विश्व दीपक-
सरदार, सरदार में फर्क होता है. एक डॉ मनमोहन सिंह थे. एक मोदी जी के मंत्री हरदीप सिंह पुरी हैं. मनमोहन सिंह मतलब मॉरल इंटीग्रिटी का दूसरा नाम. हरदीप सिंह मतलब नैतिक भ्रष्टाचार का ढीठ चेहरा.
मात्र आरोप लगने की वजह से साझा सरकार में सीनियर मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर निकाल फेंकना किसी बड़बोले के वश की बात नहीं. ऐसा दुस्साहस केवल डॉ साहब कर सकते थे जिनका जीवन, कैरियर, मन-आत्मा सब बेदाग थे.
सरकार कुर्बान करने की कीमत पर डॉ मनमोहन सिंह ने सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और शुचिता का पालन किया. दूसरी तरफ मोदी जी हैं. उनके मंत्री हरदीप पुरी मानव तस्कर और बच्चियों का यौन शोषण करने वाले एपस्टीन से 14 बार मिले थे.
दोनों के बीच 62 ईमेल्स का आदान-प्रदान हुआ. अगर एपस्टीन ने आत्महत्या नहीं की होती तो मुमकिन है मुलाकातों का सिलसिला बाद में भी जारी रहता.
हरदीप पुरी एपस्टीन से क्यों मिल रहे थे? मुलाकातें मोदी जी के पीएम बनने के बाद ही क्यों शुरु हुईं? देश को यह जानने का हक है. हरदीप सिंह पुरी जनता के प्रति उत्तरदायी हैं.
मई 2014 में मोदी जी पीएम बनते हैं. जून 2014 से हरदीप पुरी और एपस्टीन की मुलाकातें शुरू होती हैं. केवल 2014 में ही हरदीप पुरी एपस्टीन से 9 बार मिले. 5 से 9 जून के बीच दोनों के बीच चार मुलाकातें हुईं. इतनी मुलाकातें तो आज के जमाने में प्रेमी-प्रेमिका भी नहीं करते.
साल 2014 से 2017 के बीच दोनों के बीच 62 ईमेल्स का आदान-प्रदान हुआ. 32 हरदीप ने भेजे थे एपस्टीन को, 30 एपस्टीन ने हरदीप पुरी को.
एपस्टीन फाइल्स में नाम आने की वजह से नार्वे में पूर्व प्रधानमंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है, ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू को गिरफ्तार किया जा सकता है तो मोदी जी हरदीप सिंह पुरी का इस्तीफा क्यों नहीं ले सकते?
अगर नहीं ले पा रहे तो इसकी वजह क्या है? कहीं मोदी जी भी कंप्रोमाइज्ड तो नहीं?
इस आदमी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पता चलना चाहिए कि नाड़े के ढीले एपिस्टिन पर फिदा इस आदमी ने क्या-क्या राज बेचे हैं। हरदीप सिंह पुरी भारतीय राष्ट्रवाद के लिए खतरा क्यों नहीं है? वो नरेंद्र मोदी को इतना प्यारा क्यों है जो छोटो छोटी बच्चियों पर झपट्टा मारने वाले एपिस्टीन के आगे किसी गुलाम की तरह बिछा रहता था? -नवीन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार



