गिरिजेश वशिष्ठ-
अगर आप कॉपीराइट एक्ट को पढ़ें तो पहले इसका क्रिएटिव वर्क होना ही संदिग्ध है. ये न तो फिल्म है न पेंटिंग न टीवी शो. देश भर में इनके स्टिंगर्स कई बार दूसरों से फुटेज लेकर भेजते हैं. सरकारी कार्यक्रमों का फुटेज उनके कैमरे से ही उठा लेते हैं. राजनीतिक दलों का कंटेंट ले लेते हैं. और सब पर लगा देते हैं अपना ठप्पा. एक कार्यक्रम में दस माइक लगे हैं. एक ही रिपोर्टर ने सारे माइक पकड़े हैं. सारे संस्थानों को भेज देगा.
न्यूज चैनल चूंकि एएनआई का सब्सक्रिप्शन लेकर रखते हैं तो उनसे इस चोरी के बावजूद कोई कापी राइट कनफ्लिक्ट नहीं होता. लेकिन ये क्रियेटव वर्क नहीं है. कॉपीराइट एक्ट के मुताबिक बिल्कुल नहीं है. दूसरा अगर क्रिएटिव वर्क है तो कापीराइट दफ्तर में रजिस्टर करना जरूरी है. उसके लिए एक ऑफिस है. तीसरा क्रिएटिव वर्क का रिव्यू और criticism भी होना fair use है. जब हम हुसैन की पेन्टिंग का रिव्यू कर सकते हैं. सलमान खान की पिक्चर का रिव्यू कर सकते हैं तो एएनआई के काम का क्यों नहीं.
फिर लोग सिर्फ एएनआई की खबरें नहीं दिखा रहे, किसी खबर में किसी संदर्भ में अगर एक वीडियो आ गया तो वो भी उस वीडियो की समीक्षा होती है न कि उसका उपयोग. उस कार्यक्रम का लक्ष्य वो वीडियो दिखाना होता ही नहीं है.
कल के दिन किसी चैनल के शो में कोई किसी को कूट दे तो आप उस पर चर्चा नहीं कर सकते क्योंकि चैनल कॉपी राइट स्ट्राइक दे देगा. ये बकवास है और कानून का दुरुपयोग है. हद तो ये है कि तुम खुद ही तय कर देते हो कि तुम्हारी प्रॉपर्टी तुम्हारा कापीराइट है. फिर खुद ही यूट्यूब का टूल इस्तेमाल करके चैनल बंद कर देते हो. फिर कनपटी पर बंदूक रखकर मेल करते हो कि पैसे दो वरना चैनल उड़ा देंगे. उसके बाद वसूली करके जो कान्ट्रेक्ट साइन कराते हो उसमें होते हैं कान्ट्रेक्टर को गुप्त रखने यानी किसी को न बताने के क्लाज.
यानी आप किसी को बता भी नहीं सकते. फिर स्मिता प्रकाश कहती हैं कि ये लूट नहीं है. आप कंटेंट आईडी बनाइये अगर कोई हिस्सा आपको लगता है तो उस वीडियो की पूरी कमाई ले लीजिये. यही तो टीसीरीज करता है. बाकी क्रियेटर करते हैं जबकि वो सचमुच का क्रियेशन है. आपका तो कुछ क्रियेशन है ही नहीं. न रिजस्टर्ज है. न कंटेंट आईडी है. फिर भी चैन न पड़े तो वीडियो का उतना हिस्सा निकालने को मजबूर कर दीजिये. सीधे स्ट्राइक देना एक तरफा है.
यूट्यूब का घटिया नियम है. ये नियम भारत के कापीराइट कानून के अनुसार है ही नहीं. ये डीएमसीए है. भारत में भारत की धरती का कानून काम करेगा. स्ट्राइक नहीं नोटिस दीजिये. फिर कापीराइट साबित कीजिये.
जीतेंद्र चतुर्वेदी-
TMC सांसद साकेत गोखले ने गूगल को पत्र लिखा है कॉपीराइट वाले मसले पर। वैसे तो अपना कोई सरोकार नहीं होना चाहिए। लेकिन यहां मसला ये नहीं है। मामला ये है कि हम जैसे तमाम पत्रकार जो यूट्यूब के जरिए खुद की बात रख रहे हैं संकट उन पर है।
सही मायने में ये जो स्ट्राइक स्ट्राइक खेला जा रहा है उसमें कोई नहीं बचा है। कोई कॉपीराइट में है तो कोई कम्युनिटी गाइडलाइन में। मुझे लगता है पिछले एक डेढ़ महीने में बहुतों को कोई न कोई स्ट्राइक मिला होगा।
सो बात सब पर होनी चाहिए क्योंकि यहां स्ट्राइक वो लोग भेज या भेजवा रहे हैं जिन्हें रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है।
शकील अख्तर-
विपक्षी दलों को ध्यान देना चाहिए खास तौर से कांग्रेस को! इस समय यूट्यूब चैनलों में जबरदस्त गुस्सा फैला हुआ है जबरन वसूली के खिलाफ। कई यूट्यूब चैनलों का आरोप है कि ANI उन्हें स्ट्राइक (सामान्य भाषा में चैनल बंद करना मान लीजिए) की धमकी देकर लाखों रुपया मांगती है।
कई चैनलों ने दिया कुछ ने लड़ने की ठान ली है। विपक्ष को मालूम होना चाहिए कि इस समय देश में मेन चैनलों से ज्यादा यूट्यूब चैनल देखे जा रहे हैं। यूट्यूब पर करीब 50 करोड़ दर्शक हैं। विपक्ष की खबरों को स्थान भी यूट्यूब चैनलों पर ही मिलता है।
लोकसभा में मोदी को 240 पर रोकने में यूट्यूब चैनल द्वारा दिखाई गई सच्चाई का बड़ा योगदान था। नहीं तो गोदी मीडिया तो 400 पार करवा रहा था। मोदी की सबसे बड़ी ताकत गोदी मीडिया ही है। कांग्रेस और अन्य विपक्ष उसका कोई इलाज नहीं कर पाए।
अगर इसका किसी ने इलाज किया है तो वे यूट्यूब चैनल ही हैं। जनता की आवाज सही ढंग से वहीं उठ रही है। विपक्ष को मालूम होना चाहिए कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूट्यूब चैनलों का भी एक बड़ा सम्मेलन किया था और उन्हें अपने पक्ष में लाने की बड़ी कोशिश की थी।
पिछले साल बीबीसी ने इस बार एक अच्छा प्रोग्राम बनाया था जिसमें बताया था कि यूट्यूब चैनल किस तरह मेन चैनलों से आगे निकल गए हैं। 2 दिन से यूट्यूब का मामला बहुत गर्म है मगर कांग्रेस या अन्य किसी विपक्षी दलों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अगर इस समय भी विपक्ष गोदी मीडिया से डर गया तो फिर उसकी मदद कोई नहीं कर सकता।
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