अंग्रेजी अख़बार द हिंदू के संपादक महेश लंगा ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस ले ली, जिसमें उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में 10 दिन के पुलिस रिमांड को चुनौती दी थी. लंगा को डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच (डीसीबी) ने जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में अरेस्ट किया था.
गुजरात हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदी एन भट्ट ने इस प्रकरण पर हो रहे हंगामें पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि, मामले को इतना प्रचारित क्यों किया गया? न्यायालय के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति समान है. वो राजनेता हो, पत्रकार हो या कोई अन्य!
इसके साथ ही न्यायाधीश ने कहा- “पूरी याचिका प्रकाशित हो चुकी है या उसका कुछ हिस्सा..ऐसा नहीं होना चाहिए. निश्चित रूप से कुछ था… मैं अब खुलासा नहीं करना चाहता क्योंकि आप वापस ले रहे हैं.”
बार एंड बेंच डॉट कॉम में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई में लंगा के वकील ने न्यायाधीश को बताया कि पत्रकार अपनी याचिका वापस लेना चाहता है.
इस पर अदालत ने जानना चाहा कि याचिका वापस क्यों ली जा रही हैऔक क्या इसके बाद कोई इंप्रूवमेंट हुई है. हालांकि, वकील ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. इतना जरूर कहा कि- “न्यायालय के खिलाफ कुछ भी नहीं था.”
याचिका में था क्या?
लंगा ने तर्क दिया था कि मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनके खिलाफ कथित अपराध में उनकी संलिप्तता के बारे में कोई निष्कर्ष दर्ज किए बिना उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. लंगा ने कहा- “उनकी गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित थी और ऐसा उन्हें पत्रकारिता गतिविधियों को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए किया गया था.”
इसके बाद जब मामला 11 अक्तूबर, शुक्रवार को कोर्ट पहुंचा तो लंगा के वकील ने दलील दी कि- ऐसा कुछ भी नहीं है जो दर्शाता हो कि उनका उन 220 फर्जी कंपनियों में से किसी एक से भी दूर-दूर का कोई रिश्ता हो, जैसा एफआईआर में बताया गया.
बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार लंगा की गिरफ्तारी तब हुई जब जीएसटी खूफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की शिकायत के आधार पर 8 अक्तूबर को, 13 फर्मों और उनके मालिकों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करते समय धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया.
याचिका दाखिल करने की खबर…
GST धोखाधड़ी में अरेस्ट द हिंदू के संपादक ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ HC में दी याचिका
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