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भाजपा सांसद केसी पटेल की ‘इज्जत’ लूटने वाली महिला हुई अंदर… भामाकीजैजै!!

Vishnu Rajgadia : दिल्ली में बलात्कार की शिकार एक महिला ने कई दिन पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए। मामला दर्ज नहीं हुआ। तब वह कोर्ट गई। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया। यह पता लगने पर आरोपी (भाजपा सांसद के.सी. पटेल) ने महिला पर ही बहला-फुसलाकर इज्जत लूटने का आरोप लगा दिया। अब पुलिस उस पीड़िता के ही खिलाफ जाँच कर रही है और गिरफ्तार कर अंदर कर दिया। अगर महिला की गलती थी, तब भाजपा सांसद अब तक चुप क्यों थे? उन्होंने उसी दिन पुलिस को रिपोर्ट क्यों नहीं लिखाई, जिस दिन महिला ने उनकी इज्जत लूटी थी। मोदी-मोदी की रट लगाने वाले भक्त अगर अब भी इन चीजों का मतलब न समझें, तो कल किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। पापी सिर्फ वह नहीं, जो पाप करे। उसमें मौन सहमति भी पाप है।

Vishnu Rajgadia : दिल्ली में बलात्कार की शिकार एक महिला ने कई दिन पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए। मामला दर्ज नहीं हुआ। तब वह कोर्ट गई। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया। यह पता लगने पर आरोपी (भाजपा सांसद के.सी. पटेल) ने महिला पर ही बहला-फुसलाकर इज्जत लूटने का आरोप लगा दिया। अब पुलिस उस पीड़िता के ही खिलाफ जाँच कर रही है और गिरफ्तार कर अंदर कर दिया। अगर महिला की गलती थी, तब भाजपा सांसद अब तक चुप क्यों थे? उन्होंने उसी दिन पुलिस को रिपोर्ट क्यों नहीं लिखाई, जिस दिन महिला ने उनकी इज्जत लूटी थी। मोदी-मोदी की रट लगाने वाले भक्त अगर अब भी इन चीजों का मतलब न समझें, तो कल किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। पापी सिर्फ वह नहीं, जो पाप करे। उसमें मौन सहमति भी पाप है।

Deshpal Singh Panwar : वैसे तो यहां लोकतंत्र है लेकिन इस लोकतंत्र के साफ-साफ दो रास्ते हैं एक राजपथ-दूजा जनपथ। देख लीजिए किसी पर यौन शोषण का आरोप अगर कोई लड़की या महिला लगाती है तो जनपथ पर चलने वाला कोई भी शख्स गरम लू यानी सींखचों के अंदर जाने से बच नहीं पाता। पुलिस ऐसे टूट पड़ती है जैसे ये है ही लफंगा जो राह चलते छेड़ता है लेकिन बात जब राजपथ वालों की आती है तो आखिर खाकी खामोश क्यों हो जाती है…भाजपा के सांसद के सी पटेल का मामला ऐसा ही है…क्या वो बच्चे हैं जो कोई लड़की या महिला उन्हें उनकी इच्छा के बिना इस हनी शिकंजे में कस लेगी…

अब वो खुद को मासूम और महिला को कसूरवार ठहरा है जबकि खुद उनकी सिफारिश पर 11 महीनें तक एक मकान उस महिला को दिया गया.. क्या मजाक है..भाजपा वाले आंख के अंधे और कान के बहरे और बेदिल हो सकते हैं लेकिन सारा देश नहीं.. हैरत देखिए भाजपा सांसद से तो कुछ पुलिस ने पूछा नहीं हां उस महिला को जरूर अंदर कर दिया… क्या मामले की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होने तक पुलिस को खामोश नहीं रहना चाहिए था..इस पूरे मामले में अगर महिला दोषी है तो सांसद उससे भी ज्यादा फिर एकतरफा एक्शन क्यों..अगर सांसद भाजपा को छोड़ किसी दूजे का दल होता तो क्या मोदी और शाह एंड कंपनी ऐसे ही चुप रहती…चाल, चरित्र और चेहरे पर ये मामला पूरी तरह फिट बैठता है…अब भी समय है कि कमल वाले ऐसे चेहरों को काबू में करें वरना जहां कमल खिलता है वहां दलदल अक्सर सूख जाया करते हैं.. बाकी उनकी इच्छा…. बोलो भामाकीजैजै!!

वरिष्ठ पत्रकार द्वय विष्णु राजगढ़िया और देशपाल सिंह पंवार की एफबी वॉल से.

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