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राजस्थान में ANI का बड़ा घोटाला? एजेंसी से जुड़ी तीन कंपनियों ने रची ‘नकली प्रतिस्पर्धा’!

जयपुर/नई दिल्ली। राजस्थान में एक बड़े सरकारी ठेके को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार एजेंसी ANI को यह ठेका कथित तौर पर ऐसी प्रक्रिया के जरिये मिला जिसमें ‘न्यूनतम तीन बिडर्स’ की शर्त को पूरा करने के लिए उसी समूह से जुड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। इस खुलासे ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ANI को यह ठेका 2023 में राजस्थान सरकार से प्राप्त हुआ। यह ठेका एक औपचारिक टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से दिया गया, जिसमें कम से कम तीन अलग-अलग कंपनियों की भागीदारी अनिवार्य थी। मगर जांच में पाया गया कि बोली लगाने वाली तीनों कंपनियों के पते, निदेशक (डायरेक्टर्स) और कंपनी नाम तक काफी हद तक एक जैसे थे — और वे सभी ANI समूह से जुड़ी थीं।

विशेषज्ञ इसे ‘प्रॉक्सी बिडिंग’ का मामला मान रहे हैं, जहां एक ही समूह ने कई कंपनियों के माध्यम से टेंडर में हिस्सा लेकर प्रतिस्पर्धा की झूठी तस्वीर पेश की। इससे यह संदेह गहराता है कि ठेका एक पूर्व-निर्धारित योजना के तहत ANI को दिलाया गया।

विपक्षी दलों और कई मीडिया विश्लेषकों ने इस मामले को लेकर BJP और ANI के कथित गठजोड़ पर सवाल उठाए हैं। हालाँकि, अभी तक न तो ANI की ओर से और न ही भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

इस बीच, सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कई यूज़र्स ने इसे “सरकारी तंत्र का दुरुपयोग” बताया है, तो कुछ ने इसे ANI की “साख पर गंभीर सवाल” बताया है।

क्या कहता है कानून?

टेंडर प्रक्रिया में फर्जी प्रतिस्पर्धा दिखाना भारतीय अनुबंध अधिनियम और भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अगर यह साबित होता है कि एक ही व्यक्ति या संस्था ने कई मुखौटा कंपनियों के जरिए टेंडर में हिस्सा लिया, तो यह धोखाधड़ी और अनैतिक व्यापार व्यवहार माना जाएगा।

अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मामले की जांच करवाती है या यह मामला भी बीते दिनों की खबर बनकर रह जाएगा।

इस सिलसिले में द वायर की ये रिपोर्ट देखें…पढ़ें


अंकित मयंक-

MEGA EXPOSE

Smita Prakash’s ANI won a major Govt contract in Rajasthan last year by defeating two of her own companies!

Same Directors, Same Address & Similar Company Names — Yet BJP Govt allowed it

Reason – Minimum 3 companies were required for bidding

But there is no BJP-ANI nexus & ANI ain’t into EXTORTION

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