Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

चंपत राय को बचाने के लिए इस्तीफा तो दिला दिया लेकिन जिस बजरंग को ट्रस्ट सौंपा वह भी दूध का धुला नहीं है!

Two Indian men stand side by side in front of a temple backdrop; a large red arrow points from the left man toward the right, suggesting a shift or connection. NBT logo in the top-right corner.

देश में इस वक्त सबसे ज्यादा राम मंदिर और एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर बवाल कटा हुआ है। इस बीच प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर भारत छोड़ गए हैं। एथेनॉल पर धंसते एक्सप्रेस वे मंत्री गडकरी को खामोश रहने को बोला गया है तो वहीं दूसरी तरफ चंपत राय का इस्तीफा दिलाकर उन्हें चोरी मुक्त करने की जद्दोजहद कामयाब होती दिख रही है। अब जो इस पूरे प्रकरण पर सबसे दिलचस्प पहलू है वह ये कि जिस बजरंग लाल बागरा को राम मंदिर ट्रस्ट का नया प्रमुख बनाया गया है उनपर पहले से ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। कल को यदि उन्होंने भी चोरी जैसी वारदात को अंजाम दिया तो क्या इसकी गारंटी भी श्रीराम ही लेंगे…पढ़ें


सुप्रिया श्रीनेत-

राम मंदिर में हुई डकैती के बीच चंपत राय ने तो बचने के लिए ट्रस्ट से इस्तीफ़ा दे दिया

लेकिन ट्रस्ट में लाया किसे गया? बजरंग लाल बागरा को

इनको CVC ने दो घोटालों में क्लियरेंस नहीं दी थी जिसके चलते इन्हें NALCO के CMD पद से हटा दिया गया था

प्रभु राम के ट्रस्ट के लिए घोटालेबाज़ों, जालसाज़ों और दाग़दार लोगों को छोड़ कर एक बेदाग़ आदमी नहीं मिल सकता है क्या?

पाप है यह….

Table titled 'EX-CMDs WHO LEFT UNDER A CLOUD' listing five ex-CMDs with columns Name, Tenure, Charges: S N Jobri (1993–1999) alleged parking surplus and misused funds; S K Tamotia (1996–1998) alleged amassing disproportionate assets; C Venkataraman (2002–2004) sexual misconduct charges by a female employee; A K Srivastava (2009–2011) detained over bribery allegations; B L Bagra (2011–2012) involved in lime slurry procurement and ash pond disposal contracts.

यश भारतीय-

राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव और सवालों के घेरे में उनका पुराना रिकॉर्ड!

​अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे के बाद बजरंग लाल बागड़ा को कमान सौंपी गई है। ट्रस्ट इसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बता रहा है, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके पुराने सरकारी करियर पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।

  • असमय बर्खास्तगी: साल 2013 में सरकार ने उनके रिटायरमेंट से 10 महीने पहले ही उन्हें सेवा से बर्खास्त (Terminate) कर दिया था।
  • ₹15 करोड़ का लाइम खरीद घोटाला: टेंडर नियमों में हेरफेर और पसंदीदा सप्लायर्स को फायदा पहुँचाने का आरोप।
  • ₹107 करोड़ का फ्लाई-ऐश घोटाला: वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में CVC और CBI जांच के दायरे में रहे।
  • भर्तियों में अनियमितता: कास्टिक सोडा खरीद और मैनेजमेंट ट्रेनीज की भर्तियों में नियमों की अनदेखी।

​जब चंदे की हेराफेरी को लेकर ट्रस्ट पहले ही सवालों के घेरे में रहा है, तब ऐसी नियुक्ति पर जनता का चिंतित होना स्वाभाविक है। क्या इस नियुक्ति की गहराई से जांच नहीं होनी चाहिए?


चंपत राय को बेदाग़ साबित करने में पूरा मंदिर प्रबंधन जुट गया है।
जांच तक पूरी होने का इंतज़ार नहीं है, ट्रस्ट को पता है कि ये उनकी ही माँग पर बनी हुई SIT है..
जो उनके ही आगे नतमस्तक है।
वे जैसा चाहेंगे, वैसी ही रिपोर्ट आएगी।
वे ही संदिग्ध हैं। वे ही आरोपी है।
वे ही वकील हैं और वे ही जज भी हैं।
-अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार

ABP News live Hindi article about the Ram Mandir donation case, date 07 Jul 2026 visible at top of page.

मुकेश कुमार-

राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट ने आज अपनी बैठक में खुद को क्लीन चिट दे दी। अपने को पाक-साफ़ बताते हुए उसने कहा कि सब कुछ ठीक है, कोई चोरी-वोरी नहीं हुई है। उसने कुछ उन चढ़ावे की चीज़ों को प्रदर्शित भी किया जिनके चोरी होने की बात कही जा रही थी।

  • ट्रस्ट के मुताबिक 3264 करोड़ रुपए दान प्राप्त हुआ
  • 2370 करोड़ रुपए निर्माण आदि में खर्च हुए

मंदिर बनने से 31 मार्च 2026 तक 482 करोड़ रुपए चढ़ावा आया इसमें 391 करोड़ रुपए मंदिर संचालन में खर्च हुआ….बाकी पैसा बैंक खातों में उपलब्ध है। 2926 भेंट मंदिर को प्राप्त हुईं ….चांदी की वस्तुओं को गलाकर छड़ें बनाई गई हैं।

लेकिन ट्रस्ट के ये जवाब कतई संतुष्ट करने वाले नहीं हैं। अव्वल तो उसने इसके लिए क़रीब एक महीने का समय लिया। इस बीच एक ऐसी जाँच करवाई जिसका कोई कानूनी महत्व नहीं था और न ही कोई विश्वसनीयता थी।

ये साफ़ नज़र आ रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक का मक़सद चढ़ावे की लूट को छिपाना था। लेकिन पहला सवाल तो यही उठ रहा है कि क्या उसने एक महीने का समय इसलिए लिया ताकि चोरी हुई चीज़ों को बटोरकर साबित कर सके कुछ चोरी नहीं हुआ है।

अगर चोरी नहीं हुई तो मंदिर के कर्मचारियों से लाखों की रकम कैसे बरामद हुई….कैसे 15-20 हज़ार की तनख्वाह पाने वाले कर्मचारी एकदम से महल बनवाने लगे, महंगी गाड़ियाँ खरीदने लगे……और तमाम सबूत बता रहे हैं कि चोरी आज से नहीं मंदिर प्रोजेक्ट के पहले दिन से ही शुरू हो गई थी।

ज़मीन की खरीदी हो या निर्माण सामग्री की ख़रीदी, हर जगह घोटाला हुआ। मगर ट्रस्ट इन सब आरोपों पर अभी भी चुप है और विश्वसनीय जाँच से बच रहा है या उसे बचाया जा रहा है।

दूसरा सवाल ये है कि अगर कुछ हुआ नहीं तो फिर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े क्यों स्वीकार किए गए? अगर वे पाक साफ़ थे तो उन्हें बने रहने दिया जाता और अगर नहीं हैं तो उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। ज़ाहिर है कि ये केवल लोगों को दिखाने के लिए किया गया कि देखिए कितनी सख़्त कार्रवाई की गई है।

एक अपुष्ट ख़बर ये है कि जिन बजरंग लाल बागड़ा को चंपत राय की जगह महासचिव बनाया जाने वाला है, वे ख़ुद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे हैं। दो घोटालों के आरोप लगने के बाद उन्हें नाल्को के सीएमडी पद से हटा दिया गया था।

साफ़ है कि ट्रस्ट की मीटिंग भ्रष्टों को बचाने के लिए एक दिखावा थी। ये मोदी-योगी सरकारों और आरएसएस को बचाने का भी ऑपरेशन था लेकिन क्या वे आरोप मुक्त हो जाएंगे….क्या भक्तों के मन में पैदा हुए संदेह दूर हो जाएंगे?


समीरात्मज मिश्रा-

चंपतराय और अनिल मिश्र के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए गए हैं। लोगों को ये भी नहीं पता चल सका कि उन्होंने इस्तीफ़ा किसे दिया, कब दिया और क्यों दिया?

बहरहाल, चंपतराय की जगह कृष्ण मोहन को नया महासचिव बना दिया गया है। उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताई कि चढ़ावा चोरी मामले में दूध का दूध पानी का पानी कर देंगे।

यूँ तो कृष्ण मोहन जी भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे हैं लेकिन संघ से लंबा जुड़ाव रहा है। पदाधिकारी भी रहे हैं।

पिछले साल ट्रस्ट के एकमात्र दलित सदस्य कामेश्वर चौपाल की मौत के बाद कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में शामिल किया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट में उनकी एंट्री चंपतराय की सिफ़ारिश पर हुई थी। और अब उनके जाने के बाद वो महासचिव बन रहे हैं।

इसलिए चढ़ावा चोरी के दोषियों को सज़ा मिलकर रहेगी, ये तय मानिए।


वरुण उपाध्याय-

राम मंदिर में चोरी भगवान राम ने ही पकड़ी। भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं। कुछ लोग मंदिर, आस्था और भगवान की शक्ति पर सवाल उठाने लगे हैं। उन्हें कुछ अंदर की बात बताता हूँ। ट्रस्ट की मीटिंग से कुछ घंटे पहले : राम मंदिर पर आई जांच रिपोर्ट के बारे में जितनी जानकारी जुटा पाया तो सोचता रह गया। राम मंदिर में चोरी हो रही है, ये बात ना पुलिस ने खोली, ना मीडिया ने, ना संत समाज को भनक लगी। ना ट्रस्ट को पता चला। ऐसा लगता है भगवान सब देख रहे थे। चोरों ने जब अति मचा दी तो अधर्म की पोल खोलने के लिए भगवान ने ही कुछ चोरों की मति घूमा दी।

चोरों की चैट और कॉल डिटेल्स बताती है लालच में चोर आपस में लड़ गए। तूने ज़्यादा पैसा दबाया, तूने हिस्सा नहीं दिया। जीजा- साला चोर, चाचा- भतीजा चोर तक एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे। फिर एक चोर खुद शिकायत करने पहुंचा गया। ये भगवान की ही अदृश्य ताकत है कि चोर खुद दूसरे चोरों की शिकायत करने ट्रस्ट के दफ्तर चला गया।

जब चोरों के पास से चढ़ावा रिकवर हो गया तब भी चंपत मामले को दबाने में लगे रहे। 79 लाख की रिकवरी उन्हें उल्लेखनीय नहीं लगी। भगवान ने फिर चमत्कार दिखाया और चोरों के सरदार की ही मति घूमा दी। इस बार चोरों के चीफ ने ही चोरी की सारी खबर लखनऊ तक पहुंचा दी। इसलिए राम मंदिर ज़रूर जाइए, चढ़ावा भी चढ़ाइए। प्रभु रामलला महाप्रतापी तेजस्वी हैं। जय श्रीराम। धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो!

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन