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ज्यादातर कैंसर बैड लक से होता है!

मनोज अभिज्ञान-

जीवन की असल कहानी हमारी हर कोशिका (cell) के भीतर है। हर पल हमारे शरीर की अरबों कोशिकाएँ डिवाइड हो रही होती हैं और DNA की नई कॉपी बना रही होती हैं। यही कॉपी बनाना जीवन को आगे बढ़ाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में कभी-कभी छोटी-सी चूक हो जाती है। इसे वैज्ञानिक म्यूटेशन (mutation) कहते हैं। यह म्यूटेशन कभी बीमारी का कारण बनता है, कभी बिल्कुल बेअसर रहता है, और कभी-कभी वही गलती इंसान को ऐसा गुण दे देती है जो आने वाली पीढ़ियों की ज़िंदगी बदल देता है।

जब कोई म्यूटेशन बीमारी का कारण बनता है, तो इसे Bad Luck Factor कहा जाता है। 2015 में जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक स्टडी ने दुनिया को चौंका दिया था। इसमें पाया गया कि कैंसर के ज़्यादातर मामले केवल धूम्रपान, शराब या वंशानुगत कारणों से नहीं होते, बल्कि कोशिका विभाजन (cell division) के दौरान हुई random गलती से होते हैं। यानी आप कितने भी स्वस्थ क्यों न हों, जिम जाएँ, अच्छा खाएँ, फिर भी अगर DNA कॉपी में गलती हो गई तो कैंसर हो सकता है। इसे ही कहा गया Bad Luck Factor।

यही बात और बीमारियों में भी दिखती है। कई बच्चे दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर के साथ पैदा होते हैं, जिनका लाइफस्टाइल या माता-पिता की आदतों से कोई लेना-देना नहीं होता। कुछ लोग अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो जाते हैं, जबकि उनकी रिपोर्ट्स बिल्कुल ठीक होती हैं। किसी दवा या वैक्सीन से किसी-किसी को रेयर रिएक्शन हो सकता है, जबकि लाखों लोग वही दवा बिना किसी दिक्कत के लेते हैं। ये सब उस random biological error का हिस्सा हैं, जिसका आकलन कोई नहीं कर सकता।

लेकिन ज़िंदगी की खूबसूरती यही है कि यही random गलती हमेशा अभिशाप नहीं होती। कभी-कभी वही गलती इंसान के लिए वरदान भी बन जाती है। अफ्रीका में सिकल सेल (sickle cell) नाम का म्यूटेशन इसका उदाहरण है। अगर यह जीन माता-पिता दोनों से मिले तो इंसान गंभीर बीमारी का शिकार होता है, लेकिन अगर केवल एक से मिले तो यह म्यूटेशन मलेरिया से बचा लेता है। जिन इलाकों में मलेरिया जानलेवा था, वहाँ यह म्यूटेशन जीवन का रक्षक बन गया और पीढ़ियों तक फैला।

इसी तरह लैक्टोज़ टॉलरेंस (lactose tolerance) का उदाहरण लें। असल में मनुष्य को सिर्फ बचपन तक ही दूध पचाने की क्षमता मिली थी। लेकिन करीब 7-10 हज़ार साल पहले इंसान के DNA में म्यूटेशन हुआ, जिससे दूध पचाने वाला एंज़ाइम वयस्कता तक सक्रिय रहा। यह गलती भूख और अकाल के समय वरदान बन गई। यही कारण है कि आज यूरोप और भारत के कुछ हिस्सों में लोग बख़ूबी दूध पचा लेते हैं, जबकि पूर्वी एशिया के कई देशों में बड़े लोग दूध पीने पर प्रायः तकलीफ़ महसूस करते हैं।

मतलब यह कि म्यूटेशन तटस्थ है। वह न तो अच्छा है न बुरा। परिस्थिति तय करती है कि वह इंसान को अस्पताल तक ले जाएगा या फिर सभ्यता को आगे बढ़ाएगा। एक ही गलती एक जगह पर दुख बन सकती है और दूसरी जगह पर भविष्य की संभावना।

“Bad luck factor” (Medical literature में)

अमेरिकन कैंसर रिसर्च ने कहा है कि लगभग 2/3 कैंसर मामलों का कारण नशा, संक्रमण या लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि random cell mutation होता है, यानी किस्मत का खेल। इसे “random replication errors” कहते हैं।

तो Bad Luck Factor हमें यह सिखाता है कि ज़िंदगी पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं है। कुछ बातें सिर्फ़ चांस पर निर्भर हैं। लेकिन यही चांस हमारे भीतर से बीमारी भी पैदा करता है और विकास का रास्ता भी। यही कारण है कि इंसान ने अब तक, आग से लेकर कंप्यूटर तक, जितनी तरक्की की है उसके पीछे लाखों सालों की ऐसी ही random गलतियों का योगदान है।

आप कह सकते हैं कि ज़िंदगी का असली खेल यही है। Bad Luck और opportunity दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। फर्क बस इतना है कि हम उस क्षण को किस संदर्भ में देख रहे हैं—बीमारी की बेबसी में या विकास की यात्रा में।

किस्मत और मेहनत का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है जैसा mutation और evolution का। हम अक्सर मानते हैं कि मेहनत ही सब कुछ तय कर देती है, लेकिन सच्चाई यह है कि मेहनत सिर्फ़ उन संभावनाओं को दिशा देती है जो संयोग (chance) ने हमें दी हैं। अगर कोशिका में mutation ही न हो तो evolution का कोई इतिहास नहीं होता। और अगर मेहनत न हो तो उस mutation से मिले फायदे का कोई उपयोग नहीं हो पाता।

इंसानी ज़िंदगी में भी यही होता है। किसी को जन्म से ही कोई जैनेटिक डिसऑर्डर मिल जाता है, यह उसका Bad Luck Factor है। लेकिन वह इंसान अगर अपनी मेहनत और सोच से हालात को चुनौती दे, तो कभी-कभी वही कमजोरी उसकी सबसे बड़ी ताक़त बन जाती है। इतिहास गवाह है कि कई वैज्ञानिक, कलाकार और विचारक शारीरिक या मानसिक चुनौतियों के बावजूद महान बने। उनका म्यूटेशन उन्हें कठिनाई देकर गया था, लेकिन उनकी मेहनत ने उसे वरदान में बदल दिया।

दूसरी तरफ देखें तो जिन लोगों को Good Luck से जीवन में कुछ विशेष गुण मिले, अगर वे मेहनत न करें तो वह गुण व्यर्थ हो जाता है। जैसे लैक्टोज़ पचाने की क्षमता होना जैनेटिक एडवांटेज था, लेकिन अगर उस समाज ने गाय-बकरी पालने और दूध को भोजन में इस्तेमाल करने की मेहनत न की होती तो यह एडवांटेज कभी सभ्यता को न बदल पाता।

यानी इंसानी किस्मत और मेहनत का रिश्ता बिल्कुल एक दूसरे से गूंथा हुआ (intertwined) है। किस्मत (mutations, chance) हमें कच्चा माल देती है, मेहनत (effort, struggle) उससे रूप गढ़ती है। अगर हम सिर्फ किस्मत पर छोड़ दें तो बीमारी और दुर्भाग्य हमें कुचल सकते हैं। अगर हम सिर्फ मेहनत पर भरोसा करें और किस्मत की भूमिका को न समझें, तो हम जीवन की यादृच्छिकता (randomness) को नज़रअंदाज़ कर देंगे और बार-बार निराश होंगे।

असल संतुलन यह है कि हम मानें—कुछ चीज़ें हमारे हाथ में नहीं हैं, पर जो चीज़ें हमारे हाथ में हैं, उन पर हम पूरा ज़ोर लगाएँ। Bad Luck Factor से यही जीवन-दर्शन हमें मिलता है कि हम न तो भाग्यवादी बनें और न ही अहंकारी। बल्कि यह स्वीकार करें कि जीवन संयोग और प्रयास का साझा खेल है।

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