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सियासत

रिकार्ड मतदान सिर्फ सत्ता परिवर्तन के लिए होता है, यह एक मिथ है!

दयाशंकर शुक्ल ‘सागर’-

बिहार में किसी सरकार बनने जा रही है यह जानने के लिए न ज्योतिषी होने की जरूरत है न एक्जिट पोल देखने की। इंदिरा गांधी की हत्या जैसी अगर कोई लहर न हो तो न केवल भारत बल्कि किसी भी देश में वोटर सिर्फ छोटे-छोटे निजी स्वार्थों के नाम पर वोट देता है। वह बिहार हो या कोई और राज्य। परिवर्तन, क्रान्ति, सुधार, देशहित के बारे में बहुत कम लोग सोचते हैं क्योंकि आम और खासकर गरीब जानता समझ चुकी है कि सत्ता का चरित्र एक जैसा ही रहता है चाहे कोई सरकार आए या जाए।

इसलिए भारत कई-कई सदियों तक सुल्तानों, मुगलों और फिर अंग्रेजो का गुलाम रहा। क्योंकि जनता का एक ही सर्वमान्य सिद्धान्त था-‘कोऊ नृप होए हमै का हानि।’ राजा कोई भी हो, हमारी हालत में कोई बदलाव नहीं होने वाला। हां, सत्ता में बैठे लोगों के दिन जरूर अच्छे हो जाएंगे।

देखिए न बिहार का उजबग और अंगूठा टेक माफिया अनंत कुमार सिंह हो या बीजेपी का सम्राट चौधरी, सब बिहार जैसे गरीब राज्य में रहने के बावजूद अरबपति हो गए।

रिकार्ड मतदान सिर्फ सत्ता परिवर्तन के लिए होता है, यह एक मिथ है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कभी-कभी इसका ठीक उलटा भी होता है। दोनों चरणों में रिकार्ड मतदान और महिला वोटरों की बूथ पर जुटी भीड़ के आधार पर अगर मेरा आकलन गलत नहीं है तो बिहार में नीतीश कुमार और बीजेपी के गठबंधन वाली एनडीए की सरकार बनने जा रही है। मतदान के दोनों चरणों में बिहार की महिलाएं जिस तरह से भर-भर के घर से वोट देने निकली हैं उससे साफ है कि बिहार में एनडीए की वापसी होने वाली है।

नीतीश कुमार ने जिस तरह ऐन चुनाव के मौके पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं के खाते में दस-दस हजार रुपए डाले उससे पूरा खेल ही पलट गया। महिलाएं कभी नहीं चाहेंगी कि घर बैठे बिठाए खाते में पैसे आने की ये शानदार फरेबी योजना बंद हो जाए। इसलिए वे जमकर बूथ पर आईं। शराबबंदी से वे पहले ही नीतीश कुमार से गदगद हैं।

फिर मोटे तौर पर बिहार की जनता को नीतीश बाबू से कोई शिकायत भी नहीं है न उनके खिलाफ कोई गुस्सा है। रंग, भंग और सत्ता के नशे में डूबे इस आदमी से भला कोई क्योंकर नाराज होगा? आपको अच्छा लगे या बुरा मानना होगा कि नरेन्द्र मोदी से बिहार की जनता खुश है। सच तो यह है कि बिहार को न तेजस्वी के भ्रष्ट पिता लालू यादव का जंगलराज चाहिए न प्रशांत किशोर जैसा कोई परिवर्तनकारी और युगान्तकारी नेता। प्रशान्त कुमार बिहार में ऐसे सपने बेच रहे हैं जिसका कोई खरीदार नहीं। तो मेरे हिसाब से बिहार में एनडीए की वापसी तय है।

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