बलिया में परिवहन विभाग की खुली लापरवाही, बिहार की “बिष्णु लोक ट्रेवेल्स” की बस बिना परमिट, फर्जी इंश्योरेंस के दौड़ रही — ARTO बना मूकदर्शक!

सुजीत सिंह प्रिंस-
बलिया | “प्रदेश में एक भी डग्गामार वाहन नहीं चलने दूंगा” — ये दावा है उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री का। लेकिन अफ़सोसजनक विडंबना यह है कि मंत्री जी के अपने जिले बलिया में ही उनका दावा ज़मीन पर रौंदा जा रहा है। बिहार के सिवान जनपद की चर्चित ट्रैवल्स कंपनी “बिष्णु लोक ट्रेवेल्स” की बस संख्या BR45P3971 रोजाना बलिया से टाटा (झारखंड) तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे सवारी ढो रही है — और परिवहन विभाग मौन साधे बैठा है।
सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इस बस का इंश्योरेंस एक दोपहिया स्कूटर के नाम पर है, लेकिन हकीकत में यह एक भारी भरकम यात्री बस है, जो नियमों और कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए प्रदेश की सड़कों पर फर्राटा भर रही है।
मंत्री जी! जब आपके ही जिले में खुलेआम क़ानून की धज्जियाँ उड़ रही हैं, तो बाकी प्रदेश का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।
अब सवाल उठता है कि जब मंत्री जी के जिले से ही बिना परमिट, फर्जी इंश्योरेंस, टैक्स चोरी और अवैध संचालन वाली बसें बेरोकटोक चलाई जा रही हैं — तो क्या ये सीधे-सीधे मंत्री की नैतिक जवाबदेही को कटघरे में नहीं खड़ा करता?
ARTO बलिया पर गंभीर सवाल
बलिया के ARTO अरुण राय पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या इतनी बड़ी बसें उन्हें दिखाई नहीं देतीं? क्या वह वाकई अनजान हैं, या फिर मामला मिलीभगत और संरक्षण का है?
शिकायतकर्ता पंकज कुमार सिंह ने इस घोटाले की विस्तृत शिकायत बलिया के जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से सौंपी है। उन्होंने प्रशासन से पूछा है :
“जब खुद मंत्री जी के जिले में ये हाल है, तो क्या प्रदेश भर में नियम सिर्फ ईमानदारों के लिए हैं?”

यह मामला नहीं, सिस्टम की सड़ांध का सबूत है। यह सिर्फ एक बस का मामला नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, लापरवाही और ‘संरक्षण तंत्र’ की पोल खोलने वाला गंभीर उदाहरण है।
यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच जल्द शुरू नहीं की गई, तो कानून व्यवस्था और आमजन की सुरक्षा की गारंटी भी केवल नारा बनकर रह जाएगी।
जब ARTO अरुण राय से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा : “जांच चल रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
लेकिन सवाल यह है कि जब ये बस रोज़ाना बलिया शहर से गुजरती है, तो क्या ARTO कार्यालय की आंखों में चश्मा चढ़ा है या पर्दा पड़ा है?




