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भक्तिकाल में दो अखबारों ने एक खबर को अलग-अलग हरियाली दी है! देखें

अंग्रेजी के इंडियन एक्सप्रेस और हिंदी के अमर उजाला ने एक ही विषय पर खबरें प्रकाशित की हैं. लेकिन दोनों ही खबरों में विरोधाभास है. अमर उजाला कह रहा है कि देश में वन क्षेत्र बढ़ा है तो इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है वन क्षेत्र कम हुए हैं.

अब भक्तिकाल में जनता इसे पढ़कर क्या फैसला ले और किसे सही माने, हिंदी की या अंग्रेजी की? अजीब दोराहे वाली स्थिति है. मोदीजी को अगली मन की बात हरियाली पर ही करनी चाहिए. जनता को सही आंकड़ा बताएं अन्यथा सही उत्तर के लिए लोगों को लंबी तपस्या करनी पड़ सकती है.


समीरात्मज मिश्रा-

एक ही ख़बर को दो अलग-अलग अख़बारों ने अलग-अलग तरीक़े से कवर किया है।

पहले अख़बार को देखकर तो मन ख़ुशी से भर गया कि चलो बहुत जंगल हैं अपने यहाँ, कुछ और पेड़ काट सकते हैं। अच्छी रिपोर्ट आई है।

लेकिन इस दूसरे वाले अख़बार ने तो मन-मस्तिष्क में निगेटिविटी भर कर रख दी। क्या कहें?

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