इस बीच चलेगा हेडलाइन मैनेजमेंट और किए जाएंगे बचाव के उपाय। ‘सूत्रों के इस्तीफे’ पर फैसला 14 दिनों बाद!
संजय कुमार सिंह
वैसे तो आज की सबसे बड़ी खबर महाराष्ट्र में टीईटी परीक्षा के पर्चे लीक होना और इस कारण परीक्षा रद्द कर दिया जाना है लेकिन मेरे दस में से नौ अखबारों में यह खबर लीड नहीं है। देशबन्धु ने इसे पांच कॉलम से ज्यादा में लीड बनाया है। शीर्षक है, अब महाराष्ट्र में टीईटी का पेपर लीक। अखबार ने अपनी इस मूल खबर के साथ राहुल गांधी का बयान, यह तो युवाओं के भविष्य की चोरी है और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामले शीर्षक से दो खबरें छापी हैं। अमर उजाला और नवोदय टाइम्स की खबरों से राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरों की पुष्टि से मामला खत्म हो गया जैसा माहौल बनाने की कोशिश की गई है। यह इस मामले से निपटने की संघ परिवार की रणनीति का भाग हो सकता है। कल आपने पढ़ा कि ‘सूत्रों के अनुसार’ इस्तीफे की खबर को लीड बनाकर आस्था के साथ खिलवाड़ से पनपे गुस्से को कम करने की कोशिश की गई थी। आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, लंबी फजीहत के बाद आखिरकार चंपत राय व अनिल मिश्रा का ट्रस्ट से इस्तीफा। दैनिक भास्कर में यह खबर दो कॉलम में है और शीर्षक से ही स्पष्ट है कि अभी इस्तीफों पर फैसला नहीं हुआ है। फ्लैग शीर्षक है, चढ़ावा चोरी (पर) राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार दी सफाई। मुख्य शीर्षक है : “चंपत राय-अनिल मिश्र के इस्तीफों पर फैसला फैसला 11 को; दोषियों को कठोर सजा”। आप समझ सकते हैं कि इतने बड़े और गंभीर मामले में संघ परिवार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। चोरी की सजा इस्तीफा नहीं है और चौकीदार चोर हो तो उसे काम से हटा भर नहीं दिया जाता है। हालांकि, काम पर रखने के तुरंत बाद, किसी चोरी से पहले पता चले तो सबसे आसान और सुरक्षित तरीका यही होता है। राम मंदिर मामले में ऐसा नहीं है। कई सारे सवाल हैं। अखबार और परिवार के लोग जवाब देने की बजाय मामले को निपटाने में लगे दिख रहे हैं।
दैनिक भास्कर ने अखिलेश यादव के हमले, भाजपा के लिए पैसा ही धर्म और कांग्रेस के सवाल … प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं को पहले पन्ने पर प्रमुखता से छपा है। लेकिन अमर उजाला पूरे मामले को खत्म करता दिख रहा है। उपशीर्षक है, 11 जुलाई को न्यास की बैठक में नए नामों पर विचार और ट्रस्ट ने कहा – आभूषण और चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित। मुख्य खबर के साथ की एक खबर का शीर्षक है, सरकार-संघ के चौतरफा दबाव में हुआ इस्तीफा। स्पष्ट है, चोरी का आरोपी इस्तीफा भी नहीं दे रहा है जबकि उसे जेल में होना चाहिए था। आप कह सकते हैं कि एसआईटी की रिपोर्ट में नाम नहीं है इसलिए आरोपी नहीं हैं। हो सकता है लेकिन, ऐसा ही है तो इस्तीफे के लिए दबाव की क्या जरूरत और इस्तीफा लिया ही क्यों गया जब उसपर अभी फैसला नहीं हुआ है और जब फैसला ही नहीं हुआ है तो खबर इतनी बड़ी क्यों है? जाहिर है, पूरा परिवार कहानी गढ़ने में लगा है जो उसका मुख्य काम और अनुभव है। नवोदय टाइम्स में एक खबर का शीर्षक है, जांच में कई अनियमितताएं उजागर। खबर के अनुसार, एसआईटी की प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। चढ़ावे के प्रबंधन में कई चढ़ावे की राशि किस तरह निकाली गई और कुल कितनी रकम का गबन हुआ, इसकी जांच जारी है। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार नकदी की गिनती के दौरान सुरक्षा गार्ड की तैनाती, गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले कर्मचारियों की तलाशी तथा चढ़ावे की गिनती से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को 180 दिन तक सुरक्षित रखने जैसी मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियमों के विपरीत चंपत राय के पूर्व चालक रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास कई दानपात्रों की चाबियां थीं। सूत्र ने कहा, ‘एसओपी के तहत चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य किया गया था। सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज (एसआईएस) के माध्यम से सुरक्षा गार्ड की तैनाती, गिनती कक्ष में आने-जाने वाले सभी कर्मियों की नियमित तलाशी तथा औचक निरीक्षण का भी प्रावधान था, लेकिन इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।’
आप समझ सकते हैं कि गड़बड़ी कितनी गंभीर और किस स्तर की है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर सरकार समर्थक एक टिप्पणी इस प्रकार है, अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे के सम्बन्ध में सारा खेल स्टाफ के विश्वासघात का है। ट्रस्ट ने यह कभी सोचा भी नहीं होगा कि आस्था का यह चढ़ावा , यह धन लोगों के मन में लालच भी पैदा कर सकता है। धन के लालच ने इनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी। जितने लोग पकड़े गए हैं उनकी तमाम संपत्ति जब्त कर लेनी चाहिए। इन्होंने तो प्रभु श्रीराम के प्रकोप का भी ध्यान नहीं रखा कि ईश्वर सब देख रहा होगा। । सभी ट्रस्टी गलत हैं या सब मिले हुए हैं यह कहना फिलहाल सही नहीं होगा। इसमें चौकीदार का चोर होना, उसकी मिलीभगत आदि मुद्दा ही नहीं है। इससे पहले कहा गया था, श्री राममंदिर तीर्थ क्षेत्र ने बयान दिया है कि सभी चांदी की ईटें और सोने की वस्तुऐं सुरक्षित हैं। कृपया अफवाहों पर ध्यान ना दें। कल अखबारों में खबर थी कि गिरफ्तार लोगों से चोरी का मामल बरामद किया गया है। क्या चोरी का माल बरामद हो जाने के बाद चोरी का मामला नहीं बनता है? मुझे लगता है कि यह विचारधारा का मामला है और विश्वासघात मुद्दा होता तो 15 लाख भी मुद्दा बना होता और 15 लाख नहीं बना तो स्विस बैंक में रखा काला धन, उसे वापस लाना – कुछ तो बनना चाहिए था लेकिन वह सब नहीं हुआ और अब यह समझना मुश्किल नहीं है कि राम के नाम पर सत्ता हथियाई गई है और अब समर्थकों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाकर कहानियां गढ़ी जा रही हैं। शिकायत है तो कोर्ट जाओ जैसी दलीलें भी हैं लेकिन इनका अब कोई मतलब नहीं है। सब कुछ पहले की ही तरह है सिर्फ लक्ष्य बदल गया है। अब सत्ता का बचाव किया जा रहा है पहले विरोध होता था।
अंग्रेजी अखबारों में अयोध्या
सरकार की इस रणनीति या योजना के तहत आज हिन्दु्स्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू और दि एशियन एज की लीड अयोध्या के राम मंदिर की खबर है। द टेलीग्राफ की लीड मौसम की खबर है और इसके अनुसार, इस बार का मानसून 17 साल में सबसे कमजोर है। देश भर में जलाशय सूखे हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की लीड अपने आप आप में सबसे अलग है। इसका शीर्षक है, रुबियो ने कहा ट्रम्प अगले साल के शुरू में भारत आ सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि अंग्रेजी के किसी भी अखबर ने महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक की खबर को लीड नहीं बनाया है। लेकिन द टेलीग्राफ में भी यह पहले पन्ने पर छोटी सी खबर है। इंडियन एक्सप्रेस में यह लीड के बराबर में दो कॉलम की खबर है जबकि दि एशियन एज में तीन कॉलम की है। दोनों ने तीन लोगों को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर दी है। दि एशियन एज ने राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को भी पहले पन्ने पर मूल खबर के साथ जगह दी है। द हिन्दू में यह चार कॉलम की खबर है और सरकार का यह पक्ष भी शीर्षक में है कि परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सिंगल कॉलम में है और खबर का एक हिस्सा हाईलाइट किया गया है। इसके अनुसार हिन्दुस्तान टाइम्स में यह सिंगल कॉलम की खबर है। खबर का एक हिस्सा हाईलाइट किया गया है। इसके अनुसार, शुरुआती जांच से यह संकेत मिलता है कि पर्चे दिल्ली से लाए गए थे। महाराष्ट्र की परीक्षा के पर्चे दिल्ली से ले जाए गए तो मामला वैसे भी उलझा लगता है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस ने विशेष जांच के आदेश दिए हैं और प्रधानमंत्री शिक्षा मंत्री को हटा नहीं रहे हैं।
हिन्दी अखबारों में पेपर लीक
देशबन्धु में पेपर लीक की खबर लीड है जबकि दैनिक भास्कर में यह दो कॉलम की खबर है। फ्लैग शीर्षक है, व्यवस्था में छेद : बिहार – हरियाणा के हैं आरोपी। पेपर लीक के बाद महाराष्ट्र टीईटी टला, 3 आरोपी पकड़े। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया यहां भी मुख्य खबर के साथ है। अमर उजाला में यह सिंगल कॉलम की खबर है और इसका हाइलाइट किया अंश है, बिहार से दो और हरियाणा से एक आरोपी गिरफ्तार। नवोदय टाइम्स में यह सिंगल कॉलम की खबर है। मुख्य शीर्षक है, प्रश्नपत्र से मिलते प्रश्न मिले लोगों के पास, टीईटी स्थगित। उपशीर्षक है, आज होनी थी महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा। तीन लोगों के खिलाफ भिवंडी में मामला दर्ज। मुझे लगता है कि मामला इच्छा शक्ति का है। कोई कारण नहीं है कि सरकार न चाहे और प्रश्न पत्र लीक हो जाए। वह भी, बार-बार। री-नीट के लिए जो दिखावे किए गए उसके बावजूद तथ्य है कि बिहार में कई लोग दूसरों के लिए परीक्षा देते पकड़े गए हैय़ यह भी परीक्षा कराने वालों की गड़बड़ी या कमजोरी है। अभी यह मुद्दा ही नहीं है और जिस ढंग से प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं, जो खबरें छप रही हैं उससे लगता है कि कोई गिरोह यह सब कर रहा है और सरकार ने घुटने टेक दिए हैं। इसे रोकने का सबसे आसान और पुराना तरीका है, प्रश्नपत्रों के कई सेट तैयार करना और अंतिम समय में फैसला करना कि कौन सा प्रश्नपत्र परीक्षार्थियों को दिया जाए। इससे अगर सारे पर्चे लीक हो जाएं तब भी पता नहीं चलेगा कि कल कौन सा पर्चा बंटेगा। आज की खबर से लग रहा है कि अधिकारियों को पता था कि कल कौन सा पर्चा बंटने वाला है। संभव है, असंबद्ध लोगों को भी पता होता है कि परीक्षा में कौन सा प्रश्नपत्र बंटेगा या फिर प्रश्नपत्रों का एक ही सेट तैयार होता है। मैं नहीं जानता यह सही है या नहीं, खबरों से यही लग रहा है और इसीलिए मैंने कहा कि पेपर लीक रोकने की इच्छा शक्ति नहीं दिख रही है। इच्छा शक्ति हो और दिखावा नहीं करना हो तो वायु सेना को लगाने और हवाई अड्डे पर इंतजार करके छात्रों का ख्याल रखने का प्रचार करने की कोई जरूरत ही नहीं थी। वैसे तो शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी भर से छवि बन सकती है लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा होगा, समझना मुश्किल नहीं है और यह चंदा चोरी मामले में दिख ही रहा है। संभव है यह सब खतरे में पड़े हिन्दुओं की रक्षा की कीमत हो। तय संपादकों और पाठकों को करना है। कायदे से बताना भी चाहिए।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



