नीरेंद्र नागर-
असम के दलबदलू मुख्यमंत्री वैसे तो हर समय अपने सांप्रदायिक बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं लेकिन इन दिनों चुनावों के कारण उनके विषैले बयान और बढ़ गए हैं। साथ ही कांग्रेस ने उनकी पत्नी के नाम पर तीन-तीन पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति होने का आरोप भी लगाया है। इस कारण उनका नाम इधर कुछ ज़्यादा ही आ रहा है जिसे हमारा हिंदी मीडिया अपनी अराजक मानसिकता का परिचय देते हुए अलग-अलग तरह से लिख रहा है।
असम के मुख्यमंत्री के नाम की अंग्रेज़ी स्पेलिंग है Himanta Biswa Sarma और हिंदी मीडिया के लोग इसी स्पेलिंग के आधार पर उनका नाम तीन तरह से लिख रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, यह समझना आसान है।
असम के मुख्यमंत्री के नाम के पहले दो हिस्सों – Himanta और Biswa के अंत में a है। अब इस a का उच्चारण ‘अ’ भी हो सकता है और ‘आ’ भी। इसीलिए इसे तीन तरह से लिखा जा रहा है।
जागरण Himanta और Biswa के अंत में आने वाले a का उच्चारण ‘अ’ मानकर चल रहा है और लिख रहा हैं हिमंत बिस्व सरमा।
आजतक, NDTV हिंदी, ABP न्यूज़, DD News, Zee न्यूज़ और नवभारत टाइम्स इन दोनों में a का उच्चारण ‘आ’ मानकर चल रहे हैं – लिख रहे हैं हिमंता बिस्वा सरमा।
बीबीसी हिंदी और हिंदुस्तान बीच का रास्ता अपना रहे हैं। वे Himanta के a का उच्चारण तो ‘अ’ कर रहे हैं लेकिन Biswa के a का उच्चारण ‘आ’ कर रहे हैं – हिमंत बिस्वा सरमा।
नाम के पहले दो हिस्सों के मामले में भले ही हिंदी मीडिया में मतभेद हों परंतु सरनेम के मामले में आश्चर्यजनक एकरूपता नज़र आती है। सभी सरमा लिख रहे हैं।
यह तो हुआ अंग्रेज़ी का मामला जिसकी स्पेलिंग देखकर हमारे मीडिया संस्थान असम के मुख्यमंत्री के नाम को अपनी-अपनी तरह से लिख रहे हैं। इनमें से किसी ने भी शायद यह जानने की कोशिश नहीं की कि असमिया में यह नाम कैसे लिखा और बोला जाता है।
आइए, हम पता करते हैं कि असमिया में यह नाम कैसे लिखा और बोला जाता है।
असमिया में यह लिखा जाता है – হিমন্ত বিশ্ব শৰ্মা। जो लोग असमिया या बांग्ला लिपि नहीं जानते, उनको बता दूँ – लिखा है हिमंत विश्व शर्मा। यानी अगर आप असमिया स्पेलिंग के आधार पर लिखेंगे तो यही सही स्पेलिंग होगी – हिमंत विश्व शर्मा।
अब आप पूछ सकते हैं कि यदि सीएम साहब का नाम हिमंत विश्व शर्मा है तो उनके अंग्रेज़ी नाम की स्पेलिंग Himant Vishwa Sharma क्यों नहीं है, Himanta Biswa Sarma क्यों है।
इसके कारण मैं आपको एक-एक करके समझाता हूँ।
- Himanta के अंत में a इसलिए है कि असमिया में হিমন্ত को हिमंत की तरह नहीं, हिमोंतो जैसा बोला जाता है। इस उच्चारण को दर्शाने के लिए Himant के बाद a लगा दिया गया है।
- अब रहा सवाल Biswa में आने वाले b और s का। जब शब्द বিশ্ব (विश्व) है तो उसे Vishwa लिखा जाना चाहिए था, न कि Biswa। इसकी वजह यह कि असमिया वर्णमाला में ‘व’ है लेकिन उसको ‘ब’ बोला जाता है। इसीलिए V की जगह B. लेकिन अगर ‘व’ को ‘ब’ बोला जाता है तो भी Biswa क्यों? Bishwa क्यों नहीं? और सरनेम में Sarma क्यों, Sharma क्यों नहीं?
इसका कारण यह कि असमिया में ‘ष’, ‘स’ और ‘श’ – इन तीनों को एक अलग ही तरह से बोला जाता है। यह ध्वनि है ‘ह’ और ‘ख़’ के बीच वाली ध्वनि। इसलिए শৰ্মা का उच्चारण शोर्मा नहीं, ख़ोर्मा/होर्मा जैसा होता है। लेकिन বিশ্ব (विश्व) में संयुक्ताक्षर के कारण ‘श्’ को ‘स’ ही बोला जाता है हालाँकि उसका द्वित्व हो जाता है। बोला जाता है बिस्सो।
एक वाक्य में कहें तो असम के मुख्यमंत्री के नाम को असमिया उच्चारण के हिसाब से हिंदी में लिखा जाए तो निकटतम लिप्यंतर होगा हिमोंतो बिस्सो ख़ोर्मा/होर्मा। पुष्टि के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं जहाँ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय वह ख़ुद अपने नाम का उच्चारण कर रहे हैं।
अब जब आपने असम के मुख्यमंत्री के नाम की असमिया स्पेलिंग और उच्चारण जान लिए हैं तो आपको समझ में आ गया होगा कि हिंदी में उनका नाम जिन अलग-अलग तरह से लिखा जा रहा है, उनमें से कोई भी उनके असमिया नाम से पूरी तरह मेल नहीं खाता।
मैं नहीं कहता कि उनका नाम वैसे ही लिखा जाए, जैसा कि वहाँ बोला जाता है – हिमोंतो बिस्सो ख़ोर्मा या होर्मा। अगर ऐसा करेंगे तो फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम हिंदी में मोमोता ब्यानार्जि लिखना होगा। हम वैसा नहीं करते। हम उनकी अंग्रेज़ी (Mamata) और बांग्ला (মমতা) स्पेलिंग के आधार पर उनका नाम ममता बनर्जी लिखते हैं।
तो यही नियम असम के मुख्यमंत्री के मामले में क्यों नहीं अपनाया जाता? क्यों नहीं उनका नाम भी हिमंत विश्व शर्मा लिखा जाता?
मेरे विचार से लिखा जाना चाहिए।
जाते-जाते थोड़ी-सी अपने मन की बात।
जब मैं असम के मुख्यमंत्री के नाम पर रिसर्च कर रहा था तो मैंने असमिया में उनके नाम का उच्चारण पता लगाने की कोशिश की। तभी ख़्याल आया कि किसी दूसरे के हवाले से उच्चारण खोजने के बजाय ख़ुद श्रीमुख से ही सुन लिया जाए कि सीएम साहब अपना नाम कैसे बोलते हैं। इसीलिए उनके शपथग्रहण वाला विडियो खोजा। इसी विडियो में वह ईश्वर के नाम पर शपथ लेते हैं कि मैं संविधान और कानून के अनुसार सभी प्रकार के लोगों के साथ बिना किसी भय या पक्षपात, स्नेह या दुर्भावना के न्याय करूँगा।
सुनकर हँसी आती है, क्षोभ भी होता है कि देश के संवैधानिक पदों की शपथ प्रक्रिया को कितना सस्ता बना दिया है इन मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों ने। आख़िर कौनसा मंत्री-मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री होगा जो पक्षपात नहीं करता है, भेदभाव नहीं करता है? और असम के मुख्यमंत्री तो इस मामले में सबसे आगे की क़तार में हैं।
सोचिए, क्या फ़र्क़ है इनमें और उन पेशेवर गवाहों में जो सिर्फ़ पैसों के लिए अदालत में गीता, बाइबल और क़ुरआन की शपथ लेकर झूठी गवाही देते हैं।
वे किराए के गवाह पैसों के बदले गुनहगारों को सज़ा से बचा रहे हैं या बेगुनाहों को फाँसी पर चढ़ा रहे हैं तो ये माननीय दौलत और ताक़त की ख़ातिर देश की संपदा व्यापारियों और ठेकेदारों में लुटा रहे हैं और समाज में नफ़रत फैला रहे हैं, लोगों को टुकड़ों में बाँट रहे हैं।
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