नई दिल्ली: देश के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बनाया गया सरकारी फंड अब बड़े अफसरों के लग्जरी स्पोर्ट्स क्लबों और सुविधाओं पर खर्च हो रहा है। यह खुलासा The Indian Express की एक इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, National Sports Development Fund (NSDF) यानी राष्ट्रीय खेल विकास निधि का इस्तेमाल उन जगहों पर किया गया, जहां देश के शीर्ष नौकरशाह रहते हैं और एक्सक्लूसिव क्लब चलाए जाते हैं।
क्या है पूरा मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की जांच में सामने आया कि दिल्ली के पॉश इलाके न्यू मोती बाग में मौजूद एक हाई-प्रोफाइल रिहायशी परिसर में करोड़ों रुपये खर्च कर स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और दूसरी स्पोर्ट्स सुविधाओं को अपग्रेड किया गया। यह वही इलाका है जहां बड़े अफसर रहते हैं।
रिपोर्ट में दावा है कि इन सुविधाओं के निर्माण और मरम्मत के लिए NSDF से करोड़ों रुपये दिए गए। जबकि यह फंड मूल रूप से खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, खेल विकास और प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।
खिलाड़ियों के बजाय अफसरों को फायदा?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई सुविधाएं आम खिलाड़ियों या जनता के लिए खुली नहीं हैं। प्रवेश पर सुरक्षा गार्ड तय करते हैं कि कौन अंदर जाएगा। यानी सरकारी पैसे से बनी सुविधाओं का फायदा सीमित लोगों तक सिमट गया।
इंडियन एक्सप्रेस ने यह भी बताया कि Civil Services Officers Institute (CSOI) जैसी जगहों को भी इस फंड से सहायता मिली। सवाल यह उठ रहा है कि खिलाड़ियों के नाम पर बना पैसा आखिर अफसरों के क्लबों तक कैसे पहुंच गया?
संसद की समिति ने भी जताई चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, संसद की एक समिति पहले ही इस फंड के घटते आकार और उसके इस्तेमाल को लेकर चिंता जता चुकी है। समिति ने कहा था कि फंड सीमित है, इसलिए इसका उपयोग जिम्मेदारी से होना चाहिए।
इसके बावजूद सरकारी पैनल ने करोड़ों रुपये की ग्रांट मंजूर कर दी।
बड़ा सवाल
जब देश के कई खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं, ट्रेनिंग और आर्थिक मदद के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब खिलाड़ियों के नाम पर बने फंड का इस्तेमाल अफसरों के प्रीमियम क्लबों और आलीशान स्पोर्ट्स सुविधाओं पर होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह मामला सिर्फ फंड के इस्तेमाल का नहीं, बल्कि सरकारी प्राथमिकताओं का भी है — आखिर खेल विकास का पैसा खिलाड़ियों पर खर्च होगा या सत्ता और सिस्टम के वीआईपी ढांचे पर?

परीक्षा पेपर लीक हो रहे हैं, अफसर “डायवर्ट” किए गए पैसों से और मोटे होते जा रहे हैं (इंडियन एक्सप्रेस का एक्सपोज़ बस यहीं तक रुक जाता है), अडानी-अंबानी लगातार फल-फूल रहे हैं (इस पर इंडियन एक्सप्रेस खामोश है), चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों के सबसे बड़े सबूत सामने आ रहे हैं और तथाकथित “विश्लेषक” यह साबित करने में जुटे हैं कि बीजेपी वैसे भी जीत जाती… सच में? — मोदी राज की यही हकीकत है। -हरतोष सिंह बल


