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साहित्य

मुझे संतोष है कि एक कार्यक्रम में ‘कल्पित’ का बहिष्कार मैंने किया!

ऋतु तिवारी-

कृष्ण कल्पित! जब कृष्ण कल्पित ने अनामिका जी के बारे में लिखा था तब तक मैं उस कवि को नहीं जानती थी।

उसके बाद कलकत्ता में एक कार्यक्रम में उन्हें ससम्मान बुलाया गया जिसमें मैं शामिल हुई थी। उनके कार्यक्रम में आने का मैंने बहुत विरोध किया था।

और जब वो मंच पर नमूदार हुए तो उनका बहिष्कार करते हुए मैं कार्यक्रम छोड़कर निकल गई और इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा।

कार्यक्रम में कल्पित का सार्वजनिक बहिष्कार मैंने किया और इसका मुझे संतोष है और हाँ इसमें मेरा साथ दिया था Asha Pandey ने।


सुजाता-

हिंदी साहित्य में कवि, लेखक की प्रतिष्ठा पाने वाले कई ऐसे-ऐसे लोग हैं कि मन हट जाता है इस दुनिया से. अनामिका जी के ख़िलाफ़ बेहूदी पोस्ट के बाद मैंने उसे ब्लॉक किया था जिसका नाम नहीं ले रहे लोग (जहाँ से न्यूज़ ब्रेक हुई है सुबह उनका कहना है कि बिना विक्टिम की मर्जी के नाम नहीं बताया जाए पहले वह लिखे फिर हम लिखेंगे)

स्त्री विरोधी टिप्पणियों पर मैं कई ऐसे तथाकथित साहित्यकारों को ब्लॉक कर चुकी हूँ. कई बार सामने ही आपत्ति दर्ज की है. कोई भी हरकत किसी ने पहली बार नहीं के होती. उसका स्त्री द्वेषी स्वभाव यह साहित्य की दुनिया देख रही होती है, बर्दाश्त कर रही होती है, कभी तो डिफेंड भी कर रही होती है.

कहना बस यह है कि इस दुनिया की सफ़ाई का ठेका सिर्फ़ औरतों का नहीं है. आप संबंध निभाइए ऐसे लंपटों से, भाई साहब कहिए, बड़ा भाई कहिए, तस्वीरें लगाइए, उनकी किताबों की तारीफें कीजिए, समीक्षा लिखिए, उन्हें सर, सर कीजिए तो हालात कभी नहीं बदलेंगे. आज यह घटना है, कल कोई और घटना होगी. ग़लत को ग़लत कहने भर की हिम्मत भी नहीं जुट पा रही हमसे तो क्या ही बदलेंगे.


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