गया था। इसके संचालकों के विदेश में बैठे होने का पता चला उसके बाद मामला ठंडा पड़ा रहा। पिछले दिनों आरोप लगा कि इस ऐप्प के संचालकों ने मुख्यमंत्री को रिश्वत दी है और इसमें कैश कूरियर का भी जिक्र आया। पहले विदेशों से या में पैसों का लेन-देन हवाला के जरिये होता था लेकिन अब, ‘ना खाऊंगा ना खाने दूंगा’ के शासन में यह काम कूरियर वाले कर रहे हैं और सरकार की जानकारी है में है। ऐसे में भाजपा के आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने जब याद दिलाया कि ईडी को इसपर बहुत पहले कार्रवाई करनी थी तथा अब अब चुनाव के समय इस मामले को उठाया गया है तो ईडी ने (संभवतः मजबूरी में) इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने के लिए कहा है। एक बार रेड नोटस जारी हो जाये तो रद्द कराने का तरीका हम एक अलग मामले में देख चुके हैं।

यहां दिलचस्प है कि कथित रूप से केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर के बेटे के  वायरल वीडियो में भी कूरियर से कैश पहुंचाने की चर्चा है। वीडियो से साफ है कि मंत्री पुत्र करोड़ों में खेल रहा है। और इसके लिए कूरियर से नकद पहुंचाये जाने की नई व्यवस्था हुई है जिसकी जानकारी आम लोगों को नहीं थी। हम तो यही जानते थे कि भाजपा नेता एम्बुलेंस में काला धन इधर-उधर करते हैं। पर लाख टके का सवाल है कि इसकी जांच होगी कि नहीं?

इस मामले में यह दिलचस्प है कि  द हिन्दू की एक खबर के अनुसार भाजपा ने एक वीडियो साझा किया है जिसमें एक व्यक्ति दावा करता है कि वह महादेव ऐप्प का वास्तविक स्वामी है और उसने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये दिये हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि भाजपा अब ईडी की सहायता से चुनाव लड़ रही है। यहां उल्लेखनीय है कि रिश्वत लेना अपराध है तो देना भी अपराध है और देने वाला ऐसे वीडियो अपने स्तर पर जारी नहीं करेगा। अगर करे तो रिश्वत देने के आरोप में पहले उसे गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिये। वह तो अपना अपराध कैमरे पर स्वीकार कर चुका है। पैसे कैसे दिये और अगर कूरियर से भेजे तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। पर यह सब नहीं हुआ और सरकारी पार्टी उसका वीडियो साझा कर रही है। इसलिए, मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है और जांच के लिए भी गिरफ्तारी जरूरी है। रेड नोटिस जारी कराने की कोशिश इसीलिए होगी। आगे जो होगा उससे मामला स्पष्ट हो जायेगा पर तब तक मतदान हो चुका होगा और खेल यही है। ऐसी पार्टी एथिक्स की बात करती है और इसीलिए यह नया विवाद शुरू हुआ है कि एथिक्स कमेटी की नैतिकता क्या और कितनी है। आज उसकी भी खबर होनी थी पर दिखी नहीं। 

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