अच्छे दिन : मस्जिदें गिराई जा रही हैं, मंदिर की छत गिर गई। खबर दोनों की नहीं। यह तो बताया ही नहीं कि निर्माणाधीन मंदिर में श्रद्धालु गए कैसे या जाने क्यों दिया गया?
संजय कुमार सिंह
करार और प्रचार की खबरों के बाद आज ज्यादातर अखबारों की लीड होर्मुज फिर बंद होने की खबर है। दि एशियन एज के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा है कि बंगाल अब बेड़ियों से मुक्त है, राज्य के गौरव की वापसी शुरू हो चुकी है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने बंगाल के ‘झूठे’ इतिहास की आलोचना की। उन्होंने कहा, विभाजन के दौरान कांग्रेस ने राज्य को त्याग दिया था। टेलीग्राफ ने ही खबर दी है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अब तो एक ही सेना है कहकर, अपने ऑपरेशन टाइगर को हवा दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे का कोई अलग गुट नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राज्य में अलग-अलग शिवसेना होने की बात खत्म हो गई है और सिर्फ एक ही असली शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) अस्तित्व में है। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले दल को ‘शिवसेना-शिंदे गुट’ कहना पड़ता था, लेकिन अब कोई गुट नहीं बचा है क्योंकि विभाजन के बाद अब केवल एक ही शिवसेना है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे खेमे से कई सांसदों के बागी होकर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं। आप जानते हैं कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों के ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय के मामले में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। अध्यक्ष ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए बागी गुट और ममता बनर्जी (मूल टीएमसी) दोनों को सुनने के बाद भी निर्णय नहीं लिया है। अभिषेक बनर्जी ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पार्टी एक अखंड राजनीतिक इकाई है, इसलिए बागियों के अलग गुट को मान्यता न दी जाए। मूल पार्टी का तर्क है कि सांसदों का अकेला समूह इस तरह विलय नहीं कर सकता। शिवसेना के सांसदों का मामला अलग और इसके बाद का है फिर भी गृहमंत्री ने ऐसे बात की जैसे फैसला हो चुका है। और खबर तो ढूंढ़नी की पड़ती है।
दूसरी ओर, आज नीट की पुनर्परीक्षा है। पहले कहा जा चुका है कि सब प्रधानमंत्री की निगरानी में होगा। आज द टेलीग्राफ में खबर है, प्रधानमंत्री कलकत्ता में योग के राष्ट्रीय आयोजन में शामिल होंगे। अखबार के अनुसार, रविवार सुबह रेड रोड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में 30,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस शहर में इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाला यह पहला कार्यक्रम है, जो सुबह 6:30 बजे से 7:50 बजे तक चलेगा। मैदान और एस्प्लेनेड क्षेत्रों की कई सड़कें यातायात के लिए बंद रहेंगी। आप जानते हैं कि भाजपा की सरकारों को सड़क पर नमाज पढ़ने से कितनी दिक्कत है। अब तो मस्जिदें भी तोड़ी जा रहा हैं। ऐसे में योग के कार्यक्रम को लेकर विवाद और राजनीतिक बहस होनी ही थी। योग दिवस जैसे बड़े सरकारी कार्यक्रम के लिए एक सप्ताह तक रेड रोड बंद किए जाने को लेकर आम लोगों की असुविधा का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था। कोर्ट ने भी सरकार से सवाल किया था कि इस तरह के आयोजनों के लिए शहर की मुख्य सड़क को इतने लंबे समय तक क्यों बंद रखा जाता है। इस तरह प्रधानमंत्री ने कलकत्ता से नीट पुनर्परीक्षा की निगरानी तो की ही, कई दिनों तक कलकत्ता की एक सड़क बंद रखने का महत्व भी बढ़ाया है। इसके बावजूद अमर उजाला की लीड नीट पुनर्परीक्षा है। अखबार की खबर है कि यह कड़ी सुरक्षा में होगा। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, लेबनान पर हमले, ईरान ने किया होर्मुज को बंद जबकि सेकेंड लीड का शीर्षक है, नीट री एग्जाम : तैयारियों की परीक्षा आज। कहने की जरूरत नहीं है कि ये सब हेडलाइन मैनेजमेंट वाली खबरें हैं और आज नवोदय टाइम्स में ऐसा ही एक शीर्षक है, “अपनी ही बेड़ियों से मुक्त हो गया बंगाल : मोदी”।
इस खबर के बाद आज देशबन्धु की लीड पढ़कर लगा पत्रकारिता अपनी ही बेड़ियों में कैद है। लीड का शीर्षक है, दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने किया दूसरा बड़ा प्रदर्शन। धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े। राहुल गांधी ने कहा है, बच्चों के भविष्य से खेलना बंद करे सरकार और अखबार की तीसरी बड़ी खबर है महाराष्ट्र के परभनी में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन मंदिर की छत गिरने से सात श्रद्धालुओं की जान गई। निर्माणाधीन मंदिर की छत गिरना भी खबर नहीं है तो क्यों, समझना मुश्किल नहीं है। हालांकि यह नहीं समझ में आया कि निर्माणाधीन मंदिर में श्रद्धालु गए क्या करने थे और यह मामला ऐक्ट ऑफ गॉड है या ऐक्ट ऑफ फ्रॉड। ये सब बातें आम तौर पर अब अखबारों में होती नहीं हैं जबकि हेडलाइन मैनेजमेंट वाली एक और खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में भी है। इसका शीर्षक है, चुनाव के बाद पहली घोषणा में मोदी ने बंगाल के लिए 1492 करोड़ की विकास परियोजनाओं की घोषणा की। हिन्दुस्तान टाइम्स में बंगाल के सही पथ पर आने की प्रधानमंत्री की घोषणा सेकेंड लीड है। इसका शीर्षक है, बंगाल आखिरकार 1947 में सोचे गए रास्ते पर है : पीएम। द हिन्दू की सेकेंड लीड एक नई खबर है जो अभी तक किसी और अखबार में नहीं दिखी। इस खबर के अनुसार उड़ीशा में प्रधानमंत्री ने 47,000 करोड़ की संरचना परियोजनाओं का खुलसा किया। इसके साथ छपी एक और खबर का शीर्षक है, लद्दाख के संगठनों ने केंद्र सरकार के ‘पीछे हटने’ पर विरोध का आह्वान किया। खबर के अनुसार, लद्दाख नागरिक समाज के प्रमुख संगठनों – लद्दाख एपेक्स बॉडी (एलएबी) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) – ने शनिवार को 23 जून को बंद का आह्वान किया। यह विरोध केंद्र के “22 मई के फैसलों से पीछे हटने” और “बैठक के तय मिनट्स (कार्यवृत्त) जारी करने में देरी” के खिलाफ है। एक और खबर है जिसकी खूब चर्चा है, लेकिन अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। यह खबर आज अमर उजाला में पहले पन्ने पर है, चढ़ावे में चोरी के मिले साक्ष्य, गोपाल राव और अनिल की भूमिका संदिग्ध। एसआईटी जांच पूरी…. कल सीएम को सौंपेगी रिपोर्ट। टिन्नू और रकम पार करने वालों पर दर्ज हो सकती है एफआईआर।
इस तरह, आप समझ सकते हैं कि ज्यादातर अखबारों में पहले पन्ने की खबरें हिज मास्टर्स च्वाइस वाली ही हैं। उत्तर प्रदेश का अमर उजाला चंदा चोरी की खबर कैसे न छापे और भले इसे छाप दिया है लेकिन देशबन्धु वाली खबरें नहीं हैं। इनकी जगह जो खबरें हैं उनके शीर्षक है, पीएम ने किसानों के खातों में भेजे 18880 करोड़ रुपए। इसी तरह, स्वास्थ्य के लिए खतरा 16 एफडीसी दवाओं पर रोक। मुझे लगता है कि आम आदमी ना ऐसी दवाएं खाता है ना इस तरह की रोक से उसे असर पड़ता है। मेरी चिन्ता यह है कि ये अभी तक बिक कैसे रही थीं या बन क्यों रही थीं। दवाइयों के लिए तो नियम है कि डॉक्टर की पर्ची के बना न बेची जाएं और जो बहुत समान्य किस्म की दवाएं हैं वही बिकती हैं। बाकी बिक रही थीं अब बिक्री बंद हो या उत्पादन मतलब दवा बेचने वालों और गिने-चुने उपभोक्ताओं को ही होगा जो बिना पर्ची दवा खरीदते थे अब डॉक्टर से लिखवा लेंगे। जब प्रश्नपत्र सेट करने वाले लीक कर देते हैं तो डॉक्टर जरूरतमंद को दवाई लिख क्यों नहीं लिख देंगे? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इंडियन एक्सप्रेस में पतंजलि का बड़ा सा प्रचार है और आज यह भी इसका एक्सक्लूसिव हो सकता है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


