
कन्हैया शुक्ला-
बीजेपी का जबरिया VRS प्लान ..
V….Vasundhra raje
R….Raman Singh
S….Shivraj Singh Chauhan
भारतीय जनता पार्टी में इस समय गज़ब के बदलाव हो रहे हैं ..जिसकी उम्मीद बीजेपी के ही नेताओं को नही है नया समीकरण नया बैलेंस बनाने के लिए बीजेपी बहुत से धुरंधरों को आउट करने में जुट गई है ..

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का चयन बीजेपी में बड़े नेताओं के लिए मूवी का सस्पेंस जैसा हो गया है ..अब बताते हैं कैसे ..?
मोदी-शाह की जोड़ी और गुजराती दिमाग़ पूरे देश के बीजेपी शासित प्रदेशों में खलबली मचा के रखी है ..पहले केंद्र में पार्टी पर अपना दावा ठोकने वाले फर्स्ट और सेकेंड लाइन के नेताओं को बराबर किया जा रहा है और उनकी लाइन से मुक्त करने का अभियान चलाया गया है ..क्यों की सीनियर नेताओं में अब अगले लोकसभा को लेकर बहुत उम्मीदें उछाल मार रही हैं जिसको शांत करना मोदी के लिए बहुत ज़रूरी था नही तो ये अबकी बार केंद्र में सरकार बनाने के बाद बड़ा दावा ठोंकते ..
अब तीनो राज्यों में विधानसभा चुनाव में पहले सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को उतारा गया जो बहुत सीनियर लेबल के थे उसमें से कुछ हारे कुछ जीते ..अब जो जीते उनसे सांसद और केंद्रीय मंत्रिमंडल का इस्तीफ़ा ले लिया वो सब इसलिए बहुत उड़ान भर रहे थे क्यों की उनको ये लगा की वो प्रदेश के सीएम बनेंगे ..पर ऐसा नही हुआ और सांसदी और केंद्रीय मंत्री का प्रोटोकाल से निपटा दिया गया ..अब वो नार्मल विधायक हैं अगर राज्य में मंत्री का पद मिल जाए तो भी उनका कद एक झटके में कम कर दिया गया ..अब ये तो तय है की इन सांसदों को जो विधायक बने हैं उनको अगली लोकसभा में टिकट नही मिलेगा तो अब ये केंद्र के तरफ कोई उंगली नही कर सकते ..चुपचाप न्यूनतम में नेतागिरी करते रहें ..!!
इन सबमें छत्तीसगढ़ के पाटन से भूपेश बघेल के खिलाफ़ लड़ने वाले सांसद विजय बघेल की किस्मत अच्छी थी की वो विधानसभा चुनाव में हार गए और उनकी सांसदी जाते-जाते बच गई ..पर सवाल तो अब उठेगा की जो विधायकी हार गए वो सांसदी कैसे जीतेंगे उनका कोई जनाधार है या सिर्फ मोदी ही एक मात्र ऐसा चेहरा हैं जिनके नाम पर सब संसद में पहुंच रहें हैं ..?
अब बात करते हैं विजयवर्गीय जी की ..अब क्या होगा ..? मतलब सालों की मेहनत के बाद इतना ऊंचा कद पार्टी में मिला और घुमफिर के फिर से राजनीतिक पहिया शुरू वहीं आ के थम गया जहां से शुरू किया था ..इतना उलटफेर कहीं अतिउत्पात की शुरवात न हो जाए खैर बीजेपी एक संगठित और अनुशासित टाइप पार्टी है यहां मुंह तो फूल जाते हैं लेकिन फट के फ्लॉवर नही होते ..!!
मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी ने VRS प्रोग्राम चला दिया है ..वैसे तो वीआरएस लोग अपनी इच्छा से लेते हैं बीजेपी के एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज , छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा को बीजेपी जबरिया ये प्लान पकड़ाने में लगी है जिसमें से शिवराज और रमन सिंह को VRS प्लान दिया जा चुका है और राजस्थान में लड़ाई जारी है .. ख़ैर VRS प्लान आने वाली नई पीढ़ी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक अच्छी पहल भी है की मौका किसी को भी मिल सकता है पर इसका खामियाजा क्या होगा ये अभी नहीं पता ..? पर ये तो साफ़ है की बहुत उड़ान पर उड़ने वालों के पर काटे जा रहें हैं और उनके दावों में कमज़ोरी लाई जा रही है ..!!


