
बिकाऊ इन्फ्लुएंसर और कॉरपोरेट PR का पागल करने वाला “पुगलिया” खेल!
अदानी के नाम पर X–YouTube इन्फ्लुएंसर्स को 2.5 लाख नकद?
‘अडानी लूट’ पर लिखने वाले अचानक क्यों हो गए खामोश?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक सनसनीखेज दावा सामने आया है, जिसने कॉरपोरेट PR, इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी और कथित ‘अडानी इकोसिस्टम’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
X यूज़र रोशन राय ने दावा किया है कि एक बड़े उद्योगपति (इशारा साफ तौर पर अदानी समूह की ओर) की मीडिया और पीआर टीम ने X और यूट्यूब के प्रभावशाली इन्फ्लुएंसर्स को बुलाया, उनके आने-जाने और ठहरने का इंतज़ाम किया, पार्टी दी और प्रत्येक को 2.5 लाख रुपये नकद दिए गए।
चर्चा है ये सब एक महान पत्रकार पुगलिया जी के देखरेख में हुआ जो कभी अच्छी पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे और अब अदानी पत्रकारिता के लिए कुख्यात हैं।
‘अडानी विरोधी’ भी अचानक तारीफों में जुटे!
रोशन राय के अनुसार, इस कथित PR ड्राइव में कुछ ऐसे इन्फ्लुएंसर्स को भी बुलाया गया जो खुद को BJP-विरोधी और ‘अडानी लूट’ के मुखर आलोचक बताते रहे हैं।
दावा है कि इन लोगों ने न सिर्फ अचानक उसी उद्योगपति की तारीफ शुरू कर दी, बल्कि उसके खिलाफ लिखना-बोलना पूरी तरह बंद कर दिया।
रोशन राय ने लिखा—
“You can guess who I am talking about.”
यानी नाम नहीं लिया गया, लेकिन इशारा इतना स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
डीएम में ‘नाम’ बताए जा रहे हैं!
इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाते हुए डॉ. निमो यादव ने सार्वजनिक तौर पर कहा—
“I know some of them. Check DM.”
यानी दावा है कि कुछ इन्फ्लुएंसर्स के नाम उन्हें मालूम हैं, और निजी संदेशों में साझा भी किए जा रहे हैं।
विचारधारा बिकाऊ है?
रोशन राय ने आगे लिखा—
“Very shocking, compromising with your whole ideology which you used to build your follower base for some money.”
यानी जिन विचारों, नारों और “अडानी लूट” जैसे अभियानों से फॉलोअर्स कमाए गए, वही विचारधारा कुछ लाख रुपयों में गिरवी रख दी गई।
पोस्ट डिलीट कराने के लिए डीएम?
एक अन्य पोस्ट में दावा किया गया कि कुछ दलाल उन इन्फ्लुएंसर्स को डीएम कर रहे हैं जिन्होंने पहले अदानी के खिलाफ पोस्ट किए थे, ताकि पुराने ट्वीट और वीडियो हटवाए जा सकें।
सवाल सिर्फ इन्फ्लुएंसर्स पर नहीं
यह मामला केवल कुछ यूट्यूबर्स या X हैंडल्स तक सीमित नहीं है। सवाल अदानी समूह की मीडिया मैनेजमेंट रणनीति पर है—
क्या कॉरपोरेट आलोचना को नकद और पार्टियों से मैनेज किया जा रहा है? क्या सरकार-समर्थक ही नहीं, बल्कि तथाकथित “विरोधी आवाज़ें” भी PR के जाल में फँसाई जा रही हैं? क्या आज का डिजिटल एक्टिविज़्म सिर्फ रेट कार्ड का खेल बन चुका है?
भड़ास का सवाल
अगर आप इन्फ्लुएंसर हैं, यूट्यूबर हैं, अगर आपने सालों तक “अडानी लूट” लिखकर-बोलकर फॉलोअर्स बनाए हैं, तो साफ कहिए— आप सच के लिए लड़ रहे थे या बिकने की तैयारी कर रहे थे?
अदानी समूह और उनकी मीडिया टीम पर यह आरोप पहली बार नहीं हैं, लेकिन इस बार सवाल सीधे उन चेहरों पर है जो खुद को “स्वतंत्र”, “निडर” और “जनपक्षधर” कहते रहे हैं।
अब चुप्पी भी एक बयान है।
उधर पुगलिया जी का खेल तमाशा जारी है। अपने आदमी अदानी ग्रुप के मीडिया में हर जगह सेट करने के क्रम में रॉय पॉल का विकेट गिरवा दिया। इसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं। देखना है पुगलिया प्रबंधित अदानी पीआर ग्रुप द्वारा पैसे देकर अब किन किन को पागल बनाया जाता है ताकि वे रुपयों की मदहोशी में अदानी लूटकांड को भूलकर उल्टे अदानी की तारीफ़ शुरू कर दें!
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Anupam
December 17, 2025 at 10:06 am
Nice oppurtunity to earn money, keep creating multiple channels and make money after selling it, then create new one and do the same thing.