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साहित्य

संजीव को साहित्य अकादमी अवार्ड बहुत पहले मिल जाना चाहिए था!

संदीप तिवारी-

संजीव जी का लेखन ऐसा है कि आप हिंदी के किसी और लेखक से उनकी तुलना ही नहीं कर सकते। शायद ऐसा होता हो कि बड़े लेखक अपने लेखन में अतुलनीय होते हों। मैनें देखा है कि अधिकतर लेखक अपने लोक और परिवेश से इतना गहरे बंधे होते हैं कि वह उसके पार जाना ही नहीं चाहते या जा ही नहीं पाते। पर यह संजीव जी का अपना कौशल ही होगा कि वह हमेशा अपने लोक से परलोक की तरफ़ जाते हैं।

मैनें देखा है कि उनमें हमेशा कुछ नया करने की चाह होती है। भाषा और परिवेश के स्तर पर वह हमेशा नई से नई चुनौतियों को स्वीकार करते हैं। वह लगातार किसी नये लोक, नये लोग और नये परिवेश को छूते हैं। इस मामले में वह हिन्दी के विशिष्ट लेखक तो हैं ही।

मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि इस बार का साहित्य अकादमी अवार्ड उन्हें मिलेगा,लेकिन उन्हें मिला। जबकि यह पुरस्कार उन्हें बहुत पहले ही मिल जाना था। ‘मुझे पहचानो’ की जगह यह उन्हें ‘फांस’, ‘सूत्रधार’, ‘रह गई दिशाएं इसी पार’ या ‘जंगल जहाँ शुरू होता है’ पर भी मिल सकता था। लेकिन देर भले हुई पर यह चयन वाकई अच्छा था। जबसे ख़बर लगी है, मन खुश है।

अपने प्रिय कथाकार को इस उपलब्धि पर बधाई💐💐

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1 Comment

1 Comment

  1. सन्त समीर

    December 23, 2023 at 5:15 pm

    आपसे ही यह सूचना मिल रही है। ‘जङ्गल जहाँ शुरू होता है’ जब छपा तो मेरे पास समीक्षा के लिए भेजा गया था। इसे पढ़ने के बाद मैं सञ्जीव जी का प्रशंसक बन गया। ‘हंस’ के समय उनसे नज़दीक का परिचय बना। कुछ समय से उनकी ख़बर नहीं मिली थी, पर यह ख़बर पाकर मन प्रसन्न हुआ।

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