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राष्ट्रसेठ अडानी को अब ई-मेल के जरिए नोटिस भेजेगी अमेरिकी संघीय अदालत!

नई दिल्ली: अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अडानी और सागर अडानी को समन तामील कराने में आ रही बाधाओं को लेकर अब सीधे अमेरिकी संघीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। भारत सरकार द्वारा समन जारी करने के उसके अधिकार पर आपत्ति जताए जाने के बाद, SEC ने अदालत से अनुरोध किया है कि कूटनीतिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए अडानी बंधुओं को उनके अमेरिका स्थित वकीलों और कारोबारी ई-मेल के ज़रिये नोटिस भेजने की अनुमति दी जाए।

SEC ने बुधवार (21 जनवरी) को न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत में दाखिल याचिका में कहा कि उसे अब हेग कन्वेंशन के तहत नोटिस की तामील पूरी होने की कोई उम्मीद नहीं है। इसके साथ ही एजेंसी ने फरवरी 2025 से अपनाई जा रही संधि-आधारित प्रक्रिया को प्रभावी रूप से छोड़ दिया है। यह फैसला 14 महीनों से चल रही उस कोशिश में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसमें अडानी समूह को 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड इश्यू से जुड़े आरोपों की औपचारिक सूचना देने का प्रयास किया जा रहा था। इस बॉन्ड ऑफरिंग के ज़रिये अमेरिकी निवेशकों से करीब 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए गए थे।

SEC के मुताबिक, भारत के विधि और न्याय मंत्रालय के साथ करीब एक साल तक चली पत्राचार और बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। अदालत में दाखिल मेमोरेंडम में आयोग ने कहा कि मंत्रालय के रुख और समय बीतने को देखते हुए अब हेग कन्वेंशन के ज़रिये नोटिस तामील संभव नहीं लगती।

भारत की आपत्ति पर SEC का पलटवार
SEC को 14 दिसंबर 2025 को भारत के विधि और न्याय मंत्रालय की ओर से पत्र मिले थे, जिनमें यह आपत्ति जताई गई थी कि अमेरिकी नियमों के तहत जारी समन वैध श्रेणी में नहीं आते। मंत्रालय ने SEC की आंतरिक प्रक्रिया के नियम 5(b) का हवाला देते हुए कहा था कि दस्तावेज़ों की जांच के बाद यह पाया गया कि समन उचित नहीं हैं।

SEC ने इस आपत्ति को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसका हेग कन्वेंशन से कोई लेना-देना नहीं है। आयोग के अनुसार, हेग कन्वेंशन केवल नोटिस तामील की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, न कि प्रवर्तन कार्रवाई शुरू करने के अधिकार को। SEC ने यह भी कहा कि मंत्रालय का रुख ऐसा प्रतीत होता है मानो आयोग के पास समन जारी करने या हेग कन्वेंशन लागू करने का अधिकार ही नहीं है, जबकि संबंधित नियमों का इससे कोई संबंध नहीं है।

यह दूसरी बार है जब भारतीय मंत्रालय ने दस्तावेज़ों की तामील से इनकार किया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में यह कहकर समन लौटाए गए थे कि दस्तावेज़ों पर मुहर और हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि SEC का दावा है कि हेग कन्वेंशन के तहत इसकी कोई अनिवार्यता नहीं है।

अब ई-मेल और वकीलों के ज़रिये नोटिस की मांग
SEC अब फेडरल रूल्स ऑफ सिविल प्रोसीजर के नियम 4(f)(3) के तहत अदालत से अनुमति चाहता है, ताकि समन और शिकायत पत्र अडानी बंधुओं के अमेरिका स्थित क़ानूनी फर्मों और उनके कारोबारी ई-मेल पतों पर भेजे जा सकें। आयोग का तर्क है कि इससे प्रतिवादियों को प्रभावी सूचना मिलेगी, क्योंकि वे पहले से ही इस मामले से अवगत हैं और अपनी प्रतिक्रिया को सक्रिय रूप से संभाल रहे हैं।

सागर अडानी की ओर से हेक्कर फिंक एलएलपी और गौतम अडानी की ओर से किर्कलैंड एंड एलिस एलएलपी तथा क्विन इमैनुएल उरक्वार्ट एंड सुलिवन एलएलपी इस मामले में काउंसल के रूप में सामने आ चुके हैं। SEC का कहना है कि स्थापित वकीलों के माध्यम से नोटिस भेजना लगभग तय रूप से प्रतिवादियों तक सूचना पहुंचा देगा।

रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप
SEC ने 20 नवंबर 2024 को गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ सिविल शिकायत दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर के भुगतान या भुगतान के वादों से जुड़ी कथित रिश्वतखोरी योजना को अंजाम दिया। यह मामला सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा जारी बॉन्ड ऑफरिंग से जुड़ा है।

SEC का आरोप है कि बॉन्ड से जुड़े दस्तावेज़ों में भ्रष्टाचार-रोधी और रिश्वत-रोधी कार्यक्रमों को लेकर किए गए दावे कथित आचरण के मद्देनज़र भ्रामक थे। इसी दिन न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के लिए अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने भी समानांतर आपराधिक मामला दर्ज किया था, जिसमें प्रतिभूति धोखाधड़ी और वायर फ्रॉड की साज़िश के आरोप लगाए गए हैं।

अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को पहले ही “निराधार” बताते हुए कहा है कि वह सभी कानूनी विकल्पों का सहारा लेगा।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अमेरिकी अदालत SEC को ई-मेल और वकीलों के माध्यम से नोटिस भेजने की अनुमति देती है या नहीं, क्योंकि इससे यह मामला एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर सकता है।


घूसखोरी मामले में नरेंद्र मोदी सत्ता ने अदानी को नोटिस बीते 14 महीने से रोक रखा है। अब अमेरिकी संघीय अदालत अदानी को ई-मेल से नोटिस भेजेगी।
कहीं अदानी का मादुरो न हो जाए।
सोचिए कि अगर अदानी ने अमेरिकी कोर्ट में मुंह खोला तो उसकी पीठ पर बैठा बेताल प्रेत किसकी खोपड़ी फोड़ेगा? -सौमित्र राय, पत्रकार

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