पिछले मई महीने में भारत-पाक संघर्ष के दौरान भारत ने क्या अपने कुछ RAFALE विमान खोए थे? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब केवल केंद्र सरकार के पास है लेकिन उसने लंबा मौन व्रत साध रखा है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत ने इस भिड़ंत में अपने कुछ विमान खोए हैं क्योंकि भारत के रक्षा प्रमुख अनिल चौहान ख़ुद रॉयटर्ज़ (Reuters) को दिए गए एक इंटरव्यू में यह बात स्वीकार कर चुके हैं। लेकिन क्या वे RAFALE विमान थे, इसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। इस कारण से संदेह अभी भी बना हुआ है।
RAFALE के गिरने का मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि ये विमान काफ़ी उन्नत क़िस्म के माने जाते हैं और मोदी सरकार ने इन्हें भारी-भरकम क़ीमत पर ख़रीदा है। ख़रीद के समय ही सरकार पर घोटाले के आरोप लगे थे। ऐसे में अगर ये विमान युद्ध में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करते तो सरकार की ख़रीद नीति शक के घेरे में आ जाती है।
यही कारण है कि विपक्ष बार-बार यह मुद्दा उठा रहा है। लोकसभा में पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर हुई हालिया बहस के दौरान भी यह मसला उठा जब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोइ ने नाम लेकर और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए RAFALE विमानों का ज़िक्र किया।
इन ख़बरों को लेते हुए हिंदी मीडिया ने वही काम किया जो वह हमेशा से करता आया है। किसी भी विदेशी नाम को बिना किसी जाँच-परख के कुछ भी लिख देना। RAFALE को हिंदी मीडिया का बड़ा हिस्सा ज़माने से राफ़ेल लिखता आया है। इस ख़बर में भी उसने राफ़ेल ही लिखा। बस, बीबीसी और लल्लनटाप जैसे इक्का-दुक्का संस्थान ही इसे रफ़ाल लिख रहे हैं जो कि RAFALE का सही उच्चारण है।
विदेशी अंग्रेज़ी चैनलों पर रफ़ाल ही बोला जाता है। रवीश कुमार भी अपने NDTV के दौर से लेकर आज तक रफ़ाल ही बोलते आए हैं। लेकिन हिंदी मीडिया के संपादकों और पत्रकारों को भेड़चाल की ऐसी आदत लगी है कि नवभारत टाइम्स से लेकर अमर उजाला तक सभी आँख मूँदकर राफेल लिख रहे हैं।
रफ़ाल जब पहली बार चर्चा में आया था तब द प्रिंट ने इसपर एक स्टोरी की थी कि इसका सही उच्चारण क्या है। आप चाहें तो इस लिंक पर जाकर वह स्टोरी पढ़ सकते हैं और उच्चारण भी सुन सकते हैं।
पिछली शब्दचर्चा…
शब्दचर्चा (21): NBT, TV9 के ‘नरक’ और भास्कर, ABP के ‘नर्क’ में सही क्या है?


