नई दिल्ली। भारत में टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थायी रोक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल दुरोव ने न केवल भारत सरकार के फैसले की आलोचना की है, बल्कि देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो और सोशल मीडिया दिग्गज मेटा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। दुरोव के आरोपों ने डिजिटल स्वतंत्रता, इंटरनेट गवर्नेंस और कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के आईटी मंत्रालय ने कुछ यूजर्स द्वारा परीक्षा से जुड़े कथित लीक प्रश्न साझा किए जाने के कारण टेलीग्राम पर एक सप्ताह की रोक लगा दी। उनके मुताबिक, इस फैसले से भारत के 15 करोड़ से अधिक आम टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं को सजा मिली है, जबकि असली दोषी वे लोग हैं जिन्होंने परीक्षा सामग्री लीक की थी। दुरोव का कहना है कि इस प्रतिबंध से कोई समस्या हल नहीं हुई, बल्कि लीक से जुड़ी गतिविधियां दूसरे प्लेटफॉर्मों पर स्थानांतरित हो गईं।
केंद्र सरकार ने यह कदम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) से जुड़े कथित पेपर लीक और धोखाधड़ी नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए उठाया था। सरकार का कहना है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल फर्जी प्रश्नपत्र बेचने, अफवाह फैलाने और परीक्षार्थियों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा था। इसी आधार पर टेलीग्राम को 22 जून तक अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का आदेश जारी किया गया।
जियो पर ‘BGP हाइजैकिंग’ का आरोप
विवाद तब और बढ़ गया जब दुरोव ने रिलायंस जियो पर BGP (Border Gateway Protocol) Hijacking का आरोप लगा दिया। उन्होंने दावा किया कि जियो की ओर से की गई कथित नेटवर्क गतिविधियों के कारण भारत के बाहर, विशेषकर यूएई समेत कई देशों में लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की पहुंच प्रभावित हुई। दुरोव ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां जानबूझकर की गई प्रतीत होती हैं और इस संबंध में भेजी गई कई रिपोर्टों को नजरअंदाज किया गया।
हालांकि, इन आरोपों पर रिलायंस जियो की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही किसी स्वतंत्र एजेंसी ने इन दावों की पुष्टि की है।
मेटा का भी लिया नाम
दुरोव ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि टेलीग्राम के खिलाफ चल रहे दबाव और प्रतिबंध की कोशिशों के पीछे कारोबारी प्रतिस्पर्धा की भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि रिलायंस में मेटा की हिस्सेदारी है और यदि टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने की हालिया लॉबिंग के पीछे रिलायंस और व्हाट्सऐप (मेटा) की भूमिका हो तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा।
हालांकि, यह दुरोव का व्यक्तिगत आरोप है। इसके समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है। मेटा और रिलायंस दोनों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
टेलीग्राम का दावा- हमने सैकड़ों चैनल हटाए
दुरोव ने यह भी कहा कि टेलीग्राम ने पिछले कुछ सप्ताह में भारत में परीक्षा लीक और धोखाधड़ी से जुड़े सैकड़ों चैनलों को हटाया है। साथ ही “एडिटेड” लेबल को अधिक स्पष्ट बनाया गया है ताकि संदेशों के समय में हेरफेर कर फर्जी लीक का भ्रम न फैलाया जा सके।
कोर्ट पहुंचा मामला
इस बीच टेलीग्राम ने भारत सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती भी दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना अनुपातहीन कदम है और इससे करोड़ों वैध उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं।
फिलहाल यह मामला सरकार, टेलीग्राम और डिजिटल अधिकार समूहों के बीच बड़े टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर सरकार इसे परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर टेलीग्राम और इंटरनेट स्वतंत्रता के समर्थक इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक नियंत्रण का उदाहरण मान रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत और नियामकीय संस्थाओं की भूमिका इस विवाद की दिशा तय करेगी।
नरेंद्र प्रताप-
टेलीग्राम के Founder-CEO Pavel Durov ने भारत में लगाई गयी “रोक” पर अंबानी की टेलीकॉम कंपनी JIO और Meta पर कुछ गंभीर आरोप लगाये है.

भारत के IT मंत्रालय ने टेलीग्राम पर एक हफ़्ते के लिए बैन लगा दिया क्योंकि कुछ यूज़र्स ने परीक्षा के लीक हुए सवाल शेयर किए थे।
इससे भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ से ज़्यादा आम यूज़र्स को सज़ा मिल रही है — न कि उन लोगों को जिन्होंने परीक्षा का मेटीरियल लीक किया था। और इस बैन से कुछ भी नहीं रुका। लीक होने वाली जानकारी बस दूसरे ऐप्स पर चली गई।
भारतीय टेलीकॉम कंपनी रिलायंस, BGP हाइजैकिंग नाम के एक गलत तरीके से भारत के बाहर (UAE समेत) लाखों यूज़र्स के लिए टेलीग्राम का एक्सेस रोक रही है।
यह गड़बड़ी जानबूझकर की गई लगती है, क्योंकि रिलायंस ने कई रिपोर्टों को नज़रअंदाज़ किया है। यह शायद कॉम्पिटिशन की लड़ाई का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि रिलायंस में मेटा (WhatsApp की मालिक कंपनी) की भी कुछ हिस्सेदारी है।
नेटवर्क ऑपरेटर्स को सलाह दी जाती है कि वे रूट हाइजैक को रोकने और अपने यूज़र्स के लिए स्टेबल इंटरनेट एक्सेस सुनिश्चित करने के लिए रिलायंस (AS18101) से आने वाले अनऑथराइज़्ड BGP अनाउंसमेंट्स को रिजेक्ट कर दें।
ग्लोबल इंटरनेट रूटिंग का इस तरह का गलत इस्तेमाल चिंताजनक है। अगर भारत में टेलीग्राम पर बैन लगाने की हालिया लॉबिंग कोशिशों के पीछे भी रिलायंस/WhatsApp का हाथ हो, तो मुझे हैरानी नहीं होगी।


