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भारत में हेडलाइन बनाने और गोदी मीडिया में वाहवाही के लिए “एक दिवसीय युद्ध” ना लड़ें!

युद्ध की ग़लतियाँ और सीख : भारत की छवि पर इंटरनेशनली बट्टा लगा है!

श्याम मीरा सिंह-

  • हम बिना डिप्लोमेटिक तैयारी के गए, हमारे सपोर्ट में कोई देश नहीं था। पिछले दस सालों में एक-एक करके सारे देश इंडिया से दूर हो गए
  • मोदी सिर्फ़ मीडिया मैनेज करने के लिए पहले दिन अटैक किया। इसके बाद से ही हम डिफेंसिव रहे।
  • अटैक हमने किया और हम ही एक हफ़्ते के अंदर सीजफ़ायर के लिए रेडी हो गए इससे हमारी छवि पर इंटरनेशनली बट्टा लगा है
  • पाकिस्तान का मनोबल बहुत बढ़ा है वो इसे जीत की तरह ले रहा है। उसने हमारे सिविलियंस पर भी अटैक किया लेकिन हम जवाब देने के बजाय सीजफ़ायर के लिए राजी हो गए।
  • एक मैच्योर सरकार जनदबाव में युद्ध नहीं छेड़ती। युद्ध का निर्णय महीनों की तैयारी के बाद लिया जाता है
  • युद्ध से पहले कम से कम 6 महीने हम अपने मित्र देशों को तैयार कर लें कि क्या चीन और तुर्की जैसे खुले दुश्मनों की स्थिति में वे हमारे साथ आएंगे?
  • बिना डिप्लोमेटिक और मिलिट्री प्रिपरेशन के युद्ध में ना कूदें।
  • अब इस साल हम अपने डिप्लोमेटिक एफ़र्ट्स क्लियर करें। और सच कहूँ तो गुट निरपेक्ष नीति को अब उतार फेंकें। इससे हमें आर्थिक सहयोग तो मिलता है लेकिन मिलिट्री मामले में जोकर नज़र आते हैं। कोई हमारे साथ खुलकर नहीं आता।
  • युद्ध से बचें, युद्ध की स्थिति में बड़ी सुपरपावर हमारे देश को दबाने और फ़ायदा उठाने की स्थिति में होती हैं। और हमारी भूमिका एक आज्ञाकारी बालक जैसी हो जाती है। युद्ध तब लड़ने जाएँ जब हम डिप्लोमेटिक-मिलिट्री प्रिपरेशन पूरी कर लें।
  • ये सर्जिकल स्ट्राइक, और छूकर आने वाले मिलिट्री मिशन बंद हों। ये छुटमुट फोटो कार्रवाइयां बंद हों। जब आप किसी सीमा में घुसें तो वो फाइनल दिन हो। भारत में हेडलाइन बनाने और गोदी मीडिया में वाहवाही के लिए “एक दिवसीय युद्ध” ना लड़ें। युद्ध कभी “एक दिवसीय” नहीं होता, अगर युद्ध छिड़ता है तो लास्ट तक जाता है। अगर एक हफ़्ते के भीतर ही बिना कुछ बड़ा किए सीजफ़ायर कर लेना है तो ये छुटमुट कार्रवाइयां छोड़ दें।
  • विपक्ष ने आँख बंद करके आपको सपोर्ट दिया। मुस्लिम नेताओं ने पाकिस्तान को जितना सुनाया उतना किसी ने नहीं। इसका अर्थ है कि भारत उस भिखारी मुल्क की तरह नहीं है। भारत अंदर से भी मजबूत है।
  • अगर बात दूसरे मुल्क से युद्ध की हो तो पूरा देश प्रधानमंत्री के साथ है। लेकिन प्रधानमंत्री विवेक से काम लें। जनदबाव में ना आएँ। जो देश के लिए निर्णय अच्छा हो वही लें। फोटो-केंद्रित सर्जिकल स्ट्राइक के चक्कर में ना पड़ें। पूरी तैयारी करें। और जब हम पर युद्ध थोप ही दिया जाए तो ठोक दें पाकिस्तान को लाहौर-करांची तक। फिर कुछ ना देखें। POK और बलूचिस्तान की आजादी तक कुछ ना देखें।

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