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पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण पर कार कंपनियां खामोश क्यों हैं?

Gray Volkswagen sedan driving on a sunlit road with trees in the background (front three-quarter view)./ Rearview mirrors visible, motion blur suggests speed.

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। इस बीच एक नया सवाल सामने आया है कि इस पूरे मुद्दे पर ऑटोमोबाइल कंपनियां सार्वजनिक रूप से अपनी राय क्यों नहीं रख रही हैं।

सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर कई लोगों का कहना है कि यदि E20 ईंधन से वाहनों के प्रदर्शन, माइलेज या इंजन पर कोई प्रभाव पड़ता है, तो इसकी सबसे सटीक जानकारी कार और दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों तथा उनके अधिकृत सर्विस नेटवर्क के पास होनी चाहिए। ऐसे में कंपनियों को सामने आकर उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

बहस में यह तर्क भी दिया जा रहा है कि वाहन कंपनियों के सर्विस सेंटरों पर रोजाना बड़ी संख्या में कारें और बाइक सर्विस के लिए आती हैं। यदि E20 ईंधन के इस्तेमाल से कोई तकनीकी समस्या या सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, तो उसका वास्तविक फीडबैक इन्हीं कंपनियों के पास होगा। इसके बावजूद इस विषय पर अधिकांश वाहन निर्माताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया बेहद सीमित रही है।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कंपनियों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या मौजूदा वाहन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं और यदि किसी मॉडल में तकनीकी सीमाएं हैं तो उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि कई वाहन निर्माता पहले ही अपने नए मॉडलों को E20-अनुकूल (E20 Compatible) बताने का दावा कर चुके हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा। दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञ और वाहन उपभोक्ता इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

ऐसे में बढ़ती बहस के बीच उपभोक्ताओं की नजर अब ऑटोमोबाइल कंपनियों पर है। मांग की जा रही है कि वे अपने तकनीकी आंकड़ों और सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें, ताकि E20 को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच तथ्यात्मक तस्वीर सामने आ सके।


इथेनॉल बहस में कार कंपनियों की कोई आवाज़ नहीं है। उन्हें सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उनके सर्विस स्टेशन में कारें आती होंगी। बाइक आती होगी। कुछ तो फीडबैक होगा। उन्हें पता होगा कि मंत्री सही बोल रहे हैं या नहीं। क्या उन्हें भी डर लग रहा है? इतनी बड़ी बड़ी कार कंपनियाँ हैं और चूँ तक नहीं? डर इस देश का बुनियादी चरित्र हो गया है।
-रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

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