
अरविंद चोटिया-
BJP आईटी सेल कहीं थी भी क्या? आज बीजेपी की आईटी सेल के बड़े चर्चे हैं जो शायद अस्तित्व में है ही नहीं। हो सकता है यह कोई काल्पनिक आईटी सेल हो।
10-12 साल पहले सोशल मीडिया पर बीजेपी का जबरदस्त दबदबा था और इसे ही बीजेपी की ताकतवर आईटी सेल मान लिया गया था। यह आईटी सेल बहुत जबरदस्त तरीके से काम करती थी। उस आईटी सेल में जबरदस्त जोश भी हुआ करता था।
असल में काम कोई और कर रहा था और नाम बीजेपी की आईटी सेल का हो रहा था। यह नरेंद्र मोदी कि बीजेपी से उम्मीद लगाए मध्यम वर्गीय टेक्नो सेवी युवाओं का एक बड़ा वर्ग था जो बीजेपी के पक्ष में बैटिंग कर रहा था। इस वर्ग को न तो किसी पारिश्रमिक की अपेक्षा थी और न ही किसी प्रकार के श्रेय की। यह अपनी धुन में ही बीजेपी के पक्ष में नॉरेटिव चला रहा था और सेट कर रहा था। इसी “आईटी बूम” पर बीजेपी सवार थी।
किसी भी चीज का एक दौर होता है। बीजेपी ने अपनी तरह की इस अनूठी आईटी सेल को पूरी तरह ग्रांटेड लिया। उसकी कुछ अलग तरह की अपेक्षाएं थीं जो व्यक्तिगत नहीं थी।
ये अपेक्षाएं देश के लिए थीं लेकिन पूरी नहीं हुई। नरेंद्र मोदी ने उस पूरे वर्ग को उसके हाल पर छोड़ दिया। बुरी तरह निराश किया। हां, उस वर्ग ने इसके बावजूद बीजेपी को वोट देना तो जारी रखा लेकिन “सांकळ खाना” बंद कर दिया।
जब कभी ऐसे लोग जो बीजेपी आईटी सेल के तौर पर काम करते थे, कहीं फंसे तो बीजेपी ने उनकी सुध तक नहीं ली। आज बीजेपी को इस एक पूरे वर्ग की कमी का सामना करना पड़ा। बीजेपी को अपनी आईटी सेल का भी पता चल गया कि वह कितनी सक्रिय और कितनी ताकतवर है।
आज समय बदल गया है। 10 साल पहले जिस जोश वाली आईटी सेल बीजेपी के पास थी, करीब-करीब वैसी ही आईटी सेल अब कांग्रेस के पास है जो निस्वार्थ भाव से काम कर रही है और सोशल मीडिया पर इसके रिजल्ट दिख भी रहे हैं।
सबक यही है की जो भी पार्टी अपने समर्थकों को संभालकर नहीं रखेगी, वे एक समय के बाद धीरे-धीरे दूर होने लगेंगे और फाइनली पूरी तरह दूरी बना लेंगे।


